दोस्तों नमस्कार !आज मैं बात कर रहा हूं राजस्थान के पंचायती राज चुनाव की, क्योंकि चुनाव का समय नजदीक आने वाला है। राज्य निर्वाचन विभाग ने चुनाव के समय सारणी भी बना दी है। चुनाव लड़ने वाले जो प्रतिनिधित्व होंगे उनकी योग्यता क्या रखी है, जरा आप सोचो बिना योग्यता वाला आदमी वह प्रतिनिधित्व ग्राम पंचायत का या पंचायत समिति का नेतृत्व कैसे कर पाएगा नेतृत्व करने का मतलब यह है की की जनता के लिए कल्याणकारी कार्य करना , जनता के अनुरूप योजनाएं बनाना और उसको पूर्ण रुप से लागू करना। यह जो कांग्रेस सरकार ने जो ग्राम पंचायत के लिए प्रतिनिधित्व करने वाले सरपंचों के लिए जो आठवीं पास योग्यता थी उस योग्यता को हटाया। ये बिल्कुल गलत है इससे राजशाही शासन ग्राम पंचायतों में चलता रहता है । जो उस ग्राम पंचायत का युवा वर्ग शिक्षित और बड़ी सोच वाला जनता की सेवा करने के लिए मौका तलाश रहा है। मगर उस बेचारे को यह मौका नहीं मिल रहा है क्योंकि उनके पास योग्यता है लेकिन उनके सामने वाला आदमी पैसे से लबालब है ,वह अपनी पंचायत को पैसे के बलबूते पर दबा लेता है। भ्रष्टाचार करके चुनाव जीत जाता है। मेरे जैसे हजारों युवाओं की इच्छा होती है चुनाव लड़ने की उनका चुनाव लड़ने का मकसद होता है कि जनता की सेवा की जाए । जनता की समस्याओं को हल किया जाए युवाओं से पूछना चाहता हूं। आप चुनाव लड़ना क्यों चाहते हैं ? उन युवाओं का उत्तर निकल कर आता है कि इतने साल हो गए 60 से 70 साल हो गए। पंचायती राज चल रहा है लेकिन तब से लेकर आज तक अनपढ़ लोग ज्यादातर चुनाव में हिस्सा लेते हैं क्योंकि उनके पास पैसा ज्यादा है और वह चुनाव आते हैं तब खर्चा ज्यादा करते हैं । लेकिन जब चुनाव जीत जाते हैं तब वे आदमी खर्चा किया हुआ सबसे पहले अपनी भरपाई करते हैं। फिर बचा खुचा माल जो अपने नजदीकी आदमी होते हैं उनके लिए कुछ काम करते हैं उनके काम और नजरिए को देखकर युवाओं में नौजवान साथियों में यह आक्रोश है । सरकार की बडी बडी योजनाओं मैं धांधली करके अपना बिजनैस करते हैं , सरकारी पैसे का दुरुपयोग करते हैं।
जब पिछली सरकार ने पंचायती राज चुनाव में कुछ निश्चित योग्यताएं लागू की थी। योग्यताएं थी ग्राम पंचायत में प्रतिनिधित्व सरपंच डेलिकेट प्रधान सबकी अलग-अलग योग्यताएं थी। सरपंच की योग्यता आठवीं पास योग्यता थी। पिछली भाजपा सरकार ने लागू की थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने आते ही बदल दी ।आज की तारीख मैं नौजवान यूवा ही. देश की तकदीर को बदलने की ख्वाहिश रख के बैठा है, मगर उन्हें मौका नही मिल रहा है।
उनके आगे परेशानियां बहुत है,क्योंकि उनके पास सबसे बडी आर्थिक स्थिति की किल्लत और नेटवर्क की कमी ।एक देश का नोजवान देश को बदलने का ख्वाब लेकर मन मैं बैठा है मगर करे तो क्या करें, क्योंकि उनकी सुनने वाला कोई नहीं है, अगर सरकार चाहे तो अच्छा कदम उठा सकती है । ग्रामपंचायत मैं सरपंच के रूप में चुनाव लडऩे वाले प्रतिनिधित्व की योग्यता आठवीं से ऊपर की जाए और चुनावी खर्चे को कम किया जाए तो नौजवान की आस जग सकती है। ग्राम पंचायत का मुखिया के रूप में भूमिका निभाने वाला सरपंच के पास अगर शिक्षा और सोच है तो ग्राम पंचायत की तकदीर भी बदल सकता है।
उससे दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती। मैं आप लोगों से विनम्र निवेदन करता हूँ कि मत देने का अधिकार आप को है ,मगर आप का फर्ज बनता है चुनाव मैं एसै प्रतिनिधित्व को वोट दें जो शिक्षित हो, ईमानदार हो ,काम करने योग्य हो, सबसे अहम बात ये है कि जो चुनाव में अधिक खर्चा करता है उस को मत कभी न देना क्योंकि वो चुनाव जीतने के बाद अपनी भरपायी करने मैं लग जाएगा और खुद का कर्ज दूर करेगा।आप लोगों की तरफ शायद ही देख पायेगा। ऐसै उदाहरण देखने को बहुत मिलते है
पंचायती राज के पा 29 विषय है कार्य करने के ,जिससे वो.उन पर काम कर सकता है।
आज.कल हमारे सरपंचों मैं एक ये परम्परा बैठी हुई है कि ,ग्राम पंचायत में चुनाव लडऩे वाले प्रतिनिधित्व दो खेमों मैं बंटे होते है ,उनको जनता वोट देती ,जनता अपना फर्ज पूरा करती ,जनता को भी यह इख्तियार हासिल है कि वो जिसको चाहे उसको अपना मत दे सकती है, लेकिन वे सरपंच चुनाव जीतने के बाद वे अपने कार्यकाल तक नाराज रहते है कि आप ने मुझे वोट नहीं दिये और आप को काम नही दूंगा।वो बेचारा आदमी कहांं जाए? ये है हमारे अनपढ़ सरपंचों की स्थिति ।तो फिर विकास क्या करेगा सरपंच उस पंचायत का ,भला कैसे पंचायत का.सपना पूरा कर सकता है।
आज की.तारीख मैं हर.यूवा अपनी पंचायत में चुनाव. लडऩे के लिए अपना प्रचार प्रसार कर रहे है,सोशल मीडिया पर ज्यादा और धरातल पर कम । सोशल मीडिया पर बडी बडी बातें फेंक रहे हैं ,मानो.ऐसा लगता हैं कि ये सारा काम आज ही कर लेंगे.और पंचायत को वाकई सुधारने का सपना संजो के बैठे हैं। आप अपने शिक्षित और ईमानदार आदमी, जनता और पंचायत की भलाई करने वाला होना चाहिए।


