Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज नहीं जागे तो कल तुम्हारी नस्लें तालीम और तरक्की की भीख मांगती फिरेंगी, सात समंदर पार से कोई तुम्हारा हाथ पकड़ कर कलम देने नहीं आएगा"*


_कलम की ताकत से तख्त बदल जाते हैं, जो कौमें सो जाती हैं वो वक्त से रुल जाती हैं। अपना मुस्तकबिल खुद बनाना पड़ता है, दुआ के साथ मेहनत के दरवाजे भी खटखटाने पड़ते हैं।_ 

 

ये लफ्ज़ नफरत के लिए नहीं, बेदारी के लिए हैं। मेरा मकसद किसी का दिल दुखाना नहीं है। मेरा मकसद आईना दिखाना है। बात सीधी है, सख्त है, लेकिन अपने ही लोगों के भले के लिए है। अगर आज हम अपनी कमजोरियों को नहीं मानेंगे तो कल हमारी आने वाली नस्लें हमें माफ नहीं करेंगी।


जमाना तुम्हें जाहिल देखना चाहता है, जमाना तुम्हें अनपढ़ देखना चाहता है, जमाना तुम्हें गली के नुक्कड़ पर बहस करता, शिकायत करता, और मायूस देखना चाहता है। जमाना तुम्हें हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता। जमाना चाहता है कि तुम तालीम से दूर रहो, तिजारत से दूर रहो, सियासत से दूर रहो, अफसरी से दूर रहो, और सिर्फ भीड़ बनकर तालियां बजाते रहो।


लेकिन सवाल ये है कि तुम कब तक सोते रहोगे? कब तक दूसरों के रहमो करम पर जिंदा रहोगे? कब तक ये कहोगे कि "हमारा कोई नहीं है"? 


अगर तुम खुद अपने बारे में नहीं सोचोगे, अपने बच्चों के मुस्तकबिल के लिए आज मेहनत नहीं करोगे, तो याद रखो सात समंदर पार से कोई फरिश्ता उतर कर तुम्हारा हाथ पकड़ कर कलम देने नहीं आएगा। कोई तुम्हारे घर की दहलीज पर दस्तक देकर ये नहीं कहेगा कि "उठो, तुम्हारे बच्चे को डॉक्टर बनाते हैं"। 


आज हर गली में यही बात है कि मुसलमान तालीम से पीछे है। मुसलमान के बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं। मुसलमान की बेटियां 8वीं के बाद घर बैठा दी जाती हैं। मुसलमान के नौजवान डिग्री लेकर भी नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं क्योंकि हुनर नहीं है, अंग्रेजी नहीं है, कंप्यूटर नहीं है। 


और उधर दूसरी तरफ? वो अपने 3 साल के बच्चे को प्ले स्कूल भेज रहे हैं, 10वीं में कोचिंग दिला रहे हैं, और 18 की उम्र में अफसर बना रहे हैं। 


क्या तुमने कभी सोचा कि ये फर्क क्यों है? फर्क सिर्फ इतना है कि वो जाग गए और तुम अब भी नींद में हो।


हम मस्जिद और मदरसों के लिए तो दिल खोल कर चंदा देते हैं, लेकिन मदरसे में कंप्यूटर लैब, साइंस लैब और इंग्लिश टीचर के लिए 100 रुपये देने में सोचते हैं। हम शादी में 10 लाख उड़ा देते हैं, डीजे, फोटोग्राफी और दिखावे में, लेकिन बच्चे की फीस और कोचिंग के लिए कहते हैं "पैसे नहीं हैं"। हम फेसबुक और व्हाट्सएप पर कौम की तकरीरें शेयर करते हैं, लेकिन अपने घर के बच्चे से एक बार भी नहीं पूछते "बेटा होमवर्क किया?" हमारा नौजवान मोबाइल पर रील देखने में 5 घंटे दे देता है, लेकिन एक घंटा किताब को नहीं दे पाता। हम आपस में एक दूसरे की टांग खींचते हैं, हसद करते हैं, चुगली करते हैं, गीबत करते हैं, और फिर कहते हैं कि दुनिया हमें आगे नहीं बढ़ने देती। हम दूसरों की तरक्की देखकर जलते हैं और खुद मेहनत करने से जी चुराते हैं। हम 4 लोगों की महफिल में बैठकर अपने ही भाइयों की बुराई का कच्चा चिट्ठा खोलते हैं और फिर इत्तेहाद की दुहाई देते हैं। हम नशे, जुए और गैंगबाजी में अपना मुस्तकबिल जला रहे हैं, और फिर सिस्टम कोसते हैं। हमारे यहां तलाक के मामले बढ़ रहे हैं, छोटे-छोटे झगड़ों में घर टूट रहे हैं, और बच्चे सड़क पर आ रहे हैं। हम दहेज के नाम पर बेटियों को बोझ समझते हैं, जबकि इस्लाम में बेटी रहमत है। हम सूद, रिश्वत और धोखे को अपना लेते हैं और फिर बरकत न होने का रोना रोते हैं। हम पंचायत और तंजीम में कुर्सी के लिए लड़ते हैं, कौम के मुद्दों के लिए नहीं। हम उलेमा की इज्जत मुंह पर करते हैं और पीठ पीछे बुराई करते हैं। हम अपने ताजिरों से उधार लेकर वापस नहीं करते, और फिर कहते हैं कि मुसलमान का एतबार नहीं है। हम वोट के वक्त बिक जाते हैं, और 5 साल तक सरकार कोसते हैं। हम कब्रों और मजारों पर चढ़ावा चढ़ाने में लाखों खर्च कर देते हैं, लेकिन जिंदा इंसान की तालीम के लिए जेब नहीं खोलते। हमारा नौजवान खेल के मैदान में नहीं, गली में आवारागर्दी करता है। हम कारोबार में ईमानदारी छोड़ कर 2 नंबरी रास्ते अपनाते हैं और फिर कहते हैं कि बरकत नहीं है। हम पड़ोसी से जलते हैं, रिश्तेदार से दुश्मनी रखते हैं, और कौम की एकता की बात करते हैं। हम लड़कियों की शादी 30 की उम्र तक लटका देते हैं और फिर कहते हैं कि रिश्ते नहीं मिल रहे। हम सरकारी स्कीम और स्कॉलरशिप की जानकारी नहीं लेते और फिर कहते हैं कि हमारे लिए कुछ नहीं है। हम अपने बच्चों को दीन तो सिखाते हैं लेकिन दुनिया की दौड़ में पीछे छोड़ देते हैं।


इसलिए आज कौम पीछे है। इसलिए आज हमें पीछे समझा जाता है। इसलिए आज हमें हर जगह लाइन में सबसे पीछे खड़ा किया जाता है।


अब और नहीं। अब वक्त आ गया है कि हम अपनी सोच बदलें। हर घर से एक आलिम और एक अफसर निकालो, सिर्फ दीन नहीं, दुनिया की तालीम भी जरूरी है, स्कूल-कॉलेज भी, दीन और दुनिया दोनों साथ लेकर चलो। बेटियों को पढ़ाओ, जो कौम अपनी आधी आबादी को जंजीरों में जकड़ देती है वो कभी तरक्की नहीं कर सकती, बेटी पढ़ेगी तो दो घर रोशन होंगे। शादी में फिजूलखर्ची बंद करो, दिखावे में बरबाद करने के बजाए उस पैसे से बच्चे कोचिंग दिलाओ, हुनर सिखाओ, बिजनेस कराओ, सादगी अपनाओ। नशे, जुए और गैंगबाजी से नौजवानों को बचाओ, जेल और कब्रिस्तान कौम का मुस्तकबिल नहीं हो सकते, नौजवानों को स्किल, खेल और कारोबार की तरफ मोड़ो। एकता बनाओ, एक दूसरे की टांग खींचना बंद करो, हसद, चुगली और गीबत छोड़ो, जो पढ़ रहा है उसकी मदद करो, जो आगे बढ़ रहा है उसका हाथ थामो, तंजीम बनाओ। मस्जिद-मदरसों के साथ स्कूल भी, चंदा सिर्फ इमारत के लिए नहीं, तालीम के लिए भी दो, अपने बच्चों को कुरान के साथ कंप्यूटर और अंग्रेजी भी पढ़ाओ। सच्चाई और ईमानदारी अपनाओ, सूद, रिश्वत और धोखा छोड़ो, तिजारत में एतबार पैदा करो ताकि लोग कहें "मुसलमान का लफ्ज़ पत्थर की लकीर है"। घरों को बचाओ, छोटे झगड़ों को बड़ा मत बनाओ, तलाक आखिरी हल है, पहला नहीं, बच्चों की खातिर सब्र करो। सरकारी स्कीम, स्कॉलरशिप और नौकरियों की जानकारी लो, अपने हक के लिए आवाज उठाओ, लेकिन तालीम और हुनर के साथ। कारोबार में हलाल कमाई करो, उधार समय पर लौटाओ, एतबार बनाओ।


याद रखो, हुकूमतें और सिस्टम किसी को कुछ नहीं देते। जो मेहनत कर के हासिल करता है वही आगे बढ़ता है। और आगे बढ़ने के लिए ताकत चाहिए, और ताकत आती है तालीम, तिजारत और तंजीम से।


आज नहीं जागे तो कल तुम्हारी नस्लें किताबों में तुम्हारी मिसाल देकर पूछेंगी "हमारे बुजुर्गों ने हमारे लिए क्या किया था?" और जवाब में सन्नाटा होगा।


इसलिए उठो। कलम उठाओ। किताब खोलो। बच्चों को स्कूल भेजो। खुद को इस काबिल बनाओ कि दुनिया तुम्हें अनदेखा न कर सके।


क्योंकि मुस्तकबिल भीख में नहीं मिलता, मुस्तकबिल मेहनत से हासिल किया जाता है

Wahy is need in education for muslims

 *शिक्षा क्यों ज़रूरी है*?

जी हाँ दोस्तों अस्सलामु अलैकुम! उम्मीद करता हूँ की आप सभी खैरो आफियत से होंगे।

आज बात तालीम की हो रही है,हमारे मुल्क हिदुस्तान मे सबसे ज्यादा कोई पिछड़ा है वर्ग है वो समुदाय है तो मुस्लिम, ये भारत सरकार की मिश्रा कमेटी, कुंडू कमेटी ये सब कमेटीयों ने स्पष्ट कर दिया की मुसलमान सरकारी नौकरीययों मे, स्कूली विद्यालय मे, और कॉलेज शिक्षा मे और मदरसों मे बच्चों की की शिक्षा का अनुपात पिछड़ा हुआ है। राजनीती मे सबसे ज्यादा मुसलमानो की स्तिथि दलितों से भी खराब है, आज अगर आरक्षण की ज़रूरत है तो मुस्लिम समुदाय कों है।


*लफ्ज़ इक़रा*

मुसलमान कौम का माज़ी बहुत ही अच्छा गुज़रा है जिसमे कोई शक नहीं, लेकिन उन्होंने अपने तरीके कों छोड़ दिया. जो तरीका पेगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दिया था, उसके साथ मुसलमानो कों मुकद्दस क़ुरआन शरीफ जैसी किताब दी जो कयामत तक बाकी रहने वाली है, उस का पहला शब्द या अल्फाज़ या सूरह इकरा की आयत इक़रा नाज़ी हुई जिसका मतलब है पढ़ो. पढ़ो पढ़ो.

ये हमे मेसेज मिला है पढ अपने रब के नाम से, क्योंकि पढ़ेंगे नहीं तो समझ नहीं पाएंगे, अपने कों, दूसरों कोंऔर अपने आस पास के माहौल कों इसलिए पैगंबर सहाब ने हमें ये मेसेज दिया है की *इल्म हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज़ है*।

लेकिन अफ़सोस हमने इल्म हासिल करना छोड़ दिया इल्म चाहे दीन का हो या दुनिया का इल्म, दुनिया कों समझने के लिए असरी तालीम है जो हयात तक काम आती है।दीनी तालीम जो मुक्कमल दुनिया मे अमल के साथ आख़िरत मे भी काम आती है, लेकिन हमें दीनी तालीम इतनी हासिल करनी ज़रूरी है की हमें हलाल और हराम की समझ और अपना अज़ीज़ कोई गुज़र जाए या अपने बाप दादा तो उसकी नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ा सके।

हमें इस्लाम से ये मेसेज मिला है की आप कों आलिम बनना फर्ज़ नहीं है मगर आप बनते हैं तो बहूत अच्छी बात है, मुफ़्ती, हाफ़िज़, कारी, आलिम बनते है तो बहुत अच्छी बात अगर उस पर अमल करें और उससे फैलाये तो बहूत काबिल ए फ़ख्र है,।

लेकिन अफ़सोस आज का मुसलमान उस तालीम से भी पिछड़ गया जो हलाल और हराम की की समझने की जरूरत थी।

लेकिन उससे भी दुनिया की तालीम (असरी) तालीम से काफ़ी हद तक पिछड़ गया है।


*मुसलमन कैसे पिछड़ गया*?

1.मुसलमानो ने इल्म हासिल करना छोड़ दिया

2.मुसलमानो ने अल्लाह की इबादत करना छोड़ दिया है, जिसका सबूत मस्जिदे खाली नज़र आप रही है।

3.मुसलमनो ने हुकुकुल्ला और हुकुकुल इबाद मे सख्त कोताही की।

4.मुसलमानो ने मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीका छोड़ दिया।

5.मुसलमान मुत्ताहिद होने की बजाय मुंतशीर(बिखर) गये।

6.मुसलमानो ने गलत रस्मो कों अपना हथियार बना लिया।

7.मुसलमनो ने शादी और मरने पर फिज़ूल खर्ची कों बढ़ा दिया है.

8.मुसलमनो ने मुकद्दस कुरआन पाक कों पढ़ना और समझना छोड़ दिया।


9.मुसलमानो ने एक दूसरे की मदद करना छोड़ दिया।


10.मुसलमान ने कारोबार कारोबार कों छोड़ दिया, जो नबी की सुन्नत है।


11.मुस्लिम युवा अक्सर गंदे कामो मे व्यस्त हो गये.

