शिक्षा को लेकर सरकार कितनी गंभीर!

#education# सरकार शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर नज़र आ रही है, ये सबसे बड़ा सोचनिय विषय है, हमारे और आप के लिए क्यौंकि हमारे और आपके बच्चे सरकारी स्कूलों में जरूर पढते है ं। सरकारी स्कूलों में और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में दिन रात का अंतर होता है, क्योंकि निजी स्कूलें फीस लेकर बच्चों पर तवज्जो देती है और साफ सफाई ,अनुशासन और व्यवहार, पढाई हर चीज़ की नयी नयी जानकारी सिखाते हैं एवं उनके पास सामान्य ज्ञान अथाह भरा पड़ा रहता है। ओर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे के हालात से हम लोग बिलकुल वाकिफ है, और ये क्या कारण है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे की ये स्तिथि है- 
1. सरकारी स्कूलों में भयंकर स्टाफ की कमी, अगर स्टाफ पूरा भी है तो वो अपना फर्ज अदा नहीं करते हैं, वे लोग ट्यूशन के लालच में बड़ी बड़ी कोचिंग में पढाते है। 
2.जिस गाँव में सरकारी विद्यालय है वहाँ के लोग👫👬👭 जागरूक नही है, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि एस एम सी क्या होती है और स्कूल में पढाई क्या चीज़ है। 
3. सरकार सिर्फ और सिर्फ कितने भी स्टाफ क्यों न हो उनको सिर्फ हमेशा नये नये कार्यों का जिम्मा देती रहती है और कागजी कार्रवाई में व्यस्त रखना चाहतीं है ।सरकार शिक्षा के प्रति योजनाएं तो बड़ी बड़ी लागू करतीं हैं मगर वो योजनाएं सिर्फ और सिर्फ काग़ज़ों तक ही सिमीत है। इसलिए सरकारी स्कूल का स्टाफ कागजों में व्यस्त रहता है। 
4. अगर सरकार चाहती तो हर स्कूलों में पूरा स्टाफ लगा देती, मगर सरकार भी यही सोच रही है कि ये सब पढ कर क्या करेंगे, आखिर हमारी कोन सुनेगा। 
5.अगर सरकार शिक्षा के महत्व को समझती तो प्रत्येक सरकारी स्कूलों में एक कलर्क की पोस्ट को स्वीकृति दे चुकी होती है, चाहे स्कूल प्राथमिक स्तर की क्यों न हो। 6.आज उस कलर्क का काम सारा अध्यापक कर रहा है, उनको कलर्क के काम के लिए नहीं लगाया है, उन को बच्चों को पढाने के लिए लगाया है, मगर वो बेचारा अध्यापक करें तो क्या करे, सरकार के कागजों काम समय पर करना जरूरी है। पढाई समय पर करवानी जरूरी नही है। 

क्योंकि आज पढाई को लेकर सरकार शिक्षा के प्रति इतनी गंभीर नहीं है तो दूसरा कौन होगा, क्योंकि जो आज अमीर और मध्यम वर्ग का तबका अपने पैसे🤑💸💵💴💶💰💳 के बलबूते पर बड़ी बड़ी प्राईवेट स्कूलों में बच्चों को पढा रहे हैं। और पीछे बचा गरीब तबका, वो कहाँ जाए क्योंकि उनके के पास दो वक्त का  खाना भी नसीब नहीं होता है, प्राईवेट स्कूल तो दूर की बात है। 

तो ये सरकार का और सरकारी स्कूलों के हालात हैं आप लोग जरा चोकन्ना रहे, ता की समय के साथ जागरूक रहकर आगे प्रगति कर सकें। 

में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर। 

धन्यवाद 🙏💕शुक्रिया।। 
 https://socialworkerandeducationist.blogspot.com/2019/07/important-day-of-celebrating-reasons.html

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