"इला न देणी आपणी हालरिय हुलराय
पूत सिखा व पाल ण मरण बड़ाई माय "।।
भावार्थ:- एक माँ अपने बच्चे को पालणे में झूला झुलाती हुई कहती है कि अपनी ज़मीन किसी को मत देना चाहे शत्रु कितना भी हमला कर दे, भले ही मर जाना मगर अपनी ज़मीन किसी को मत देना। अगर आप ने ज़मीन किसी दुशमन को दे भी दी तो इस आंचल की कसम है ,चाहे कैसी भी मुसीबत सामने आ जाए मगर हिम्मत नहीं हारनी है।
दिन ☀ आंथ्यो थाक्या बलद
पियो न 💧🚰 पानी क्यारी एक।
भावार्थ:- एक किसान पूरा दिन☀ परिश्रम कर रहा है और कूंए से पानी बलदौं द्वारा
द्वारा निकाल कर पोधौं को पिला रहा है और लेकिन एक चीज भूल गया, क्योंकि उन पौधों के बीच क्यारी नहीं बनाई हुई है और वो बेचारा किसान और पशु परिश्रम करके थक गया क्योंकि उसने सारे पोधौं को पानी नहीं मिल रहा था, वो इसलिए कि पानी की नालिया नहीं बनाई हुई थी।
बड़ा भ ईया तो क्या भया, जैसे पैड़ खजूर
पंछी को छाया न मिले फल लागे अति दूर।
भावार्थ:- ये कहावत बहुत ही बड़िया है कि बड़ा होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन उसके अंदर गुण और काबलियत होनी चाहिए । खजुराखजुरा का 🌳पेड़ बड़ा होता है आखिर किस काम का है लेकिन न पक्षीयों को छाया मिलती है और फल 🍎🍊🍌🍉🍇🍒🍍 भी बहुत दूर लगते हैं। तो हमारे लिए कोई काम का पेड़ नहीं है।
धन्यवाद🙏💕 में आप का दोस्त लेखक, वक्ता, मुराद खान।
।। जय हिंद जय भारत।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें