व्यवहार Behavior

दोस्तों👭👬👫 नमस्कार आज में आप के सामने एक नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ हूँ वो अध्याय है व्यवहार। जी हाँ आज में इसी विषय पर बात करना चाहता हूं कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति क्यों न हो जहाँ तक एक माँ-पिता की संतान ही क्यों न  हो लेकिन उनके व्यवहार में अन्तर दिन☀ और  रात 🌃 का होता है। 
जी बिलकुल तह बात सत्य है कि यहाँ तक सगे भाइयों में फर्क होता है, उनके स्वभाव, आदतें, रुचियां, और अन्य कार्यों में फर्क नज़र आता है। घर 🏡 में जन्म🐣 लेने वाले हर सदस्य अपने आप में अलग होते हैं, वो सदस्य भावात्मक रूप से जुड़े रहते हैं और कार्य कारण में एक दूसरे से अलग नज़र आते है, उन सदस्यों में कार्य करने की क्षमता अलग होती है, कोई मजबूत होता है तो कोई कमज़ोर होता है तो कोई मोटा तो कोई पतला होता है, और कोई छोटा तो कोई बड़ा होता है। हर सदस्य  की अपनी आदतें अलग अलग होती है, प्रत्येक सदस्य की रूचियाँ अलग अलग होती है, यहाँ📍 तक कोई आलसी होता है तो कोई सक्रिय होता है, कोई सदस्य ज्यादा समय तक सोता है कोई कम समय तक सोता है। तो कोई सदस्य कम खाना खाता है तो कोई ज्यादा खाना खाता है। तो कहने का मतलब यह है कि हर सदस्य अपने आप में आदत, रुचि और व्यवहार में अलग अलग होता है। 
आप का व्यवहार ही आप के लिए महान होता है, आप किसी भी व्यक्ति के सामने जिस लहजे में बात करोगे तो सामने वाला उसी लहज़े में बात करेगा। आप मीठा बोलोगे तो सामने वाला मीठा बोलेगा। आप गलत बोलोगे तो सामने वाला ही उसी अंदाज में बात करेगा। व्यवहार शब्द आप ज़िन्दगी में सबसे महत्वपूर्ण है, इस को अगर संवार कर रखते हैं तो आप को जीवन में भुगतना नहीं पड़ेगा। 



Eid ईद -उल फितर

प्रिय दोस्तों👭👬👫 सलाम आदाब। आज आप सभी को ईद मुबारक बाद, क्योंकि आज ईद का दिन☀ है। आज में आप को ईद की महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ। 
मुस्लिम समाज के दो मुख्य त्योहार होते हैं एक ईद  उल फितर और दूसरा ईदूल अज़हा। 
तो आज में ईद उल फितर के बारे में बातचीत करने जा रहा हूँ कि ईद उल फितर क्यों मनाई जाती है और किसलिए। 
ये ईद मुस्लिम मज़हब का अहम त्योहार है। ये इस्लामिक महीने शव्वाल  की पहली तारीख चांद🌙 देखने पर मनाया जाता है और उससे पहले मुस्लिम लोग रमज़ान के महीने में रोजै (उपवास)  रखते हैं तीस दिन☀ तक। शव्वाल माह की पहली तारीख को ईद का चांद🌙 नजर आने पर ईद मनाई जाती है और इस ईद पर खुशी की बात यह है कि लोगों को फितरा  ( कुछ पैसे🤑💸💵💴💶💰💳, या अन्य सामग्री)  ग़रीब लोगों को दी जाती है, जिससे गरीब और मिस्कीन  लोगों की पूर्ति होती है और वो लोग दान वाले आदमी को दिल 💜❤ से दुआ🙏 करते हैं और सवाब / नेकी मिलती है। इस ईद को फितरा वाली ईद भी कहते हैं, और लोग बहुत सारा 💰 धन अपनी आवश्यकता अनुसार दान करते हैं और रमजान के रोजे रखकर नेकियाँ कमाते हैं और अल्लाह को याद करते हैं। ईद के मोके पर खुशियाँ मनाते है और एक दूसरे को मुबारक बाद देते हैं, ये भाईचारे का है, आपसी प्रेम मोहब्बत का त्यौहार है। 