12.मुसलमानो ने दीनी तालीम हासिल करना छोड़ दिया।

13.मुस्लिम कौम के रहबरी का चोला ओढ़ कर मिंबरे रसूल पर एक दूसरे कों जन्नत और जहन्नम का टिकट फिक्स करने वाले बाअज़ उलमा ने फिरके वारियत की हवा कों तेज़ कर दिया जिससे मुसलमान बिखर गया।

14.मुसलमान एक दूसरे से लड़ कर ही हारे है किसी और ने नहीं हराया है, अंग्रेजो के खिलाफ जंग हो या लोकतंत्र मे चुनावी जंग हो, अफ़सोस मुसलमान कों मुसलमान ने ही हराया है किसी और ने नहीं ये कटु सत्य है।

15.मुसलमान एक दूसरे से टांग खींचाई मे सबसे आगे है।

16मुसलमानो कों दुनिया मे आने का मकसद इल्म सीखना और एक रब की इबादत करना मगर उन्होंने अपना मकसद रोजी रोटी और पेट भरना लगा दिया।

17.मुसलमानो ने शिक्षा पर पैसा खरच करना छोड़ दिया जिससे उनकी औलाद अनपढ़ रह गयी है।

18.मुसलमनो कों हॉस्पिटल, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, और मीडिया हॉउस जैसी संस्थाएं खोलनी चाहिए थी मगर ये संस्थाएं आज न के बराबर है।

19. मुसलमान युवा मोबाइल और सोशल मीडिया मे फंस गया।

20. अक्सर मुस्लिम युवा जो नशे मे रहते है जो बर्बादी की वजह बना।


21.अक्सर मुस्लिम नौजवान माँ बाप के ना फरमाबरदार बन गए है इसलिए उनकी बद दुआ लग जाती है, इसलिए ज़िन्दगी मे माँ-बाप और अपने उस्ताज़ का जिससे अपने इल्म सीखा है उसका अदब करें।


22. आज नौजवान पीढ़ियों अपनी ऊर्जा कों खेलो मे खर्च कर रही है जिसका भविष्य मे कोई फायदा नहीं है।

23. आज हमने किताबों से ताल्लुक तोड़ दिया।

24. आज हमने सादगी कों छोड़ दिया और मौज मस्ती, और अय्याश पसंद बन गए।


जो मैंने लिखा है आज के समय के हालात कों महसूस करते हुए लिखा है, ये हम मुसलमानो मे सख्त सुधार की आवश्यकता है, ये लेख किसी के खिलाफ भी नही है जो देखा वो ही लिखा है। आप सब साथी इस पर जरुर ध्यान दे और अपने भाइयों कों, पड़ोसियों कों या रिश्तेदारों कों जो भी अपना बंदा स्कूलो मे पढ़ रहा है उसको प्रेरित करें, जीवन मे आगे बढ़ने की नसीहत करें और उनकी कोई समस्या हो तो सुने और उसका समाधान करें। साथ अपने बच्चों कों मकतब की तालीम ज़रूर से ज़रूर दिलाये, मदरसे मे और मकताब मे पढ़ा हुआ बचा अदब और अनुसासन वाला बनेगा और आप की क़द्र भी करेगा ताकि आप की वजह से अगर अच्छा काम होता है तो उसका सवाब आप कों मिलेगा।



*हमें क्या करना होगा*


*मेरी पोस्ट पढ़ने वालो कों अहद करना होगा तभी हम सब और हमारे भाई बहिन कामयाब होंगे और आगे सही दिशा कों और मंज़िल तक पहुंचेंगे। इंशाअल्लाह.

हमारी बर्बादी की वजह ऊपर लिखे हुए बिन्दु है।

अगर हम चाहे तो अपने आप कों बदल कर और अपने मुआशरे कों सुधार सकते है।

हर पढ़ा लिखा जागरूक बने, और अपने आस पास के जितने भी भाई बहिन पढ़ रहें है या पढ़ने से वंचित है उनको प्रेरित करके स्कूलो से जोड़े जिसने 12 वी पास कर लिए है अब आगे नहीं पढ़ना चाहहता तो उसको आईटीआई या rscit कंप्यूटर कोर्स करवा ले ताकि उसको भविष्य मे फायदा जरुर मिलेगा।


लेखक :- मुराद खान बाड़मेर

ओबीसी की जनगणना क्यों नहीं?

 *ओबीसी जनगणना विरोधी भाजपा!*

*ओबीसी विरोधी भाजपा!*जिस पंडित अटल बिहारी ने देवगोड़ा सरकार  द्वारा 1998 में 2001की जनगणना में ओबीसी* *जनगणना कराने के फैसले को लंगड़ी सरकार बनते ही रद्द कर दिया था भाजपा ने उस वाजपेई की अस्थियां पूरे देश में घुमाई।*

*और जिस भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे ने बार बार संसद में ओबीसी जनगणना कराने के लिए आवाज उठाई उनकी मृत्यु के बाद भी* *भाजपा उनकी इच्छा पूरी करने को तैयार नहीं क्यों?*

*क्योंकि वाजपेई ब्राह्मण थे और गोपीनाथ मुंडे ओबीसी,*

*इससे यह भी सिद्ध होता है* *कि भाजपा ब्राह्मणों की पार्टी* *है जो ओबीसी का सिर्फ इस्तेमाल करती है उसके ही ओबीसी नेताओं के जोरदार* *मांग के बावजूद ओबीसी* *जनगणना नहीं कराना चाहती क्योंकि संख्या मालूम पड़ने पर शासन प्रशासन में* *ओबीसी को आधे से ज्यादा प्रतिनिधित्व देना पड़ेगा फिर ब्राह्मण* *वर्चस्ववाद का क्या होगा जिसे आजादी के बाद से कांग्रेस ने मजबूत* *किया टिकाया अपने शासन में वही काम भाजपा कर रही है ।*

*प्रस्तुत है दिवंगत गोपीनाथ मुंडे जी का ओबीसी जनगणना की  मांग के लिए संसद में दिया गया जोरदार भाषण-- -----*

अध्यक्ष महोदय! मैं ऐसा मानता हूं कि आज इस सदन में बहुत ऐतिहासिक और महत्त्वपूर्ण बहस हो रही है,क्योंकि इस देश में 54% ओबीसी हैं, इसका मतलब 54 करोड़ लोगों के जीवन से संबंधित विषय पर बहस कर रहे हैं और इसके प्रति सरकार ने अभी तक फैसला नहीं लिया है।  1931 में सिर्फ एक बार ओबीसी की जनगणना हुई थी,80 साल हो गए मगर ओबीसी OBC की जनसंख्या आज कितनी है किसी को इसके बारे में मालूम नहीं क्योंकि OBC CENSUS (जनगणना) नहीं हुआ है। अगर हम इस समय भी census  (जनगणना) में ओबीसी जनगणना नहीं करेंगे तो तो ओबीसी को Social justice  (सामाजिक न्याय) देने के लिए और दस साल हम ओबीसी पर अन्याय करेंगे, लेकिन यह किसलिए? ओबीसी क्यों Census(जनगणना) मांगते हैं? इसलिए कि कि 2007 में IIT और IIM में आरक्षण देने के बाद एक पब्लिक (लिकिटेशन) में उस समय के कोर्ट ने ओबीसी के पापुलेशन के तथ्य सरकार को देने के लिए कहा, सरकार ने कहा कि आजादी के बाद हमारे पास ओबीसी OBC Population का कोई Statistics नहीं है, इसलिए आरक्षण देने के लिए कोई Statistics  उपलब्ध नहीं है। तो कितना पर्सेंट आरक्षण दें? ये तय नहीं किया जा सकता,उस समय बहस मेंAddition Advocate general  ने(लाॅ मिनिस्टर मोइली जी यहां पर उपस्थित हैं ,वो इस बात को रखें) उन्होंने भरी कोर्ट में कहा कि हां,OBC का Census (जनगणना) सरकार को करना चाहिए।

अब उसके बाद 2011 में Census होने जा रहा है तो उसमें ओबीसी का Census क्यों नहीं किया जा रहा है?

अध्यक्ष महोदय! OBC का Census इसलिए कीजिए कि अभी हमारे भक्त चरणदास कह रहे थे कि Casteless Society होनी चाहिए, गुणवत्ता के आधार पर समाज में न्याय मिलना चाहिए ,आप दूसरे मनु दिख रहे हैं मुझे ( उनकी तरफ हाथ करते हुए ...... सांसद खुलकर हंसते हैं) , कहां है सोसायटी में इक्वलिटी?( सबकी तरफ देखकर सवाल पूछा) आप दलित होते हुए Scheduled caste से होते हुए  Open seat पर चुनकर आए हैं मैं आपका अभिनन्दन करता हूं , लेकिन हमारे Constitution में Sheduled caste और  Sheduled tribe को आरक्षण नहीं होता तो क्या बाकी सदस्य जीतकर आ सकते थे?( सांसदों का जोरदार सपोर्ट .... नहीं!.... नहीं!...क्या बात है .. कहते हुए)।

आप(भक्त चरणदास)की सोच सच्चाई से कोसों दूर है, और आप अकेले को न्याय मिला इसलिए सबको अन्याय में मत ढकेलिए। (संसद से जोरदार तालियां और Response मिल रहा था)।

अध्यक्ष महोदय! क्या (खुद आप Sheduled caste से हैं?) मैं पूछना चाहता हूं कि छूत अछूत भेदभाव बंद हुआ है क्या?( जोर से कुछ सांसद  नहीं हुआ है.....!  नहीं हुआ है.....! चिल्लाते हैं) क्या आज भी दलितों को मंदिर में प्रवेश है? बाबा साहेब अम्बेडकर को ही नहीं हर अम्बेडकर को मंदिर प्रवेश से नकारा जा रहा है, छोड़िए कल की बातें, परसों हरियाणा में दलितों के घर नहीं जलाए गए? (Shame.... Shame सांसदों का सपोर्ट) और एक सांसद बोले घर ही नहीं बल्कि दलितों को भी जलाया गया...। हां वही तो कह रहा हूं मैं।

अध्यक्ष महोदय! दलितों के घर जलाए दलितों को जलाया, महाराष्ट्र के खैरलांजी गांव में बहन , बेटी, मां और सारा एक दलित परिवार को नंगा करके (गुस्से में जोर से) जुलूस निकालकर जलाया गया।(विरोधियों ने बड़ा हंगामा किया चीखे चिल्लाए ....) मैं किसी सरकार को दोष नहीं दे रहा हूं बल्कि सामाजिक वास्तविकता बता रहा हूं। तालियां....!

हम हर दिन मंच से कहते हैं ,छूत अछूत सब बंद हो गया,हम सब बराबरी के हैं,यह सब कहने की बात है, हकीकत और कथनी में अंतर है। वास्तविकता अलग है। आप बिना देखे Casteless class निर्माण करना चाहते हो। मैं पूछना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान में पुनर्जन्म में विश्वास नहीं रखता हूं लेकिन अगर मुझे हिन्दुस्तान में फिर से जन्म लेना है और भगवान को मैंने अप्लीकेशन किया कि  Without caste यानी कि बिना जाति के घर में मुझे जन्म दो ! संभव है ये??( नहीं......! नहीं.......! कहकर जोरदार प्रतिसाद बेंच बजाकर सांसदों ने दिया) बिना जाति के आधार पर कौन सा ऐसा घर होगा बिना जाति के घर में ( सांसद लालू यादव जी का नाम लेते हुए कुछ सांसद कहते हैं Next time यादव के घर चलेगा और यादवजी मुंडे के घर में आयें( सांसद खुलकर हंसते हैं)।

देखिए ओबीसी कास्ट नहीं एक क्लास है, क्योंकि अब तीन क्लास बनाए गए हैं, Sheduled caste एक Class हो गया, Sheduled tribe दूसरा Class हो गया और OBC तीसरा Class हो गया। Sheduled Caste बोले तो उसमें कई जातियां आती हैं Sheduled tribe में भी कई जातियां आती हैं वो Class हो गया है और Constitution ने अधिकार दिया , मैंने या आपने नहीं।

हमारे कहने से क्या होने वाला है? Constitution ने Sheduled tribe और Sheduled caste को आरक्षण दिया,OBC को Parliament में नहीं दिया है, लेकिन काका कालेलकर कमीशन बनी और उसमें विभिन्न प्रदेशों को अधिकार दिया कि वो अपने अपने प्रदेशों में ओबीसी को अधिकार दें।

मैं कहता हूं आजादी की बात छोड़ो हमारे जमाने में मद्रास और कर्नाटक ऐसे प्रदेश हैं जिन्होंने आजादी के पहले भी एससी एसटी ओबीसी को आरक्षण दिया था, और मैं उस महाराष्ट्र से हूं जहां शाहू महाराज ने आजादी से पहले ओबीसी और एससी को आरक्षण दिया था और बाबा साहेब अम्बेडकर को Scholarship शाहू महाराज ने दी थी।

अध्यक्ष महोदय! ये Caste system कोई आपके,या कोई सत्ता के कारण यह कुछ गड़बड़ हुई है ऐसा मैं नहीं मानता लेकिन यह वास्तविकता है,जाति है जो कभी जाती नहीं। जिन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार किया जो मुगलों के जमाने में मुस्लिम हुए वो जाति को साथ लेकर वहां गए , धर्म बदला पर जाति नहीं बदली।

और जाति के आधार पर हमें जनगणना की आवश्यकता क्यों है? क्योंकि पिछड़ापन जाति से जुड़ा हुआ है और जाति पिछड़ेपन से जुड़ी हुई है,जन्म के आधार पर पिछड़ापन है,जन्म के आधार पर गरीबी है।वो पिछड़े हैं जो गांव में रहते हैं,जिनको पीने का पानी नहीं है जिनको सड़क बिजली नहीं जिनके तन पर पहनने के लिए वस्त्र भी नहीं है।ये लोग पिछड़े हैं अब 63 साल के आजादी के बाद भी आप उनको न्याय नहीं देना चाहते, जनगणना में ओबीसी की जनगणना नहीं करना  यानी ओबीसी को सोशल जस्टिस नकारना है, सरकार सोशल जस्टिस नहीं देना चाहती ।डा. बाबा साहेब अम्बेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले,शाहू महाराज नहीं होते तो ये वर्ग संगठित भी नहीं होते वो अपनी लड़ाई लड़ने की ताकत भी नहीं रखते और उन्होंने समता का विचार रखा समानता का विचार रखा ।

हमारे देश में विभिन्न जातियां होते हुए भी गड़बड़ क्यों है, अलग अलग जाति है इसका मतलब क्या है? यह बुराई है या अच्छाई है? यह सोचने का समय नहीं है। जातियां विविधता में........

