जी हाँ आज में उस शख्सियत की बात करने जा रहा हूँ, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी, जिन्होंने इस देश भारत को एक सूई के धागे में पिरोने से लेकर इस देश को कैसे मजबूत किया जा सकता है।
बापू का जन्म गुजरात के पोरबंदर साबरमती नदी के किनारे आश्रम में 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था, उनका परिवार गरीब और साधारण परिवार से था और कोई इतना बड़ा पैसे से अमीर आदमी नहीं था, हाँ जानकारी के जरिये सबसे पहले होशियार था।
उनकी शुरुआती तालीम अपने राज्य में ही हूई मगर उच्च शिक्षा के लिए बाहर विदेश जाकर पढाई की। और वकालत करने के लिए इंग्लैंड के लिए गए थे। वकालत की डिग्री पास करके वापस अपने मुल्क आए, वहाँ से वापस दक्षिणी अफ्रीका गए वहाँ पर एक मुस्लिम व्यापारी का फैसला सुना था लेकिन बदकिस्मती से असफल हो गये। दक्षिणी अफ्रीका में काले और गोरों का भैद चल रहा था तब गाधीं जी ने वहाँ पर इस चीज़ को हकीकत में समझा और परखा। जब अपने मुल्क लोट रहे थे तब एक रेल 🚄 के फ्रस्ट क्लास के डब्बे में बैठ कर यात्रा कर रहे थे, तब वहाँ पास में बैठे अंग्रेज ने पूछा तुम यहाँ क्यों बैठे हो तो गाधीं जी ने मेरे पास टिकट है में बैठ सकता हुं, तो अंग्रेज ने कहा आप नहीं बैठ सकते क्योकि आप काले लोग हो हम गोरे लोग है हमारे पास अधिकार है, जब बीच में कोई एक रेलवे स्टेशन🚏 आ जाता है और वहाँ पर गांधी जी को वे लोग धक्का देकर बाहर उतार देते हैं, तब गांधी जी मन ही मन कहते हैं अंग्रेजो आज आप मुझे इस रेल से उतारा है कल आपको एक दिन में अपने मुल्क से बाहर खदेडूगा।ये गांधी जी का दृढ निश्चय था। आखिरकार वापस अपने मुल्क भारत आने का फैसला किया उस समय 1915 का सन था जब देश में पहली बार कदम रखा था उस समय देश अंग्रेजी हुकूमत की दास्ताँ बयान कर रहा था। महात्मा गांधी जी के राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले था जिन्होंने उनको सलाह दी कि आप देश की स्थितियों से निपटना चाहते हैं तो सबसे पहले देश का भ्रमण करो और लोगों की हकीकत आप को पता चल जाएगी, तब गांधी जी 1917 में पंजाब के अमृतसर में किसानों की हकीकत हालातों से वाकिफ होते हैं और अंग्रेज़ी सरकार से अनुरोध करवाकर उनकी मांगो को स्कवीकर कररवाते हैं। इसी तरह बापू पूरे भारत का भ्रमण करके किसान ौ और गरीब लोगों की मदद करते हैं, भारतीय जनता को संगठित करने का काम भी करते हैं। भारत में उनके द्वारा तीन प्रमुख ा आंदोलन चलाए गए जिन्हें देशव्यापी आंदोलन का जाता है। महात्मा गांधी जी ने देश का प्रतिनिधित्व किया था कोई अपने स्वार्थ के लिए नहीं किया। जो आंदोलन चलाए थे वो तीन आंदोलन महत्वपूर्ण है 1. असहयोग आंदोलन 2.सिविन्य अवज्ञा आंदोलन 3.भारत छोडो़ आंदोलन। ये तीन आंदोलन गांधी जी के नेतृत्व में चलाए गए थे। और ये आंदोलन कोई लाठी कै जोर में नहीं बल्कि बात और सत्य और अंहिसा के बलबूते पर आधारित था।
अगर गांधी चाहते तो लठ और हथियार🔫 से विद्रोह करवा सकते थे मगर ऐसा नहीं किया, उन्होंने इस बात को गहराई से जांचा और परखा फिर कदम उठाया उस की तरफ, क्योंकि उन्हें पता था कि अगर हथियार से अंग्रेजों🇬🇧 से मुकाबला किया जाए तो हमारे लिए नुकसान की बात है, तो गांधी जी ने बात चीत और सुलह , और असहयोग द्वारा विद्रोह करने का फैसला किया। गांधी जी दो शब्दों से भलीभाँति और अच्छी तरह परिचित थे, सत्य और अंहिसा। क्योंकि हमेशा सच बात की ही जीत होती है, झूठ की हार होती है। और अगर हिंसा होगी तो आपस में मर कर खत्म हो जाएंगे और गलत दिशा में जाकर गिर जाएंगे। इसलिए उनहोंने सत्य और अहिंसा शब्दों का प्रयोग किया और इन दोनों शब्दों के पुजारी बन गये।और दूसरे लोगों को सत्य और अहिंसा पर चलने का आग्रह किया। देश को आजादी महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में ही मिली थी, इस में कोई शक की बात नहीं है।
