Help line 🔢number, सहायतार्थ नम्बर

दोस्तों नमस्कार आज में आप के सामने एक नया अधिगम बिंदु लेकर हाज़िर हुआ हुं, आप लोग इन नंबरों को जरूर देखें और आगे भी शैयर करें। ये नम्बर हमारी बहुत सहायता करते हैं, हमारे जीवन में इन नम्बरों की विशेष महत्व है, समय समय जरूरत पड़ने पर हम इन नम्बरों का उपयोग प्रत्यक्ष रूप से करते हैं। 

1. पुलिस 👮सेवा :- 100

2.अग्नि सेवा:-       101

3.एम्बूलैस सेवा :-108 /102 

4.जननी एक्सप्रेस:- 104 

5.यातायात पुलिस:- 103

6.आपदा प्रबंधन :-108

7.इमरजंसी नबंर :- 112

8.रेलवे पूछताछ:- 139

9.वीमैन हेल्पलाइन नंबर:- 181

10.भ्रष्टाचार विरोधी:- 1031

11.हाईवे हेल्पलाइन नंबर:- 1033

12.रेलवे दुर्घटना नंबर:- 1072

13.सड़क दुर्घटना नम्बर:-1073

14.CM हेल्पलाइन नंबर:- 1076

15.वीमेन पावर लाईन:- 1090


16.महीला हेल्पलाइन नंबर:- 1091

17.पृथ्वी भूकंप:- 1092

18.चिल्ड्रेन हेल्पलाइन नंबर:- 1098 


19.किसान काल  नंबर:- 1551

20.बल्डबैंक नबंर;- 9480044444


धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया।


Population is Controlle जनसंख्या नियंत्रण

जी हाँ आज बात जनसंख्या नियंत्रण को लेकर की जाए, क्योंकि जब हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर लाल किले की प्राचीर से कर ही लिया है तो हमें भी  उस विषय पर जरुर चर्चा करनी चाहिए। कि जनसंख्या क्यों बढ रही है?  इस के क्या मायने हैं?  देश के लिए कितना संकट है?  इन परिस्थितियों के बारे में हमें ग़ौर करना भी चाहिए। 

ज़ाहिर सी बात है कि जनसंख्या अगर बढ रही है तो हमारे पास जो उपलब्ध संसाधन है, वो भी कम हो जाएंगे, और जो हमारा खज़ाना है वो भी धीरे धीरे घटता चला जाएगा, खजाने का मतलब ये है कि भुमि के अन्दर से प्राप्त होने वाली वस्तुएँ तेजी से घटती जा रही है, क्योंकि जनसंख्या तेजी से बढ रही है, उन संसाधनों की समाज के प्रत्येक सदस्य को प्राप्त नहीं हो रही है, तो इसका मतलब ये बात उचित है कि जनसंख्या नियंत्रण होना चाहिए, वैसे भी जनसंख्या नियंत्रण हो रहा है और लोग खुद जागरूक हो रहे हैं ,। लोग खुद देश और समाज की परिस्थितियों को देख कर ही जनसंख्या नियंत्रण को अपने वश में कर रहे हैं। 2014 से पहले की सरकारों ने देश के अन्दर समाज को जागरूक किया और सार्वजनिक स्थानो पर स्लोगन ( नारे)  जो समाज को जागृत करे ऐसे नारे लिखवाए और प्रचार प्रसार भी किया गया। तो यकीनन समाज के अन्दर काफी हद तक जागरुकता आई है इस में कोई शक की बात नहीं है , जहाँ पर ज्यादा शिक्षित लोग है, वहाँ पर जनसंख्या को लेकर सोच समझ कर कदम उठाया गया है। हाँ ये भी बात सही है कि जहाँ पर या जिस समाज में शिक्षा की कमी हो वहाँ पर हालात काफी नाजुक है। 
भारत विश्व🌏 में जनसंख्या के हिसाब से दूसरे नंबर पर है, पहला नबंर चाईना का है  । तो चाईना में जनसंख्या नियंत्रण पर सख्त कानून लागू भी और वहाँ की आबादी भी काफी भारत से कयी गुना शिक्षित और जागरूक है, तो उनहोंने इस कदम को उचित ठहराया है। जब भारत की बात करें तो, भारत काफी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है और लोगों के अन्दर कुछ हद तक जागरूकता की  कमी भी है। अगर सरकार जनसंख्या नियंत्रण पर संसद में कानून लाती है और अगर कानून पास भी हो जाता है और हो भी जाएगा, कोई शक की बात नहीं है। मगर लोग कितने उस कानून के मुताबिक चलने की हिमायत करेंगे, ये बात कानून के बाद की है। 

आंकड़े ये बता रहे हैं कि 2030 तक भारत की जनसंख्या चाईना को भी पार कर देगी। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर पर इस बात का जिक्र किया कि हमारे देश की जनसंख्या लगातार तेजी से बढ रही है, इस बात की हमें सख्त चिंता है, एक तबका जो जागरूक है वो जनसंख्या को नियंत्रण में लेकर चल रहा है और दूसरा तबका जो अनपढ़ और गरीब तबका है जो जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। उनका इशारा किसी विशेष समाज को लेकर था, अच्छी बात ये है कि उन्होंने उस समाज का नाम नहीं लिया। जब देश के अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर लाल किले की प्राचीर से सम्बोधन दिया था कि जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और इस के जिम्मेदार मुस्लिम समाज है। 2021 तक भारत की जनसंख्या 132 करोड़ हो जाएगी। 
अच्छी बात तो ये है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जरूर बात कही है मगर  आज सबसे ज्यादा यूवा आबादी वाला देश भारत  है, उन यूवाओ के लिए रोजगार को लेकर कोई बात नहीं की, ये भी अच्छी बात है शायद। 
भारत में महीलाएं जो बच्चों को जन्म देती है उनका हम कुछ जिक्र करते हैं धर्म के अनुसार, बाद में कुछ राज्यों की स्थिति के बारे में जिक्र करेंगे। 
1955 से लेकर यानि 2005 तक का जिक्र 

हिन्दू धर्म में प्रति महिला बच्चे को जन्म देती है उस का रेस्कयू 
2.59  जो कि अब 1.3 पर आ  गया है। 
मुस्लिम मे 3.40 था जो कि अब 2.62 पर आ गया है। 
ईसाई धर्म में 2.4 था
क्रिश्चियन में 1.95 था 
बुध्दिष्ट में 2.25 था। 

अब राज्यों की स्थिति 
बिहार राज्य में प्रति महिला 2.5 यानि ढाई बच्चे पैदा करती है  
गुजरात में 1.9  बच्चे महिला पैदा करती है। मध्यप्रदेश में 2.0 है। 
जम्मू कश्मीर में जो मुस्लिम बहुल आबादी वाला राज्य है वहाँ पर 1.5  है जो कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। 


भारत में यूवाओ की आबादी बढ रही है और प्रधानमंत्री द्वारा बेरोजगारी को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया, भारत में अगर आत्महत्या या खुदकुशी होती है तो उस में दो वर्ग निकल कर सामने आते है वो है- बेरोजगार यूवा और किसान। दोस्तों जो में आप को आंकड़े बता रहा हूँ इससे आप जरूर विचलित होंगे - 
1.     2001 से 2017 तक यानि बीते 17 वर्षों में किसानों की तादाद 2,64,152  है जो इन किसानों ने खुदकुशी की है। 
अब दूसरी स्थिति जरा समझ लीजिये
2. जो कि छात्रों की है 1,17,874 ऐसे छात्र है जो कि परीक्षा में फैल हो जाते हैं, जिन्होंने अपने जीवन को त्याग दिया। 
3.तीसरी स्थिति का भी जिक्र कर लेते हैं 
जो बेरोजगार यूवक है 1,67,606 ऐसे विद्यार्थी है जिन्होंने बीते 17 सालों में खुदकुशी की है। 

