प्रिय दोस्तों👭👬👫 सलाम आदाब। आज आप सभी को ईद मुबारक बाद, क्योंकि आज ईद का दिन☀ है। आज में आप को ईद की महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ।
मुस्लिम समाज के दो मुख्य त्योहार होते हैं एक ईद उल फितर और दूसरा ईदूल अज़हा।
तो आज में ईद उल फितर के बारे में बातचीत करने जा रहा हूँ कि ईद उल फितर क्यों मनाई जाती है और किसलिए।
ये ईद मुस्लिम मज़हब का अहम त्योहार है। ये इस्लामिक महीने शव्वाल की पहली तारीख चांद🌙 देखने पर मनाया जाता है और उससे पहले मुस्लिम लोग रमज़ान के महीने में रोजै (उपवास) रखते हैं तीस दिन☀ तक। शव्वाल माह की पहली तारीख को ईद का चांद🌙 नजर आने पर ईद मनाई जाती है और इस ईद पर खुशी की बात यह है कि लोगों को फितरा ( कुछ पैसे🤑💸💵💴💶💰💳, या अन्य सामग्री) ग़रीब लोगों को दी जाती है, जिससे गरीब और मिस्कीन लोगों की पूर्ति होती है और वो लोग दान वाले आदमी को दिल 💜❤ से दुआ🙏 करते हैं और सवाब / नेकी मिलती है। इस ईद को फितरा वाली ईद भी कहते हैं, और लोग बहुत सारा 💰 धन अपनी आवश्यकता अनुसार दान करते हैं और रमजान के रोजे रखकर नेकियाँ कमाते हैं और अल्लाह को याद करते हैं। ईद के मोके पर खुशियाँ मनाते है और एक दूसरे को मुबारक बाद देते हैं, ये भाईचारे का है, आपसी प्रेम मोहब्बत का त्यौहार है।
ये ईद मुस्लिम मज़हब का अहम त्योहार है। ये इस्लामिक महीने शव्वाल की पहली तारीख चांद🌙 देखने पर मनाया जाता है और उससे पहले मुस्लिम लोग रमज़ान के महीने में रोजै (उपवास) रखते हैं तीस दिन☀ तक। शव्वाल माह की पहली तारीख को ईद का चांद🌙 नजर आने पर ईद मनाई जाती है और इस ईद पर खुशी की बात यह है कि लोगों को फितरा ( कुछ पैसे🤑💸💵💴💶💰💳, या अन्य सामग्री) ग़रीब लोगों को दी जाती है, जिससे गरीब और मिस्कीन लोगों की पूर्ति होती है और वो लोग दान वाले आदमी को दिल 💜❤ से दुआ🙏 करते हैं और सवाब / नेकी मिलती है। इस ईद को फितरा वाली ईद भी कहते हैं, और लोग बहुत सारा 💰 धन अपनी आवश्यकता अनुसार दान करते हैं और रमजान के रोजे रखकर नेकियाँ कमाते हैं और अल्लाह को याद करते हैं। ईद के मोके पर खुशियाँ मनाते है और एक दूसरे को मुबारक बाद देते हैं, ये भाईचारे का है, आपसी प्रेम मोहब्बत का त्यौहार है।
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