Politics of Muslims in sithwetion. मुसलमानो की राजनीती में स्थिति !

Politics of  indian muslims of 
                sithwetion.

# भारतीय मुसलमानो को राजनीति में स्थिति  !!







जी हां दोस्तों आप के साथ आज एक नया टॉपिक ले कर हाजिर हुआ हूं, जो की एक मुस्लिम समुदाय का  पॉलिटिक्स से जुड़ा मसला है । वर्तमान समय में हिंदुस्तान के अंदर बीस से पच्चीस प्रतिशत मुस्लिम आबादी है जो की  हिंदू समुदाय के बाद दूसरे नम्बर पर मुसलमानो की आबादी है ।एक बड़ी आबादी जनसंख्या के हिसाब से मायने रखती है । आज हमारे मुल्क हिंदुस्तान में राजनीति बहुत ही हावी हो चुकी है ,इससे कोई भी व्यक्ति राजनीति से बिना प्रभावित हुए रह ही नहीं सकता । हिंदुस्तान की हर रियासत में राजनीति की लहर इस तरह चल बसी है की हर आम आदमी का बचना बहुत ही मुश्किल हो गया है ।लेकिन वर्तमान दौर में बात मुस्लिम समुदाय की हो रही है की इस राजनीति में मुसलमान कहां पर खड़ा नजर आ रहा है ? क्या मुसलमानो की राजनीति में हैसियत है ? अगर राजनीति में उनकी हैसियत है तो उनका क्या मर्तबा है?किस पॉलिटिक्स पार्टी में क्या उनका योगदान है ?

क्या मुस्लमान हाशिए पर धकेला गया ? 

इन सब सवालों को जानने के लिए हम विश्लेषण करेंगे और मुस्लमानों की राजनीती स्थिति को समझेंगे ।जी हिंदुस्तान के मुसलमानो को विरासत में मिली पार्टी कोंग्रेस ही है ,जो हिंदुस्तानी मुसलमानो ने इस पार्टी को सींचा और पाल पोस कर बड़ा किया और राष्ट्रीय स्तर की पार्टी तक और एक  सबसे बड़ी मजबूत पार्टी मुसलमानो ने बनाई  । और ये बात  हिंदुत्व की आइडियोलॉजी को  मानने वाले हिंदुओं ने भी कहा है की ,दरअसल कांग्रेस पार्टी तो मुसलमानो की है , क्योंकि मुसलमान राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा वोट भी कांग्रेस को ही देते हैं।मुसलमानो ने इस पार्टी को हमेशा गले लगाए रखा ,और जब बात वोट देने की आती है तब इन्होंने100 में से 95 प्रतिशत वोट हमेशा कांग्रेस को दिए ,। बाकी 5 प्रतिशत वोट इधर उधर अन्य पार्टियों को गए होंगे जिसमे कोई दो राय नहीं । आज हिंदुस्तान में दो बड़ी राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां है जो एक पार्टी अपने आप को सेकुलर मानती है वो है कोंग्रेस और दूसरी पार्टी राष्ट्रवाद का दावा करती है वो है भाजपा एक पार्टी  मुसलमानो की रहबरी का  दावा करती है ,तो दूसरी पार्टी मुस्लामनो को सिरे से खारिज करती है और ये कह कर की हमे मुसलमानो के वोट चाहिए ही नही । तो फिर मुस्लिम एक पार्टी से डर कर सेकुलर का दावा करने वाली पार्टी  से जा गले मिलते है , और दावा करती है की मुसलमानो के हम रखवाले है । फिर मुसलमान बेचारा थका हारा,मांदा,आखिर जाए तो जाए कहां ?आज हमारे मुल्क में हर रियासत में अलग अलग राजनीतिक पार्टियां अथवा दल है ,भाजपा जो वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पार्टी बन चुकी हैं जो की उनको मुस्लिम वोटर्स की जरूरत है ही नही ,तो फिर मुस्लिम वोटर्स की जरूरत है किसको ,जरूरत तो उनको है जो अपने आप को सेकुलर मानती है की हम आप की रक्षा करते है। , इस स्थिति को ज़रा समझना होगा कि वर्तमान दो राजनीतिक दल एक कांग्रेस और भाजपा दोनों में बुनियादी फर्क ये है की एक मुस्लिम वोटर्स को ये चैलेंज करती है की आप के के वोटों की हमें जरूरत है नही, तो ये उनका एक पीछे बहुत बड़ा राज़ है ,की हम से हिंदू वोटर्स जुड़े रहे और हम सत्ता में हमेसा बने रहे और मुस्लिमों के चांद वोटों की जरूरत है नही ताकि हमें इस जुमले से हिंदू वोट मिल जायेंगे और सत्ता के अनुकूल सब कुछ चलता रहेगा , लेकिन ये कह कर मुस्लमान डर कर हम से दूर हो जाए ।

