Edul Azhaa ( बकरा ईद)

जी हाँ दोस्तों👭👬👫 सलाम आदाब, आज में आप से ईदुल अज़हा के बारे में जानकारी दूंगा। आप लोग जरूर इस जानकारी को पढैं और आगे भी शैयर करें ं। इस साल ईदुल अज़हा अंग्रेजी तारीख 12 अगस्त 2019 बरोज़ सोमवार को होने जा रही है, अब इस्लामिक तारीख को ईद हमेशा, इस्लामिक महीने ज़िलहिज की 10 तारीख को मनाई जाती है। 
ईदुल अज़हा इस्लाम मज़हब का प्रमुख त्योहार है, और मुस्लिम लोग बड़ी शान से मनाते है और शरियत के मुताबिक अमल भी करते हैं। ईद के मुबारक मौके पर लोग एक दुसरे को मुबारक बाद देते हैं और एक दूसरे को दावत भी देते हैं एक दूसरे को खाना भी खिलाते हैं। गरीब लोगों को खाना भी खिलाते है और एक दूसरे के साथ खुशियाँ भी बांटते हैं। 

ईदुल अज़हा:- 
                     ईदुल अज़हा अरबी भाषा का शब्द है, जिसको कुर्बानी की ईद या सुन्नते इब्राहिम या बकरा ईद भी कहते हैं। 
इस दिन मुस्लिम लोग अपने प्रिय जानवर की कुर्बानी देते हैं जैसे  बकरा,भेड़ एवं ऊंट, भैंस की भी कुर्बानी देते हैं। 

ईदुल अज़हा क्यों मनाई जाती है:- 
ये कुर्बानी ईद हमारे नबी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की रिवायत से जुड़ी हुई है, एक दिन अल्लाह पाक ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का इम्तिहान (परीक्षा)  ली, और कहा कि आप अपने प्रिय चीज की कुर्बानी करो ,तब आप ने अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को स्नान वगैरह करवाके जंगल की तरफ ले गए और आप ने अपनी आंखों पर पट्टी बाँध कर गर्दन पर छुरी चलाई, बाद में देखा तो अपने बेटे की जगह भेड़ जि़बाह  हो गई और अपने बेटे सुरक्षित है। इह तरह अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की परीक्षा ली थी, हकीकी ईमान जानने के लिए। तब से लेकर आज तक लोग उनकी याद में कुर्बानी करते आ रहें हैं। 
ईद की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी:- 
1. सुबह जल्दी उठा। 
2.गुस्सल करना, स्नान🛀 करना। 
3.मिस्वाक करना। 
4.उम्दा से उम्दा कपड़े पहनना  जो पास में मोजूद हो। 
5.खुशबू लगाना। 
6.ईद की नमाज़ से पहले कुछ नहीं खाना। 
7.ईदगाह के रास्ते में जाते वक्त तकबीर बुलंद आवाज़ में पढैं। 
8.एक रास्ते में जाना दूसरे रास्ते में वापस आना। 
9.ईद की नमाज़ के बाद ही कुरबानी करें। 



