ड्रेस कोड का महत्व।

जी हाँ दोस्तों सलाम आदाब आज में आप के सामने एक नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ हूँ वो है "ड्रेस कोड का महत्व"। 
जी हाँ आज सरकार के हर विभाग के कर्मचारियों की ड्रेस अलग- अलग नमूने एवं विभिन्न प्रकार के रंगों की होती है, तो इस के पीछे क्या कारण है?  
आइये हम जानते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है, एक राजनेता की ड्रेस सफेद, एक पुलिस👮 की ड्रेस खाकी रंग की, एक वकील की ब्लैक पैंट👖 और सफेद शर्ट ऊपर काला कोट अनिवार्य है, एक डाक्टर की सफेद पैट शर्ट ऊपर सफेद कोट अनिवार्य है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की ड्रेस भी एक भगवा रंग की निश्चित कर दी है यहाँ तक की कोलेज के छात्रों की ड्रेस एक निश्चित है। एक सैनिक कर्मचारी की ड्रेस भी अलग है। 
क्या कारण है कि इन सब विभागों की ड्रेस अलग अलग है तो आईये में बताता हूँ कि ऐसा क्यों हो रहा है, ये ड्रेस कोड हमैं, और इन स्वयं को क्या पैगाम मिलता है, इनकी सीमा कहाँ तक है ।
वकील/ एडवोकेट:-1.ये वो वकील है जो मुल्जिम लोगों को इंसाफ या न्याय ⚖दिलाते हैं। ये काले रंग की वर्दी और कोट इसलिए पहनते है कि दो मुल्जिमों  का न्याय बारीकी से करते हैं, किसी की भी पक्ष बाजी नही करते हैं, काली ड्रेस किसी भी मुल्जिम के पक्ष में नहीं होती है। 
2.दूसरा कारण है मुल्जिम और वकील मे फर्क  का नज़र आना। अगर वकील और मुल्जिम में फर्क नजर नहीं आएगा तो दोनों के बीच कोई महत्व नहीं रहेगा। कोई एक दूसरे के फर्क भी महसूस नहीं होगा और पहचान🆔 भी नहीं रहेगी। 
3.वकील की काली ड्रेस का विशेष महत्व है कि उनकी ड्यूटी समय पर ही पहने, अगर बिना ड्यूटी पहन के रखी है तो उस का कोई महत्व नहीं रहेगा। वकील की ड्रेस कोड समय पर ही महत्व देगी। 
डाक्टर/ चिकित्सक🏥:- जी हाँ आप चिकित्सक के बारे में आप अच्छी तरह  जानते हैं और अस्पताल में आप ने चिकित्सक को देखा भी और आप की जीवन में एक बार जरूर मुलाकात भी जरूर हुई होगी। चिकित्सक मरीज का इलाज करता है, और उसके सफेद ड्रेस ओर सफेद कोट पहन कर देखा होगा जरूर। तो ऐसा क्या कारण है कि एक मरीज का इलाज करने वाला सफेद ड्रेस पहनता है, ये एक अलग अलग दैश का नियम📏 बना हुआ है कि मरीज का इलाज करने वाला चिकित्सक सफेद ड्रेस पहनेगा, और संदेश उस जनता को मिलता है कि वो मरीजों का इलाज करता है और उनके अन्दर शांति की बात करता है। 
इन सब अधिकारियों की ड्रेस कोड का विशेष महत्व होता है कि ये समय समय पर जनता की सैवा करते हैं और उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोकते है ं। 
वकील का काम है इंसाफ करना,
डाक्टर काम है मरीज का इलाज करना। 
पुलिस👮 का काम है जनता कि रक्षा करना। 
आर्मी सेना काम है देश की रक्षा करना। 
राजनेता का काम है  जनता की कल्याण कारी काम करना। 
तो इन सब के अलग अलग काम है और इनकी ड्रेस कोड भी अलग अलग है, ये अपनी सैवाऐं  अपनी वर्दी के मुताबिक देते हैं। 