हमारा ध्यान ⚠ उस दिशा में जाता ही नही है, बड़ी अजीब ओ ग़रीब स्थिति है, हम किसानों का जिक्र करके बच जाते हैं, मगर न किसानों की समस्या का समाधान होता है और न ही बेरोजगार यूवाओ और छात्रों की समस्या का हल भी नहीं होता है और न ही उन्हें रोजगार दिया जाता है।। 

बीते 17 साल की स्थिति हर दिन 42 किसान प्रतिदिन खुदकुशी करता है, मगर बीते चार साल में किसान प्रतिदिन 41 खुदकुशी करता है यानि एक कम हो गया। 

बीते 17 साल में 18.9 छात्र प्रतिदिन खुदकुशी कर लेते हैं मगर बीते चार साल प्रतिदिन 24छात्र खुदकुशी करते हैं। 

बेरोजगारों की तादाद बीते 17 सालों में हर दिन☀ 27 बेरोजगार खुदकुशी के शिकार हो जाते हैं। 
बीते चार साल में 29.6 छात्र हर दिन खुदकुशी कर लेते हैं। 

आत्महत्या, खुदकुशी, मोत, हत्या के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं और समाज के भीतर तनाव की स्थिति बनी हुई है। लेकिन सरकार का ध्यान इस तरफ जाता ही नहीं है, मगर सरकार का ध्यान उस तरफ बहुत है। अगर हमारी सरकार देश को  विकसित बनाने चाहत रखती है तो देश को शिक्षा के ऊपर रूपये खर्च करने पडेंगे, क्योंकि आज सरकारी स्कूल और निजी स्कूल की कार्यशैली में दिन रात का अंतर क्यों आ गया है। जरा सरकार को सोचना चाहिए और सरकारी स्कूलों पर अगर सरकार तवज्जो दे तो यकीनन देश की स्थिति में काफी बदलाव आएगा। 
आज अगर सरकारी कर्मचारी और राजनेताओं के बच्चे निजी और हाई क्लास के विध्यालय में दाखिला लेता है, मगर एक सरकारी स्कूल में गरीबों के बच्चे और मध्यम वर्ग के विद्यार्थी पढते है। तो भला आप बताओ भारत विकसित केसै होगा, आज भारत के अन्दर बहुत सारे सरकारी स्कूल है मगर उस विध्यालय की स्थिति बदल से बदतर है, उस स्थिति का जिम्मेदार कोन?  सरकार या हम। आखिर बड़ा सोचनीय विषय है। 
मुख्य बात ये है कि हमारे पास शिक्षा सिर्फ कागज़ और डिग्री तक ही सीमित है, उस के बाद रोजगार की कोई गारन्टी नहीं है, तब यूवा मजबूर होकर खुदकुशी कर लेता है। हम देशको डिजिटल इंडिया🇮🇳 बनाना चाहते हैं मगर ज्यादातर आबादी अनपढ़ है, बताओ वो आबादी डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कैसे करेंगे। हर देश के विकास का पैमाना शिक्षा और संसाधनों पर टिका होता है, भारत के अन्दर संसाधनों की कोई कमी नहीं है, मगर हमारे पास उचित शिक्षा🎒🏫📚🎓 नीति लागू नहीं है। पूरा देश का एक पाठ्यक्रम नहीं है।


आज का मेरा लेख जनसंख्या नियंत्रण को लेकर था, जो कि जनसंख्या नियंत्रण करना हर आदमी को जरूरी है, क्योंकि आप को पता है कि भारत के अन्दर जनसंख्या तीव्र गति से बढ रही है और संसाधनों की मांग भी बढती जा रही, हमें और आप को सोच समझ कर कदम उठाना चाहिए। अगर सरकार इस विषय पर कानून लाती है तो भी ठीक है, अगर नही भी लाती है तो भी ठीक, मगर भारतीयों को सोच समझ कर कदम उठाना चाहिए। 


दोस्तों👭👬👫 धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया, आप लोग यकीनन मेरा लैख पढते है, तो आप लोग मुझे सुझाव भी देते रहे ं और आगे भी पोस्ट को लिंक के जरिये भी दूसरे भाईयों तक शैयर करें। 
एक बार फिर धन्यवाद🙏💕 पोस्ट पढने के लिए। 
में आप का दोस्त लेखक, ब्लोगर, और स्वतंत्र विचारक मुराद खान जयसिंधर।। 

    ज   य    हिं   द     जो   ये   भारत।। 
6378616491


जम्मू कश्मीर में अभी तक बवाल क्यों?

जी हाँ दोस्तों आज बात जम्मू कश्मीर की की जाएगी, क्योंकि जम्मू कश्मीर जो पहले था, अब वो नहीं रहा, इस स्थिति के बारे में आप को भी पता है काफी। पहले भारत का राज्य था और भारत का अभिन्न अंग भी था लेकिन अब एसा क्या हुआ कि मोदी सरकार को जम्मू कश्मीर पर धारा 144 लागू करके अवाम की की आवाज को दबा देना और जम्मू और लद्दाख को दो केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा देना, ये सब करने के पीछे सरकार का क्या रूख है?  

अनुच्छेद 370 और 35 A  हटाने की प्रक्रिया:- 
सबसे पहले तो ये समझो कि ये धारा नहीं है बल्कि ये एक अनूच्छेद है जो 370 और 35 a है जो कि ये कश्मीर इस अनुच्छेद में बंधा हुआ था, आज राजनेता और अवाम को ये पता नहीं कि धारा है या अनुच्छेद है। अब इस को हटाने की प्रक्रिया क्या है?  वो जरा समझ लीजिये पहली बात अनुच्छेद 370 को खत्म करने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है। ये अनूच्छेद हटाने की मांग जम्मू कश्मीर के भवन में में ही उठनी चाहिए और वहाँ से ये मसला केन्द्र सरकार के पास जाएगा, फिर केन्द्र सरकार इस पर बिल लोकसभा में पैश करेगी ,लोकसभा में पास होना अनिवार्य है, उसके बाद राज्यसभा में बिल जाएगा वहाँ से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के पास जाएगा, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही ये बिल कानून का रूप इख़्तियार करेगा। 

केन्द्र सरकार किस तरह बिल लायी है?  
हमारी केन्द्र सरकार तो बहुत ही तगड़ी चलती है और जो चाहती है वो कर लेती है, उनहोंने न तो कश्मीर की अवाम की सुनी और न ही प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं की सुनी। जो कानून लाया गया वो तुरंत एक  घंटा पहले लोकसभा के सदस्यों को प्रतियां दी गई, मगर ये सब जल्द बाजी में। हालांकि जो कानून संसद में पैश करना होता है उस को चार से पांच घंटे पहले लोकसभा सदस्यों को बताना होता है और वो सदस्य इस पर अध्ययन करते हैं, उसके बाद लोकसभा में सदस्यों से राय ली जाती है, फिर बहुमत के हिसाब से ही बिल को पास कराया जाता है। आप को बता दे कि जम्मू कश्मीर में अभी रष्ट्रपति शासन लागू जो कि वहाँ पर किसी भी पार्टी की सरकार नहीं है। तो कानून लाना भी गलत है, क्योंकि इनके पास बहुमत है जो चाहे वो कर सकते हैं।

अगर अनूच्छेद को उचित तरीके से हटाते तो इतना जम्मू कश्मीर में बवाल उत्पन्न नहीं होता, क्योंकि उस कानून के साथ बहुत सारे लोग खड़े होते तो इतनी राज्य की अवाम परेशान नहीं होती और न ही भारी सिक्योरिटी का इन्तिजाम करना पड़ता। अब आपने जो यह कदम उठाया है चाहे उचित हो या अनुचित हो, इस फैसले के ख़िलाफ़ है अवाम, और आप को उस अवाम को दबाने के लिए या मनाने के लिए भारी बल का सेना💂💂💂 के जरिये से प्रयोग करना पड़ रहा है। तो यकीनन आप को आर्थिक स्थिति मतलब देश की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। देश पहले से ही आर्थिक स्थिति में डूब जा रहा है, लेकिन अब पूरा ही डूबने वाला।

अनुछेद 370 और अनुच्छेद 35 A हटाने के क्या परिणाम आए हैं?  