Good student of Twenty Rules, अच्छे विद्यार्थी के 20 नियम।

1.सुबह जल्दी उठ कर ईश्वर, अल्लाह की इबादत ( पूजा) करें- 

2. अपने माँ- बाप का सम्मान करें। 

3.प्रतिदिन अध्ययन 📚✏करें। 

4.अपनी अध्ययन सामग्री सही जगह पर रखें। 

5.अपने अध्ययन 📚✏कक्ष और आस पास की जगह को साफ सुथरा रखें। 

6.हमेशा प्रेरित रहें। 

7.साफ सुथरे कपड़े पहनें। 

8.खुश रहें। 

9.कभी भी गलती करने से न डरें। 

10.अपना ज्ञान हासिल करने के मौके ढूंढ। 
11.लगातार प्रयास करते रहे ं। 

12.एकाग्र होकर पढाई करें। 

13.अपने काम से काम रखें। 

14.समय सारणी के अनुसार पढाई करें। 

15.खान पान का ख्याल रखें। 

16.बुजुर्गों का सम्मान करें। 

17.मधूर वाणी बोलें।

18.नशे से दूर रहें। 

19.शारीरिक और मानसिक स्वछता पर ध्यान दें। 

20.पर्यावरण जैसे कार्यक्रम में भाग लें। 

Bhart scout guide of general knowledge


नवयुवकों के लिए एक स्वयंसेवि और गैर सरकारी, शैक्षिक आन्दोलन है। जो किसी जाति, मूल वंश और सम्प्रदाय से बिना भेदभाव से मुक्त ये द्वार🚪  प्रत्येक व्यक्ति के लिए खुला है। ये समाज सेवा करने का मोका भरपुर देता, स्काउट खुद को जीवन जीने की कला और दूसरों के जीवन को कैसे आरामदायक बनाए और उनके दुख सुख में काम आए, यही स्काउटिंग सिखाता है। 1907 में संस्थापक लार्ड बैडेन पावेल ने जो कृत संकल्पित सिधांत दिये थे। 
@ ये देश भक्त और फुर्तीले, सक्रिय, और ऊर्जावान, बुद्धीमान, अग्रगामी और दूरदर्शी नागरिकों का निर्माण करने वाली संस्थान है। 
@उत्म नागरिकता की पाठशाला है। 
@खाली समय का सदुपयोग करना। 
@एक शैक्षिक आंदोलन है। 
@एक स्वेच्छिक अशासकीय संगठन है। 
@ एक खेल जो शिक्षा प्रद है। 
@प्रशन्दायक वातावरण है। 
@नेतृत्व का प्रशिक्षण है। 
@प्रकृति से जुड़ा हुआ रिश्ता है। 
@मनोविज्ञान प्रगतिशील प्रशिक्षण है। 
@पाठ्य सहगामी सर्वोत्तम क्रिया है। 
@व्यक्ति का चारित्रिक, बौद्धिक, शारीरिक     विकास और मानसिक विकास होता है। 
@भाई चारा तथा विश्व🌏 बंधुत्व का पाठ      पढाने वाली संस्थान है। 

उद्देश्य:- 
स्काउटिंग का मुख्य उद्देश्य है कि विश्व के अन्दर प्रत्येक नागरिक को सामाजिकता एवं भाईचारे का पाठ पढाना है, और इस आंदोलन में नवयुवकों की भागीदारी जरूरी है, जिसमें उनकी शारीरिक, बोध्दिक, मानसिक, सामाजिक विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। 

स्काउटिंग एक महत्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय संस्थान है जो सभी विश्व के युवाओं के लिए खुला है, इस महत्वपूर्ण कार्य में जो भी नवयुवक भाग लेना चाहता है उनके लिए जीवन जीने के आदर्श तरीके, और शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आध्यात्मिक एंव बौद्धिकता का विकास होता है। स्काउटिंग व्यक्ति को व्यक्तिव बनाना चाहता है, और अच्छा इन्सान भी, साथ में काबिल इन्सान भी बनाता है। 
स्काउटिंग सभी व्यक्तियों को आह्वान करता है कि आओ, इस महान क्रांतिकारी कार्यक्रम में हिस्सा लेकर अपने जीवन को मोज मस्ती के साथ गुजार सके। स्काउटिंग अभिभावकों से विनम्र निवेदन करता है कि आप अपने बच्चों को इस स्काउट में शामिल करिये और उनके अन्दर छुपे हुए गुण और सोच को उभारने का काम करते हैं। स्काउटिंग करने से व्यक्ति के अन्दर सकारात्मक सोच, ऊर्जा, और जीवन जीने की कला, समस्याओं का सहजता से सामना करना ,वो भी सूझ बूझ के साथ समस्याओं का निपटारा करना ही स्काउटिंग है। स्काउटिंग करने से बच्चों के अन्दर नयी सोच, ऊर्जा, और अच्छा इन्सान, सकारात्मक नजरिया, व्यक्तित्व, समाज सेवा का भाव जागृत होता है। 

सिद्धांत:- 
ईश्वर के प्रति कर्तव्य का पालन करना। 
दूसरों के प्रति कर्तव्य का पालन करना। 
स्वयं के प्रति कर्तव्य का पालन करना। 

प्रतिज्ञा:- 
में मर्यादा पूर्वक प्रतिज्ञा करता हूँ कि
1.में यथा शक्ति ईश्वर/ अपने देश के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करुंगा। 
2.दूसरों की सहायता करूँगा। 
3.स्काउटिंग नियमों का पालन करूँगा। 


स्काउटिंग नियम:- 
1.स्काउटिंग विशवसनिय होता है। 
2.स्काऊट वफादार होता है। 
3स्काउट सबका मित्र होता है। 
4.स्काऊट विनम्र होता है। 
5.स्काऊट पशु पक्षी एवं प्रकृति 🌿🍃का प्रेमी 👱👫होता है। 
6.स्काऊट अनूशासनशील होता है, एवं सार्वजनिक सम्पति की रक्षा करता है। 
7.स्काऊट मित्व्वयी होता है। 
8.स्काऊट मन वचन एवम कर्म से शुद्ध होता है। 


ये थे स्काऊट के नियम, सिध्दांत, प्रतिज्ञा, एव सामान्य जानकारी। अब एक स्काऊट झण्डा गीत में आप को बता रहा हूँ आप इस को भी पढने के साथ साथ लय के साथ गाएं

झण्डा गीत :- 
भारत स्काऊट गाईड झण्डा, ऊंचा सदा रहेगा। 
ऊंचा सदा रहेगा, भारत स्काऊट गाईड झण्डा। 
नीला 🔵रंग गगन सावितृत भातृत्व भाव फैलाता। 
त्रिदल कमल नित तीन प्रतिज्ञाओं की याद दिलाता। 
और चक्र कहता है,प्रति पल आगे कदम बढेगा। 
ऊंचा सदा रहेगा झण्डा ऊंचा सदा रहेगा। 
भारत स्काऊट गाईड झण्डा सदा ऊंचा रहेगा। 