धन्यवाद🙏💕 दोस्तों में आप का दोस्त ,लेखक ,वक्ता       मुराद खान। 

               ।। जय हिंद जय भारत।।          

                  शुक्रिया                              । 






संस्कार

दोस्तों👭👬👫 नमस्कार!  आज में आप को एक नये बिंदु की ओर लेकर चलता हूँ, वो बिंदु है - संस्कार। जी  हां यह शब्द अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण है, इस शब्द की अहमियत हमें तब पता चलती है जब किसी बच्चे की खराब वाणी या भाषा के मूंह से निकलने से पता चलता है🔍 कि इस के परिवार जनों ने इस को कैसे संस्कार या लक्षण सिखाए है। 
जी बिलकुल यह बात सही है कि हर धर्म और समाज में अपने अपने नियम-कायदे होते हैं, और वै सभ्य माँ-बाप अपने बच्चो को धार्मिक भावना और प्रेम मोहब्बत के  अच्छे संस्कार , लक्षण और अच्छी बातें जरूर सिखाते हैं और सही सलाह देते हैं। लेकिन हर धर्म और समाज में कुछ अपवाद भी होते हैं जो अच्छे संस्कार की बजाय बुरे संस्कार सीखते हैं या तो उनके माता पिता में कुछ कमी〽 होती है, या उनकी संतान बाहरी दुषित वातावरण में मिल कर बुरे लक्षण सीख जाते हैं और बुरी हरकते करने लगते हैं। 
हर समाज और धर्म यही चाहता है कि हमारी औलाद या संतान अच्छे लक्षण सीखै और भले काम करे, जिससे माँ बाप का नाम  रौशन हो, एक सभ्य समाज में अच्छा पैगाम मिले। लेकिन बदकिस्मती से लोग अपने स्वार्थ के लिए बुरे काम भी करते हैं, जिससे इन्सानियत की परिभाषा धूमिल हो जाती है। 
कहते हैं न जेसा राजा वैसी प्रजा ,उसी प्रकार जेसा खानदान होगा वैसी ही औलाद या संतान होगी इस बात में कोई दो राय नही है, क्योंकि जो बच्चे अपना कर्म करते हैं  उसे उनके परिवार की स्थिति के बारे में पता चल जाता है, चाहे वो बच्चा कर्म अच्छा करे या बुरा करे। आज अगर किसी माँ बाप की संतान गलत काम करती है तो 90 फीसदी कारण जिम्मेदार उन के मां बाप और परिवार ही है,और 10 फीसदी लोग गलत काम बाहरी वातावरण से सीखते हैं क्योंकि एक सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले बच्चे को मां बाप जेसा सिखाएंगे वैसा ही वो सीखता जाएगा। बच्चे का दिमाग खाली कागज़ के समान होता है, माँ बाप जैसी आदतें, कर्म, रूचियाँ और व्यवहार अपनाएंगे तो वैसी ही आदतें बच्चे सीखैगैं।
आज के मां बाप से अनुरोध है कि आप अपनी लाडली संतान को अच्छी लक्षण सिखाइये, अच्छी आदतें विकसित करै और उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करैं, बच्चे की हर उचित ज़रुरतैं पूरी करें। हर धर्म और हर समाज में जन्म लेने वाला बच्चा अपने धर्म और समाज के अनुसार संस्कार ढलते हैं और उनके के अन्दर अच्छे संस्कार और बुरे संस्कार भी मिलते हैं , ये शुरुआत में तो छोटी समस्याएं है लेकिन बाद में ये समस्याऐ उन्हीं लोगों को दुख देती है।ये छोटे छोटे बुरे संस्कार बाद में आदत का रुप धारण करते हैं। 

