हिंदुस्तान की खूबसूरती

दोस्तों सलाम ,आदाब आज बात हिन्दुस्तान की खूबसूरती को लेकर की जा रही है।हिन्दुस्तान दुनिया का वाहिद मुल्क है जो सभी धर्मों को एक साथ लेकर चलता है ।इस देश के अंदर सभी धर्म हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई, जैन,बोध और पारसी आदी मज़हब इस देश मैं सभी मिलजुल कर रहते हैं ये हमारे लिए बड़े फख्र की  बात है।हिन्दुस्तान दुनिया में आबादी के हिसाब से विश्व का दूसरा बड़ा देश है जो चसकी अपनी विशिष्ट पहचान है ।एक तरफ हिमालय पर्वत है, वही मध्य में उपजाऊ मैदान है जहाँ नदियां कल कल करती बहती है और उतर-पश्चिम मैं थार का रेगिस्तान मरुस्थल भुमि है ,हिन्दुस्तान के उत्तर मैं पठारी भाग है ।भारत की तीनों सीमाएं समुद्र से घिरी हुई है।


भारत की एक राष्ट्र भाषा  एवं राजभाषा, भारत का राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्र गान भारत एक लोकतांत्रिक संविधान   सबको एक धागे मैं पिरोने का कार्य करता है।भारत जेसे विशाल देश के अंदर सभी धर्म के लोग एक साथ हंसी और खुशी के साथ रहते हैं। भारत के अन्दर बहुलता हिन्दू धर्म की है, उसके बाद मुसलमानों की आबादी 15 प्रतिशत ।कुछ जगह आज भी असामाजिक तत्वों द्वारा अपनी राजनीतिक और स्वार्थ के लिए जरूर माहौल को दुषित करते हैं, लेकिन उसके बावजूद सभी लोग अपने अपने स्तर पर एक दूसरे के खुशी और गमी मे शरीक होते हैं ।आज भी लोगों के जाती पाती व धर्म को छोड़ सब के अंदर इन्सानियत के भाव आज भी ज़िन्दा है।








मुसलमानों का मोजूदा हाल

 दोस्तों सलाम ,आदाब आज बात हिन्दुस्तान के मुसलमानों की हो रही है, मुसलमान किस दिशा की तरफ जा रहा है।आज राजनीति का क्षेत्र हो या शैक्षिक क्षेत्र हो या आर्थीक क्षेत्र हो या सामाजिक क्षेत्र हो हर जगह से मुसलमान हाशिये पर नज़र आ रहा है, इसका मकसद क्या है दोस्तों?

इसका मकसद ये है कि हर एक को राजनीतिक पार्टियां मुसलमानों को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल तो कर रही है मगर उनका हकीकत मैं जो विकास होना चाहिए वो नहीं हो रहा है सिर्फ उन्हें लोलीपॉप देकर शान्त करवाया जा रहा ।मुस्लिम प्रतिनिधि जो मुस्लिम समाज का प्रतिनिधित्व करने की क्षमता का दावा तो करते हैं मगर उन्हीं के आकाओं के सामने खुल कर बात करने की पूरी तरह पैरवी नहीं कर पाते हैं।वैसे भी मुस्लिम प्रतिनिधि अपने सामर्थ्य, स्वार्थ और सिद्ध के लिए अपने आकाओं की बातो को मानना पड़ता है, उन्हें पता है कि हम हमारी कौम के लिए हक और इन्साफ के लिए लड़ेंगे तो हमारी कोई अहमियत ही नहीं रहेगी।हिन्दुस्तान के अधिकतर मुसलमानों का जुड़ाव सत्तर दशक से कांग्रेस पार्टी से जुड़ाव रहा ,मग़र आज भी कांग्रेस मुसलमानों के हक की आवाज और उन्हें साथ लेकर चलने मैं हिचकिचा रही, कांग्रेस पार्टी अच्छी तरह जानती है कि उनका असली  हिन्दू वोट एक तरफा हो रहे हैं,इसलिए उन्हें हर जगह अपनी पार्टी का दायरा सीमित होता जा रहा है।

जब मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं होगा तब तब तक उनका असली विकास कत्तई नहीं होगा।आज हिन्दुस्तान मैं राजनीति का बड़ा खेल है, सभी  जातियों की आज राजनीति मैं लीडरशिप है । चाहे उस जाती या समुदाय की आबादी 2 प्ररतिशत ही क्यों न हो । मुसलमानों का  हमदर्द कोई भी नेता या न कोई भी पार्टी न बन सकी ,सिर्फ उन्हें दरी बिछाने, इफ्तार पार्टी और दरगाह पर चादर भेंट करने  और तालियां बजाने तक तक सीमित कर दिया ये असली सच्चाई है।

 

मुसलमानों को करना चाहिए?

हिन्दुस्तान के मुसलमान सत्तर साल से कांग्रेस और अन्य  सैकुलर पार्टियों को वोट देता आ रहा है मगर आज तक उनके हाथ कुछ नहीं लगा,क्या मुसलमानों के सामने विकल्प नहीं है?क्या अब भी मुसलमानों का कोई लीडरशिप नेता मोजूद नहीं है?क्या मुसलमान अब नींद मैं सो रहा है? क्या हिन्दुस्तान का मुसलमान अपने आपको अब भी पहचान नहीं पाए? 

इन सब सवालों के जवाब अगले लेख मैं मिलेंगे इन्शाअल्लाह!

धन्यवाद आपका दोस्त, साथी ,लेखक मुराद खान 

जयसिंधर ।




Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...