।।      धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया      ।। 

में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर





Indeepedencday of India for now. भारत की आज़ादी से अब तक

दोस्तों नमस्कार, सलाम आदाब आज का अध्याय बहुत ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की आज़ादी 15 अगस्त 1947 को मध्य रात्री में हुई थी, ये आज़ादी कैसे मिली और किन से मिली?  ये आज़ादी भारत को कड़ी मश्कत के बाद अंग्रेजों की दास्ताँ से हुकूमत मिली। आज भारत को आजाद हुए को 73 साल हो चुके हैं। आज तक भारत ने कितनी तरक्की की, विश्व के अन्दर भारत की क्या अहमियत है ।भारत अंग्रेजों से आज़ाद भी हो गया और बहुत कुछ तरक्की भी कर ली। भारत की आजादी कैसे मिली और कब मिली और क्या कारण रहे और क्या परिणाम रहे ये सब बातें आप को मालूम है, ज़िक्र करने की कोई जरूरत नही है। महत्वपूर्ण बात ये भी है कि देश की जंगे आज़ादी में कितने तरह के आंदोलन हुए और किनके नेतृत्व में देश को आज़ादी मिली, ये भी जानकारी मालूम है। 

आज महत्वपूर्ण बात ये है कि देश की हकीकत क्या है?  और वाकई मे देश किस दिशा की तरफ जा रहा है, देश वाकई मे विकास की दिशा की तरफ बढ़ रहा है, ये बात बहुत बड़ी खुशी की है कि देश तरक्की की ओर बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक में जितना देश विकसित होने जा रहा उतना ही देश ये पीछे गड्ढे में भी जा रहा है ।क्यों? 
क्योंकि देश के अन्दर आज न जाने कितने प्रकार की समस्याएं हमारे सामने खडी़ हुई है कि हम अपने देश को कहाँ से कहाँ तक ले जा रहे हैं। ये अनहोनी दुखद घटनाएं हम और आप लोग प्रति दिन अखबार, और दूरदर्शन और इण्टरनेट के ज़रिए से हम समाचार  देख और सुन रहे हैं- बेरोजगारी, भूखमरी, भ्रष्टाचार, लिंगानुपात, आतंकवाद, नक्सलवाद, मोबलिचींग, जनसंख्या वृद्धि आदि समस्याएं हमारे देश में उठ खडी़ हुई है जो हमे गुलाम बनाने के लिए मजबूर कर रही है, हम लोग अभी भी इन घटनाओं से बेखबर है। भाईयों और दोस्तों ये घटनाएं हमारी आंखों के सामने से होकर गुजरती है, लेकिन हमें इस बात का जरा बराबर शक भी नहीं लगता। भाईयों और दोस्तों एसी घटनाओं के बारे में चोकन्ना रहे और देश को गड्ढे में डालने से बचाएं और प्यारे मुल्क भारत को सुन्दर और स्वच्छ बनाएं। 
हम आने वाले 15 अगस्त की तारीख को भारत की आज़ादी दिवस के रूप में मनाएंगे  और उस मोके पर बड़ी बड़ी बातें करेंगे कि हमारा मुल्क अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ और सभी मजहब के लोगों ने मिलकर देश को आजाद करवाया। मगर आज हम खुद आजाद हे क्या?  ये प्रशन आप अपने सीने में झांक कर करें।  हकीकत आप को पता चल जाएगी कि देश किस दिशा की तरफ जा रहा है। 


आज देश के अन्दर ये सबसे बड़ी समस्याएं हैं जो हमें गुलाम बनाने के लिए मजबूर कर रही है भ्रष्टाचार, आतंकवाद, नक्सलवाद, बैरोजगार, और भूखमरी, जनसंख्या वृद्धि,, अभी एक ओर नयी समस्या उत्पन्न हो चुकी है वो है - आसमानता, मोबलिचींग, और नफरत का माहोल। 
ये समस्याएं हमारे प्यारे मुल्क के लिए समस्या का नासूर बन चुकी है कि हम लोग इन समस्याओं का मुकाबला भी नहीं कर सकते। आज इन समस्याओं का ज़िम्मेदार कौन?  दोस्तों इन समस्याओं का जिम्मेदार अपन लोग, सरकार और समाज  ये तीनो लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि ये समस्याएं इन तीनों लोगों के हाथों से फैलती है और इन समस्याओं को विलुप्त करने के जिम्मेदार भी हम लोग ही है जो अभी भी बे खबर है ं। हमें इन समस्याओं का निजात पाने का तरीका ढूंढना चाहिए और देश के अन्दर भाईचारा और खुशहाली की दुआ और अमन का पैगाम देना चाहिए, ता की देश अपना विकास सही दिशा में कर सके। 

भारत तो अंग्रेजों से तो आजाद हो गया मगर अभी भी अपने आप में आजाद हुआ नहीं है, क्योंकि भारत के अन्दर बेहिसाब समस्याएं उठ खडी हुई है जो हमें आगे बढ़ ने से रोक रही है और गुलाम बनाने के लिए मजबूर कर रही है। 

मेरी आप यूवा और जागरूक लोगों से विनम्र अपील है कि आप लोग मिल कर दैश को डूबने से बचाऐं ता की भारत एक महान देश बन सके। 

शुक्रिया धन्यवाद🙏💕। 
   में आप का दोस्त लेखक, मुराद खान जयसिंधर  
6378616491






शिक्षा को लेकर सरकार कितनी गंभीर!

