Government schools✏📚🏫 of conditions, सरकारी स्कूलों के हालात



 Government school of village.

जी हाँ ऊपर दिये गये स्क्रीन शॉर्ट को देख कर लगता है कि वाकई मे एक नया अध्यापक जिनकी अभी वर्तमान में जोइनिंग हुई है वो ये सोच कर स्कूल जाता होगा कि मैं भारत के भविष्य का निर्माण करने जा रहा हूँ, लेकिन उस अध्यापक को 🏫स्कूल की स्थिति से हालात का पता नहीं है। आगे क्या होने वाला है और क्या नहीं। लेकिन पहले दिन☀ नया जोश व जुनून के साथ स्कूल के बच्चो के साथ जरूर ज्ञान💯📖📚📝 बांटता है और बच्चों को शिक्षा के प्रति उन्हें प्रेरित करता है  कुछ दिन बाद जैसे ही स्कूल की डाक बनाने का काम का पता चलता है तो फिर वो नया अध्यापक उसी काम में व्यस्त रहता है, फिर बच्चों की पढाई धीरे धीरे भूल जाता है और फिर उसी के सिलसिले में आफिस के चक्कर लगाता रहता है। सरकारी स्कूलों में भयंकर स्टाफ की कमी, उसके बावजूद एक ही सरकारी अध्यापक वो भी सरकारी स्कूल के कागजी कार्रवाई में पूरा समय लगाता है, फिर पढानै का नाम मतलब स्कूल जाना है, पढाना या न पढाना हमारे बस की बात नहीं है क्योंकि ये किसी अध्यापकों का दोष नहीं है ये दोष किसी ओर का नहीं ये सरकार का दोष है जो हमे शिक्षा नीति से पीछे धकेल रही है। सरकार जितना कागजी कार्रवाई में व्यस्त रखती है उतना ही अगर पढाई में अध्यापकों को व्यस्त करवाती तो शायद ही आज इस भारत की तस्वीर दुनिया में बदल चुकी होती  क्योंकि शिक्षा से ही देश का विकास होता है न कि कागजी कार्रवाई पूरी करने से। 
मेरा एक सरकार से सुझाव है कि आप हर सरकारी विद्यालयो में एक कलर्क पद का गठन कीजिये ताकि अध्यापक का भार कागजों के प्रति कम हो और छात्रों को पढाई आराम से करवा सके। 
सरकार जो चाहे वो कर सकती है, क्योंकि सरकार शिक्षा के प्रति चाहे तो बडा़ बदलाव करवा सकती। शिक्षा के प्रति सुधार करवा सकती है शिक्षा के प्रति नवाचार स्थापित कर सकती है। अगर सरकार ही न चाहे कि देश का भविष्य सुधर जाएगा। 
ये समस्या सरकारी विद्यालय उच्च प्राईमरी तक तो ज्यादा दिखाई देती है।
सरकार ऊपर से सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती है लेकिन बच्चा स्कूल तो चला जाता है मगर खाली दिमाग वापस लोट आता है, भरा हुआ दिमाग जाता है। कहने का मतलब यह है कि सरकारी स्कूलों में पढाने वाले अध्यापक सिर्फ कागजी कार्रवाई में व्यस्त रहते हैं उधर बच्चों की पढाई गायब हो जाती है, अध्यापक बच्चों पर पढाई के प्रति पूरा ध्यान नही दे पाते हैं। 



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