फिर जब दूसरी पार्टी कांग्रेस जो मुस्लामानो को अपना रखवाला समझती है , हालांकि वो मुसलमानो को टिकट भी देती हैं,उतना ही देती है जितना ऊंट के मुंह में जीरा,लेकिन बीजेपी के मुकाबले जरूर टिकट ज्यादा देती है ,और मुसलमानो के वोट्स कांग्रेस को 95 प्रतिशत जाते है । हिंदुस्तान की मुख्तलिफ रियासतों में में क्षेत्रीय दल है ,वो भी मुसलमानो को अपनी गोद में लेके बैठे है और ये कह कर की आप उधर इधर मत भागिये वरना बीजेपी आप को मार डालेगी।  जो बीजेपी नही करती वो क्षेत्रीय दल और सेक्युलर दल ही काम तमाम करते है ,फिर हमारे जुम्मन मियां साहब को समझते है बड़े प्यार से की देखो ज्यादा आप बोलोगे तो बीजेपी आ जायेगी और आप को खतरा हो जायेगा , जैसे एक कहावत है न की शरारती बच्चे को जब मां चुप कराने के लिए कहती ही की बेटा बदमाशी मत कर ,वरना बिल्ली आ जायेगी और उठा के ले जायेगी । यही स्तिथि सेकुलर पार्टी का दावा करने वाली क्षेत्रीय दलों का है जो मुसलमानो को इस तरह करके अपने पाले में रखते है । ताकि हम लोग सेकुलर का ढोंग रचते रहे और जो खेल खेलना हैं वो भी पूरा करते रहें।इससे वो भी अपने आप को महसूस करने लगता है को वास्तव में अगर दूसरी पार्टी आएगी तो हमे खतरा उत्पन्न हो जायेगा ,इससे विकास की तो बात छोड़िए लेकिन 5 साल शांति से तो रह पायेंगे और अपनी आजीविका सही से कमा पाएंगे।इसी आसरे को लेकर कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों को वोट देते है ।

इन सब बातों के बावजूद सेकुलर पार्टी का दावा करने वाली मुसलमानो को किस स्तिथि में रखती है ये देखना सबसे अहम जरूरी है, मुसलमानों को अपने प्रचार प्रसार में चुनावी रैलियों की भीड़ भाड़ दिखाने के लिए ,और रोज़ा इफ्तार पार्टी की दावत करने के लिए , दरी बिछाने के लिए इस्तेमाल करते है ,कुछ मामूली उम्मीदवारों को टिकिट देकर ये कह कर की बीजेपी तो मुसलमानो को एक भी उम्मीदवारों को टिकट नहीं देती है ,जब सेकुलर पार्टी का दावा करने लीडर जब सत्ता में आ जाते है तो किसी एक मुस्लिम को अल्पसंख्यक मंत्री का दर्जा दे देते है ,और सत्ता की मलाई तो खुद खाते है ,मुस्लिम आवाम का कोई विकास नहीं , वो बेचारा हुश में खुश लेकिन विकास का कोई अता पता नहीं केवल केवल ये पल्ला झाड़ने के लिए की हम ने तो मुसलमानो को टिकट भी दिया और अल्पसंख्यक मंत्री भी बना दिया । इस वाक्य का पीछे का मतलब इतना ही है की सिर्फ और सिर्फ मुसलमानो को राजनीति में इस्तेमाल करो use and throw वाली कंडीशन है । आखिरकार मुसलमानो को सभी राजनीतिक दल हाशिए पर धकेलना चाहते है और धकेल दिया गया है ।

आज भी सत्ता में बैठे क्षेत्रीय राजनीतिक दल बड़े बेड़े दावे करते है की हम लोग 36 कॉम का विकास करते है ,लेकिन ये उनके दावे धरातल पर सिर्फ धरे  के धरे रह जाते है । लेकिन जब अल्पसंख्यक के गांव और कस्बे में जब जाते है तब वाह के हालात बता देते है की मुसलमानो के गांव या ढाणी और कस्बे में क्या हाल है ?मुसलमानो के अधिकतर गांवों में पीने के लिए पानी  उपलब्ध है ही नहीं है , वहां स्कूल भी नही अगर स्कूल है तो भी पढ़ने वाला अध्यापक नही है , उस गांव या ढाणी में बिजली उपलब्ध नहीं है,मिनी अस्पताल भी नही इलाज के लिए दूर दराज के शहरो में जाना पड़ता है जिसे उन ग्रामीण लोगो को तकलीफों का सामना करना पड़ता है । आज भी ऐसे गांव है जहां पर आवागमन के लिए पकी सड़क है नहीं जिससे ग्रामीण लोग आज भी पैदल जातें है , हां ये बात जरूर है की वहां पर पुलिस थाना जरूर होगा , क्युकी उससे सरकार को और प्रशासन को फायदा होता है ,लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी होगी कहां पर , जहां पर वहां पर मुस्लिम आबादी जायदा है ।

मुसलमानों को किस चीज की जरूरत है ?