#education# सरकार शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर नज़र आ रही है, ये सबसे बड़ा सोचनिय विषय है, हमारे और आप के लिए क्यौंकि हमारे और आपके बच्चे सरकारी स्कूलों में जरूर पढते है ं। सरकारी स्कूलों में और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में दिन रात का अंतर होता है, क्योंकि निजी स्कूलें फीस लेकर बच्चों पर तवज्जो देती है और साफ सफाई ,अनुशासन और व्यवहार, पढाई हर चीज़ की नयी नयी जानकारी सिखाते हैं एवं उनके पास सामान्य ज्ञान अथाह भरा पड़ा रहता है। ओर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे के हालात से हम लोग बिलकुल वाकिफ है, और ये क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे की ये स्तिथि है- 
1. सरकारी स्कूलों में भयंकर स्टाफ की कमी, अगर स्टाफ पूरा भी है तो वो अपना फर्ज अदा नहीं करते हैं, वे लोग ट्यूशन के लालच में बड़ी बड़ी कोचिंग में पढाते है। 
2.जिस गाँव में सरकारी विद्यालय है वहाँ के लोग👫👬👭 जागरूक नही है, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि एस एम सी क्या होती है और स्कूल में पढाई क्या चीज़ है। 
3. सरकार सिर्फ और सिर्फ कितने भी स्टाफ क्यों न हो उनको सिर्फ हमेशा नये नये कार्यों का जिम्मा देती रहती है और कागजी कार्रवाई में व्यस्त रखना चाहतीं है ।सरकार शिक्षा के प्रति योजनाएं तो बड़ी बड़ी लागू करतीं हैं मगर वो योजनाएं सिर्फ और सिर्फ काग़ज़ों तक ही सिमीत है। इसलिए सरकारी स्कूल का स्टाफ कागजों में व्यस्त रहता है। 
4. अगर सरकार चाहती तो हर स्कूलों में पूरा स्टाफ लगा देती, मगर सरकार भी यही सोच रही है कि ये सब पढ कर क्या करेंगे, आखिर हमारी कोन सुनेगा। 
5.अगर सरकार शिक्षा के महत्व को समझती तो प्रत्येक सरकारी स्कूलों में एक कलर्क की पोस्ट को स्वीकृति दे चुकी होती है, चाहे स्कूल प्राथमिक स्तर की क्यों न हो। 6.आज उस कलर्क का काम सारा अध्यापक कर रहा है, उनको कलर्क के काम के लिए नहीं लगाया है, उन को बच्चों को पढाने के लिए लगाया है, मगर वो बेचारा अध्यापक करें तो क्या करे, सरकार के कागजों काम समय पर करना जरूरी है। पढाई समय पर करवानी जरूरी नही है। 

क्योंकि आज पढाई को लेकर सरकार शिक्षा के प्रति इतनी गंभीर नहीं है तो दूसरा कौन होगा, क्योंकि जो आज अमीर और मध्यम वर्ग का तबका अपने पैसे🤑💸💵💴💶💰💳 के बलबूते पर बड़ी बड़ी प्राईवेट स्कूलों में बच्चों को पढा रहे हैं। और पीछे बचा गरीब तबका, वो कहाँ जाए क्योंकि उनके के पास दो वक्त का  खाना भी नसीब नहीं होता है, प्राईवेट स्कूल तो दूर की बात है। 

तो ये सरकार का और सरकारी स्कूलों के हालात हैं आप लोग जरा चोकन्ना रहे, ता की समय के साथ जागरूक रहकर आगे प्रगति कर सकें। 

में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर। 

धन्यवाद 🙏💕शुक्रिया।। 
 https://socialworkerandeducationist.blogspot.com/2019/07/important-day-of-celebrating-reasons.html

Man is capitalism in three Qutions इन्सान की काबलियत तीन प्रशनों में है

जी हाँ दोस्तों आज का अध्याय बहुत ही महत्वपूर्ण है और अपने आप को समझने के लिए बहुत ही जरूरी है।कोई भी व्यक्ति कैसा भी हो, चाहे अमीर हो या गरीब ,अमीरी और गरीबी किसी पर भी आ सकती है इस में कोई शक की बात नहीं है। अथार्त ये तो कुदरत का खेल हे।कि हम अपने आप को कहाँ तक समझने का प्रयास करते हैं ये सबसे जरूरी है। व्यक्ति खुद ने कभी अपने आप को समझने का प्रयास किया ही नहीं, क्योंकि उसने कभी अपने आप के अन्दर झांकने का प्रयास ही नही किया। व्यक्ति की काबलियत के तीन महत्वपूर्ण प्रशन 💭❓है, जो में आप को बताने जा रहा हूँ, आप मेरा लेख पढने के बाद जरूर ये तीन प्रशन अपने आप से जरूर करें। 
ये तीन प्रशन है?  
1. में कौन हूँ? 
2. में कहाँ जा रहा हूँ?  
3.में क्या कर सकता हूँ? 