अलग जाति अलग देश।

अलग भाष अलग प्रदेश।

फिर भी हमारा एक देश।  (तालियां)

इसलिए पिछड़े हुए वर्गों की देशभक्ति के बारे में आशंका जताना गलत है।

(जोर देकर बोले) किसी भी काम के लिए होते हैं हम,वो पिछड़ापन सालों से है सदियों से है उनको हम Welfare State Government में न्याय देना चाहते हैं कि नहीं देना चाहते? यह सवाल है , और काका कालेलकर के बाद मंडल आयोग आया , मंडल आयोग ने कितनी जातियां ढूंढ़ी? 3743 इतनी कास्ट हैं  कितनी कास्ट हैं ?(आश्चर्य से चौंककर बोले) उसमें उपजातियां भी हैं, अब वो कहते हैं रोटी बेटी का व्यवहार होता है, मगर नहीं होता है । होना चाहिए। अरे भाई जातियां इतनी हैं कि जय प्रकाश नारायण ने जाति तोड़ो आंदोलन किया, कई लोगों ने Intercaste Marriage किया  मैंने भी किया अब Intercaste करने वालों की अलग जाति हो गई है जाति तो नहीं गई ।(सांसद हंसते हैं) , तो जाति नहीं जाती।

तो मंडल आयोग ने कहा कि 52% ओबीसी हैं उनको 52% आरक्षण मिलना चाहिए लेकिन कोर्ट ने फैसला किया 50% आरक्षण क्यों?

Why 52% Reservation? जिन लोगों को आज तक सोशल जस्टिस नहीं मिला , सामाजिक न्याय नहीं मिला जो दूसरों के बराबरी के नहीं हैं उनको न्याय देने के लिए ही आरक्षण है । और उनको आरक्षण किस आधार पर दिया जाता है केवल जाति के ही आधार पर दिया जाता है आरक्षण, इसलिए जातिगत जनगणना आवश्यक है।....... तालियां!

अध्यक्ष महोदय! रेंडके आयोग की 2004 में अटलजी की सरकार के काल में उनकी नियुक्ति हुई थी, उन्होंने 2008 में हमारे अध्यक्ष ने  सोशल वेलफेयर मिनिस्टर जी को अपना रिपोर्ट दिया, उनमें भी ओबीसी जातियां आती हैं , उन्होंने कहा 47% ओबीसी यों को राशनकार्ड नहीं है,ऐसे कई लोग हैं जिनका मतदान लिस्ट में नाम नहीं है यह आयोग Nomadic Tribe के लिए नियुक्त किया गया था। रेंडके आयोग की जो रिपोर्ट है वो सरकार ने जारी नहीं की, मेरी मांग है कि सरकार को रेंडके आयोग की रिपोर्ट को जारी करना चाहिए और ओबीसी को न्याय देना चाहिए,उनको घर नहीं, उनको जमीन नहीं!!

अध्यक्ष महोदय! ये तीन काका कालेलकर कमीशन, मंडल कमीशन और रेंडके कमीशन इन सबका परिणाम यही है कि देश का सबसे बड़ा सवाल पूछा जा रहा है कि ओबीसी की जनसंख्या कितनी है? इसका अंदाजा किसी को नहीं है, और क्या कहा Scientific Base तैयार होगा? किसी को कहने का कोई अधिकार नहीं रहेगा कि यह Scientific Base तैयार है। और ये ओबीसी की जनसंख्या है और इस जनसंख्या के आधार पर विभिन्न प्रदेशों में आरक्षण दिया जा सकता है अब संविधान में Sheduled Caste के लिए Shedule  है। राजीव गांधी ने संविधान में संशोधन करके  पंचायत राज में शेड्यूल लाया मेरी मांग है कि Schedule Casteके लिए Schedule Tribe के लिए Schedule है Constitution में  अभी OBC के लिए भी Schedule होना चाहिए।

उसके लिए अलग मंत्रालय भी होना चाहिए। बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन उनके लिए सब जातियां बराबर हैं।

क्रीमीलेयर जारी है। एससी एसटी को क्रीमीलेयर नहीं है लेकिन ओबीसी को क्रीमीलेयर है मेरा बेटा ओबीसी की सहूलियत नहीं ले सकता, यादवजी का बेटा ओबीसी की सहूलियत नहीं ले सकता क्योंकि अभी क्रीम निकालो , निकालने के लिए क्रीम बचा ही कहां है? क्रीमीलेयर लगाया है जिसके कारण उनकी सहूलियतें उनको मिलती नहीं , एक ही बात कहना चाहता हूं अध्यक्ष महोदय अभी आपने जो तथ्य बताए इन्होंने ओबीसी का तथ्य बताया। एससी को 13% आरक्षण है एसटी को 9% है कुछ राज्यों में 7% आरक्षण है इतने लोग सर्विस में हैं क्या? जैसे सच्चर आयोग से आपने मुसलमानों की स्थिति का जायजा लिया मैं मांग करता हूं कि एससी एसटी और ओबीसी के आरक्षण उनको 63 वर्षों में मिले क्या ? नहीं मिले।13% में से केवल 4% मिला, ओबीसी को तो केवल 2.4% ही मिला है, आरक्षण 27% है लेकिन मिला कितना है? कागजों पर केवल फैसले करने से उनको न्याय नहीं मिला है जब उनका अधिकार उनको मिलेगा तब न्याय मिला ऐसा कहा जायेगा और वह न्याय आज तक नहीं मिला है। इसलिए यह लड़ाई है सोशल जस्टिस की, जनगणना में केवल नाम लिखना इतना ही नहीं है। जाति बचाने से ढकने वाली नहीं है, हमारे संघर्ष भी हो रहे हैं। अब अमीरों और गरीबों में भी अंतर बढ़ता गया है। चरणदास जी मैं आपसे पूछना चाहता हूं 63 साल में सबको बराबरी का दर्जा होता, सबको बराबरी का अवसर होता तो ओबीसी भी आरक्षण नहीं मांगते ( आवाज बढ़ाकर सांसद बोले क्या बात है.....क्या बात है सांसदों का प्रतिसाद)।

लेकिन क्यों वो पिछड़े ज्यादा पिछड़े हुए हैं? उनको किसी Education में नहीं, Politics में नहीं हर स्तर पर वे पिछड़े रहेंगे।54% population अगर विकास से, सुविधा से,प्रगति से दूर रहेगी तो देश कैसे आगे बढ़ेगा? मुझे लगता है कि ओबीसी को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लेकर उनको आरक्षण सुविधा और जनगणना करना ही चाहिए!(बेंच बजते हैं...... तालियां बजती हैं)।

OBC की जनगणना की मांग हम इसलिए कर रहे हैं कि ये अवसर है सरकार को भी और आपको भी,ये मौका खोना नहीं चाहिए। स्वामीजी! मोइली जी! ऐसे मंत्रिमंडल में तुम्हारी बात नहीं सुनते हैं तो क्यों बैठे हो ऐसे मंत्रिमंडल में? (सांसद जोर से हंसते हैं तालियां बजाकर) होने दो ओबीसी के लिए एक लड़ाई! लोग सर पर उठायेंगे आपको।

तो अध्यक्ष महोदय! ये मामला जनसंख्या का है 80 साल ओबीसी की जनगणना नहीं हुई। एक कालम भरना है बस्स, Sheduled Caste, Shedule Tribe और OBC का एक और कालम ।OBC लिखकर उसमें अपनी Caste लिखेगा। उसमें नुकसान क्या है? और क्या नुकसान है सरकार का भी?

सारे ओबीसी संगठन देश में मांग कर रहे हैं कि उनकी जनसंख्या का Census होना चाहिए,यह मांग उठा रही हैं, सरकार क्या गूंगी है? क्या उसके कानों पर ओबीसी की आवाज नहीं जा रही है? ओबीसी आवाज उठा रहे हैं,आज मैं कहना चाहता हूं सरकार को...... आज मंत्री महोदय जबाब देंगे, तो उनको यहां घोषणा करनी चाहिए कि ओबीसी की अलग जनगणना होगी।(आवाज उठाकर जोरदार तालियां)

अगर आप नहीं करेंगे तो OBC,SC,ST यानी 75% Population का गुस्सा आप पर होगा। आज एक समय सरकार आपकी है, सरकार किसी भी हो, सरकार को होता है समाज को न्याय देना, तो न्याय देने काम आप करें ।एक Constitutional Responsibility आप पर आई है और वो Constitutional Responsibility है। जिस Constitution में पिछड़े हुए वर्गों को न्याय देने की भूमिका डा. बाबा साहेब अम्बेडकर ने लिखी है,उस बाबा साहेब का सपना और भारत के सभी गरीब लोगों की आशा, आकांक्षा है कि लोकतंत्र में हमें न्याय मिलेगा इस विश्वास के साथ 63 साल वो जीते आए हैं,वो विश्वास कभी न कभी पूरा करो।

ज्यादा मांग नहीं है केवल हमारी जनगणना करो।हम इस देश के नागरिक हैं हमारी भी गिनती करो! तो एक बार ये गिनती करो!

*जय हिन्द! जय भारत 

Important points of Board classes in rajasthan board ajmer महतवपूर्ण बिन्दु बोर्ड कक्षाओं के लिए

विद्यार्थी जीवन एक स्वर्ण जीवन !


     विद्यार्थी के पांच लक्षण
काग चेष्ठा, वगो ध्यानम,श्वान निंद्रा
अल्पाहारी यथेचु गृह त्यागी।


इल्म नूर है, जहालत अंधेरा है ,
इल्म ज़िंदगी के लिए
 जिन्दगी वतन के लिए।


शिक्षा एक शेरनी का दूध है ,
जो जितना पियेगा,
वो उतना ही दहाड़ेगा 

प्रिय छात्रों!


जी हां प्रिय छात्रों! आज का युग शिक्षा का है ,जिसमें हर बच्चा पढ़ना चाहता है और मेहनत करके कामयाब होना चाहता है ,उनके मां बाप का एक सपना होता है की हमारा बच्चा शिक्षा में कामयाबी हासिल करे, अध्यापक , डॉक्टर, पुलिस वकील या बड़ा ऑफिसर बने लेकिन कुछ सही रणनीति नही बनाने की वजह से वो अपना मुकाम हासिल नहीं कर पाता है ,इसी वजह से अक्सर विद्यार्थी परीक्षा में अपने उद्देश्य में कामयाब नही हो पाते है । या तो वो परीक्षा में फेल हो जाते है या अपेक्षाओं के अनुरूप प्रतिशत नही बना पाते है सबसे ज्यादा बच्चा तनाव महसूस करने लगता है और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है । इस तनाव से बचना चाहिए।    जिंदगी आप के लिए एक बहुत ही  महत्वपूर्ण है,कभी तनाव न ले ,जीवन में मस्त होकर जिए।कभी कोई आपका काम सही समय पर नही होता है या आप फेल हो जाते है तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि वो आप की किस्मत में कुदरत ने लिखा ही नहीं था जो आप फालतू को टेंशन ले रहे हो ।आप अपना पूरा भरोसा अल्लाह पर रखते हुए अपने लक्ष्य पर मेहनत करते रहे ,कामयाबी देने वाली जात अल्लाह की है ।
✍🏻 *पढाई करते समय ध्यान देने योग्य बातें* 📚 

1. पढाई हमेशा कुर्सी टेबल पर बैठकर ही करें, बिस्तर पर लेटकर बिलकुल भी न पढ़े । लेटकर पढ़ने से पढ़ा हुआ दिमाग में बिलकुल नही जाता बल्कि नींद आने लगती है ।

2. पढ़ते समय टेलीविजन न चलाये और रेडियो   या गाने भी बंद रखे*

3. पढाई के समय मोबाइल स्विच ऑफ़ कर दे या साईलेंट मोड में रखे ।*

4. पढ़े हुए पाठ्य को लिखते भी जाये, इससे आपकी एकाग्रता भी बनी रहेगी और भविष्य के लिए नोट्स भी बन जायेंगे ।

5. कोई भी पाठ्य कम से कम तीन बार जरूर पढ़े।

6. रटने की प्रवृत्ति से बचे जो भी पढ़े उस पर विचार मंथन जरूर करें ।

7. शॉर्ट नोट्स जरूर बनाये ताकि वे परीक्षा के समय काम आये ।

8. पढ़े हुए पाठ्य पर विचार विमर्श अपने मित्रो से जरूर करें, ग्रुप डिस्कशन पढ़ाई में लाभदायक होता है।*

9. पुराने प्रश्न पत्रों के आधार पर महत्वपूर्ण टॉपिक को छांट ले और उन्हें अच्छे से तैयार करें ।

10. संतुलित भोजन करें क्योंकि ज्यादा भोजन से नींद और आलस्य आता है, जबकि कम भोजन से पढ़ने में मन नहीं लगता है और थकावट, सिरदर्द आदि समस्याएं होती है ।

11. चित्रों, मानचित्रो, ग्राफ, रेखाचित्रो आदि की मदद से पढ़े । ये अधिक समय तक याद रहते है ।

12. पढाई में कंप्यूटर या इन्टरनेट की मदद ले सकते हैं।

रख हौंसला वो मंजर भी आएगा ,
प्यासे के पास चल कर समंदर भी आएगा,
ए मंजिल के मुसाफिर ,मंजिल भी मिलेगी ,
मंज़िल मिलने का मज़ा भी आएगा ।।



 परीक्षा से पूर्व तैयारी करने के महत्त्वपूर्ण बिंदु 
1.परीक्षा से पूर्व दिनों में नींद बराबर रूप से लेते रहे ।
2. ज्यादा तनाव और दबाव महसूस न करें।
3. जितना पाठ्यक्रम हो चुका है उसका वापस दोहरान करे।,घबराने की आवश्यकता नहीं है ।
4.आप के लिखे हुए नोट्स का वापस रिवीजन करें ।
5.समय समय पर कक्षा टेस्ट देते रहे और समय के अनुरूप प्रश्न पत्र को हल करें।
6. पिछले वर्ष के चार साल के प्रश्न पत्रों को अच्छी तरह से पढ़ ले और चेक भी कर लें की प्रश्न कहां से और केसे आते है इससे आप को अनुभव हो जायेगा ।
7.परीक्षा से पूर्व आरबीएसई बोर्ड द्वारा जो मॉडल पेपर निकाले जाते है है उनको हल अवश्य करें।
8.आप दिन में 8 से 10 घंटे नियमित रूप से अध्ययन करे।
9.परीक्षा के दिनों में आप की नींद 8 घण्टे अनिवार्य है ।
10.परीक्षा के दिनों में चिंता ,अवसाद,दबाव, घबराहट और नकारात्मक प्रवृति से दूर रहे ।
11.रोजाना एक घंटा अपना खेलने में बिताए।
12. रोजाना सुबह शाम मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक और हल्की कसरत जरूर करें ताकि आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे ।
13. सतुलित और उचित आहार ग्रहण करे, ज्यादा मात्रा में न खाएं की पढ़ने की बजाए नींद का ज्यादा गलबा आ जाए।

खुद ही को कर इतना बुलंद की हर तकदीर से पहले,खुदा खुद बंदे से पूछे कि बता तेरी रज़ा क्या है ?