हाँ सरकार ने जम्मू कश्मीर का जो विशेष दर्जा था वो समाप्त करके, उसकी जगह केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया और जम्मू अलग और लद्दाख अलग यानि दो केन्द्र शासित प्रदेश हो गये। लेकिन जम्मू कश्मीर एक मुस्लिम बहुल इलाका है, वहाँ पर 70 फीसदी मुस्लिम आबादी है। जम्मू कश्मीर का एक हिस्सा लद्दाख जहाँ पर सिक्ख और पंडित है, वहाँ उन की आबादी ज्यादा है। खैर जो भी है लेकिन वहाँ की अवाम इस फैसले का सख्त विरोध कर रही है उनको भारी बल की वजह से ही दबाव बना कर रखा गया है और लगभग 1000 मोतें हो चुकी है गन और बैलट की वजह से, यानि जो भी लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी करे या विरोध करे तो सेना को पीछे से खुला आदेश था कि उस को गोली🔫💉 से उड़ाया जाए। तो वाकई सरकार लोकतंत्र के लिए मशहूर है या राजतंत्र के लिए मशहूर है। लोकतंत्र में ऐसे कानून को बनाने की नोबत क्यों पड़ी जिससे सरकार के फैसले को अवाम ( जनता)  ने सख्त विरोध किया और अभी भी जारी है। और उसके बावजूद भी  सरकार को भारी  नुकसान उठाना पड़ रहा है। 


आज भी लोग घरो में बंद है, सारा काम काज ठप है और स्कूल🏫 कोलेज सब बंद है, लोगों की सम्पर्क व्यवस्था बिल्कुल ठप है, हालांकि सरकार ने टेलीफोन लगाने का एलान किया है उस के लिए सरकार ने 96,000 लगाए थे दो चार दिन सम्पर्क व्यवस्था ठीक तरह से चली बाद में वो भी बंद हो गयी, और उस में इनकमिंग कोल की व्यवस्था थी, आउट गोइंग काल की व्यवस्था बंद हो गई थी। कयी लोगों की शादियां होनी थी वो भी दबाव के चलते बंद हो गई और उन्हें मजबूरन शादियां रोकनी पड़ी। कुछ जगह कर्फ्यू हटाया गया है और सामान्य हालात हैं लेकिन अभी तक बड़ा तबका इस कानून के खिलाफ उग्र विरोध कर रहे हैं और उन्हें विशेष दबाव के तहत दबाया गया है और उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और वहाँ के प्रतिनिधित्व करने वालों को दबा कर रखा गया है  शायद ही लोकतंत्र में एसा हो रहा है तो समझो कि अब लोकतंत्र की बजाय राजतंत्र ने स्थान ले लिया है।

अब जम्मू कश्मीर का सहारा कौ
ये मसला भारत का है किसी और देश का नहीं है, लेकिन इस मसले पर पाकिस्तान हमेशा अपना राग अलापता आया है कि कश्मीर हमारा है हमारा है, लेकिन उनके कहने से कश्मीर उनका नहीं होगा ये बात सत्य है। अभी जब जम्मू कश्मीर में विशेष राज्य का  दर्जा हटाया गया, तब भी पाकिस्तान ने दखल देने का बहुत प्रयास किया मगर उनकी कोशिश नाकाम रही, उनहोंने हर स्तर पर फैसला लिया, भारत और पाकिस्तान के जो रिश्ते खत्म किये और सम्पर्क व्यवस्था खत्म कर दी बिलकुल । और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुस्लिम मुमालिक हुकमरानों से भी बात कर जम्मू कश्मीर के मोज़ू में दखल देने का प्रयास किया मगर वहाँ से भी उन्हें संतोष जनक जवाब नहीं मिला। फिर उनके पास एक और रास्ता था वो था यू एन ओ   वहा सयूक्त राष्ट्र संघ  में भी दखल दिया मगर वहाँ पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम रहनुमा सैय्यद अकबर खान ने पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में जवाब दिया।पाकिस्तान के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा है, आखिर उन्होंने अपने आप से हार मान ली। अब जम्मू कश्मीर का कोई सहारा नहीं है, जनता खुद ही सहारा है। और इस फैसले की जिम्मेदार वहाँ की अवाम ही है।
आखिर कोई भी मुल्क जम्मू कश्मीर के हालात के बारे में क्यों नहीं पूछता, लगता है सोची समझी प्लानिंग है। लेकिन एक आम आदमी का दिल इस बात को लेकर दर्द करता है कि वहाँ के लोगों को इतना भारी बल पर क्यों दबा कर रखा है, भला वो लोग आपके फैसले को सम्मान जनक कैसे स्वीकार करैंगे। जम्मू कश्मीर के लोगों के पास अल्लाह के सिवा कोई उनका सहारा नहीं है और उन लोगों को अल्लाह के सामने हाथ उठाने चाहिए और दूसरी अवाम के सामने मेरी आप से गुजारिश है कि आप भी इन भाईयों के लिए दुआ 🙏करें, अल्लाह पाक इन्हें सलामत रखे।



दोस्तों👭👬👫 धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया।

   जय हिंद जय भारत।।

में आप का दोस्त लेखक मुराद जयसिंधर ।






Why are Indian muslims bacword.हिन्दुस्तान का मुसलमान पिछड़ा क्यों? जानिए इस रिपोर्ट से।

हिंदुस्तान का मुस्लमान पिछड़ा क्यों?                          जी हा दोस्तों आज में बात कर रहा हूँ हिन्दुस्तान के मुसलमानों की, जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है, और सब को पता है कि हिन्दुस्तान का मुसलमान पिछड़ा है। आखिर मुसलमानों के पिछड़ेपन का क्या कारण रहा होगा। 