धन्यवाद🙏💕। 
       ।। जय हिंद जय भारत। । 



कुंई या बेरी

  • कुंई या बेरी:- जी हाँ दोस्तों👭👬👫 आज में आप के सामने एक नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ वो है कुईं। 
  • यह एक पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत है। 
स्थानीय भाषा में कुईं को बेरी कहते हैं ये बेरियां पश्चिमी राजस्थान के जिलों में पायी जाती है। इसका महत्व आज भी बरकरार है, लेकिन इससे पहले अत्यधिक बेरियों का महत्व था, आज पेयजल सुविधाओं  में बदलाव देखने को मिलता है, जिससे बेरियों के महत्व में कुछ कमी आ गयी। आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व लोग पानी के लिए बेरियों पर ही निर्भर थे, क्योंकि उस समय पेयजल सुविधाओं का अभाव था इसलिए लोग पानी के लिए बेरियों पर ज़्यादा तवज्जो देते थे। 
आज उतना तवज्जो नहीं देते हैं क्योंकि इस के पीछे दो अहम कारण है- 
1.पाना का स्तर कम हो जाना, क्योंकि बरसात का पानी (पालर पानी) ही बेरियों के तल में जमा हो जाता है जिसे लोग पानी को चड़स  के द्वारा बाहर निकालते हैं। आज पश्चिम राजस्थान में वर्षा की भयंकर😱 कमी की वजह से पानी💧 का जलस्तर नीचे चला गया है, इससे लोगों का मोह बेरियों से हट गया है। 
2.पेयजल सुविधाओं में विस्तार, आज जमीन का पानी निकलने के लिए बड़ी बड़ी मशीनों से पाताल का पानी निकाला जाता है, उसके अलावा नहरों के पानी को उपलब्ध करवाना। 
बेरी का आकार:- बेरी की गहराई 10-15 मीटर   तक होती है ,बेरी अन्दर से चोड़ाई  2-3फीट तक होती है। इस के अन्दर जो पाणी मिलता है उसे पालर पानी कहते हैं, बेरी कि खुदाई करने वाले को चेजारा  कहते हैं। पश्चिम राजस्थान में पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत आज भी बेरियां है ,लेकिन कुछ बेरियों में आज भी पानी अथाह भरा पड़ा है, ज्यादातर बेरियां पानी💧 से सूख चुकी है और यहाँ तक रेत ⌛ से दब चुकी है। 
धन्यवाद🙏💕। 
  ।। जय हिंद जय भारत।। 

अनमोल वचन एवं अर्थ

"इला न देणी  आपणी हालरिय हुलराय 
पूत सिखा व पाल ण मरण बड़ाई माय "।। 
भावार्थ:- एक माँ अपने बच्चे को पालणे में झूला झुलाती हुई कहती है कि अपनी ज़मीन किसी को मत देना चाहे शत्रु कितना भी हमला कर दे, भले ही मर जाना मगर अपनी ज़मीन किसी को मत देना। अगर आप ने ज़मीन किसी दुशमन को दे भी दी तो इस आंचल की कसम है ,चाहे कैसी भी मुसीबत सामने आ जाए मगर हिम्मत नहीं हारनी है। 
दिन ☀ आंथ्यो  थाक्या बलद 
पियो न 💧🚰 पानी क्यारी एक। 
भावार्थ:- एक किसान पूरा दिन☀ परिश्रम कर रहा है और कूंए  से पानी बलदौं द्वारा
द्वारा निकाल कर पोधौं को पिला रहा है और लेकिन एक चीज भूल गया, क्योंकि उन पौधों के बीच क्यारी नहीं बनाई हुई है और वो बेचारा किसान और पशु परिश्रम करके थक गया क्योंकि उसने सारे पोधौं को पानी नहीं मिल रहा था, वो इसलिए कि पानी की नालिया नहीं बनाई हुई थी। 
बड़ा भ ईया तो क्या भया, जैसे पैड़ खजूर
पंछी को छाया न मिले फल लागे अति दूर। 
भावार्थ:- ये कहावत बहुत ही बड़िया है कि बड़ा होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन उसके अंदर गुण और काबलियत होनी चाहिए । खजुराखजुरा का 🌳पेड़ बड़ा होता है आखिर किस काम का है लेकिन न पक्षीयों को छाया मिलती है और फल 🍎🍊🍌🍉🍇🍒🍍 भी बहुत दूर लगते हैं। तो हमारे लिए कोई काम का पेड़ नहीं है। 