परीक्षा हॉल में ध्यान रखने योग्य बातें!

1. सबसे पहले अपने रोल नंबर देख कर ही अपनी सीट पर बैठे ।
2.आपके पास अच्छे से चलने वाले दो कलम होने चाहिए।
3.आप के पास ज्योमेट्री बॉक्स और स्केल वगैरा सभी साधन होने चाहिए।
4.आपको परीक्षा में बुकलेट कॉपी (answer sheet) दी जाती है उस पर आप को फोरमेल्टी पूरी करनी होती है ।
आपको रोल नंबर अंको और शब्दो में लिखना चाहिए , दिनाक और वार , विषय,जिस विषय की परीक्षा हो , स्कूल का नाम , वार्षिक परीक्षा और सत्र ये लिखने अनिवार्य है ।
5 .पेपर से कॉपी आप को 15 मिनट पहले  दी जाती है ,ताकि आप अपनी औपचारिकता को  आराम से पूरी करे।
6.आप की परीक्षा का समय 3 घण्टे और 15 मिनट का समय होता है ।
7.आप का प्रश्न पत्र 80 नम्बर का होता है।
8.आप का प्रश्न पत्र चार खंडों में विभाजित होता है । खंड  अ, ब, स,और द।
9.सभी प्रश्न करने अनिवार्य है ।
10.जो प्रश्न आप को अच्छे से याद है ,उनको पहले ही हल करे,ताकि आप का समय बच सके।
11. प्रश्न पत्र को सबसे पहले अच्छी तरह पढ़ ले,जो प्रश्न समझ में नहीं आ रहा है उसको दो या तीन बार जरूर पढ़ें।
13.सभी प्रसनों को उसी  खण्ड में  उत्तर दे जिस खंड का वो प्रश्न है ।
14.आप की कॉपी में Quetion या प्रश्न लिखने की कोई जरूरत नहीं है आप जो प्रश्न कर रहे हो उस का नम्बर लगाकर ही सीधा उत्तर लिखे ।
15.आपकी लिखावट का बहुत फर्क पड़ता है ।
आपकी जैसी लेखन शैली है कोई बात नही लेकिन आप लिखते समय आप कॉपी की एक लाइन में आठ से दस शब्द ही लिखे । शब्द साफ सुथरे लिखे , मात्रा या बिंदु की गलती नही करे। 
आप की लेखन शैली examinner को प्रभावित करती है और आप को अच्छे से नंबर दे देता है । क्यों की उसके पास बहुत सारे कॉपियों के बंडल चेक करने होते है । जिस कॉपी को चेक करने में कम समय लगता है उसको नंबर ज्यादा देता है ।
16. कॉपी में ज्यादा खाली जगह न छोड़ें।
17.आप की कॉपी में ज्यादा कांट छांट भी न करे
18.जो बड़े प्रश्न है या अथवा वाले है उनमें से को अच्छे से याद हो कोई एक ही करे ,दोनो प्रश्न गलती से कर भी लिए नंबर नही मिलेगा ।
19.जो प्रश्न निंब्धात्मक है उन्हें प्वाइंट या बिंदु बनाकर उत्तर लिखे।
20.आप की कॉपी में रफ कार्य का अंतिम पृष्ठ होता है ,जो की गणित या विज्ञान में जरूरत पड़ती है ।
21.आप चित्र वगैरा पेंसिल से बनाएं, 🖋️ कलम से नही ।
22. प्रश्न पत्र पूरा हल करने के बाद आप के शेष खाली रहे पर्ष्ठों को कलम से क्रोस कर दे।
23. प्रश्न पत्र पूरा करने के बाद कार्य समाप्त लिख दे ताकि ये समझा जाए की आप के द्वारा किया गया कार्य पूर्ण हो गया ।
24. प्रश्न के उत्तर लिखने के बाद आप अगला Q.   एक लाइन खाली छोड़ कर ही लिखे ।
25.प्रत्येक प्रश्न का उत्तर शब्द सीमा के अंदर ही देने का प्रयास करें।
25.आपको सप्लीमेंट्री या अतिरिक्त कॉपी नही मिलेगी । पहले से आप के पास कॉपी होगी वो आप के लिए पर्याप्त होगी ।
26. प्रश्न पत्र का स्तर सरल से कठिन की ओर होगा ।
26.सभी प्रश्नों के अंक सामने दिए होंगे ।
27.आप परीक्षा के दौरान सोचालय जाते है तो आप के रोल नंबर लिखे जायेंगे ।
28.आप अगर कलम बदलते है तो आप के रोल नम्बर लिखवाने पड़ते है ।


धन्यवाद! में  उम्मीद करता हु की ये परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बिंदु अच्छे से समझ में आ गए होंगे।आप इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अमल जरूर करेंगे।

मंज़िल से आगे बढ़,मंजिल तलाश कर ,
दरिया तुझे मिले तो समंदर तलाश कर ।।

 जय हिंद धन्यवाद दोस्तों! 
आप का दोस्त ,लेखक,अध्यापक , मुराद खान जयसिधर, बाड़मेर।।
@7023347607









                
      
                  

       

जेल भरो आंदोलन by मौलाना तौकीर रज़ा खां साहब

      जैल भरो आन्दोलन अभियान !

जैल भरो आंदोलन से सरकार पर कितना असर!

अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश राज्य के जिले बरेली से सय्यद तौकीर रज़ा खां साहब ने जेल भरो आंदोलन अभियान की शुरुआत की थी जिसका मकसद था, हमारे मुल्क हिंदुस्तान के खराब होते हालत को देख कर बहुत ही आहत हुए हालांकि इस वक्त मैं हर कोई समुदाय चाहे वो मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम समुदाय के लोग हो  जितनी भी मुस्लिम तंजीमे चाहे जमीयत उलमा ए हिंद हो , मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हो या कोई और मुस्लिम तंजीम है ,जो सेकुलर दिमाग रखता हो वो हर कोई परेशान है । आज के मौजूदा दौर में जो सरकार सत्ता में है मुसलमानो के खिलाफ नए नए मुद्दे बना कर पेश करती है और मुसलमानो को आजमाती है की मुसलमान हमारी विचार धारा को किस हद तक मानता है ।
सरकार मुसलमानो के विरोध में ही कानून क्यों ला रही है ?और समुदाय के विरोध में कानून क्यों नही ला रही है ? बीजेपी सरकार का क्या उद्देश्य है ?
मौलाना तौकीर रज़ा साहब ने जो जेल भरो आंदोलन जुम्मे के दिन जो आंदोलन किया इससे उनके साथ हजारों अनुयायी बाढ़ की तरह गली मोहल्लों में बवंडर की तरह गूंज से भर गई जिसे यूपी सरकार ने पुलिस फ़ोर्स को लगा कर जेल जाने से हजारों लोगों को रोकने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी । 
तौकीर रज़ा साहब के अहम मुद्दे ?
उनका कहना था की जिस तरह सरकार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ व्यवहार कर रही है वह बहुत खतरनाक है , मौलाना ने ये भी कहां की हम मुसलमान इस सरकार के फैसलों में खामोश रहे इसलिए सरकार हमारे खिलाफ नए नए कानून और बिल ला रही है । ये सरकार मुसलमानो के खिलाफ शरीयत में छेड़ छाड़ कर रही है जो मुसलमानो को यकीनन कबूल नहीं है ।
1.सरकार मस्जिदों को तोड़ कर मंदिर में परिवर्तन कर रही है । देश की अदालतें सरकार के दबाव में आकर आस्था के आधार पर फैसले दे रही है ,जो हमे कत्तई मंजूर नहीं है ।
बाबरी मस्ज़िद का फैसला आया हम ने उस फैसले को माना मगर वो फैसला टाइटल शूट के आधार पर नही था बल्कि आस्था के आधार पर दिया ,उसमे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने ये स्वीकार किया की मस्जिद मंदिर तोड़कर नही बनाई गई है बल्कि बहुमत को आस्था के आधार पर फैसला दिया मुसलमान अमन पसंद खामोश रहा ,लेकिन बाबरी मस्जिद के फैसले पर चुप रहने से हमारे खिलाफ आए दिन आस्था के आधार पर फैसले लागू हो रहे है जो को सरकार जुल्म व जब्बर कर रही है ।
2.मुफ्ती सलमान अजहरी जो इस्लामिक स्कॉलर है उसको एक शायरी बोलने से गिरफ्तार कर दिया, जिससे सरकार आए दिन इससे पूर्व भी मुस्लिम उलेमाओं को गिरफ्तार कर चुकी है ,जो को हमारे लिए चिंता का विषय है ।
कई उलेमा आज भी जेलो में बंद है जिनके लिए जमीयत उलमा ए हिंद पुरजोर तरीके से अदालत में केस लड़ रही है और कई उलेमाओं को आजाद भी करवाया है ,चाहे वो किसी भी फिरके के आलिम हो ।
3. उनका तीसरा मुद्दा था , गैर कानूनी तौर से मदरसो और उनके घरों पर बुलडोजर चलाना ये संविधान के खिलाफ है । उनका कहना था की जिस व्यक्ति ने जुर्म किया है उसको सजा देने का काम अदालत का है न की सरकार का है उस अकेले व्यक्ति की सजा पूरे परिवार के लोगों की सामूहिक संपत्ति पर बुलडोजर चलाकर धवस्त कर देना ये कोनसा कानून है ।
4. उनका कहना है को सरकार मुस्लामनों के खिलाफ तरह तरह के कानून ला रही ,सरकार ये सोच के ला रही है की मुस्लिम लोग खामोश है । ये खामोशी कल सरकार के लिए  शायद भारी पड़ जायेगी जिससे इस देश को किसी प्रकार का नुकसान न झेलना पड़ा ,ये सोच कर अमन पसंद लोग खामोश बैठे है ।












What is this Uniform civil code in India ?









1.What is this Uniform civil code in India ?

जी हां दोस्तों सलाम व आदाब जैसा कि आपको मालूम है कि हमारे मुल्क में कई तरह के मुद्दे आए दिन चलते रहते है अभी हाल फिलहाल भारत के अंदर उत्तराखंड राज्य के अंदर वहां की भाजपा सरकार ने UCC को लागू किया है । यूनिफॉर्म सिविल कोड  क्या है ? UCC क्या है? और सरकार लागू क्यों करना चाहती है ?सरकार का क्या उद्देश्य है? और UCC का इतिहास कब का है ? UCC लागू करने के क्या फायदे हैं ? और क्या नुकसान है ? इन तमाम सवालों के एक-एक सवाल  का जवाब बारीकी से मैं आपको बताने जा रहा हूं। आप मेरे इस लेख को जरूर पढ़िए ताकि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से मजीद जानकारी मिलती रहेगी।


UCC क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड ( समान नागरिक संहिता)  है । देश में सभी समुदायों और धर्मों को जीवन में समानता लाने की वकालत करता है ।
ये कानून सभी धर्मो और समुदायों के एक समान कानून की बात करता है जो की भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में इसका उल्लेख है ।

UCC का इतिहास !
UCC का इतिहास आज से तकरीबन सो साल पहले का है ,जो भारत में अंग्रजों ने शुरुआत की थी । 19 वी शताब्दी में अंग्रेजो ने शासकों के अपराध ,अनुबंध,और शबुतो के बारे में में। भारतीय कानून संहिता का उल्लेख किए जाने का प्रावधान है ।
 हालांकी अंग्रेजी हुकूमत ने इस कानून से मुस्लामनो और हिंदुओ को अलग रखा था। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानून से बाहर रखा था ।
क्योंकि ईसाई समुदाय एकेश्वर में। विश्वास करते थे और उन्हें भारत के अंदर हिंदू और मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक रीति रिवाज को समझना चाह रहे थे लेकिन अंग्रेजो का मुख्य उद्देश्य भारत में पैसा लूटना और व्यापार करना था न को किसी विवाद में पड़ना ।

बीजेपी सरकार UCC को  क्यों लागू करना चाहती है ? 
बीजेपी सरकार का ये एक अहम मुद्दा है की देश के अंदर UCC लागू करके सभी धर्मो और समुदायों के पारिवारिक कानूनों को एक समान रूप से  लागू करना ताकि एक देश में एक ही तरह का कानून हो और सभी नागरिकों किसी प्रकार की उलझन नही हो ,ये इनका एक लीगल बिंदु है ।
हिंदुस्तान के अंदर विश्व के लगभग सभी धर्म निवास करते है इसलिए ज़ाहिर सी बात है की सभी धर्मो के रीति रिवाज और पारिवारिक कानून और जीवन गुजारने के अलग अलग तरीके उनके अपने धर्म के अनुसार है ।
शायद ये बात बीजेपी सरकार को हज़म नहीं होती है की इस तरह भारत में सभी समुदायों को निशाना बनाकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जाए जिसे  कुछ नया परिवर्तन हो जाए ।

UCC लागू करने का उद्देश्य!
UCC की बात अंग्रेजी हुकूमत के बाद आजाद भारत में बीजेपी हुकूमत ने ही की है क्योंकि इनका मुख्य उद्देश्य जो इनकी भावना से जुड़ा हुआ ये है की इस मुल्क को आज़ाद करवाने के बाद  सभी धर्म एक साथ भाई चारे के साथ केसे रह रहे है ? बीजेपी और आरएसएस को इसी बात से दर्द है ।
बीजेपी के मेनिफेस्टो में ये बात प्रमुख रूप से उल्लेखित है ,इस बात की प्रमुख दलील है की बीजेपी के बड़े बड़े नेता पब्लिक मीटिंग में कई बार ज़िक्र कर चुके है,की देश के अंदर UCC लागू हो कर ही रहेगा । 
यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का एक और उद्देश्य ये है की इस्लाम मज़हब को मानने वाले मुस्लमानो को निशाना बनाया जाए ताकि देश को कमजोर करके हम लोग इस मुल्क पर शासन करें । हिंदुस्तान के अंदर इस्लाम और मुसलमानो को निशाना बनाने के लिए आज ये पहला कानून नहीं लाई है बल्कि इसके अलावा बहुत सारे क्वानीन हमारे सामने आ चुके है और भी आयेंगे शायद। तीन तलाक, सी ए का कानून, लव जिहाद, UCC, एनआरसी, एनपीआर, घर वापसी  ऐसे बहुत सारे कानून जो बीजेपी ने  देश में लागू कर दिए है न जाने देश में और कौन कौन से कानून लाना चाहती है ।
ऐसे कानून लाने से साफ जाहिर होता है की बीजेपी और आरएसएस मुस्लमानों के सख्त खिलाफ है ,तरह तरह के उनके खिलाफ हथकंडे अपना रहे हैं जिसे मुसलमान कमजोर हो जाए और हमारे दबाव में रह कर हमारी गुलामी करे ये उनका असली मकसद है! लेकिन ऐसी उम्मीद है इंशा अल्लाह ऐसा हो नही पाएगा वो अपने मंसूबों में कामयाब नही होगी ।