आज भारत के अन्दर मुसलमानों की जनसंख्या लगभग 25 करोड़ है। और मुसलमानों का कोई खास एक राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व नहीं है, हर राज्य में मुसलमान दूसरी पार्टियों के साथ जुड़े हुए है, वो संगठन उनका वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन उनकी मूलभूत सुविधाओं की ओर कोई भी संगठन ध्यान नही दे रहा है, मुख्य कारण ये है कि मुसलमानो के पास शिक्षा🎒🏫📚🎓 नहीं है और बिना शिक्षा के उनके अन्दर जागरूकता नहीं है, इस वजह से मुसलमान फिरका परस्त पार्टियों में बंटे हुए है और उनका ज़िम्मेदार कोई संगठन नहीं है।
आज भारत का मुसलमान किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि बहुत सारे क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है, कारण बस एक ही है वो है  शिक्षा। हम लोग अपने परिवार के सदस्यों को शिक्षा हासिल नहीं करवाते हैं। अगर हमारे पास शिक्षा होती तो हम लोग राजनीति में चले जाते, हम लोग बहुत सारी नोकरियों में बड़े बड़े पदों पर चले जाते, हम लोग निजी क्षेत्र की कंपनियों में चले जाते, हम लोग बड़े बड़े बिजनेस मैन बन जाते थे, लेकिन हमने शिक्षा के ऊपर कभी भी महत्व नहीं दिया, अगर महत्व दिया होता तो आज ये हालात नही होते हमारे। 
आज सरकार आरक्षण गरीबों को दे रही है, जैसे sc st को दिया, लेकिन उस आरक्षण से भील और मेघवाल समाज का भला नही बल्कि मीणा जाती का भला हुआ। क्योंकि मीणा सबसे ज्यादा है, और भील सबसे कम अनुपात में है इसलिए उस आरक्षण का फायदा मीणा जाती को मिल रहा है। वही आरक्षण OBC  कोटे से अल्पसंख्यकों को भी आरक्षण दिया गया है, लेकिन उस आरक्षण का फायदा जाट समुदाय को मिल रहा है, और मुसलमानों का अनुपात बहुत ही कम है। लेकिन उस आरक्षण का फायदा मेहनत करने वालों के लिए कोई मायने नहीं रखता। 
आज में आप लोगो को सच्चर कमेटी की कुछ तथ्य बताने जा रहा हूँ, आप लोग इन तथ्यों पर गौर करें और अपने आप को समझने की कोशिश करैं मतलब मेहनत करें। 
U. P. A सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जस्टिस राजेन्द्र सच्चर की अध्यक्षता में समीति गठित की थी। उन्होंने 403 पैज वाली रिपोर्ट 30 नवम्बर 2006 को लोकसभा में पैश की, और उस रिपोर्ट में क्या क्या खुलासा किये गए हैं जो आप को जानना बहुत जरूरी है। बता दे ं इस समीति में तीन मुस्लिम सदस्य भी थे
सय्यद हामीद, ज़फ़र महमूद, और डो अबुसलेह शरीफ। 

1.6-14 वर्ष के बच्चे 75 प्रतिशत विद्यालय छोड़ देते हैं। 
2.17 वर्ष के बच्चे 26 % 10  वीं पास करते हैं। 
3.  50 % 8 वीं पास करते हैं। 
4.  62%   12 वीं उत्तीर्ण करते हैं। 
5.मुसलमानो की कुल आबादी का 4.9 % सरकारी नोकरी में है। 
6.  3.2% उच्च पदों पर लोग है, जबकि दलित जैसी जातियों में 15 %लोग सरकारी उच्च पदों पर है। 
7.पुलिस कांस्टेबल में मात्र 6% ही मुस्लिम है ।
8.परिवहन क्षेत्र में 4.4% ही है। 
9. रेलवे में 6.5 सरकारी कर्मचारी है। 
9
10.बैंक में 4.5% ही सरकारी कर्मचारी हैं। 
11.जो मुस्लिम लोग ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं उन लोगों में 62% लोग ऐसे है जिनके पास पट्टा सुदा ज़मीन भी नहीं है। 
12.100 में से 33% लोगों के पास ही रोजगार है, बाकी के सब बेरोजगार है। 
13.भारत में 584 कुल मुसलमानो की जातियाँ हैं, जिनमें 80 जातियाँ पैशागत या जातीय कार्य करती है जो कि सख्त पिछड़ी जातियाँ हैं। 


सच्चर समिति द्वारा दिए गए सुझाव-
मुस्लिम बहुल इलाकों में स्कूल, आई टी आई, पोलोटेक्निक कोलेज।  मुसलमानो को छात्रवृत्तियां देना, बैंक शाखाएँ उपलब्ध करवाना  ,ऋण सुविधा उपलब्ध करवाना । रंगनाथ मिश्रा जी की कमेटी का प्रमुख सुझाव था कि मुसलमानो को अल्पसंख्यक कोटे से 10 फीसदी आरक्षण देना। 

जब कांग्रेस सरकार ने इस रिपोर्ट को लोकसभा में पैश किया गया तब लोकसभा सदस्यों से प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के बारे में ली गयी तब भाजपा के कयी सदस्यों ने इस रिपोर्ट के बारे में विरोध किया
#गिरिराज - अल्पसंख्यक का दर्जा समाप्त होना चाहिए मुसलमानो का। 
#शिवराज सिंह चौहान- ये रिपोर्ट साम्प्रदायिकता की भावना को बढ़ावा वाली रिपोर्ट है, इस को नहीं लागू करना चाहिए। 
#दीन दयाल उपाध्याय- मुसलमानो को परिषकृत करने की जरूरत है। 

#सावरकर - मुसलमान और ईसाई भारत के नहीं है ब्लकि ये लोग बाहर के है। 

तो दोस्तों ये थी कुछ सच्चर समिति की सिफारिश और खुलासे, और उस समिति की प्रति क्रिया भी आप लोगो ने पढ ली है, जो लोग भाजपा को वोट देते हैं वो सावधान और जो बाकी पार्टियों के वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल होते हैं वो भी सावधान। तो दोस्तों में आप से गुजारिश करना चाहता हूँ कि आप लोग अपने भाई बहनों और संतान को दुनिया  की तालीम और दीनी तालीम जरूर दिलावें, ता की आप का बच्चा एक बड़ा अफसर तो न पर छोटा सा कर्मचारी जरूर बनेगा, फिर उसी रास्ते धीरे धीरे प्रगति भी कर लेगा  । आज हम मुसलमान फालतू के खर्चे ज्यादा करते हैं, अपने पास हिसाब किताब निश्चित नहीं रहता है, हम लोग शादी ब्याह में और औसर में कयी गुना फालतू में खर्च करते हैं जो कि ये इस्लाम के खिलाफ कर रहे है। हमें अपना पैसा सोच समझ कर खर्च करना चाहिए। हमारी सहायता सरकार करे या ना करे ये कोई जरूरी नही है, मगर हमें जो अल्लाह पाक ने जो दिमाग़ दिया है उसके ज़रिए जरूर सोच समझ कर कदम उठाएं। 

भाईयों आप लोगो से गुजारिश है कि मेरी बात को आप आगे तक पहुंचाए और सुझाव भी दे मुझे। धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया।
में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर।