 दोस्तों👭👬👫 ये थे आपके तीन प्रशन जो आप अपने खुद से तीन  प्रशन कीजिये और अपने आप को पहचानिये और फिर उस दिशा में कदम👣 बढाइये,तो आप जरूर सही रास्ते पे जा रहे होंगे। वो पहला प्रशन है - 
1.में कौन हुं?  
ये पहला प्रशन है जिसे आप अपने खुद को पहचानने की क्षमता रखते हैं कि मैं कोन हूँ ये बात आप अपने दिल💜❤ से करते हैं तो आप एक पैज और कलम ✒ ले के बैठ जाओ तो अनगिनत योग्यताएँ लिख सकते हो और अपनी बैकग्राउंड के बारे में, और व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ लिख सकते  हैं। 
2. में कहाँ जा रहा हूँ?  
ये दूसरा प्रशन है जो कि मैं कहाँ जा रहा हूँ, क्या में जिस दिशा में जा रहा हूँ वो दिशा सही है या गलत।  ये प्रशन अपने आप से करें और इस प्रशन पर जरूर गौर करें, ता की आप अपनी जिंदगी को सही  रास्ते पर ले   जा सकें । 

3. में क्या कर सकता हूँ?  
इस प्रशन का उत्तर भी आप खुद ढूढे और इस प्रशन को करने के लिए आप बहाने मत बनाइये कि मैं गरीब हूँ, ये काम में नहीं कर सकता, तो आप का ये बहाना है। गरीबी में जन्म लेना कोई गुनाह नहीं है मगर गरीब ही रहकर मर जाना ये गलत है। आप वो काम कर सकते हैं जो दुनिया ने आज तक नहीं किया। 

दोस्तों👭👬👫 इन तीन प्रशनों की काबलियत आप के अन्दर मोजूद है वो है आप की सोच 💭, व्यवहार और अच्छी आदतें। 

में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर। 
मोबाइल📱 नम्बर 6378616491
                       7023347607

शुक्रिया धन्यवाद🙏💕। 

इन्सान के शरीर पर नशे का प्रभाव

जी हाँ आज कल हर 10 में से एक व्यक्ति नशे का शिकार है, यानी 90 फीसदी लोग नशे में लिप्त रहते हैं जिनकी वजह से उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। नशे के बारे में व्यक्ति कभी सोचता ही नहीं है कि इसके आने वाले समय में क्या परिणाम हो सकते हैं। व्यक्ति कयी प्रकार के नशे का सेवन करता है, धुम्रपान, शराब, गुटखा, तम्बाकू एवं अफीम, अमल इत्यादि ये कयी प्रकार के नशे हैं जिनके प्रभाव से व्यक्ति की सेहत जल्दी खराब हो जाती है। एक बगैर नशे वाला और दूसरा नशे वाला व्यक्ति दोनों सेहत का चेक अप कर लो जो नशे वाला आदमी है उसका शरीर कमकमज़ोरी और कुछ न कुछ बीमारी बताएगा। 
1. नशे का प्रभाव :- व्यक्ति नशे का सेवन करने से उनके स्वास्थ्य संबंधी सबंधित कयी बीमारियां उत्पन्न होती है जिससे वो इंसान इस नशे से बेखबर होता है, अगर उसको मालूम भी है तो जानबूझकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम करता है। 
नशे का सेवन करने से शरीर का कमज़ोर होना, यादाश्त का कम होना, शरीर में थकावट का आ जाना, आलस ज्यादा आना, कम उम्र में ही व्यक्ति के अन्दर टेढापन  आ जाना, न जाने एसी बहुत सारी समस्याएं है जो शरीर को जल्दी नष्ट कर देती है। 
2.नशे से क्या खोया क्या पाया:- दोस्तों नशे का सेवन करने से आप ने पाया तो कुछ  भी नहीं मगर सब कुछ खोया ही है। क्योंकि नशा आप लोग करते हैं, उस दुकानदार को पैशा भी आप लोग ही देते , आप अपने शरीर को बिगाड़ते भी आप ही है , नशे का सेवन करने से आप की सेहत खराब होती है और पैसा अलग से बर्बाद करते हैं। इस में आप ने सब कुछ खोया ही है पाया कुछ भी नहीं है। हकीकत में आप शरीर को स्वच्छ और सेहतमंद रखना चाहते हैं तो नशे  से दूर रहो। 

3.लोग नशे को क्या समझते हैं? :- आज कल हर यूवा वर्ग बहुत बड़ा तबका जो नशे को शौक की तरह खाते है, और वो लोग अपने भविष्य🔮 के बारे में कभी सोचते भी नही है कि इसका सेवन करने से क्या परिणाम हो सकते हैं, इस तरह वो लोग बेखबर है । इस तरह नशे को खाते है जैसे मान लो खाना खा रहे हैं, उतना ये लोग अगर खाना भी खाते तो इन लोगों का शरीर हट्टा कट्टा होता। मगर अफसोस की बात ये है कि नशा करने वाले लोग उतना खाना भी उनको नहीं भाता है ।
4.सरकार नशे को लेकर क्या कर रही है:- आज कल नशे के बारे में सरकार भी उतनी गंभीर नहीं है, क्योंकि सरकार को इस नशे जैसी चीज़ो से ही उनको राजस्व कर मिलता है, सरकार को भी नशा चाहिए मगर स्वास्थ्य नहीं चाहिए, क्योंकि सरकार को भी नशे से आमदनी चाहिए। सरकार अगर चाहे तो नशा प्रबंधन पर रोक लगा सकती है और कठोर नियम भी लागू कर सकती है। सबसे ज्यादा खतरनाक नशा है शराब, अफीम और अमल है, लेकिन इनको भी इसी नशे से सबसे ज्यादा टैक्स मिलता है। तो फिर सरकार क्यों गंभीर होगी नशे के प्रति। हमें अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना होगा। 