UCC संविधान के खिलाफ़!
बीजेपी की सरकार ने  आज उत्तराखंड में UCC को लागू कर दिया है जिससे वहां की आवाम ने इस कानून का सख्त विरोध भी किया ,वही प्रदेश की बीजेपी की सरकार ने बहमत के जरिए कानून पास भी करा लिया। वहां की सरकार ने एससी और एसटी ( अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति ) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा है,इससे साफ जाहिर होता है की हुकूमत मुसलमानो के खिलाफ है ।
UCC कानून संविधान के खिलाफ इसलिए है की  देश के अंदर रहने वाले सभी नागरिकों को अनुच्छेद 25,26,29,30 नागरिकों के समानता और धर्म के अनुच्छेद का उल्लघंन करता है ।
दूसरा पहलू ये है की जब प्रदेश की सरकार ने अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति को इस कानून के दायरे से बाहर कर दिया है ,तो मुसलमानो को इस कानून से बाहर क्यों नही कर सकते ये बिलकुल मुसलमानो के साथ धोखा है ।

UCC लागू करने का वैध तरीका क्या है ?
UCC लागू तभी हो सकता है जब एक संप्रदाय के लोग समान विचार धारा वाले लोग हो उनके अंदर अलग अलग कानून हो इसीलिए भारत के अंदर UCC सभी धर्मो के लोगो के लिए ठीक नहीं है । हालांकि UCC कानून सबसे ज्यादा प्रभावित इस्लाम धर्म को कर रहा है  इसीलिए मुस्लिम समुदाय ही इस कानून का विरोध कर रहा है ,क्योंकि बाकी सिख, हिंदू ,जैन और बौद्ध अन्य धर्म के पारिवारिक कानून सभी के मिलते जुलते है इसलिए ओर कोई भी समुदाय मुखर कर सरकार के सामने नहीं आ रहे है । 

UCC के महत्वपूर्ण बिंदु जिन्हे सरकार लागू करने जा रही है 
1. लड़कियों की शादी की उम्र अधिक करने पर विचार, ताकी लड़की ग्रेजुएट बन सके 

2.ग्राम पंचायत स्तर पर शादी का रजिस्टर बनेगा ,पंजीकरण करवाना अनिवार्य है अन्यथा सरकारी सुविधाएं मिलनी बंद हो जाएगी।

3.तलाक का मामला पति पत्नी समान रूप से अब तलाक दे सकेंगे ।

4. बहु विवाह पर प्रतिबंध

5.उतराधिकार में लड़के और लड़कियों का समान अधिकार ।

6.नोकरी पैसा, बेटे की मौत पर पत्नी को मिलने वाले मुआवजे में माता पिता के भरण पोषण की जिम्मेदारी ।

7.पत्नी की मौत के बाद उसके अकेले माता पिता का बनेगा पति ।

8. गोद लेना , मुस्लिम महिलाए जिनके संतान नहीं हैं तो अब वह अपने परिवार के बचे और बच्ची को गोद ले सकती है ।

9. हलाला और इद्दत पर रोक 

10. लिव इन रिलेशन शिप पर सरकार को कानूनी सूचना देना अनिवार्य है ।

11. अनाथ बच्चों की परवरिश करने का अधिकार 

12. पति पत्नी का झगडा होने पर बचे दादा दादी या नाना नानी के पास उनके सरंक्षण में रहेंगे ।

13. जनसंख्या नियंत्रण पर रोक ।

इन 13 बिंदुओ पर सरकार UCC लागू करने जा रही है,इससे इस्लाम कितना प्रभावित होगा आप लोग इस लेख को पढ़ कर कॉमेंट करके जरूर बताएं।


बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
लेख को पढ़ कर शेयर और टिप्पणी जरूर करे ,साथ ही पेज को फॉलो जरूर करे।


लेखक मुराद खान जयसिंधर,बाड़मेर 
7023347607






















One steps for success

एक कदम सफ़लता की ओर!


✍️ *रातों रात सफलता पाने के लिए सालों साल कड़ी मेहनत करनी पड़ती हैं, तब ही आप अपने मां बाप की फिक्र को फक्र में बदल सकते हो।* 📚


✍️ *तुम्हें अपनी मेहनत से सूरज भी उगाना होगा, महज जागने भर से सवेरा नहीं होगा।* 📚


✍️ *गौर कीजिए आपने आज तक क्या किया जब आप अपने घर से बाहर निकले थे तो आप की आंखों में कुछ ख्वाब थे। आपके होठों पर कुछ जज्बात थे। आपके चेहरे पर एक चमक थी और आपके कर्मों में एक तूफान था। आखिर क्यों आप थम सा गए हैं। आपकी सिद्दत कहां गई। आपका जुनून कहां गया। ऐसा तो नहीं कि आप जिंदा लाश बन गए हैं। जनाब याद रखिए दुनिया उन्हीं को याद रखती है जो याद रखने जैसा कुछ कर जाते हैं।* 📚


✍️ *कल का तो मुझे पता नहीं पर आपसे इतना जरूर कहूंगा कि आप इस कदर मेहनत करो की खुद को सुकून मिले। इतिहास गवाह है इतिहास उन्हीं का लिखा जाता है जो संघर्षों से गुजरते हुए खुद को खुद के लिए खड़ा कर लेते हैं आपके अंदर। दम है, ताकत है, शिद्दत है, जुनून है, जज्बा है, जज्बात है, ख्वाब है, ख्यालात है। याद रखिए आप इंसान हैं जो लड़ सकता है, गिर के उठ सकता है जो हार के भी जीत सकता है और जीत के भी हार सकता है। इसके लिए चंद लाइने है।*।   👇🏻👇🏻👇🏻📚


✍️ *हौंसले हो बुलंद तो हर मुश्किल को आसां बना देंगे। छोटी टहनियों की क्या बिसात, हम बरगद को ही हिला देंगे। वो और हैं जो बैठ जाते हैं थक कर मंजिल से पहले, हम बुलंद हौंसलों के दम पर ✍🏻 *पढाई करते समय ध्यान देने योग्य बातें* 📚 

पढ़ाई के तरीक़े 


*1. पढाई हमेशा कुर्सी टेबल पर बैठकर ही करें, बिस्तर पर लेटकर बिलकुल भी न पढ़े । लेटकर पढ़ने से पढ़ा हुआ दिमाग में बिलकुल नही जाता बल्कि नींद आने लगती है ।*


*2. पढ़ते समय टेलीविजन न चलाये और रेडियो या गाने भी बंद रखे*


*3. पढाई के समय मोबाइल स्विच ऑफ़ कर दे या साईलेंट मोड में रखे ।*


*4. पढ़े हुए पाठ्य को लिखते भी जाये, इससे आपकी एकाग्रता भी बनी रहेगी और भविष्य के लिए नोट्स भी बन जायेंगे ।*


*5. कोई भी पाठ्य कम से कम तीन बार जरूर पढ़े।*


*6. रटने की प्रवृत्ति से बचे जो भी पढ़े उस पर विचार मंथन जरूर करें ।*


*7. शॉर्ट नोट्स जरूर बनाये ताकि वे परीक्षा के समय काम आये ।*


*8. पढ़े हुए पाठ्य पर विचार विमर्श अपने मित्रो से जरूर करें, ग्रुप डिस्कशन पढ़ाई में लाभदायक होता है।*


*9. पुराने प्रश्न पत्रों के आधार पर महत्वपूर्ण टॉपिक को छांट ले और उन्हें अच्छे से तैयार करें ।*


*10. संतुलित भोजन करें क्योंकि ज्यादा भोजन से नींद और आलस्य आता है, जबकि कम भोजन से पढ़ने में मन नहीं लगता है और थकावट, सिरदर्द आदि समस्याएं होती है ।*


*11. चित्रों, मानचित्रो, ग्राफ, रेखाचित्रो आदि की मदद से पढ़े । ये अधिक समय तक याद रहते है ।*


*12. पढाई में कंप्यूटर या इन्टरनेट की मदद ले सक


           ✍🏻 Board 𝗘𝘅𝗮𝗺 𝗔𝗹𝗲𝗿𝘁* 📚आसमां को ही झुका देंगे। हम कैसे हार मान सकते हैं अपनी मंजिल, अपने ख्वाबों से पहले, कैसे भाग सकते हैं, अपनी जिम्मेदारियों से किसी के भी प्रति। बहुत लोगों की उम्मीद की किरण हैं हम। चाहे वो हमारे माता-पिता हो, चाहे हो भाई बहन, चाहे हो रिश्तेदार कोई, चाहे हो हमारा अपना समाज (Society), चाहे हो शहर अपना, तो दोस्तो पूरी ताकत से जुट जाइए और अब बस तभी रुकना हैं, जब सफलता हमारे कदमों में हो। ऐसी कोई चीज नहीं है, जो हम मेहनत, लगन व आत्मविश्वास से नहीं पा सकते। खुद पर भरोसा कर इंसान अपनी किस्मत खुद बना सकता है।


          [06/01, 3:22 pm] +91 95889 86809: ✍🏻 *सफलता का मूल मंत्र* 📚


*अगर आपका एक टॉपिक नोट्स से खत्म हो गया है तो उस टॉपिक को प्रैक्टिस सेट और एग्जाम रिव्यु मतलब पिछले सालों के जितने भी एग्जाम हुए है उनके प्रश्नोत्तर को भी पढ़ लेना चाहिए, हर सब्जेक्ट के हर टॉपिक को प्रैक्टिस सेट और एग्जाम रिव्यु से पढ़ लेना चाहिए ताकि आपको वह टॉपिक पूरी तरह से याद हो जाए*


*हमारे सबसे बड़ी कमी यही है कि हम नोट्स को पढ़कर एग्जाम देने चले जाते हैं, ज्यादातर प्रश्नों के उत्तर नही आने पर उस पेपर को देखकर हमको यही लगता है कि पेपर बहुत हार्ड आया है लेकिन रिजल्ट आने पर मेरिट हाई देख कर फिर हमारे मन में यही ख्याल आता है कि पेपर आउट हुआ होगा तभी मेरिट इतनी हाई गई होगी जबकि ऐसा कुछ नही होता है, हां कुछ रैर केस में ऐसा हो सकता है, मेरिट हाई जाने का आजकल एक ही कारण है लोग नोट्स के साथ-साथ प्रैक्टिस सेट और एग्जाम रिव्यु भी पढ़ते हैं, आज के टाइम में बहुत ज्यादा कंपटीशन है इसलिए आपको भी नोट्स के साथ-साथ एग्जाम रिव्यु और प्रैक्टिस सेट मिलाना चाहिए*


*हर सब्जेक्ट को ज्यादा से ज्यादा 3 घंटे दो ( अगर आपकी भर्ती में कम सब्जेक्ट है तो फिर हर सब्जेक्ट को आप ज्यादा टाइम दे सकते हो ) क्योंकि एक ही सब्जेक्ट को हम पढ़ते है तो फिर बोरिंग-सा फील होता है और फिर हम ज्यादा टाइम तक नहीं पढ़ पाते है इसलिए आपको बोरिंग फील नहीं हो उसके लिए सब्जेक्ट को चेंज कर-कर के पढ़ना चाहिए और यदि आपको लगता है, आपका कोई सब्जेक्ट कमजोर है तो फिर उस सब्जेक्ट को आप ज्यादा टाइम दे सकते है और अगर आपको लगता है कि आपका कोई सब्जेक्ट पहले से अच्छा/मजबूत है तो उस सब्जेक्ट को आप कम टाइम दे*


*डेली/हमेशा का एक रूटीन बनाओ कि मुझे इतने घंटे पढ़ना है तो पढ़ना ही है फिर है अगले दिन उस रूटीन में थोड़ा ओर टाइम ऐड करते जाओ जैसे कल आपने 7 घंटे पढ़ाई की है तो आपको आज कैसे भी कर के 7:30 घंटे पढ़ाई करनी है ऐसे कर के हमेशा पढ़ाई के रूटीन मे टाइम ऐड करते जाओ वो सब आपके ऊपर है फिर एक टाइम ऐसा आयेगा कि आप हमेशा 14 से 15 घंटे हर दिन पढ़ सकोगे क्योंकि अब आपकी पढ़ाई करने की सिटिंग पावर अच्छी हो चुकी है और हर 3 से 4 घंटे बाद या फिर आपको जैसा लगता है कि मुझे इतने घंटे के बाद ब्रेक लेना चाहिए तो ले सकते है क्योंकि हम लगातार ज्यादा टाइम तक पढ़ाई नही कर सकते है ( ज्यादा से ज्यादा 3 से 4 घंटे बाद 10 या 12 मिनट का ब्रेक ले-ले )*


*पढ़ाई करने का सबसे अच्छा टाइम सुबह जल्दी उठकर और रात में देर तक पढ़ना है क्योंकि उस वक्त कोई डिस्टर्बेंस नही होता है, दोपहर के वक्त आप 2 घंटे सोने का रख सकते हो*


*इस तरह एक शेड्यूल बना लो मुझे इतने घंटे ये सब्जेक्ट पढ़नी है और इतने घंटे बाद मुझे इतना ब्रेक लेना है और दोपहर इतने घंटे सोना है वो सब कुछ आप पर निर्भर है*


*इतना कुछ कर लोगे तो आपको सफलता पाने से कोई नही रोक सकता, आप अपना सपना पूरा कर सकते है, जिस पद को आप ने पाने के लिए सोचा था, बस हमेशा पॉजिटिव रहो, कोई क्या बोल रहा है उस पर कुछ भी ध्यान मत दो और ना बाहर की बातो पर ध्यान दें*


🤲🏻🤲🏻🤲🏻🤲🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻


*पढ़ने का सबसे बेहतरीन तरीका क्या है?*


*जब भी आप कोई टॉपिक या सब्जेक्ट पढ़ें तो एक बार उसको अच्छे से पढ़े, फिर थोड़ा मनन करे कि आज आपने क्या क्या पढ़ा है।*