धन्यवाद🙏💕 में आप का दोस्त लेखक, वक्ता, मुराद खान। 

    ।। जय हिंद जय भारत।। 

Advise सलाह

सलाह:- जी हाँ दौस्तो आज में आप के सामने एक नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ हूँ वो है सलाह। जी  हाँ आज के दौर में हर कोई कुछ नया काम करना चाहता है लेकिन उस काम कै लिए हर किसी व्यक्ति से सलाह ली जाती है लेकिन कितने लोग सही सलाह देते हैं और कितने लोग गलत सलाह देते हैं। आज दुनिया के अन्दर दो तरह के लोग रहते हैं एक सकारात्मक दृष्टि वाले और दूसरे नकारात्मक दृष्टि वाले। कितने लोग👫👬👭 ऐसे है जो लोगों को जाने अनजाने में गलत सलाह देते हैं, में आज आप को स्पष्ट बता रहा हूँ कि दुनिया में 70 फीसदी लोग गलत सलाह देते हैं क्योंकि उनको उस काम कै बारे में जानकारी नहीं होती है।  या उनके अन्दर नकारात्मकता की भावना भरी हुई होती है। कयी लोग👫👬👭 ये चाहते हैं कि इस व्यक्ति को अगर अच्छी सलाह दे भी दी तो यह मेरे से आगे बढ़ जाएगा और मेरे रास्ते में बाधा डालेगा, मुझे आगे बढने से जरूर घाटा होगा, इस दृष्टि से बहुत सारे लोग👫👬👭 सलाह मांगने वाले को गलत सलाह देते हैं वो अपना रास्ता भटक जाता है। आज कल बहुत सारे लोग👫👬👭 ऐसे होते हैं जो एसे लोगों से सलाह लेते हैं जिनसे उनको उस काम से कोई मतलब नहीं होता है। वही लोग उनकी  हिम्मत को हरा देते हैं। आज में आप को बता रहा हूँ कि सलाह ऐसे लोगों से लेनी चाहिए, जिनको उस काम से जानकारी ज्यादा होनी चाहिए। आप अगर बड़ा बिजनेस करना चाहते हैं तो बिजनेस मैं उच्च पद पर है उनसे सलाह लो।, अगर आप निजी स्कूल खोलना चाहते हैं तो स्कूल जो खोल के बैठा है उनसे सलाह लो, आप कलैक्टर बनने का सपना है तो आप कलैक्टर बना हुआ है उनसे सलाह लो, अगर आप वकील बनना चाहते हैं तो हाई कोर्ट के एडवोकेट से सलाह लो। आप अगर एक्स यू वी जैसी बड़ी गाड़ी खरीदना चाहते हैं तो आप ओटो वाले से सलाह नहीं ले सकते, अगर सलाह ले भी ले ली तो आप एक महान इन्सान नही बल्कि मूर्ख इन्सान कहलाओगे। ये है सलाह। जो हर इंसान के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन किससे सलाह लैनी चाहिए वो सबसे महत्वपूर्ण है। 

दोस्तों👭👬👫 सलाह सबसे महत्वपूर्ण है, आज बड़े दिग्गज भी सलाह को अहम मानते हैं, और सलाह लेनी भी चाहिए, सलाह ऐसे लोगों से लो जो उस काम की जानकारी रखता हो और  अच्छे आचरण वाला हौ, सकारात्मक दृष्टि वाला हो। सलाह लेने से कोई पाप नहीं होता है। बल्कि सलाह गलत लैने  से पाप होता है। 