सुझाव :- आप श्रीमान जी से निवेदन है कि आप लोग नशे से दूर रहें, नशा सबसे बुरी चीज़ है और आप अपना एक तो धन दोलत बर्बाद करते हैं, दूसरा आप स्वास्थ्य को गंवाते है । तो आप लोग नशे का सेवन नहीं करें। 
धन्यवाद🙏शुक्रिया। 

में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर। 

आप मेरे लेख को जरूर देखें और आगे भी शैयर करें। 



महात्मा गांधी Mahatma Gandhi

जी हाँ आज में उस शख्सियत की बात करने जा रहा हूँ, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी, जिन्होंने इस देश भारत को एक सूई के धागे में पिरोने से लेकर इस देश को कैसे मजबूत किया जा सकता है।
बापू का जन्म गुजरात के पोरबंदर साबरमती नदी के किनारे आश्रम में 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था, उनका परिवार गरीब और साधारण परिवार से था और कोई इतना बड़ा पैसे से अमीर आदमी  नहीं था, हाँ जानकारी के जरिये सबसे पहले होशियार था। 
उनकी  शुरुआती तालीम अपने राज्य में ही हूई मगर उच्च शिक्षा के लिए बाहर विदेश जाकर पढाई की। और वकालत करने के लिए इंग्लैंड के लिए गए थे। वकालत की डिग्री पास करके वापस अपने मुल्क आए, वहाँ से वापस दक्षिणी अफ्रीका गए वहाँ पर एक मुस्लिम व्यापारी का फैसला सुना था लेकिन बदकिस्मती से असफल हो गये।      दक्षिणी अफ्रीका में काले और गोरों का भैद चल रहा था तब गाधीं जी ने वहाँ पर इस चीज़ को हकीकत में समझा और परखा। जब अपने मुल्क लोट रहे थे तब एक रेल 🚄 के फ्रस्ट क्लास के डब्बे में बैठ कर यात्रा कर रहे थे, तब वहाँ पास में बैठे अंग्रेज ने पूछा तुम यहाँ क्यों बैठे हो तो गाधीं जी ने मेरे पास टिकट है में बैठ सकता हुं, तो अंग्रेज ने कहा आप नहीं बैठ सकते क्योकि आप काले लोग हो हम गोरे लोग है हमारे पास अधिकार है, जब बीच में कोई एक रेलवे स्टेशन🚏 आ जाता है और वहाँ पर गांधी जी को वे लोग धक्का देकर बाहर उतार देते हैं, तब गांधी जी मन ही मन कहते हैं अंग्रेजो आज आप मुझे इस रेल से उतारा है कल आपको एक दिन में अपने मुल्क से बाहर खदेडूगा।ये गांधी जी का दृढ निश्चय था।  आखिरकार वापस अपने मुल्क भारत आने का फैसला किया उस समय 1915 का  सन था जब देश में पहली बार कदम रखा था उस समय देश अंग्रेजी हुकूमत की दास्ताँ बयान कर रहा था। महात्मा गांधी जी के राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले था जिन्होंने उनको सलाह दी कि आप देश की स्थितियों से निपटना चाहते हैं तो सबसे पहले देश का भ्रमण करो और लोगों की हकीकत आप को पता चल जाएगी, तब गांधी जी 1917 में पंजाब के अमृतसर में किसानों की हकीकत हालातों से वाकिफ होते हैं और अंग्रेज़ी सरकार से अनुरोध करवाकर उनकी मांगो को स्कवीकर  कररवाते हैं। इसी तरह बापू पूरे भारत का भ्रमण करके किसान ौ और गरीब लोगों की मदद करते हैं, भारतीय जनता को संगठित करने का काम भी करते हैं। भारत में उनके द्वारा तीन प्रमुख ा आंदोलन चलाए गए जिन्हें देशव्यापी आंदोलन का जाता है। महात्मा गांधी जी ने देश का प्रतिनिधित्व किया था कोई अपने स्वार्थ के लिए नहीं किया। जो आंदोलन चलाए थे वो तीन आंदोलन महत्वपूर्ण है 1. असहयोग आंदोलन 2.सिविन्य अवज्ञा आंदोलन 3.भारत छोडो़ आंदोलन। ये तीन आंदोलन गांधी जी के नेतृत्व में चलाए गए थे। और ये आंदोलन कोई लाठी कै जोर में नहीं बल्कि बात और सत्य और अंहिसा के बलबूते पर आधारित था। 
अगर गांधी चाहते तो लठ और हथियार🔫 से विद्रोह करवा सकते थे मगर ऐसा नहीं किया, उन्होंने इस बात को गहराई से जांचा और परखा फिर कदम उठाया उस की तरफ, क्योंकि उन्हें पता था कि अगर हथियार से अंग्रेजों🇬🇧 से मुकाबला किया जाए तो हमारे लिए नुकसान की बात है, तो गांधी जी ने बात चीत और सुलह , और असहयोग द्वारा विद्रोह करने का फैसला किया। गांधी जी दो शब्दों से भलीभाँति और अच्छी तरह परिचित थे, सत्य और अंहिसा। क्योंकि हमेशा सच बात की ही जीत होती है, झूठ की हार होती है। और अगर हिंसा होगी तो आपस में मर कर खत्म हो जाएंगे और गलत दिशा में जाकर गिर जाएंगे। इसलिए उनहोंने सत्य और अहिंसा शब्दों का प्रयोग किया और इन दोनों शब्दों के पुजारी बन गये।और दूसरे लोगों को सत्य और अहिंसा पर चलने का आग्रह किया। देश को आजादी महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में ही मिली थी, इस में कोई शक की बात नहीं है। 