*अगले दिन शुरू करने से पहले कल का रिवाइज करें, एक बार फटाफट रीड आउट कर ले फिर आगे का पढ़े। उससे अगले दिन भी पहले पेज से पढ़े और उससे अगले दिन भी पहले पेज से उस दिन तक का फटाफट रिवाइज कर ले*


*इस तरीके से आप अपने नोट्स के 100% फैक्ट्स को याद कर सकते है। बस आपको हर रोज पहले पेज से शुरू करना है। शुरू में आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, पर 10 दिन बाद फर्क साफ दिखेगा।*


*अगर आप 10 दिन में एक सब्जेक्ट खत्म करते हो तो और रोज पहले पेज से करते हो तो आपके 10 रिवीजन होते है जो कि ऐसे नोर्मल पढ़ने पर आप 7 दिन में एक बार ही पूरा कर पाते और आपको पता चलता है कि शुरू के 5 दिन आपने जो पढ़ा उसका मात्र 40-50% ही याद रहा है।*


*इससे एक प्रकार की कुंठा उत्पन्न होती है कि एक बार पढ़ तो लिए, पर याद कुछ खास नहीं हुआ।*


*इसका एक ही इलाज है हर रोज पहले पेज से शुरू करो भले ही 2 दिन ज्यादा लगेंगे पर इस बात कि गारंटी मैं लेता हूं कि 10 दिन बाद आपको 80% तक फैक्ट्स याद हो जाएंगे और उसके बाद 2-3 कंप्लीट रिवीजन के बाद आपको लाइन टू लाइन याद हो जाएगा भले ही कितना ही कठिन विषय क्यों ना हो।*


*आप टेस्ट सीरीज में भी दोनों विधियां अपनाकर एक बार ट्राई कर सकते है। एक बार अपनी विधि से पढ़ना और एक बार इससे फर्क साफ दिखेगा। इससे आप 10-15 सब्जेक्ट तक के नोट्स आराम से मुख जबानी याद कर सकते हो।*



      ✍🏻 *M J Mαɳʂυɾι* 

        



          ✍🏻 *𝗠𝗮𝗶𝗻𝗮 𝗘𝘅𝗮𝗺 𝗔𝗹𝗲𝗿𝘁* 📚

[06/01, 3:22 pm] +91 95889 86809: *✍🏻 🤝✌🏻एक कदम सफलता की ओर* 🎊🤲🏻📚


✍️ *हर नई शुरुआत थोड़ा डराती है, पर याद रखना सफलता मुश्किलों के पार ही नजर आती है।*


✍️ *जिंदगी में ऐसा भी वक्त आएगा जब तुम्हें लगेगा सब खत्म हो गया हैं, उस वक्त मेरे दोस्त आपकी कहानी की असली शुरुआत होगी*


✍️ *मजबूत होने का मजा तभी आता है, जब सारी दुनिया कमजोर करने में लगी हो*


✍️ *लोग हसेंगे जरूर जब आप कुछ अलग और असंभव की शुरुआत करोगे लेकिन सफल होने पे वही लोग तुमसे सलाह मागेंगे।*


✍️ *सपना हमेशा बड़ा से बड़ा देखो चांद नहीं मिला तो क्या हुआ आसमान तक तो पहुंचोगे*


✍️ *दुनिया आपको कैसे देखती है, वो मायने नही रखता आप खुद को कैसे देखते है वो मायने रखता है*


✍️ *"कल से करेंगे" ये शब्द आपको कभी कामयाब नहीं होने देंगे*


✍️ *टाइम बर्बाद करने वाली चीजें 👇*


*1. फालतू टीवी देखना*


*2. काम करते समय ध्यान न देना*


*3. दिनभर आलस करना*


*4. बहुत ज्यादा गेम खेलना*


*5. फालतू गप्पे लड़ाना*


*6. फालतू में घूमना*


*7. चिंता करते रहना*


*8. बिना मतलब पार्टी करना*


*9. दिनभर मोबाइल चलाना।*


*अपनी पीड़ा के लिए संसार को दोष मत दीजिये, अपने मन को समझाइये, मन का परिवर्तन ही आपके दुखों का अंत कर सकता है।*


✍️ *एक कामयाब व्यक्ति को क्या त्यागना पड़ता है 👇🏻*


*1) जरूरत से ज्यादा नींद*


*2) गुस्सा* 


*3) आलस्य* 


*4) मनोरंजन* 


*5) पार्टिया*


*6) दोस्त* 


*7) नकारात्मक सोच*


*जिंदगी Science की तरह होती है, जितना Experiment करेंगे, उतना Better Result आएगा*


                    *~पढते रहो ...*



     Murad khan jaisindher 


Mugal Empire history of Babar

 बाबर: मध्य एशिया में वर्चस्व की लड़ाई से भारत में मुग़ल सल्तनत की स्थापना तक: बीबीसी हिन्दी


अंग्रेजी के मशहूर उपन्यासकार ईएम फोस्टर लिखते हैं कि आधुनिक राजनीतिक दर्शन के आविष्कारक मैकावली ने शायद बाबर के बारे में नहीं सुना था. अगर सुना होता तो 'द प्रिंस' नामक पुस्तक लिखने के बजाय उनके (बाबर के) जीवन के बारे में लिखने में उनकी दिलचस्पी ज़्यादा होती.


बाबर एक ऐसा किरदार थे जो न केवल सफल थे, बल्कि सौंदर्य बोध और कलात्मक गुणों से भी भरपूर थे. मुग़ल सल्तनत के संस्थापक ज़हीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर (1483-1530) को जहां एक विजेता के रूप में देखा और वर्णित किया जाता है, वहीं दूसरी ओर उन्हें एक बड़ा कलाकार और लेखक भी माना जाता है.


एक इतिहासकार स्टीफन डेल बाबर के बारे में लिखते हैं कि यह तय कर पाना मुश्किल है कि बाबर एक बादशाह के रूप में अधिक महत्वपूर्ण हैं या एक कवि और लेखक के रूप में.


आज के भारत में, बाबर को बहुसंख्यक हिंदू वर्ग की एक विशेष विचारधारा के लोग आक्रमणकारी, लुटेरा, सूदखोर, हिंदू दुश्मन, अत्याचारी और दमनकारी बादशाह भी मानते हैं. यह मुद्दा यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सत्तारूढ़ पार्टी, बाबर ही नहीं, मुग़ल सल्तनत से जुड़ी हर चीज़ के ख़िलाफ़ नज़र आती है.


आज से लगभग पांच सौ साल पहले, बाबर ने एक सल्तनत की स्थापना की जो अपने आप में बेनज़ीर है. उन्होंने 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोधी को हराया और भारत में एक नई सल्तनत की स्थापना की. अपने बुलंदी के दिनों में इस सल्तनत के क़ब्ज़े में दुनिया की एक चौथाई से अधिक दौलत थी. इस सल्तनत का क्षेत्रफल अफ़ग़ानिस्तान समेत लगभग पूरे उपमहाद्वीप पर फैला हुआ था.


बाबर का सबसे बड़ा परिचय

लेकिन बाबर का जीवन एक निरंतर संघर्ष है. आज की दुनिया में बाबर का सबसे बड़ा परिचय उसकी अपनी आत्मकथा है. उनकी किताब को आज 'बाबरनामा' या 'तुज़्क़ ए बाबरी' के नाम से जाना जाता है.


जामिया मिलिया इस्लामिया में इतिहास विभाग की अध्यक्षा निशात मंज़र का कहना है कि, बाबर के जीवन को दो भागों में बांटा जा सकता है: एक हिस्सा सीर दरिया और आमु नदी के बीच मध्य एशिया में वर्चस्व के लिए संघर्ष का है और दूसरा हिस्सा बहुत छोटा है लेकिन बहुत महत्वपूर्ण है. क्योंकि इस हिस्से में केवल चार वर्षों में उन्होंने भारत की एक महान सल्तनत की स्थापना की जो लगभग तीन सौ वर्षों तक चलती रही.


ऑक्सफ़ोर्ड सेंटर फॉर इस्लामिक स्टडीज में दक्षिण एशियाई इस्लाम के फेलो मुईन अहमद निजामी ने बीबीसी को बताया कि, तैमूरी और चंगेज़ नस्ल के बाबर, को अपने पिता उमर शेख़ मिर्ज़ा से फरग़ना नाम की एक छोटा सी रियासत विरासत में मिली थी. फ़रग़ना के पड़ोसी रियासतों में उनके रिश्तेदारों का शासन था.

वो बताते हैं कि, "यहां तक कि उन्हें अपनी रियासत भी गंवानी पड़ी. उन्होंने अपना अधिकांश जीवन अभियान और रेगिस्तान में भटकते हुए बिताया. अपनी रियासत को फिर से हासिल करने के उनके प्रयास विफल होते रहे. यहां तक कि परिस्थितियों ने उन्हें भारत की ओर रुख़ करने के लिए मजबूर किया."


बाबर की आत्मकथा

बाबर ने उस समय की अपनी लगातार होती असफलताओं का ज़िक्र करते हुए अपनी आत्मकथा में लिखा है: "जितने दिन मैं ताशकंद में रहा, उतने दिन मैं बहुत ही दुखी और तंगदस्ती में रहा. देश कब्ज़े में नहीं था और ना ही इसके मिलने की कोई उम्मीद थी. ज़्यादातर नौकर चले गए थे, और जो कुछ साथ रह गए थे, वह ग़रीबी के कारण मेरे साथ नहीं घूम सकते थे..."


वह आगे लिखते हैं, "आखिरकार मैं इस भटकने और बेघर होने से थक गया और जीवन से ऊब गया. मैंने अपने दिल में कहा कि, ऐसा जीवन जीने से अच्छा है कि जहां संभव हो सके वहां चला जाऊं. ऐसा छिप जाऊं कि कोई देख न सके. लोगों के सामने ऐसी बेइज़्ज़ती और बदहाली में जीने से अच्छा है जितना हो सके दूर चला जाऊं, जहां मुझे कोई न पहचाने. ये सोच कर उत्तरी चीन के इलाक़े की तरफ जाने का इरादा कर लिया. मुझे बचपन से ही यात्रा करने में दिलचस्पी थी, लेकिन मैं सल्तनत और संबंधों के कारण नहीं जा सकता था.


मुईन अहमद निजामी ने बताया कि उन्होंने अन्य जगहों पर भी इस तरह की बातें लिखी हैं. एक जगह लिखा है, "क्या अब भी कुछ देखना बाकी रह गया है,अब क़िस्मत की कैसी विडंबना और उत्पीड़न देखना बाकी रह गया है?"


एक शेर में, उन्होंने अपनी स्थिति व्यक्त की है, जिसका अर्थ यह है, "न तो मेरे पास अब यार दोस्त हैं, न ही मेरे पास देश और धन है, मुझे एक पल का भी चैन नहीं है." यहां आना मेरा फैसला था लेकिन मैं अब वापस भी नहीं जा सकता. '


अपने आत्मकथात्मक उपन्यास, 'ज़हीर-उद-दीन बाबर' में डॉक्टर प्रेमकिल कादरॉफ ने बाबर की इसी उत्तेजक और अशांत स्थिति को दर्शाया है. एक जगह पर वह लिखते हैं कि "बाबर सांस लेने के लिए थोड़ा सा रुका लेकिन उसने अपनी बात जारी रखी ... सब कुछ फ़ानी (नश्वर) है. बड़ी बड़ी सल्तनतें भी अपने संस्थापकों के दुनिया से जाते ही टुकड़े टुकड़े हो जाती हैं. लेकिन शायर के शब्द सदियों तक जीवित रहते हैं.


उन्होंने एक बार अपना एक शेर जमशेद बादशाह के उल्लेख के बाद एक पत्थर पर कुंदवा दिया था, जो अब तज़ाकिस्तान के एक संग्रहालय में है. वह उनकी स्थिति की सही व्याख्या करता है.


गिरफ़्तेम आलम ब मर्दी व ज़ोर

व लेकिन न बर्देम बा ख़ुद ब गोर


इसका अनुवाद यह है कि बल और साहस से दुनिया पर विजय तो प्राप्त की जा सकती है, लेकिन ख़ुद अपने आप को दफ़न तक नहीं किया सकता.


इससे पता चलता है कि वह हार मानने वालों में से नहीं थे. बाबर में एक पहाड़ी झरने की तरह शक्ति थी जो पथरीली ज़मीन को चीर कर ऊपर से इतनी ताक़त से निकलता है कि पूरी भूमि को सिंचित करता है. इसी लिए, एक स्थान पर,प्रेमकिल क़ादरॉफ ने इस स्थिति का वर्णन इस तरह किया है.


"उस समय, बाबर को शक्तिशाली झरने का दृश्य बहुत आनंदित कर रहा था... बाबर ने सोचा कि इस झरने का पानी पेरिख़ ग्लेशियर से आता होगा. इसका मतलब यह था कि पानी को पेरिख़ से नीचे आने और फिर आसमान जैसे ऊंचे माउंट लाओ की चोटी तक चढ़ने के लिए, दोनो पहाड़ों के बीच की घाटियों की गहराई से भी अधिक गहराई तक जाना पड़ता था. पानी के झरने को इतनी ताक़त आखिर कहाँ से मिल रही थी?... बाबर को अपने जीवन की तुलना ऐसे झरने से करना बिलकुल ठीक लगा. वह ख़ुद भी तो टूट कर गिरती चट्टान के नीचे आ गया था."


बाबर भारत की तरफ

बाबर का ध्यान भारत की ओर कैसे आकर्षित हुआ, इस बारे में अलग-अलग दृष्टिकोण दिए जा सकते हैं, लेकिन प्रोफेसर निशात मंज़र का कहना है कि, भारत की तरफ उनका ध्यान बहुत उचित था. क्योंकि काबुल में कर लगाने के लिए केवल एक चीज थी. और शासकीय प्रशासन के लिए धन की सख़्त आवश्यकता थी, इसलिए बाबर के पास भारत की ओर रुख़ करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.


इसलिए हम देखते हैं कि सिंधु नदी को पार करने से पहले, उन्होंने भारत के पश्चिमी हिस्से पर पहले भी कई बार हमला किया था और वहां से लूटपाट के बाद वापिस काबुल लौट गए थे.

उनका कहना है कि बाबर जिस तरह से अपनी आत्मकथा शुरू करता है, किसी बारह साल के लड़के से इस तरह की हिम्मत और निश्चय की उम्मीद नहीं की जा सकती. लेकिन बाबर के ख़ून में शासन के साथ साथ बहादुरी भी शामिल थी.