आज के युग में अगर मुसलमानो को जरूरत है तो उनको समाजिक न्याय, आर्थिक न्याय,और पॉलिटिकल न्याय इन तीनो की न्याय की जरूरत है इन तीनों न्याय के आसरे ही किसी भी कॉम या समुदाय का असली विकास होता हैं और उस समुदाय का उत्थान होता है ,लेकिन काफी हद तक मुसलमानो के पास ये विकास के आयाम बिलकुल पहुंच ही नही पाते जिससे मुसलमान की स्तिथि दलित और आदिवासियों से भी बदतर है ।

आज के संदर्भ में देखा जाए तो मुसलमानो के पास नोकरियों में आरक्षण नही है ,दूसरे समुदाय के पास आरक्षण है जिससे उनका अनुपात ज्यादा है ,मुसलमान रोजगार में पिछड़ा हुआ है जिससे उनकी इकोनॉमिक कंडीशन बहुत ही खराब है ।मुसलमानों के पास राजनीतिक इंपोवार नही है जिससे उनका प्रतिनिधित्व बराबर नही मिल पता है इसलिए उनके क्षेत्र की आवाज सदन में नही सुनाई देती ।मुसलमान छात्रों को पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप सरकार नही देती जिससे छात्र पढ़ाई से ड्रॉप आउट हो जाते है ,मुसलमानों की बस्ती में उप स्वास्थ्य केंद्र नही खोलती जिससे उनकी स्तिथि और भी खराब होती है ।

लेकिन देखे जाए तो हिंदुस्तान की आज़ादी से लेकर आज  तक 76 साल हो चुके हैं ,लेकिन मुसलमानो की स्थिति में सुधार अभी तक नही आया है ये में नही कह रहा हु बल्कि केंद्र सरकार का डाटा कह रहा और सच्चर समिति,रंगनाथ मिश्र की समिति कह रही है की हिंदुस्तान में को समुदाय या धर्म पिछड़ा हुआ है तो वो मुसलमान है लेकिन सरकार सब खामोश !मुसलमानों के विकास की बात आती है सेकुलर पार्टी में बैठे उनके अपने ही साथी ये कह कर कहते है की सिर्फ और सिर्फ सरकार मुसलमानो की है ,हमारी कुछ सुनती नही तब सरकार के मुखिया ठप हो जाते हैं ,फिर आगे देखेंगे तब तक काम रुक जाता है और बीच में नया एजेंडा लागू किया जाता ह तब तक मुसलमानो के विकास को भुला दिया जाता है । आखिर कार मुसलमान हाशिए पर धकेला जाता है । हर पार्टी और क्षेत्रीय दल मुसलमानो के साथ अपनत्व का ढोंग रचते है लेकिन हकीकत में मुसलमानो को सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय ,और पॉलिटिकल न्याय कोई भी दल या पार्टी देने के लिए तयार नही है ।

जी हां मुसलमानो की वर्तमान राजनीति में हैसियत उतनी ही  है जितनी ऊंट के मुंह में जीरा ,आज चाहे कोई भी पार्टी या क्षेत्रीय राजनीतिक दल हो ,लेकिन अपने आप को सेकुलर मानने से कुछ नही होगा बल्कि सेक्युलरिसिम पर चलना होगा ,और हर गरीब मुस्लमान और दलित वर्ग को भी साथ में बिठाना होगा उनके हित में काम करना होगा उनके सामाजिक ,और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए काम करना होगा तभी सेकुलर पार्टी का दावा करने वाले बड़े बड़े राजनीतिक दल अपने आप को प्रमाणित नही कर पाएंगे।सिर्फ और सिर्फ मुंह में खजूर डालने से और दरी बिछाने से कुछ उनका विकास नही होगा । अगर आप लोग इस तरह का सेक्युलर दावा करते रहोगे तो उनका शोषण होता रहेगा , फिर जनता बड़ी जनार्दन है ,कोई और विकल्प देख लेगी, जिससे आप की अहमियत को कहीं खतरा न हो जाए ।


नोट: ये मेरे निजी एव स्वतंत्र विचार है किसी राजनीतिक         दल से प्रत्यक्ष संबंध नही है ।

                         धन्यवाद 

आप का दोस्त ,साथी ,लेखक , स्वतंत्र विचारक 

                 मुराद खान जयसिंधर 

                   जय हिंद जय भारत 












 

1 टिप्पणी:

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