धन्यवाद🙏💕, में आप का दोस्त लेखक, वक़्ता, सामाजिक कार्यकर्ता मुराद खान। 

     । ।जय हिंद जय भारत।। 

व्यवहार Behavior

दोस्तों👭👬👫 नमस्कार आज में आप के सामने एक नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ हूँ वो अध्याय है व्यवहार। जी हाँ आज में इसी विषय पर बात करना चाहता हूं कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति क्यों न हो जहाँ तक एक माँ-पिता की संतान ही क्यों न  हो लेकिन उनके व्यवहार में अन्तर दिन☀ और  रात 🌃 का होता है। 
जी बिलकुल तह बात सत्य है कि यहाँ तक सगे भाइयों में फर्क होता है, उनके स्वभाव, आदतें, रुचियां, और अन्य कार्यों में फर्क नज़र आता है। घर 🏡 में जन्म🐣 लेने वाले हर सदस्य अपने आप में अलग होते हैं, वो सदस्य भावात्मक रूप से जुड़े रहते हैं और कार्य कारण में एक दूसरे से अलग नज़र आते है, उन सदस्यों में कार्य करने की क्षमता अलग होती है, कोई मजबूत होता है तो कोई कमज़ोर होता है तो कोई मोटा तो कोई पतला होता है, और कोई छोटा तो कोई बड़ा होता है। हर सदस्य  की अपनी आदतें अलग अलग होती है, प्रत्येक सदस्य की रूचियाँ अलग अलग होती है, यहाँ📍 तक कोई आलसी होता है तो कोई सक्रिय होता है, कोई सदस्य ज्यादा समय तक सोता है कोई कम समय तक सोता है। तो कोई सदस्य कम खाना खाता है तो कोई ज्यादा खाना खाता है। तो कहने का मतलब यह है कि हर सदस्य अपने आप में आदत, रुचि और व्यवहार में अलग अलग होता है। 
आप का व्यवहार ही आप के लिए महान होता है, आप किसी भी व्यक्ति के सामने जिस लहजे में बात करोगे तो सामने वाला उसी लहज़े में बात करेगा। आप मीठा बोलोगे तो सामने वाला मीठा बोलेगा। आप गलत बोलोगे तो सामने वाला ही उसी अंदाज में बात करेगा। व्यवहार शब्द आप ज़िन्दगी में सबसे महत्वपूर्ण है, इस को अगर संवार कर रखते हैं तो आप को जीवन में भुगतना नहीं पड़ेगा। 



Eid ईद -उल फितर

प्रिय दोस्तों👭👬👫 सलाम आदाब। आज आप सभी को ईद मुबारक बाद, क्योंकि आज ईद का दिन☀ है। आज में आप को ईद की महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ। 
मुस्लिम समाज के दो मुख्य त्योहार होते हैं एक ईद  उल फितर और दूसरा ईदूल अज़हा। 
तो आज में ईद उल फितर के बारे में बातचीत करने जा रहा हूँ कि ईद उल फितर क्यों मनाई जाती है और किसलिए। 
ये ईद मुस्लिम मज़हब का अहम त्योहार है। ये इस्लामिक महीने शव्वाल  की पहली तारीख चांद🌙 देखने पर मनाया जाता है और उससे पहले मुस्लिम लोग रमज़ान के महीने में रोजै (उपवास)  रखते हैं तीस दिन☀ तक। शव्वाल माह की पहली तारीख को ईद का चांद🌙 नजर आने पर ईद मनाई जाती है और इस ईद पर खुशी की बात यह है कि लोगों को फितरा  ( कुछ पैसे🤑💸💵💴💶💰💳, या अन्य सामग्री)  ग़रीब लोगों को दी जाती है, जिससे गरीब और मिस्कीन  लोगों की पूर्ति होती है और वो लोग दान वाले आदमी को दिल 💜❤ से दुआ🙏 करते हैं और सवाब / नेकी मिलती है। इस ईद को फितरा वाली ईद भी कहते हैं, और लोग बहुत सारा 💰 धन अपनी आवश्यकता अनुसार दान करते हैं और रमजान के रोजे रखकर नेकियाँ कमाते हैं और अल्लाह को याद करते हैं। ईद के मोके पर खुशियाँ मनाते है और एक दूसरे को मुबारक बाद देते हैं, ये भाईचारे का है, आपसी प्रेम मोहब्बत का त्यौहार है। 