प्रतियोगिता का समय अथार्त प्रतियोगिता की तैयारी

जी हाँ दोस्तों आज का युग प्रतियोगिता का युग है। हर कोई व्यक्ति अपनी तरफ यही चाहता है कि मैं इस प्रतियोगिता की नदी को कैसे पार कर सकूँ। सबसे ज्यादा जिस वर्ग की भीड़ है वो है विद्यार्थी वर्ग। क्योंकि स्कूल और कोलेज में पढ़ने वाला हर छात्र/ छात्रा  यही चाहता है कि मैं एक सरकारी नौकरी हासिल करूँ, और मेरी ज़िन्दगी आसानी से निकल जाए, में अपने परिवार को सही दिशा में ले जा सकूँ। हर विद्यार्थी वर्ग की यही आस होती है, वो आस हर किसी की पूरी भी नहीं होती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है, जितना बड़ा देश है उतनी ही बेरोजगारों की भरमार है। लेकिन बेरोजगारी की समस्या को  दूर करने के सरकार द्वारा प्रयास किये जाने चाहिए, वेसे भी सरकार बेरोजगारी समस्याओं का हल निकाल रही है, फिर भी उस विषय की मोनिटरिंग सही से नहीं हो पाती।
आज कल हर यूवा नोकरी हासिल करना चाहता है आज के समय में नोकरी मिलना बहुत ही मुश्किल काम हो गया है, क्योंकि नोकरी उन्ही को जल्दी से मिलती है जिनको मार्गदर्शन मिलता है और साथ में कठिन परिश्रम की सख्त जरूरत पड़ती है। आज के वक्त में कयी यूवा कठिन मेहनत तो करते हैं पर वो एक बड़ी गलती कर देते हैं वो क्या है? उनके पास सही से रणनीति नहीं होती है और मार्गदर्शन नहीं होता है जिसकी वजह से वो लोग पीछे रह जाते हैं। अथार्त अपना लक्ष्य हासिल करने से चूक जाते हैं। आज कल के बहुत सारे यूवा लोग अपने उद्देश्य की रणनीति नहीं होती है उनके पास, इसलिए वो उद्देश्य भटक जाते हैं और सफलता🏆💪 से चुक  जाते हैं। बिना कोचिंग के आप जल्द ही सफल हो सकते हैं इसके लिए में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु बता रहा हूँ जो आप इन बिन्दुओं पर जरूर चर्चा करें।
Competition exam प्रतियोगिता की परीक्षा में पास होने के तरिके
@    मित्रों में आप को प्रतियोगिता की परीक्षा की तैयारी से संबंधित कुछ ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु बताने जा रहा हूँ जिसको लेकर 100 % सफल हो सकते हैं। जो बिंदु में आप को बताने जा रहा हूँ, जरूर आप को पसंद आएंगे और आप की तैयारी में मदद करेंगे। 

1.सभी विषयों की अलग अलग पुस्तक रखने:- अगर आप सरकारी नोकरी की तैैयारी कर रहे हो तो आप प्ररत््य्््य्य््ं्््य्् 
प्रत्येक विषय की महत्वपूर्ण पुस्तक को अलग अलग छांट कर रखें, किसी भी भर्ती परीक्षा में एक गाईड नहीं चलेगी बल्कि सभी विषयों की अलग अलग गाईड या पुस्तक खरीद कर पढाई करें। 

2.अपना ग्रूप बनाएं:- 
अगर आप लोग मोबाईल या कम्प्यूटर पर ओनलाइन तेयारी कर रहे है तो आप लोग वाट्सएप, फैसबुक, टेलिग्राम और इन्टरनेट जैसे सोसलमिडिया पर कम्पीटीशन एज्युकेशन जैसे ग्रूपों में जुड़ जाईए और अपनी तैयारी का सिलसिला जारी रखिये। 

3.एकान्त व शुद्ध वातावरण में पढें:-
आप प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे है तो एकान्त वास में पढें जहाँ आप को पढाई में खलल नहीं होता हो, ता की आप के द्वारा पढा हुआ याद रहे। अगर आप के नज़दीक कोई लाएबरेरी हो तो वहाँ पर एकान्त में जाकर पढाई करें। 

4.एक ही लक्ष्य बनाएं:- आप जो भी बनना चाहते हैं, उस के लिए आप पूर्ण तैयारी करें और एक उद्देश्य की तैयारी जारी रखैं। एक लक्ष्य की तैयारी करते रहोगे तो जल्दी सफल हो जाओगे। धन्यवाद। 

5.समय सारणी बनाएं:- आप जो भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो सबसे पहले जरूरी है कि आप अपना टाईम टेबल बनाएं, फिर उसमें सभी विषयों को बराबर समय दीजिये और जो विषय कठिन है उस को ज्यादा टाईम दीजिये। 

6.समय का सदुपयोग करें:--आप प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो उस के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि समय को फालतू में न गंवाते हुए अपना कीमती वक्त पढाई में लगाएं ता की आप का उद्देश्य पूरा हो सके। 

7.अन्य प्रतियोगिता  की परीक्षाएं भी दे ं:
कम्पीटीशन की तैयारी करने वालों के लिए सबसे जरूरी है कि आप के सामने आने वाले हर परीक्षा देते रहे ता की आपको उन भर्ती परीक्षा से सीखने के लिए बहुत कुछ मिलता है। जिससे आप को जल्दी अपने उद्देश्य में कामयाबी मिल सकती है। 

8.ज्यादा अंधविश्वास से बचें। कयी विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी करने वाले, अंधविश्वास में पड़ जाते हैं कि मेने बहुत सारी परीक्षाए दी अभी तक सफल नहीं हुआ। मेरी किस्मत अच्छी नहीं है,मेरा लक साथ नहीं दे रहा है, अब मैं तैयारी करके क्या करूँ मैं। 

9 सब्र रखें। 
बहुत सारे विद्यार्थी 5-6 परीक्षाए दे कर हिम्मत हार जाते हैं कि अब मेरा नम्बर नहीं आएगा, अब परीक्षा दे कर क्या करूँ मैं। इसी वजह से कयी विद्यार्थी अपनी हिम्मत हार जाते हैं। तो ये आप सबसे बड़ी गलती कर रहे हो। आप अपनी कोशिश जारी रखैं, बेशक हिम्मत करने वालों की हार कभी नहीं होती है।

10.पूरी मेहनत व लगन से पढ़े ं। 
आप अपने उद्देश्य की तैयारी कर रहे है तो उस को पूरी मेहनत व लगन के साथ तैयारी करें। पढाई को रूचि में लेकर काम करें। 

दोस्तों आप को यह लेख बहुत पसंद आया होगा। मेरे साथ जुड़े रहें और मुझे अपने लेख के बारे में सुझाव भी देते रहे ं ताकि मुझे नयी नयी जानकारी सीखने को मिले।

में आप का दोस्त लेखक वक्ता मुराद खान जयसिंधर।


Triple Tlaaqq तीन तलाक

आज मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल को लोकसभा में पास करके , राज्य सभा में बिल को पास करवा दिया और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही तीन तलाक बिल कानून का रुप ले लेगा। इस बिल को मोदी सरकार तीसरी बार संसद में पेश कर रही है। हालांकि उससे पहले मोदी सरकार के पास राज्यसभा में अल्पमत संख्या की वजह से बिल कयी बार वापस स्टैडिंग कमेटी के पास बिल भेजा गया। जब मोदी सरकार दुबारा बनी तो उनके पास लोकसभा में तो बहमत तो थी ही मगर राज्यसभा में भी सदस्यों की संख्या में काफी इज़ाफ़ा हो गया दूसरे दल जो NDA में शामिल हैं, कुल मिलाकर उनकी राज्यसभा में बहुमत  हो गई है, और अब जो चाहे वो कर सकता है क्योंकि उनकी लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत हो गई है, अब जो उनकी मर्जी होगी वही होगा  ,विपक्ष में बैठे लोग कुछ भी करें, उनके आगे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। 

तीन तलाक बिल मुस्लिम औरतों के खिलाफ ही क्यों लाया गया?  तीन तलाक का मुद्दा और जम्मू कश्मीर की धारा 370 और 35 a भाजपा के मेनिफेस्टो में ये मुद्दा शामिल था, क्यों लाया गया और किसलिए लाया गया ये तो वो लोग ही जानते हैं जो चाहे तो वो अपनी इच्छा अनुसार कर भी सकते हैं, किसी की राय मशोरा  सुनने की कोई जरूरत नहीं है। 

तीन तलाक क्या है?  
तीन तलाक का मतलब है कि शादी शुदा जोड़ा अगर, उनके अन्दर कोई अनबन हो जाती है तो पति अपनी मर्जी के अनुसार तीन बार तलाक तलाक तलाक शब्द बोलते ही शादी टूट जाती है  हालांकि शादी टूटती नहीं, बल्कि सख्त गुनाह (पाप)  होता है। तीन बार शब्द तलाक बोलने से शादी नहीं टूटी है। उसके लिए 90 दिन यानी 3 माह का समय होता है, उस दौरान पति और पत्नी के मध्यस्थता आलिम और उनके घर के समझदार इन्सान ही करेंगे। अगर 90 दिन के अन्दर तक अगर समझोता नहीं होता है तो तलाक वास्तव में हो जाती है। आज कल के यूवा लोग मीडिया पर या लिखित मे या मोखिक  रुप से तलाक बोल कर अपनी पत्नी को बिना सलाह मशोरा के छोड़ देते हैं जबकि ये बिदअत है और सख्त गुनाह है। हालांकि शरिया के मुताबिक शादी नहीं टूटती। 

सुप्रीम कोर्ट ( उच्चतम न्यायालय)  का कहना है कि अगर तीन बार एक शब्द तलाक तलाक तलाक बोलता है या मीडिया के ज़रिए या लिखित में अगर अपनी पत्नी को को छोड़ने की सूचना दे देता है तो शादी यकीनन नहीं टूटती है None aset.   यहाँ तक सुप्रीम कोर्ट ने वही कहा है जो शरियत कह रही है तो सरकार ने कैसे इस फैसले को अपनी मर्जी से बदल दिया। और किसी से सलाह मशोरा भी नहीं किया, लगता है अब मुल्क के अन्दर लोकतंत्र की बजाय राजतंत्र ने स्थान ले लिया है। 

सरकार ने जो कानून बनाया है उस कानून के तहत तीन बार तलाक बोलने वाला आदमी जाएगा सीधा जैल , न कोई पूछताछ न कोई राय मशोरा, और वो भी तीन साल की जैल, और जैल में बैठा आदमी अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता दैगा, आखिर आप लोग सोचो वो आदमी जैल में बैठा कैसे देगा भत्ता। 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बना हुआ है😝सरकार ने उस बोर्ड को भी नहीं पूछा कि आखिर आप के मुस्लिम समाज में तलाक के मसले को कैसे हल करें और उसके सही रास्ता क्या होना चाहिए। अगर सरकार उनको अपने पावर के जरिये यहाँ तक कह सकती थी कि आप अपने समाज में तीन तलाक के मुद्दे को खत्म करने का प्रयास करें नहीं तो हम संसद में बिल पैशन करके कानून बनाएंगे फिर आपको स्वीकार करना पड़ेगा। यहाँ तक भी नहीं बोला मगर बिना किसी को पूछे सीधा ही बिल लाए और पास करवा दिया। वो भी एक मुस्लिम समाज के विरुद्ध, बाकि सब साफ है ।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी इस बात को गंभीरता से लेता आया है कि मुस्लिम समाज में तलाक का मसला कम से कम हो और उसको सुलझाने का प्रयास करता आ रहा है। वैसे भी मुस्लिम समाज में इतना तलाक का मसला नहीं होता है जितना गैर इसलाम का होता है। खैर जो भी कानून बनाने की शक्ति संसद को है, और संसद में जिस राजनीतिक पार्टी की बहुमत है तो वो जो चाहे उधर पलट सकती है।






हातिम ताई की कहानी📖

दोस्तों आज एक अजीब कहानी बताने जा रहा हूँ, आप हज़रात जरूर से जरूर पढ़ें और इससे शिक्षा🎒🏫📚🎓 लैं।
किसी गाँव में एक अमीर और दौलतमंद इन्सान रहता था जो कि वह अमीर और बड़े बड़े र ईस लोगों को खाना खिलाता था। उसी गाँव के पास में गरीब और दरवेश रहता था, उस का नाम हातिम ताई था, वो एक दिन भुखा था, उसने सुन रखा था तब हातिम ताई उस आदमी के घर🏡 गया और वहाँ पर सफेद कपड़े पहने हुए बहुत सारे लोग बैठे थे, तब उस घर के मालिक ने मुलाकात भी नहीं की और पानी की सलाह तो दूर बैठने तक की जगह भी नहीं दी। और हातिम ताई को उस आदमी ने वहाँ से वहाँ से भगा दिया और वह दरवेश बाजार की तरफ एक दर्जी के पास गया और दर्जी से कहा कि मुझे नये कपड़े सफेद किराए पर चाहिए, और परसों तक वापस लोटा दूंगा। तब हातिम ताई नये कपड़े पहनकर उस आदमी के घर गया और उसने सलाम किया और घरके मालिक ने जवाब  भी दिया, हाल चाल भी पूछे, पानी भी पिलाया गया, जब खाना आगे रखा तब उस ने लुकमा उठा कर अपने कपड़ों पर रखा, तब उस आदमी की नज़र हातिम ताई पर पड़ी और कहा, ये कर रहे हो, पागल हो गये क्या?  तब हातिम ताई ने जवाब दिया जनाब में पागल नहीं हूँ, पागल आप लोग हैं, क्योंकि मैं आदमी वही हूँ, जब मैं पहली बार पुराने गंदे कपड़ो में आया था तब आपने मुझे बैठने की जगह भी नहीं दी और पानी की बात तो दूर रह गयी। जब मैं नये कपड़े पहनकर आया तो आप ने मुझे इतनी बड़ी इज्जत दी और अच्छा खाना परोसा। क्योंकि आप लोग व्यक्ति की इज्जत नही करते हौ बल्कि आप लोग लोगों के कपड़ो और फैशन को देखते हैं। तब उस आदमी को शर्म महसूस हुई और फोरन उस हातिम ताई से माफी मांगी। 

दोस्तों👭👬👫 जीवन में इन्सान कै रंग रूप और फैशन 💄💋👠👝💍को कभी मत देखना। व्यक्ति के दिल💜❤ को जरूर देखना। क्या पता कोनसा इन्सान आप को दुआ दे कर चला जाए। 


दोस्तों एसी कहानियों को पढ कर आगे से आगे फार्वरड  करे। 

धन्यवाद 🙏💕शुक्रिया। 



मंच पर कैसे बोले,how to speak on munch

आज का महत्वपूर्ण अध्याय है मंच पर कैसे बोला जाए, बहुत सारे ऐसे लोग👫👬👭 होते हैं जिनको मंच पर बोलने के लिए कहते हैं तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है। क्योंकि उन्होंने कभी मंच पर बोलने का अभ्यास ही नहीं किया। जब कभी लोग अपने रिश्तेदार, मित्रों, और परिवार के सदस्यों से बात करनी होती है तो वे बेधड़क तसल्ली के साथ करते हैं। लेकिन जब इन लोगों को भीड़ में कभी मंच पर बोलने के लिए कहा जाता है तो इनके शरीर से पसीना छूटने लगता है। 

तो आईये मंच पर बोलने के महत्वपूर्ण मुख्य बिन्दु:-
1. लम्बी सांस खींचे, लम्बी सांस खींचने से आक्सीजन का संचार बढता है, इससे आप के शरीर का पसीना आना बंद कर दैता है।
दो मिनट आंखे बंद कर के गहरी सांस छोड़े फिर शरीर को धीरे धीरे ढीला छोडै।

2. जिस विषय पर बोलने जा रहे हो, उस विषय की अच्छी तैयारी करके जाएं।

3. जब आज मंच पर जाए तो बड़े आत्मविश्वास के साथ जाएं, और चेहरे पर मुस्कराहट होनी चाहिए।
मंच पर आराम से जाएं, हड़बड़ाए नहीं।

