आज भले ही राज्य सरकार ने ऊंट 🐫 को राज्य स्तरीय पशु का दर्जा दिया है, लेकिन राज्य में थार का रेगिस्तान कहा जाने वाला ऊंठ धीरे धीरे घटता नज़र आ रहा है। राजस्थान सरकार ने 6जून 2014 को केबिनेट बैठक में ऊंठ को राज्य स्तरीय पशु का दर्जा दिया था।
ऊंठ को राज्य स्तरीय पशु क्यों घोषित किया?
इसलिए के बहुत सारी जातियाँ जो ऊंठ को बैचती है और ऊंठ को काट कर खाते है और उसका मांस बाहर जाता है। जिससे ऊठों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। इस कारण सरकार कै निर्णय लेना पड़ा।
लेकिन आज ये नियम या निर्णय उल्टा साबित हो रहा है, जो राजस्थान सरकार ने ऊंठ संरक्षण के लिए योजनाएँ बनाई थी वो मात्र कागज़ों तक ही सीमित हो पायी ।किसी भी ऊंठ पशु पालक जाती को फायदा नही पहुंचा, और ऊंठ पशु पालकों कि ऊंठ से मोह भंग हो गया।
आज किसी के घर में उतनै ऊंठ नहीं है जितने पहले ऊंठ थे, क्योंकि इस पर सरकार ने ऊंठ की बिक्री पर रोक लगा दी जिससे ऊंठ की संख्या में भारी गिरावट नज़र आने लगी है,
आज हम ग्रामीण क्षेत्रों में देखते हैं तो जिनके पास पहले 10ऊंठ या ऊंठनी होते थे अब उनके पास मात्र 1या 2 ही बच्चे हैं, बाकी वाले बीमारी से ग्रसित होकर खत्म हो चुके हैं, क्योंकि ऊंठ से लोगों को आमदनी होती थी अब वो आमदनी सरकार ने बंद कर दी जिससे पशु पालक जातियों का ऊंठ के प्रति मोह भंग हो गया है, और उन्होंने ऊंठ की देखभाल करना छोड़ दिया है जिससे ऊंठ विलूप्त के कगार पर खड़ा है।
सरकार ने ऊंठ संरक्षण से संबंधित योजनाएं चलाई लैकिन इन योजनाओं का कोई ऊंठ पर असर नहीं हुआ, आखिर ये यौजनाए नाकाम रही।
ऊंठ पालने का मुख्य उद्देश्य यही था कि लोगों की आमदनी का अहम ज़रिया था जिसे लोग👫👬👭 संपन्न शाली थे, ऊंठ का आदान प्रदान हो जाता था और ये प्रक्रिया लम्बे समय से सही से चल रही थी और इस का फायदा ऊंठ पशु पलकों को मिल रहा था। आज ऊंठ की भयंकर कमी नज़र आ रही है और मेलों में ऊंठ का रंग फीका नज़र आ रहा है।
धन्यवाद🙏💕 में आप का दोस्त लैखक, स्वतंत्र विचारक मुराद खान।
। । जय हिंद जय भारत।।
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