दोस्तों👭👬👫 नमस्कार! आज में आप को एक नये बिंदु की ओर लेकर चलता हूँ, वो बिंदु है - संस्कार। जी हां यह शब्द अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण है, इस शब्द की अहमियत हमें तब पता चलती है जब किसी बच्चे की खराब वाणी या भाषा के मूंह से निकलने से पता चलता है🔍 कि इस के परिवार जनों ने इस को कैसे संस्कार या लक्षण सिखाए है।
जी बिलकुल यह बात सही है कि हर धर्म और समाज में अपने अपने नियम-कायदे होते हैं, और वै सभ्य माँ-बाप अपने बच्चो को धार्मिक भावना और प्रेम मोहब्बत के अच्छे संस्कार , लक्षण और अच्छी बातें जरूर सिखाते हैं और सही सलाह देते हैं। लेकिन हर धर्म और समाज में कुछ अपवाद भी होते हैं जो अच्छे संस्कार की बजाय बुरे संस्कार सीखते हैं या तो उनके माता पिता में कुछ कमी〽 होती है, या उनकी संतान बाहरी दुषित वातावरण में मिल कर बुरे लक्षण सीख जाते हैं और बुरी हरकते करने लगते हैं।
हर समाज और धर्म यही चाहता है कि हमारी औलाद या संतान अच्छे लक्षण सीखै और भले काम करे, जिससे माँ बाप का नाम रौशन हो, एक सभ्य समाज में अच्छा पैगाम मिले। लेकिन बदकिस्मती से लोग अपने स्वार्थ के लिए बुरे काम भी करते हैं, जिससे इन्सानियत की परिभाषा धूमिल हो जाती है।
कहते हैं न जेसा राजा वैसी प्रजा ,उसी प्रकार जेसा खानदान होगा वैसी ही औलाद या संतान होगी इस बात में कोई दो राय नही है, क्योंकि जो बच्चे अपना कर्म करते हैं उसे उनके परिवार की स्थिति के बारे में पता चल जाता है, चाहे वो बच्चा कर्म अच्छा करे या बुरा करे। आज अगर किसी माँ बाप की संतान गलत काम करती है तो 90 फीसदी कारण जिम्मेदार उन के मां बाप और परिवार ही है,और 10 फीसदी लोग गलत काम बाहरी वातावरण से सीखते हैं क्योंकि एक सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले बच्चे को मां बाप जेसा सिखाएंगे वैसा ही वो सीखता जाएगा। बच्चे का दिमाग खाली कागज़ के समान होता है, माँ बाप जैसी आदतें, कर्म, रूचियाँ और व्यवहार अपनाएंगे तो वैसी ही आदतें बच्चे सीखैगैं।
आज के मां बाप से अनुरोध है कि आप अपनी लाडली संतान को अच्छी लक्षण सिखाइये, अच्छी आदतें विकसित करै और उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करैं, बच्चे की हर उचित ज़रुरतैं पूरी करें। हर धर्म और हर समाज में जन्म लेने वाला बच्चा अपने धर्म और समाज के अनुसार संस्कार ढलते हैं और उनके के अन्दर अच्छे संस्कार और बुरे संस्कार भी मिलते हैं , ये शुरुआत में तो छोटी समस्याएं है लेकिन बाद में ये समस्याऐ उन्हीं लोगों को दुख देती है।ये छोटे छोटे बुरे संस्कार बाद में आदत का रुप धारण करते हैं।
धन्यवाद🙏💕।
।। जय हिंद जय भारत। ।
हर समाज और धर्म यही चाहता है कि हमारी औलाद या संतान अच्छे लक्षण सीखै और भले काम करे, जिससे माँ बाप का नाम रौशन हो, एक सभ्य समाज में अच्छा पैगाम मिले। लेकिन बदकिस्मती से लोग अपने स्वार्थ के लिए बुरे काम भी करते हैं, जिससे इन्सानियत की परिभाषा धूमिल हो जाती है।
कहते हैं न जेसा राजा वैसी प्रजा ,उसी प्रकार जेसा खानदान होगा वैसी ही औलाद या संतान होगी इस बात में कोई दो राय नही है, क्योंकि जो बच्चे अपना कर्म करते हैं उसे उनके परिवार की स्थिति के बारे में पता चल जाता है, चाहे वो बच्चा कर्म अच्छा करे या बुरा करे। आज अगर किसी माँ बाप की संतान गलत काम करती है तो 90 फीसदी कारण जिम्मेदार उन के मां बाप और परिवार ही है,और 10 फीसदी लोग गलत काम बाहरी वातावरण से सीखते हैं क्योंकि एक सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले बच्चे को मां बाप जेसा सिखाएंगे वैसा ही वो सीखता जाएगा। बच्चे का दिमाग खाली कागज़ के समान होता है, माँ बाप जैसी आदतें, कर्म, रूचियाँ और व्यवहार अपनाएंगे तो वैसी ही आदतें बच्चे सीखैगैं।
आज के मां बाप से अनुरोध है कि आप अपनी लाडली संतान को अच्छी लक्षण सिखाइये, अच्छी आदतें विकसित करै और उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करैं, बच्चे की हर उचित ज़रुरतैं पूरी करें। हर धर्म और हर समाज में जन्म लेने वाला बच्चा अपने धर्म और समाज के अनुसार संस्कार ढलते हैं और उनके के अन्दर अच्छे संस्कार और बुरे संस्कार भी मिलते हैं , ये शुरुआत में तो छोटी समस्याएं है लेकिन बाद में ये समस्याऐ उन्हीं लोगों को दुख देती है।ये छोटे छोटे बुरे संस्कार बाद में आदत का रुप धारण करते हैं।
धन्यवाद🙏💕।
।। जय हिंद जय भारत। ।
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