महीनों के नाम The Month of name

1.अंग्रेजी महीनों के नाम। 
2.हिन्दी महीनों के नाम। 
3.इस्लामिक महीनों के नाम। 
1.                3.                     2.
1.जनवरी     1. मोहर्रम           1.चैत्र 
2.फरवरी      2.सफ़र              2.बैशाख 
3.मार्च          3.रबिउल अव्वल 3.ज्येष्ठ 
4.अप्रेल        4.रबिउल आखिर 4.आषाढ
5.म्ई            5.जिमादिल ऊला 5सिरावण
6.जून           6.जिमादिल उखरा 6.भाद्र 
7.जुलाई        7.रज्जब            7.अशि्व
8.अगस्त        8.शोअ़बान       8.कार्तिक
9.सितंबर       9.रमज़ान         9मार्गशीष 
10.अक्टूबर   10.शव्वाल        10 पोहा 
11.नवम्बर    11.ज़िल क़ाअ़द 11.माघ 
12.दिसंम्बर। 12.ज़िल हिज्ज  12 फाल्गुन
      
       ।। धन्यवाद🙏💕।। 






तापमान Temperatur

जी हाँ दोस्तों👭👬👫 आज में आप के सामने एक नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ हूँ, वो है तापमान। आज हमारे वातावरण में कितने डिग्री सेल्सियस तापमान पाया जाता है इस पर कभी मालूम किया या नहीं। तो आज में इस पर बात करना चाहता हूं। 
आज हमारे वातावरण का तापमान क्यों बढ रहा है?  क्या कारण है इसका? 
तो आइये इस के बारे में आप को बताने जा रहा हूँ, क्योंकि हमारे वातावरण में पेड़🌳🌲🌳🌴 पोधों की भयंकर😱 कमी के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। आज हम पेड़ों का उपयोग आए दिन☀ अंधाधुंध से करते आ रहें हैं, जिससे पेड़ों की संख्या कम हो रही है। आज पेड़🌳 पोधों के अनेक उपयोग हो रहै है, जेसे फर्नीचर, कुर्सी, टैबल, कागज, पलंग, रसोई सामान, इत्यादि। 
हम पेड़🌳 पोधों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर है, क्योंकि बिना पेड़🌳 पोधों के जीवन भी दुष्कर है। जी हाँ हमें खाने से लेकर पहनने तक हम पेड़ों पर निर्भर है, फिर भी हम हम इन पेड़ों का उपयोग अंधाधुंध से कर रहे हैं, हमें इन की चिंता बिलकुल भी नहीं है, पेड़ों की कमी के चलते हमें ज़रा भी फिक्र नही है। पेड़🌳 पोधों की भयंकर कमी के कारण निम्नलिखित परिणाम सामने आ रहे हैं- 
1.तापमान का बढना। 
2.बरसात की भयंकर कमी। 
3.सूखी वनस्पति। 
4.जल की भयंकर कमी। 
5.गर्म लू का अत्यधिक चलना। 
पेड़🌳 पोधों से न जाने क्या सामग्री क्या क्या सामग्री मिलती है जिसकी वजह से इन्सान पैड़ो  को काट रहा है। तापमान का बढना और बरसात का न होना ये मुख्य कारण है उस क्षेत्र में पेड़ पोधों की कमी। प्रकृति🌿🍃 का हर प्राणी पेड़🌳 पोधों पर निर्भर है, चाहे प्रत्यक्ष रूप से हो या अप्रत्यक्ष रूप से, लेकिन वो पैड़ो को जरूर प्रभावित करता है।

पेड़🌳 पोधों से मिलने वाली सामग्री। 
फल-फूल, अनाज, लकड़ी, आक्सीजन, छाया, ओषधि आदि। 
ये सारी वस्तुएँ हमें पेड़ पोधों से मिलती है और हम इसका सदुपयोग तो करते हैं लेकिन पेड़ों का भयंकर😱 दुरूपयोग भी करते हैं। कभी हमने एक पेड़ लगाने की सोची भी नहीं है न जाने कितने समय में एक नया पोधा पैड बनता है , प्रकृति🌿🍃 से हर प्राकृतिक वस्तु का उपयोग तो कर रहे है मगर इस का दुरूपयोग तो भी कर रहे हैं। लेकिन प्रकृति की वस्तु को कभी सींचने के बारे में सोचते तक भी नहीं है। न जाने कैसा समय आ गया है  प्रकृति🌿🍃 हमें खाने के लिए दे रही है हम आराम से खा रहे हैं और, प्रकृति🌿🍃 शान्त अवस्था में बैठी हूई है। उस बिचारी की ज़बान है नहीं आखिर बोले तो बोले कैसे। हाँ एक बात है वो बोलती नहीं है मगर अहसास जरूर करवाती है मानव, मानव समझ भी रहा है, लेकिन उसकी पीड़ा की तरफ कदम नहीं बढ़ा रहा है। 
                 विनम्र  अपील 