निशात मंज़र का कहना है कि उन्हें भाग्य और ज़रूरत दोनों इधर खींच लाये थे, अन्यथा उनके सभी प्रारंभिक प्रयास उत्तरी एशिया में उनके पैतृक साम्राज्य को मज़बूत करने और एक महान साम्राज्य स्थापित करने पर आधारित थे.


उन्होंने यह भी कहा कि यह बहस का एक अलग विषय है कि, क्या राणा साँगा या दौलत ख़ान लोधी ने उन्हें दिल्ली साम्राज्य पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं. लेकिन यह निश्चित था कि, आज के लोकतांत्रिक मूल्यों से हम सल्तनत काल की परख नहीं कर सकते. उस दौर में, कोई कहीं भी जाता और विजयी होता तो उसे वहां के आम और ख़ास दोनों स्वीकार करते, उसे हमलावर नहीं समझते थे.


लेकिन बाबर के भारत के सपने के बारे में, एलएफ रुशब्रुक ने अपनी पुस्तक 'ज़हीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर' में लिखा है कि बाबर ने सबसे थक हार कर 'देख़ कात' नामक गाँव में रहने का फैसला किया.


उन्होंने अपने आपको पूरी तरह से वहां के माहौल के अनुकूल बनाया. उन्होंने अपने सभी दावों को छोड़ दिया और एक साधारण अतिथि की तरह ग्राम मुक़द्दम (सरदार) के घर पर रहने लगा. यहां एक ऐसी घटना घटी कि जिस पर भाग्य ने यह तय कर दिया था कि, बाबर के आने वाले जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. मुक़द्दम 70 या 80 साल का होगा. लेकिन उसकी माँ 111 साल की थी और वह जीवित थी. इस वृद्ध महिला के कुछ रिश्तेदार तैमूर बेग की सेना के साथ भारत गए थे. यह बात उनके दिमाग में थी और वह उसकी कहानी सुनाती थी.


बाबर के बुजुर्गों के कारनामों के बारे में उन्होंने जो कहानियां सुनाईं, उन कहानियों ने युवा शहज़ादे की कल्पना में एक उत्साह पैदा कर दिया. इसमें कोई शक नहीं कि उस समय से ही, भारत में तैमूर की विजय को ताज़ा करने का सपना उसके दिमाग़ में घूमता रहा.

जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग में सहायक प्रोफेसर रहमा जावेद राशिद का कहना है, यह तो सब जानते हैं कि बाबर पिता की ओर से तैमूर वंश का पांचवी पीढ़ी के वंशज थे और माता की तरफ से महान विजेता चंगेज खान की 14 वीं पीढ़ी के वंशज थे. इस प्रकार एशिया के दो महान विजेताओं का ख़ून बाबर में शामिल था, जिससे उन्हें अन्य क्षेत्रीय शासकों पर श्रेष्ठता मिली.


शिक्षा और प्रशिक्षण

बाबर का जन्म और शिक्षा फरग़ना की राजधानी अंदजान में हुई थी. प्रोफ़ेसर निशात मंज़र कहती हैं कि, हालांकि उनके दोनों पूर्वज चंगेज़ ख़ान और तैमूर लंग दोनों ही पढ़े लिखे नहीं थे. लेकिन वे इस बात से अच्छी तरह वाक़िफ़ थे कि शिक्षा के बिना शासन चलना मुश्किल काम है. इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दी. बाबर की शिक्षा भी इस्लामी परंपरा के अनुसार चार साल और चार दिन की उम्र में शुरू की गई थी.


उन्होंने आगे बताया कि, चंगेज ख़ान के वंशजों को शिक्षित करने वाले लोग उइगर समुदाय से थे, जो अब चीन के शिनजियांग प्रांत में परेशान हाल हैं, लेकिन मध्य पूर्व में उन्हें सबसे अधिक पढ़ा लिखा माना जाता था.


इसी तरह, अपने बच्चों की शिक्षा के लिए, तैमूर बेग ने चुग़ताई तुर्कों को रखा, उन्हें भी अपने समय का सबसे अधिक पढ़ा लिखा माना जाता था. उन्होंने अरबी और फ़ारसी के प्रभुत्व के बावजूद अपनी भाषा को साहित्यिक दर्जा दिया था.


जब मैंने प्रोफ़ेसर निशात से पूछा कि इतनी कम उम्र में बादशाह बनने, इतनी जंगी मुहिमों और दरबदर भटकने के बावजूद ज्ञान और कौशल के क्षेत्र में उन्हें यह स्थान कैसे मिला है. उन्होंने कहा कि बाबर जहां भी गए, उनके शिक्षक भी उनके साथ जाते थे. वह सभी प्रकार के लोगों से मिलना पसंद करते थे, और उन्होंने विशेष रूप से अली शेर नवाई जैसे कवियों का संरक्षण किया था.


उन्होंने कहा कि बाबर ने जिस तरह से ख़ुद का खुले तौर पर वर्णन किया है, वह किसी अन्य बादशाह के बारे में नहीं मिलता है. उन्होंने अपनी शादी, प्यार, शराब पीने, रेगिस्तान में पैदल भटकना, तौबा और अपनी दिल की स्थिति तक हर बात का उल्लेख किया है.

स्टीफन डेल ने अपनी पुस्तक 'गार्डेन ऑफ एट पैराडाइज़' में, बाबर के गद्य को "दिव्य" कहा और लिखा कि यह उसी तरह प्रत्यक्ष है जिस तरह आज पांच सौ साल बाद लिखने की शैली आम है, या जिस तरह से आज भी लिखने को कहा जाता है.


उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने अपने बेटे हुमायूं के लेखन को कैसे सही किया. उन्होंने लिखा था कि "आपके लेखन में विषय खो जाता है" और इसलिए उन्हें प्रत्यक्ष लिखने के लिए कहा था.

उर्दू के मशहूर शायर ग़ालिब ने लगभग तीन सौ साल बाद उर्दू में लिखने की जिस शैली का आविष्कार किया और जिस पर उन्हें गर्व भी था. ऐसा स्पष्ट और सरल गद्य बाबर ने उनसे पहले अपने उत्तराधिकारियों के लिए लिखा था.


बाबरनामा पढ़ने से पता चलता है कि उनकी पहली शादी उनके चचेरी बहन आयशा से हुई थी. आयशा से एक बेटी पैदा हुई थी जो 40 दिन भी जीवित नहीं रह सकी. लेकिन बाबर को अपनी पत्नी से कोई प्यार नहीं था.

उन्होंने लिखा है कि "उर्दू बाज़ार में एक लड़का था, बाबरी नाम का जिसमें हम नाम का भी एक जुड़ाव था. उन्ही दिनों मुझे उससे एक अजीब सा लगाव हो गया.

इस परिवश पे क्या हुआ शैदा

बल्कि अपनी ख़ुदी भी खो बैठा

उनका एक फ़ारसी शेर ये है:

हेच किस चूं मन ख़राब व आशिक़ व रुस्वा मबाद

हेच महबूब चोत व बे रहम व बे परवा मबाद


"लेकिन स्थिति यह थी कि अगर बाबरी कभी मेरे सामने आ जाता, तो मैं शर्म की वजह से निगाह भर कर उसकी ओर नहीं देख पाता था. भले ही मैं उससे मिल सकूं और बात कर सकूं. बेचैन मन की ऐसी अवस्था थी कि उसके आने का शुक्रिया तक अदा नहीं कर सकता था. उसके न आने की शिकायत भी नहीं कर सकता था और ज़बरदस्ती बुलाने की हिम्मत भी नहीं थी..."

शोम शर्मिंदा हर गह यार ख़ुदरा दर नज़र बेनम

रफ़ीक़ा सूए मन बेनंदू मन सूए दीगर बेनम


"उन दिनों में मेरी स्थिति ऐसी थी, इश्क़ और मोहब्बत का इतना ज़ोर और जवानी व जुनून का ऐसा प्रभाव हुआ कि कभी कभी नंगे सिर नंगे पैर महलों, बगीचों और बागों में टहला करता था. न अपने और पराये का ख्याल था, न ही अपनी और दूसरों की परवाह.

वैसे, बाबर की सबसे प्रिय पत्नी माहिम बेगम थी, जिसके गर्भ से हुमायूँ का जन्म हुआ, जबकि गुलबदन बेगम और हिंदाल, असकरी और कामरान का जन्म अन्य पत्नियों से हुआ था.


शराब पीना

बाबर का एक शेर कई जगहों पर नज़र आता है:

नौ रोज़ व नौ बहार व दिलबरे ख़ुश अस्त

बाबर बह ऐश कोश के आलम दोबारा नीस्त

"नौ रोज़ हैं, नई बहार है, शराब है, सुंदर प्रेमी है, बाबर, बस ऐश और मस्ती में ही लगा रह कि दुनिया दोबारा नहीं है."


प्रोफ़ेसर निशात मंज़र कहती हैं कि बाबर ने 21 साल तक एक पवित्र जीवन व्यतीत किया. लेकिन फिर उन्हें शराब पीना की महफिले रास आने लगी. इसलिए, उनकी महफिलों में शराब पीने वाली महिलाओं का भी उल्लेख किया गया है. बाबर ने उनके उल्लेख को छिपाने की कोशिश नहीं की है. वह अपने पिता के बारे में भी लिखते हैं कि, वह शराब के आदी थे और अफ़ीम भी लेने लगे थे. जबकि हुमायूँ के बारे में तो मशहूर है कि वह अफ़ीम का आदी था.


निशात मंज़र कहती हैं कि जब बाबर ने शराब से तौबा की, तो यह उसकी रणनीति थी. उनके सामने भारत का सबसे बड़ा जंगजूं राणा सांगा था. जो इससे पहले कभी किसी युद्ध में नहीं हारा था. पानीपत की लड़ाई के बाद बाबर की सेना आधी रह गई थी. जंग के दौरान एक समय आया जब बाबर को सामने हार दिखाई दे रही थी. तब उसने पहले एक उग्र भाषण दिया और फिर तौबा की.


कुछ आलिमों का मानना है कि बाबर के इस सच्चे पश्चाताप के कारण, अल्लाह ने मुग़लों को भारत में तीन सौ वर्षों की सल्तनत आता कर दी. लेकिन जामिया मिलिया इस्लामिया में इतिहास के प्रोफेसर रिज़वान क़ैसर कहते हैं कि, यह बाबर के कार्यों की धार्मिक व्याख्या तो हो सकती है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व नहीं है. क्योंकि यह किसी भी तरह से साबित नहीं किया जा सकता है. हाँ यह ज़रूर कहा जा सकता है कि बाबर ने युद्ध जीतने के लिए धार्मिक उत्साह का इस्तेमाल किया होगा.


इससे पहले, जब बाबर ने अपने पैतृक वतन फरग़ना को पाने के लिए ईरान के बादशाह का समर्थन लिया था. तब उसने ख़ुद को शिया कहा था, तो उस समय के एक प्रमुख आलिम ने बाबर के बारे में बहुत बुरा भला कहा था और उसका विरोध किया था.

प्रोफेसर निशात ने यह भी कहा कि बाबर ने कई स्थानों पर अपने दुश्मन मुस्लिम शासकों के लिए "काफिर" शब्द का इस्तेमाल किया और उन्हें बुरा भला कहा.


बाबर ने अपनी इस तौबा का उल्लेख इस प्रकार किया है: "मैंने काबुल से शराब मंगाई थी और बाबा दोस्त सूजी ऊंटों की तीन पंक्तियों पर शराब के मटके भर कर ले आया. इस बीच, मोहम्मद शरीफ़ नजूमी (ज्योत्षी) ने यह बात फैला दी कि, मंगल इस समय पश्चिम में है और यह अशुभ है, इसलिए जंग में हार होगी. इस बात ने मेरी सेना का दिल हिला दिया..."

"जमादी-उल- सानी (अरबी महीना) की 23 तारीख थी मंगलवार का दिन था. अचानक मुझे एक विचार आया कि क्यों न शराब से तौबा कर लूँ. ये इरादा करके मैंने शराब से तौबा कर ली. शराब के सभी सोने और चांदी के बर्तनों को तोड़ दिया गया. और उस समय छावनी में जो भी शराब थी सब बाहर फिंकवा दी. शराब के बर्तनों से जो सोना चांदी मिला उसे ग़रीबों में बंटवा दिया. इस काम में मेरे साथी अस ने भी साथ दिया."


"मेरी तौबा की खबर सुनकर, मेरे तीन पदाधिकारियों ने भी उसी रात तौबा कर ली. चूंकि बाबा दोस्त ऊंटों की कई पंक्तियों पर काबुल से शराब के अनगिनत मटके लाया था और यह शराब बहुत ज्यादा थी. इसलिए इसे फेंकने के बजाय, इसमें नमक मिला दिया ताकि इसका सिरका बन जाये. जहां मैंने शराब से तौबा की और शराब को गड्ढों में डाला वहां तौबा की याद के तौर पर एक पत्थर लगवा दिया और एक इमारत बनवाई..."


मैंने यह भी इरादा किया था कि अगर अल्लाह राणा साँगा पर विजय देगा, तो मैं अपनी सल्तनत में सभी प्रकार के करों को माफ़ कर दूंगा. मैंने इस माफ़ी की घोषणा करना आवश्यक समझा और लेखकों को इस विषय के लेख लिखने और इसे दूर-दूर तक प्रसिद्ध करने का आदेश दिया.


"दुश्मनों की बड़ी संख्या के कारण सेना में बद दिली फ़ैल गई थी. इसलिए मैंने पूरी सेना को एक जगह इकट्ठा किया और कहा: 'जो कोई भी इस दुनिया में आया है उसे मरना है. जीवन ख़ुदा के हाथ में है, इसलिए मृत्यु से नहीं डरना चाहिए. तुम अल्लाह के नाम पर क़सम खाओ कि, मौत को सामने देख कर मुंह नहीं मोड़ोगे और जब तक जान बाक़ी है तब तक लड़ाई जारी रखोगे." " मेरे भाषण का बहुत प्रभाव पड़ा. इससे सेना में उत्साह भर गया, लड़ाई जम कर हुई और अंत में जीत हुई. यह जीत 1527 में हुई.


बाबर और उनके रिश्तेदार

पानीपत की लड़ाई के बाद, बाबर को जो धन हाथ लगा उसने वह उदारतापूर्वक अपने रिश्तेदारों और पदाधिकारियों के बीच बांट दिया. बाबर ने भी इसका उल्लेख किया है और उनकी बेटी गुलबदन बानो ने भी अपनी पुस्तक 'हुमायूँनामा' में इसका विस्तार से उल्लेख किया है.