4.अपनी बोडी लैंग्वेज को आत्मविश्वास के साथ इशारों के साथ, रखें।

5. घबराने का प्रमुख कारण है या तो तैयारी नहीं होती है।

6. लोगों के सामने मंच पर बोलते है तो उनकी आंखों में आंखे डालकर बात करैं।

7.बार बार उसी बात को न दोहराए।

8.सीखना बंद न करें, निरंतर तैयारी करते रहे ं।

धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया, में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर
6378616491

Kashmir freedom ,कशमीर स्वतंत्र

आज का दिन बहुत ही एतिहासिक है , इस फैसले का हम मोदी सरकार का स्वागत करते हैं कि कश्मीर और भारत के बीच खड़ी धारा 370 का आज अंत कर दिया। साथ ही धारा 35 A को भी हटाया और कश्मीर के दो टुकड़े कर दिए एक लद्दाख केनद्रशासित प्रदेश और दूसरा जम्मू कश्मीर कैन्द्रशासित प्रदेश बनाने गये हैं। अब भारत के अन्दर 28 राज्य और 9 केन्द्र शासित प्रदेश है। 
मोदी सरकार ने धारा 370 क्यों हटायी ,क्या कारण रहा होगा?  आज मोदी सरकार के फैसले का देश मुबारक बाद दे रहा है, और बहुत कुछ लोग है जो इस फैसले का मुखालिफत  भी कर रहा है।
कशमीर को भारत के साथ विलय करने में महत्वपूर्ण भूमिका किसकी थी?  
जम्मू कश्मीर में विलय करने की महत्वपूर्ण भूमिका पंडित जवाहरलाल नेहरू जी और महाराजा हरि सिंह की थी। जब भारत आजाद हुआ तब जम्मू कश्मीर ने ये फैसला लिया था कि हम अपना अलग स्टेट बनाएंगे, तब उस पर पाकिस्तान विलय करने के लिए दबाव डालता रहा, तब जम्मू कश्मीर ने भारत से सहायता मांगी, तब जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर को भारत के साथ विलय करने का दबाव बनाया। तब जम्मू कश्मीर के महाराजा ने कुछ अपनी शर्तें रखी जिस की वजह से धारा 370 और 35 A को रखना पडा , तब ये ममजबूरन वाली स्थिति बनी हुई थी, तब जम्मू कश्मीर को अलग राज्य नहीं बनने देना और पाकिस्तान के साथ विलय नहीं होने देना। 
आज कश्मीर में क्या है जो 70 सालो मे ये स्थिति बनी हुई थी  और अब उस में क्या परिवर्तन हुआ है वो में आप को बता रहा हूँ। 
पहले और अब तक स्थिति में क्या अंतर है?
1.जम्मू कश्मीर में बाहर के लोग ज़मीन नहीं खरीद सकते थे। 
अब बाहर के लोग जमीन खरीद सकते हैं। 

2.जम्मु कश्मीर में विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्ष का था। 
अब कार्यकाल 5 वर्ष का होगा। 
3.संसद पहले जम्मू कश्मीर को लेकर सीमित कानून बना सकती थी। 
अब अपनी इच्छा अनुसार विस्तार से कानून बना सकती है। 
4.जम्मू कश्मीर में पंचायत के पास कोई अधिकार नहीं थे। 
अब बाकी राज्यों की तरह सारे अधिकार मिलेंगे। 
5.जम्मु कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दू,और सिक्खों को आरक्षण नहीं मिलता था। 
सरकारी नोकरियों में अब आरक्षण मिलेगा। 
6.राज्य का झंडा🏁 अलग होता था, 
अब देश का झंडा तिरंगा ही रहेगा। 

7.जम्मू कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता थी। 
अब एकल नागरिकता ही होगी, सबके पास। 

8.भारत के प्रतीको का सम्मान नही करते थे, 
अब सम्मान नही करने पर सजा मिलेगी। 
9.सूचना का अधिकार लागू नहीं होता था, 
अब सूचना का अधिकार लागू होगा।


हिन्दुस्तान का 73 वां स्वतंत्रता दिवस, 2019 अगस्त 15

दोस्तों जैसा कि आप सब को मालूम है कि हमारे मुल्क को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली थी। उससे पहले हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी का शिकार था। भारत की पहली क्रांति 1857 से लेकर 15  अगस्त 1947 के युग के भीतर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मुख़तलिफ जगहों पर लडाईया होती रही, लेकिन वास्तविक जन्गे  आज़ादी 1915 में महात्मा गांधी जी के भारत आने पर ही  कार्य योजना बना कर महात्मा गांधी के नेतृत्व में ही तीन महन आंदोलन चलाए गए।, 1.असहयोग आंदोलन, 2.सविन्य अवज्ञा आंदोलन 3.भारत छोड़ो आंदोलन।गांधी जी ने खिलाफत आंदोलन जो मुस्लिम बधुओ का उस को अपने साथ मिला लिया, और दलित, हरिजनों के लिए उद्दार का काम किया। देश के अलग अलग जगह पर भ्रमण किया और देश के किसानों की समस्याओं का निस्तारण करवाया, और गांधी जी को लोग बापू के नाम से पुकारने लगे। अगर देश को आजादी मिली तै गांधी जी के नेतृत्व में ही मिली वो भी गांधी जी दो शब्दों के पुजारी थे सत्य और अहिंसा जिनके बल पर अंग्रेजो  को झुकना पड़ा।, गांधी जी को पता था कि हमारा देश कैसे आज़ाद हो सकता है उसके लिए उसने पूरे देश का भ्रमण किया और लोगों समस्याओं को निकट से परखा और समझा  ओर उनकी समस्याओं का हल निकालने का अंग्रेजी हुकूमत से प्रयास करवाया। लेकिन गांधी जी के नेतृत्व का सभी भारतीयों ने साथ दिया और देश को आजाद होने में समय लगा, मगर देश गांधी जी के नेतृत्व में, सभी के सहयोग, सभी देशवासियों के मिल कर अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ने से देश आजाद हो गया। 
आज हमारे देश को आजाद हुएं को 732 साल हो चुके  है,और 73 वां साल लग चुका है। हमारे मुल्क ने काफी विकास की प्रगति की ,विकास के  नये नये आयाम छुए है देखा जाए तो देश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। भारत जैसा देश दुनिया में शायद ही मिलेगा, भारत की जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है, भारत के अन्दर सभी मज़हब के लोग रहते हैं और 💯💯 जातियाँ निवास करती है। भारत एक धर्म निरपेक्ष देश और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। भारत जैसे अज़ीम मुल्क में हिन्दू और मुसलमान साथ में रहना भाईचारे के साथ बड़े गर्व की बात है। लेकिन जब ये स्थिति उलट हो जाती है तो ये पूरा का पूरा खैल बिगड़ जाता है। ये काम वही लोग करते हैं जिनके अन्दर परिवार में जिनको नफरत सिखाई गयी है और उनको प्रेम मोहब्बत का पाठ नहीं पढाया गया। हर देश में कुछ असामाजिक तत्व होते हैं जिनकी वजह से देश भी बर्बाद होता है  और समाज भी बदनाम होता है। ये लोग अपने स्वार्थ के लिए एसा करते हैं जिससे देश को नुकसान उठाना पड़ता है, देश के अन्दर विकास के पहिये की रफ़्तार धीमी हो जाती है। 