आप समस्त भाईयों और बहनों से निवेदन🙏😊 है कि पैड पोधों को बचाया जाए और इनका संरक्षण किया जाए, ये पेड पोधै अमूल्य है, इनकी दैखभाल करें ।अपने घरों में और खतों में एक पेड़ पोधा जरूर लगाएं। 


धन्यवाद🙏💕 में आप का दोस्त लेखक, वक्ता, स्वतंत्र विचारक  मुराद खान। 


   ।। जय हिंद जय भारत।।


राज्य पशु डोमेस्टिक कैमल की स्थिति

आज भले ही राज्य सरकार ने ऊंट 🐫 को राज्य स्तरीय पशु का दर्जा दिया है, लेकिन राज्य में थार का रेगिस्तान कहा जाने वाला ऊंठ धीरे धीरे घटता नज़र आ रहा है। राजस्थान सरकार ने 6जून 2014 को केबिनेट बैठक में ऊंठ को राज्य स्तरीय पशु का दर्जा दिया था। 
ऊंठ को राज्य स्तरीय पशु क्यों घोषित किया? 
इसलिए के बहुत सारी जातियाँ जो ऊंठ को बैचती है और ऊंठ को काट कर खाते है और उसका मांस बाहर जाता है। जिससे ऊठों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। इस कारण सरकार कै निर्णय लेना पड़ा। 

लेकिन आज ये नियम या निर्णय उल्टा साबित हो रहा है, जो राजस्थान सरकार ने ऊंठ संरक्षण के लिए योजनाएँ बनाई थी वो मात्र कागज़ों तक ही सीमित हो पायी ।किसी भी ऊंठ पशु पालक जाती को फायदा नही पहुंचा, और ऊंठ पशु पालकों कि ऊंठ से मोह भंग हो गया। 
आज किसी के घर में उतनै ऊंठ नहीं है जितने पहले ऊंठ थे, क्योंकि इस पर सरकार ने ऊंठ की बिक्री पर रोक लगा दी जिससे ऊंठ की संख्या में भारी गिरावट नज़र आने लगी है, 
आज हम ग्रामीण क्षेत्रों में देखते हैं तो जिनके पास पहले 10ऊंठ या ऊंठनी  होते थे अब उनके पास मात्र 1या 2 ही बच्चे हैं, बाकी वाले बीमारी से ग्रसित होकर खत्म हो चुके हैं, क्योंकि ऊंठ से लोगों को आमदनी होती थी अब वो आमदनी सरकार ने बंद कर दी जिससे पशु पालक जातियों का ऊंठ के प्रति मोह भंग हो गया है, और उन्होंने ऊंठ की देखभाल करना छोड़ दिया है जिससे ऊंठ विलूप्त  के कगार पर खड़ा है। 
सरकार ने ऊंठ संरक्षण से संबंधित योजनाएं चलाई लैकिन इन योजनाओं का कोई ऊंठ पर असर नहीं हुआ, आखिर ये यौजनाए  नाकाम रही। 
ऊंठ पालने का मुख्य उद्देश्य यही था कि लोगों की आमदनी का अहम ज़रिया था जिसे लोग👫👬👭 संपन्न शाली थे, ऊंठ का आदान प्रदान हो जाता था और ये प्रक्रिया लम्बे समय से सही से चल रही थी और इस का फायदा ऊंठ पशु पलकों को मिल रहा था। आज ऊंठ की भयंकर कमी नज़र आ रही है और मेलों में ऊंठ का रंग फीका नज़र आ रहा है। 


धन्यवाद🙏💕 में आप का दोस्त लैखक, स्वतंत्र विचारक मुराद खान। 


  । । जय हिंद जय भारत।। 





Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...