आज बहुत सारे लोग राजनीति की रोटियां सेकने वाले गांधी जी को नमन तो करते हैं मगर उनके द्वारा अपनाए गये सिद्धांत पर नहीं चलते हैं। अगर लोग👫👬👭 गांधी जी के सिद्धांतों पर चले तो देश की स्थिति में काफी परिवर्तन देखने को मिलेगा। उन को राष्ट्र पिता के नाम से और किसान मजदूर उसको बापू के नाम से पुकारते है, क्योंकि वो यही चाहते थे कि देश के अन्दर हर गरीब तबके का विकास हौ और सुख चैन से रह सके। उन्होंने हर गरीब और मजलूम लोगों की मदद की, रोजगार चलाने के लिए खुद ने खादी का चरखा चलाया ंऔर लोगों को इस काम के लिए प्रेरित किया। ताके लोग रोजगार के लिए आत्मनिर्भर रह सके किसी दूसरे के मोहताज न हो।
आज हमे ऐसी शख्सियत से सबक लेकर देश के अन्दर नवाचार स्थापित करने चाहिए। देश को ऊंचाईयों तक ले जाकर कामयाब बनाएं। किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, खुद मेहनत करके रोजीरोटी कमानी चाहिए।
गांधी जी की चार गजब बातें जो दुनिया ने अपनाई हमने भुला दी-
1.घी का दिया क्यों जलाया।
2. शिक्षा का फार्मूला।
3.दूसरों को उठाईये।
4.खुद उदाहरण बनिए।
अगर गांधी चाहते तो लठ और हथियार🔫 से विद्रोह करवा सकते थे मगर ऐसा नहीं किया, उन्होंने इस बात को गहराई से जांचा और परखा फिर कदम उठाया उस की तरफ, क्योंकि उन्हें पता था कि अगर हथियार से अंग्रेजों🇬🇧 से मुकाबला किया जाए तो हमारे लिए नुकसान की बात है, तो गांधी जी ने बात चीत और सुलह , और असहयोग द्वारा विद्रोह करने का फैसला किया। गांधी जी दो शब्दों से भलीभाँति और अच्छी तरह परिचित थे, सत्य और अंहिसा। क्योंकि हमेशा सच बात की ही जीत होती है, झूठ की हार होती है। और अगर हिंसा होगी तो आपस में मर कर खत्म हो जाएंगे और गलत दिशा में जाकर गिर जाएंगे। इसलिए उनहोंने सत्य और अहिंसा शब्दों का प्रयोग किया और इन दोनों शब्दों के पुजारी बन गये।और दूसरे लोगों को सत्य और अहिंसा पर चलने का आग्रह किया। देश को आजादी महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में ही मिली थी, इस में कोई शक की बात नहीं है।
आज बहुत सारे लोग राजनीति की रोटियां सेकने वाले गांधी जी को नमन तो करते हैं मगर उनके द्वारा अपनाए गये सिद्धांत पर नहीं चलते हैं। अगर लोग👫👬👭 गांधी जी के सिद्धांतों पर चले तो देश की स्थिति में काफी परिवर्तन देखने को मिलेगा। उन को राष्ट्र पिता के नाम से और किसान मजदूर उसको बापू के नाम से पुकारते है, क्योंकि वो यही चाहते थे कि देश के अन्दर हर गरीब तबके का विकास हौ और सुख चैन से रह सके। उन्होंने हर गरीब और मजलूम लोगों की मदद की, रोजगार चलाने के लिए खुद ने खादी का चरखा चलाया ंऔर लोगों को इस काम के लिए प्रेरित किया। ताके लोग रोजगार के लिए आत्मनिर्भर रह सके किसी दूसरे के मोहताज न हो।
आज हमे ऐसी शख्सियत से सबक लेकर देश के अन्दर नवाचार स्थापित करने चाहिए। देश को ऊंचाईयों तक ले जाकर कामयाब बनाएं। किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, खुद मेहनत करके रोजीरोटी कमानी चाहिए।
गांधी जी की चार गजब बातें जो दुनिया ने अपनाई हमने भुला दी-
1.घी का दिया क्यों जलाया।
2. शिक्षा का फार्मूला।
3.दूसरों को उठाईये।
4.खुद उदाहरण बनिए।
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