आज भारत जैसे हसीन मुल्क में न जाने कैसी कैसी समस्याएं देश के सामने उठ खडी हुई है जो हमारे देश को गुलाम बनाने के लिए फिर से मजबूर कर रही है। ये समस्याएं हमारे देश के लिए घातक साबित हो रही है, जो आए दिन☀ हम अखबारों और टेलीविजन📺 के जरिये से सुन और देख रहे हैं - आतंकवाद, नक्सलवाद, माबलिचीग, बेरोजगार, भूखमरी, भ्रष्टाचार, ना जाने अनगिनत समस्याएं और भी है जो हमे हमारे मुल्क को गुलाम बनाती नजर आ रही है। ये समस्याएं हमारे मुल्क के लिए अच्छी नहीं है बहुत बूरी है, लेकिन इन समस्याओं से हम सब लोग वाकिफ है फिर भी बेखबर है, कि ये समस्याएं कैसे उत्पन्न होती है। 

आखिर इन समस्याओं का निस्तारण कौन करेगा और कैसे होगा, इन समस्याओं से हमें ही पानी होगी। में आप सभी देशवासियों से हाथ✋ जोड़ कर अपील करता हूँ कि देश गलत रास्ते पर जा रहा है, हमें देश को बचाना है, देश की समस्याओं का समझ कर उनका निस्तारण करना है  आगे हमारा सबसे बड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम स्वतंत्रता दिवस आ रहा है, उस दिन को हम लोग बड़ी शान ओर शौकत के मनाते है, मनाना भी चाहिए । लेकिन देश की समस्याओं को समझना सबसे जरूरी है। हम लोग उस दिन  को तो प्रेम हर्षोल्लास के साथ मनाते है और बाकी दिनों को भूल जाते हैं। लेकिन घटनाएं तो रुकने का नाम ही नहीं लेती है, तरातर बढती जा रही है । साल में दो दिन ऐसे होते हैं जो हमें देश को एक डोर में बांध के रखते हैं, बाकी दिनों में इसका कोई असर नहीं पड़ता। 













दिल 💜❤ दहलाने वाली कहानी

बाहर बारिश☔ हो रही थी, अन्दर क्लास चल रही थी, तभी एक अध्यापक ने कहा कि आज आप प्रत्येक छात्र को में 100 - 100 रुपये💵 दूं तो आप लोग क्या खरीदोगे तो किसी छात्र ने कहा कि मैं तो ट्रोफी खरीदूंगा, तो किसी ने कहा में विडियो गेम खरीदूंगा, तब अध्यापक की नज़र एक ऐसे छात्र पर पड़ी जो अपने विचारों में डूबा हुआ था, तब अध्यापक ने कहा बेटा आप क्या खरीदोगे, बोलते क्यों नहीं हो, तो उसने कहा कि मैं मेरी माँ के लिए चश्मा खरीदूंगा। तो अध्यापक ने कहा बेटा चश्मा खरीदने के लिए तेरे पिताजी है चशमा तो तेरे पिताजी खरीद सकते हैं तू तेरे लिए क्या खरीदेगा, तो उस छात्र की बात सुन कर अध्यापक का गला भर आया  , उसने कहा सर मेरे पिताजी इस दुनिया में अब नहीं रहे। मेरी माँ लोगों के कपड़े सील कर मुझे खिलाती पिलाती है और मेरी पढाई का खर्चा भी भरती है । में चाहता हूं कि मेरी माँ को चश्मा खरीद के दूं ता की वो अच्छे से देख सके और कपड़े सील कर मेरी पढाई का खर्चा चला सके, और में पढ कर बड़ा आदमी बन के मां की सेवा कर सकूँ, तब अध्यापक ने उसको अपनी जैब से 100 रुपये💵 ओर उधार दिए और कहा कि ये 100 रुपये मेरे वादे के और ये 100 रूपये उधार दे रहा हूँ, जब रोजगार लगे तब वापस लोटा देना। लेकिन 20 साल बाद बाहर बारिश हो रही थी, अन्दर क्लास चल रही थी, उस बाहर अचानक लाल 🔴 बत्ती वाली गाड़ी आ के रुकती है और पूरी स्कूल 🏫 में सन्नाटा छा गया। पूरा स्कूल स्टाफ चोकन्ना सा रह गया। तब एक कलेक्टर वृहद अध्यापक के पैरों को छूता है और अध्यापक  उस कलेक्टर को बाहों में कश कर ऊपर उठा लेते हैं और कलेक्टर कहता है कि आप मेरे सर हाथ रखें में धन्य हो जाऊँ। 

सीख :- दोस्तों जीवन में कभी मग़रूर मत करना,  साधारण रहना,अपने को कभी कमज़ोर मत आंकना शहंशाह को कभी फकीर, और फकीर को कभी शहंशाह बनने में देर नही लगती।। 

Edul Azhaa ( बकरा ईद)

जी हाँ दोस्तों👭👬👫 सलाम आदाब, आज में आप से ईदुल अज़हा के बारे में जानकारी दूंगा। आप लोग जरूर इस जानकारी को पढैं और आगे भी शैयर करें ं। इस साल ईदुल अज़हा अंग्रेजी तारीख 12 अगस्त 2019 बरोज़ सोमवार को होने जा रही है, अब इस्लामिक तारीख को ईद हमेशा, इस्लामिक महीने ज़िलहिज की 10 तारीख को मनाई जाती है। 
ईदुल अज़हा इस्लाम मज़हब का प्रमुख त्योहार है, और मुस्लिम लोग बड़ी शान से मनाते है और शरियत के मुताबिक अमल भी करते हैं। ईद के मुबारक मौके पर लोग एक दुसरे को मुबारक बाद देते हैं और एक दूसरे को दावत भी देते हैं एक दूसरे को खाना भी खिलाते हैं। गरीब लोगों को खाना भी खिलाते है और एक दूसरे के साथ खुशियाँ भी बांटते हैं। 

ईदुल अज़हा:- 
                     ईदुल अज़हा अरबी भाषा का शब्द है, जिसको कुर्बानी की ईद या सुन्नते इब्राहिम या बकरा ईद भी कहते हैं। 
इस दिन मुस्लिम लोग अपने प्रिय जानवर की कुर्बानी देते हैं जैसे  बकरा,भेड़ एवं ऊंट, भैंस की भी कुर्बानी देते हैं। 

ईदुल अज़हा क्यों मनाई जाती है:- 
ये कुर्बानी ईद हमारे नबी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की रिवायत से जुड़ी हुई है, एक दिन अल्लाह पाक ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम का इम्तिहान (परीक्षा)  ली, और कहा कि आप अपने प्रिय चीज की कुर्बानी करो ,तब आप ने अपने बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को स्नान वगैरह करवाके जंगल की तरफ ले गए और आप ने अपनी आंखों पर पट्टी बाँध कर गर्दन पर छुरी चलाई, बाद में देखा तो अपने बेटे की जगह भेड़ जि़बाह  हो गई और अपने बेटे सुरक्षित है। इह तरह अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की परीक्षा ली थी, हकीकी ईमान जानने के लिए। तब से लेकर आज तक लोग उनकी याद में कुर्बानी करते आ रहें हैं। 
ईद की कुछ महत्वपूर्ण जानकारी:- 
1. सुबह जल्दी उठा। 
2.गुस्सल करना, स्नान🛀 करना। 
3.मिस्वाक करना। 
4.उम्दा से उम्दा कपड़े पहनना  जो पास में मोजूद हो। 
5.खुशबू लगाना। 
6.ईद की नमाज़ से पहले कुछ नहीं खाना। 
7.ईदगाह के रास्ते में जाते वक्त तकबीर बुलंद आवाज़ में पढैं। 
8.एक रास्ते में जाना दूसरे रास्ते में वापस आना। 
9.ईद की नमाज़ के बाद ही कुरबानी करें। 



Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...