प्रोफेसर निशात मंज़र और डॉक्टर रहमा जावेद ने बीबीसी को बताया कि बाबर के व्यक्तित्व की ख़ास बात महिलाओं के साथ उनका रिश्ता था. उन्होंने बताया कि महिलाएं उनके मश्वरों में शामिल होती थी. उनकी मां उनके साथ थीं तो उनकी नानी भी समरकंद से अंदजान पहुंचती थीं. उन्होंने अपनी जीवनी में चाचियों, मासियों, बहनों और फूफियों का विशेष रूप से उल्लेख किया है.

बाबर की जीवनी में जितनी महिलाओं का उल्लेख है उतनी महिलाओं का नाम बाद की पूरी मुग़ल सल्तनत में सुनने में नहीं आया. इस संबंध में, प्रोफ़ेसर निशात मंजर ने कहा कि अकबर बादशाह के शासनकाल से पहले तक, मुग़लों के बीच तुर्क और बेग परंपराओं का प्रभाव ज़्यादा था, जिसके कारण महिलाओं की उपस्थिति हर जगह दिखाई देती है.


इसलिए बाबर ने अपनी दो फूफियों का उल्लेख किया है, जो पुरुषों की तरह पगड़ी बाँधती थी. घोड़े पर सवार होकर तलवार लेकर चलती थी. वैसे तलवार चलाना और बहादुरी उनमें आम थी, लेकिन वो दरबार और सभाओं में अक्सर हिस्सा लेती थी. उनका दायरा केवल शादी तक सीमित नहीं था.


प्रोफेसर निशात का कहना है कि मुग़लों का भारतीयकरण अकबर के समय में शुरू हुआ था और उसके बाद महिलाएं पिछड़ती चली गईं. बाद में जब जहांगीर की बज़ावत के मामले में समझौता कराने में जो आगे आगे नज़र आती हैं वो जहांगीर की फूफियां और दादियां हैं. उनकी असली माँ जिनके पेट से वो पैदा हुए वो कहीं दिखाई नहीं देती है. हालांकि फिल्मों में उनकी भूमिका को ख़ूब बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है. क्योंकि ये फिक्शन पर आधारित है."


बाबर के व्यक्तित्व में विरासत

बाबर पर भारत में हमलावर होने और मंदिरों को तोड़ने , जबरन हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित करने के आरोप लगाए जाते हैं. जबकि उनके पोते जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर को "शांति दूत" कहा जाता है और धार्मिक सहिष्णुता को उन्हीं का हिस्सा माना जाता है.

लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग में सहायक प्रोफेसर सैफुद्दीन अहमद कहते हैं, "इतिहासकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों ने अक्सर अकबर बादशाह और अशोक को एक मज़बूत शासक के रूप में देखा और उनके महत्व पर प्रकाश डाला है. इन दोनों व्यक्तित्वों को भारत के लंबे इतिहास में साम्राज्य निर्माण की नब्ज़ माना जाता है, इसके उलट बाबर अयोध्या में मंदिर को तोड़ कर मस्जिद के निर्माण करने के लिए बदनाम है."


वह आगे कहते हैं कि, "बाबर का वसीयत नामा, जो उसने अपने बेटे और उत्तराधिकारी हुमायूँ के लिए बनाया था, वह खुरासान में विकसित राजनीतिक विचारधारा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. बाबर ने कई ऐसे मुद्दों की ओर इशारा किया है, जिन्हें आज के राजनीतिक दल पूरी तरह से अनदेखा करते हैं, या उस पर अमल करने से बचते हैं. बाबर को लंबे समय तक भारत में रहने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उसने जल्द ही यहां के तौर तरीके अपना लिए. उसने हुमायूँ के लिए जो वसीयत लिखी वह उसके न्याय और विवेक को दर्शाता है."


बाबर ने लिखा: "मेरे बेटे, सबसे पहले तो ये कि, धर्म के नाम पर राजनीति न करो,आप अपने दिल में धार्मिक नफरत को बिलकुल जगह न दो. लोगों की धार्मिक भावनाओं और धार्मिक अनुष्ठानों का ख्याल रखते हुए सब लोगों के साथ पूरा न्याय करना."


सैफुद्दीन अहमद कहते हैं कि, बाबर की यही विचारधारा तो आज सेक्यूलरिज़्म कहलाता है.

उन्होंने आगे कहा कि बाबर ने राष्ट्रीय संबंधों की विचारधारा में तनाव न पैदा करने की नसीहत करते हुए लिखा था: गौकशी से ख़ास तौर से परहेज़ करो ताकि इससे तुम्हें लोगों के दिल में जगह मिले और इस तरह वो अहसान और शुक्रिया की ज़ंजीर से तुम्हारे वफ़ादार हो जाए.


सैफुद्दीन अहमद के अनुसार, बाबर ने तीसरी बात यह कही: "आपको किसी भी समुदाय के प्रार्थना स्थल को ध्वस्त नहीं करना चाहिए और हमेशा पूर्ण न्याय करना. ताकि बादशाह और रियाया के बीच संबंध दोस्ताना रहें और देश में शांति व्यवस्था बनी रहे."

चौथी बात उन्होंने यह कही कि, इस्लाम का प्रचार अन्याय और दमन की तलवार के बजाय अहसान और परोपकारी की तलवार से बेहतर होगा. इसके अलावा, बाबर ने शिया-सुन्नी मतभेद को नज़रअंदाज़ करने और जाति के आधार पर लोगों की उपेक्षा करने से बचने की सलाह दी. अन्यथा, यह देश की एकता को नुकसान पहुंचाएगा और शासक जल्द ही अपनी सत्ता को खो देंगे.


सैफुद्दीन के अनुसार, बाबर ने यह भी कहा कि "अपनी जनता की विभिन्न विशेषताओं को वर्ष के विभिन्न मौसमों के रूप में समझो, ताकि सरकार और लोग विभिन्न बीमारियों और कमज़ोरियों से बच सकें."


प्रोफेसर निशात मंज़र ने कहा कि सच यह है कि, बाबर का दिल भारत की तरह विस्तृत था और वह निरंतर संघर्ष में विश्वास करता था. प्रकृति में उनकी रुचि और भारत में बाग़ों के निर्माण ने एक नए युग की शुरुआत की है, जिसकी परिणति हम जहाँगीर के बाग़ों और शाहजहाँ की वास्तुकला में देखते हैं.


बाबर के जीवन में धर्म का बहुत समावेश था और वह बहुत से लोगों के बारे में बताते हुए, इस बात का उल्लेख करना नहीं भूलता कि वह नमाज़ का पाबंद था. या ये कि उसने किस समय की नमाज़ के वक़्त अपनी यात्रा शुरू की और उस समय की नमाज़ वहां पढ़ी।


हालांकि वो ज्योतिषियों से हालात पता करते थे, लेकिन अंधविश्वास से दूर थे. इसलिए, काबुल में अपने बयान में, बाबर ने लिखा है कि, "यहाँ के एक संत मुल्ला अब्दुल रहमान थे. वे एक विद्वान थे और हर समय पढ़ते रहते थे. उसी हालत में उनकी मौत हो गई... लोग कहते हैं कि गज़नी में एक मज़ार है और अगर आप उस पर दरूद का पाठ करते हैं, तो वह हिलने लगता है. मैंने जाकर देखा तो ऐसा महसूस हुआ कि वह मक़बरा हिल रहा है. जब इसके बारे में जांच की, तो पता चला कि यह मज़ार पर रहने वालों की चालाकी है. कब्र के ऊपर एक जाल बनाया गया है, जब जाल पर चलते हैं, तो वह जाल हिलता है. इसके हिलने से क़ब्र भी हिलती हुई प्रतीत होती है. मैंने उस जाल को उखड़वा दिया और गुंबद बनवा दिया. '


बाबरनामा में इसी तरह की कई घटनाएं हैं लेकिन बाबर की मृत्यु अपने आप में एक बहुत ही आध्यात्मिक घटना है.

गुलबदन बानो ने इसका विस्तार से वर्णन किया है कि, कैसे हुमायूँ की हालत बिगड़ती जा रही थी. इसलिए बाबर ने उनके बिस्तर के चारों ओर चक्कर लगाया और एक प्रतिज्ञा की. वह लिखती हैं कि हमारे यहाँ ऐसा हुआ करता था. लेकिन बाबा जानम ने अपने जीवन के बदले में हुमायूँ का जीवन माँगा था. इसलिए यह हुआ कि हुमायूँ बेहतर होते गए और बाबर बीमार. और इसी हालत में 26 दिसंबर 1530 को एक महान विजेता ने दुनिया को अलविदा कहा और अपने पीछे अनगिनत सवाल छोड़ गया.

Muslims community of raility report

 *फ्रांसीसी पत्रकार फ्रांसिस गुइटर* की रिपोर्ट है जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं : 


*दिल्ली के 150 शुलभ शौचालयों में तकरीबन 1325 सफाई कर्मचारी हैं। इनमे से आधे से अधिक मुस्लिम वर्ग के हैं।*


*दिल्ली और मुंबई के 50% रिक्शा चालक मुसलमान हैं। इनमें से अधिकतर नाई, जुलाहे, पठान, सिद्दीकी, शेख़ यानी पूर्वांचल और बिहार के मुसलमान हैं।*


*पूर्वी भारत में मुसलमानो की स्तिथि अछूत सी है कुछ जगहों पर। बाकी जगहों पर लोगों के घरों में काम करने वाले 70% बावर्ची और नौकर मुसलमान हैं।*


*मुसलमानो में प्रति व्यक्ति आय दलितों से भी कम हैं। यहां और अधिक चिंता का विषय यह है कि 1991 की जनगणना के बाद से दलितों की प्रति व्यक्ति आय सुधर रही है लगातार वहीं मुसलामानो की और कम हो रही है।*


*मुसलमान भारत का दूसरा सबसे बड़ा कृषक समुदाय है। पर इनके पास मौजूद खेती के साधन अभी 40 वर्ष पीछे हैं। इसका कारण मुसलमान होने की वजह से इन किसानों को सरकार से उचित मुआवजा, लोन और बाकी रियायतें न मिलना रहा है। अधिकतर मुसलमान किसान कम आय की वजह से जमीन बेचने को मजबूर हैं।*


*मुसलमान छात्रों में "ड्रॉप आउट" यानी पढ़ाई अधूरी छोड़ने की दर अब भारत में सबसे अधिक है। वर्ष 2001 में मुसलमानों ने इस मामले में दलितों को पीछे छोड़ दिया और तब से टॉप पर कब्जा किये बैठे हैं।*


*मुसलमानों में बेरोजगारी की दर भी सबसे अधिक है। समय पर नौकरी/रोजगार न मिल पाने की वजह से 14% मुसलमानों हर दशक में विवाह सुख से वंचित रह रहे हैं। यह दर भारत के किसी एक समुदाय में सबसे अधिक है। यह मुसलमानों की आबादी लगातार गिरने का बहुत बड़ा कारण है।*


*आंध्र प्रदेश में बड़ी संख्या में मुसलमानों परिवार 500 रुपये प्रति महीने और तमिलनाडु में 300 रुपए प्रति महीने पर जीवन यापन कर रहे हैं। इसका कारण बेरोजगारी और गरीबी है। इनके घरों में भुखमरी से मौतें अब आम बात है।*


*भारत में ईसाई समुदाय की प्रति व्यक्ति आय तकरीबन 1600 रुपए, sc/st की 800 रुपए, ओ॰बी॰सी॰ की 750 के आस पास है। पर मुसलमानों में यह आंकड़ा सिर्फ़ 537 रुपये है और यह लगातार गिर रहा है।*


*मुसलमानों युवकों के पास रोजगार की कमी, प्रॉपर्टी की कमी के कारण सबसे अधिक मुसलमानों लड़कियों लव जिहाद का शिकार हो रहीं हैं।*


 *उपरोक्त आकंड़े बता रहे हैं कि मुसलमानों कुछ दशकों में वैसे ही खत्म हो जाऐंगे। जो बचे खुचे रहेंगे उन्हें वह जहर खत्म कर देगा जो सोशल मीडिया पर दिन रात मुसलमानों के खिलाफ गलत लिखकर नई पीढ़ी का ब्रेनवाश करके उनके मन में मुसलमानों के प्रति अंध नफरत से पैदा किया जा रहा है।* महाशय हम कहाँ जा रहे हैं,ध्यान देना होगा हमे अपने भविष्य पर।

: *मुसलमानों से सात यक्ष प्रश्न*

1-मुसलमान एक कैसे होंगे और कब होंगे?

2- मुसलमान एक दूसरे की सहायता कब करेंगे?

3-मुसलमान संगठनों में एकता कैसे होगी?

4-मुसलमान अपना वोट एक जगह कब देंगे?

5- मुसलमान अपनी अपनी जातियों का गुणगान कब बंद करेंगे?

6-उच्च पदों पर बैठे अफसर, मुसलमान मंत्री, mp, MLA अपने निहित स्वार्थ से ऊपर उठ कर मुसलमानों की बिना शर्त सहायता कब करेंगे?

7-गरीब मुसलमानों की सहायता करने के लिए मुसलमान महाकोष का गठन कब होगा?

भारत मे 30 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम आबादी है 

हर महीने एक मुसलमान 10 र₹ भी महाकोष में जमा करेगा तब भी हर महीने 300 करोड़ जमा होंगे

और उसमे से हर ग़रीब मुस्लिम को स्वयंरोजगार मुहैया कराया जा सकता है

गरीब मुस्लिमो की बच्चे  बच्चीयों का निकाह कराया जा सकता है

मुस्लिमों के लिए फ्री स्कूले कॉलेज खोले जा सकते हैं

इसका उत्तर एक कट्टर मुसलमान चिंतक प्राप्त करना चाहता है l


    *यदि आप सही में मुसलमानो का  उद्धार चाहते हैं तो इसे मानना प्रारंभ करें पढ़कर कम से कम दस मुसलमानों को अवश्य भेजें!*

Election results of Rajasthan 2023

चुनाव परिणाम राजस्थान 2023

जी हां दोस्तों आप ने राजस्थान विधानसभा के परिणामों को देख लिया और समझ भी लिया ।जिस तरह चुनाव से पहले कांग्रेस की एक लहर महसूस हो रही थी ,भारत के तीन हिंदी भाषी  राज्यों में जिस तरह बीजेपी की सरकार को लेकर आक्रोश और गुस्सा था 




Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...