आज बहुत सारे लोग राजनीति की रोटियां सेकने वाले गांधी जी को नमन तो करते हैं मगर उनके द्वारा अपनाए गये सिद्धांत पर नहीं चलते हैं। अगर लोग👫👬👭 गांधी जी के सिद्धांतों पर चले तो देश की स्थिति में काफी परिवर्तन देखने को मिलेगा। उन को राष्ट्र पिता के नाम से और किसान मजदूर उसको बापू के नाम से पुकारते है, क्योंकि वो यही चाहते थे कि देश के अन्दर हर गरीब तबके का विकास हौ और सुख चैन से रह सके। उन्होंने हर गरीब और मजलूम लोगों की मदद की, रोजगार चलाने के लिए खुद ने खादी का चरखा चलाया ंऔर लोगों को इस काम के लिए प्रेरित किया। ताके लोग रोजगार के लिए आत्मनिर्भर रह सके किसी दूसरे के मोहताज न हो। 

आज हमे ऐसी शख्सियत से सबक लेकर देश के अन्दर नवाचार स्थापित करने चाहिए। देश को ऊंचाईयों तक ले जाकर कामयाब बनाएं। किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, खुद मेहनत करके रोजीरोटी कमानी चाहिए। 

गांधी जी की चार गजब बातें जो दुनिया ने अपनाई हमने भुला दी- 
1.घी का दिया क्यों जलाया। 
2. शिक्षा का फार्मूला। 
3.दूसरों को उठाईये। 
4.खुद उदाहरण बनिए। 

Important day of celebrating reasons, महत्वपूर्ण दिवस मनाने के पीछे का कारण

जी हाँ दोस्तों आज का अध्याय बहुत ही महत्वपूर्ण है। वो है " महत्वपूर्ण दिवस मनाने का पीछे का कारण"। महत्वपूर्ण दिवस हम क्यों मनाते है और किसलिए मनाते है किस उद्देश्य से मनाते है, इससे क्या प्रेरणा मिलती है हमें?  इन सारे सवालो के जवाब आप को दे रहा हूँ। 
हम  भारतीय महत्वपूर्ण दिवस किसी महापुरुष की जयंती या पुण्यतिथि, या शहीद दिवस, या कोई ऐसा बड़ा दिवस जो हमे एक खास दिवस मनाने की प्रेरणा देता हो और उससे हमे बहुत कुछ संदेश अथवा सीखने के लिए मिलता है। 
आज भारत के दो - तीन दिवस ऐसे है जो 
हमें भारतियों को एक साथ प्रेरणा के साथ रहने अथवा भाईचारे की भावना का विकास होता है सभी भारतीय इन कार्यक्रम में एक तिरंगे के नीचे खड़े होकर एक प्रकार की अच्छी शपथ लेते हैं। आज हम सभी देशवासी राष्ट्रीय दिवस मनाते तो बड़ी शानो शौक़त से, उस दिन हम देश के लिए सब कुछ कुर्बान होने के लिए हम लोग बड़ी बड़ी बातें तो खूब करते, अथवा भाषण भी बढ चढ कर करते हैं, ये बातें तो अच्छी है मगर देश के लिए कुर्बान होना और सच्ची मोहब्बत दिखाना बहुत दूर की बात है। क्योंकि जो लोग महत्वपूर्ण दिवस के मोके पर जितना गर्व से भाषण देते हैं उतना अगर देश की सच्ची सेवा करे तो देश की आज कुछ रोनक ही अलग होती। हाँ यह हमारी भारत की सभ्य संसकृति की परंपरा है कि बड़े महान क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी जैसे वाद्वान लोगों को याद करना चाहिए और उन्होंने देश के लिए और अपनी समाज के लिए क्या किया, वो बातें गौर से समझनी चाहिए। फिर उन से शिक्षा लेकर हमें आगे बढ़ना चाहिए, ये होता है महत्वपूर्ण दिवस मनाने का मुख्य कारण है। 
स्तंभ
स्वतंत्रता दिवस
गणतंत्र दिवस
शहीद दिवस
विज्ञान दिवस
शिक्षक दिवस
हिन्दी भाषा दिवस
पर्यावरण दिवस
जल दिवस
न जाने और भी बहुत सारे दिवस हम लोग बडे़ शान और गर्व से मनाते है और उनसे सबक लेकर कुछ समय जरूर आगे बढते हैं। लेकिन बाद में ये सब बातें भूल जाते हैं।अलग अलग मोके पर अलग अलग सीख जरूर मिलती है, लेकिन उस अच्छी प्रेरणा को लेकर जीवन में आगे कैसे बढ़ा जाए ये सबसे समझना अनिवार्य है। हमारी एक बडे स्तर पर परंपरा बन गयी है कि हम लोग महत्वपूर्ण दिवस मनाते तो बड़ी धूम धाम से, मगर उन महत्वपूर्ण दिवस से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना भूल जाते हैं। व्यक्ति को अपने जीवन में आगे बढने के लिए बहुत कुछ अभ्यास करना जरूरी है और हर चीज को समझना और उस पर गौर करना जरूरी है। महत्वपूर्ण दिवस मनाने से हमें बहुत सारी जानकारी मिलती है और उन महान आदर्श लोगों की सफलता के राज मिलतें है ं जिससे हम लोग आगे बढ़ पाते हैं जल्दी से कामयाब होते हैं। आज हम लो जैसे महात्मा गांधी जी का दिवस शहीद दिवस के रूप में याद करते हैं, याद तो सब करते हैं अपने अपने स्वार्थ के लिए मगर उनके सिंधातो पर कोई भी नहीं चल पाता है, और तभी तो देश इतना पीछे चल रहा है, महात्मा गांधी जी के बताए हुए नियमों पर देश चलता तो देश तभी अमेरिका जैसे विकसित देशों से आगे निकल जाता ।आज ये गांधी जी की बातें विदेशों ने अपना ली है और वो देश तरक्की की रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, आखिर हम लोग कहां जा रहे हैं। ये सबसे बड़ा सोचनीय विषय है

धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया। 
   में आप का दोस्त लेखक वक्ता, निजी अध्यापक मुराद खान जयसिंधर। 
Mobile phone📱 6378616491
muradjiyand1234@gmail.com


https://socialworkerandeducationist.blogspot.com/2019/07/man-is-capitalism-in-three-qutions.html?m=1





Government schools✏📚🏫 of conditions, सरकारी स्कूलों के हालात



 Government school of village.

जी हाँ ऊपर दिये गये स्क्रीन शॉर्ट को देख कर लगता है कि वाकई मे एक नया अध्यापक जिनकी अभी वर्तमान में जोइनिंग हुई है वो ये सोच कर स्कूल जाता होगा कि मैं भारत के भविष्य का निर्माण करने जा रहा हूँ, लेकिन उस अध्यापक को 🏫स्कूल की स्थिति से हालात का पता नहीं है। आगे क्या होने वाला है और क्या नहीं। लेकिन पहले दिन☀ नया जोश व जुनून के साथ स्कूल के बच्चो के साथ जरूर ज्ञान💯📖📚📝 बांटता है और बच्चों को शिक्षा के प्रति उन्हें प्रेरित करता है  कुछ दिन बाद जैसे ही स्कूल की डाक बनाने का काम का पता चलता है तो फिर वो नया अध्यापक उसी काम में व्यस्त रहता है, फिर बच्चों की पढाई धीरे धीरे भूल जाता है और फिर उसी के सिलसिले में आफिस के चक्कर लगाता रहता है। सरकारी स्कूलों में भयंकर स्टाफ की कमी, उसके बावजूद एक ही सरकारी अध्यापक वो भी सरकारी स्कूल के कागजी कार्रवाई में पूरा समय लगाता है, फिर पढानै का नाम मतलब स्कूल जाना है, पढाना या न पढाना हमारे बस की बात नहीं है क्योंकि ये किसी अध्यापकों का दोष नहीं है ये दोष किसी ओर का नहीं ये सरकार का दोष है जो हमे शिक्षा नीति से पीछे धकेल रही है। सरकार जितना कागजी कार्रवाई में व्यस्त रखती है उतना ही अगर पढाई में अध्यापकों को व्यस्त करवाती तो शायद ही आज इस भारत की तस्वीर दुनिया में बदल चुकी होती  क्योंकि शिक्षा से ही देश का विकास होता है न कि कागजी कार्रवाई पूरी करने से। 
मेरा एक सरकार से सुझाव है कि आप हर सरकारी विद्यालयो में एक कलर्क पद का गठन कीजिये ताकि अध्यापक का भार कागजों के प्रति कम हो और छात्रों को पढाई आराम से करवा सके। 
सरकार जो चाहे वो कर सकती है, क्योंकि सरकार शिक्षा के प्रति चाहे तो बडा़ बदलाव करवा सकती। शिक्षा के प्रति सुधार करवा सकती है शिक्षा के प्रति नवाचार स्थापित कर सकती है। अगर सरकार ही न चाहे कि देश का भविष्य सुधर जाएगा। 
ये समस्या सरकारी विद्यालय उच्च प्राईमरी तक तो ज्यादा दिखाई देती है।
सरकार ऊपर से सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती है लेकिन बच्चा स्कूल तो चला जाता है मगर खाली दिमाग वापस लोट आता है, भरा हुआ दिमाग जाता है। कहने का मतलब यह है कि सरकारी स्कूलों में पढाने वाले अध्यापक सिर्फ कागजी कार्रवाई में व्यस्त रहते हैं उधर बच्चों की पढाई गायब हो जाती है, अध्यापक बच्चों पर पढाई के प्रति पूरा ध्यान नही दे पाते हैं। 



Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...