महीनों के नाम The Month of name

1.अंग्रेजी महीनों के नाम। 
2.हिन्दी महीनों के नाम। 
3.इस्लामिक महीनों के नाम। 
1.                3.                     2.
1.जनवरी     1. मोहर्रम           1.चैत्र 
2.फरवरी      2.सफ़र              2.बैशाख 
3.मार्च          3.रबिउल अव्वल 3.ज्येष्ठ 
4.अप्रेल        4.रबिउल आखिर 4.आषाढ
5.म्ई            5.जिमादिल ऊला 5सिरावण
6.जून           6.जिमादिल उखरा 6.भाद्र 
7.जुलाई        7.रज्जब            7.अशि्व
8.अगस्त        8.शोअ़बान       8.कार्तिक
9.सितंबर       9.रमज़ान         9मार्गशीष 
10.अक्टूबर   10.शव्वाल        10 पोहा 
11.नवम्बर    11.ज़िल क़ाअ़द 11.माघ 
12.दिसंम्बर। 12.ज़िल हिज्ज  12 फाल्गुन
      
       ।। धन्यवाद🙏💕।। 






तापमान Temperatur

जी हाँ दोस्तों👭👬👫 आज में आप के सामने एक नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ हूँ, वो है तापमान। आज हमारे वातावरण में कितने डिग्री सेल्सियस तापमान पाया जाता है इस पर कभी मालूम किया या नहीं। तो आज में इस पर बात करना चाहता हूं। 
आज हमारे वातावरण का तापमान क्यों बढ रहा है?  क्या कारण है इसका? 
तो आइये इस के बारे में आप को बताने जा रहा हूँ, क्योंकि हमारे वातावरण में पेड़🌳🌲🌳🌴 पोधों की भयंकर😱 कमी के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। आज हम पेड़ों का उपयोग आए दिन☀ अंधाधुंध से करते आ रहें हैं, जिससे पेड़ों की संख्या कम हो रही है। आज पेड़🌳 पोधों के अनेक उपयोग हो रहै है, जेसे फर्नीचर, कुर्सी, टैबल, कागज, पलंग, रसोई सामान, इत्यादि। 
हम पेड़🌳 पोधों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर है, क्योंकि बिना पेड़🌳 पोधों के जीवन भी दुष्कर है। जी हाँ हमें खाने से लेकर पहनने तक हम पेड़ों पर निर्भर है, फिर भी हम हम इन पेड़ों का उपयोग अंधाधुंध से कर रहे हैं, हमें इन की चिंता बिलकुल भी नहीं है, पेड़ों की कमी के चलते हमें ज़रा भी फिक्र नही है। पेड़🌳 पोधों की भयंकर कमी के कारण निम्नलिखित परिणाम सामने आ रहे हैं- 
1.तापमान का बढना। 
2.बरसात की भयंकर कमी। 
3.सूखी वनस्पति। 
4.जल की भयंकर कमी। 
5.गर्म लू का अत्यधिक चलना। 
पेड़🌳 पोधों से न जाने क्या सामग्री क्या क्या सामग्री मिलती है जिसकी वजह से इन्सान पैड़ो  को काट रहा है। तापमान का बढना और बरसात का न होना ये मुख्य कारण है उस क्षेत्र में पेड़ पोधों की कमी। प्रकृति🌿🍃 का हर प्राणी पेड़🌳 पोधों पर निर्भर है, चाहे प्रत्यक्ष रूप से हो या अप्रत्यक्ष रूप से, लेकिन वो पैड़ो को जरूर प्रभावित करता है।

पेड़🌳 पोधों से मिलने वाली सामग्री। 
फल-फूल, अनाज, लकड़ी, आक्सीजन, छाया, ओषधि आदि। 
ये सारी वस्तुएँ हमें पेड़ पोधों से मिलती है और हम इसका सदुपयोग तो करते हैं लेकिन पेड़ों का भयंकर😱 दुरूपयोग भी करते हैं। कभी हमने एक पेड़ लगाने की सोची भी नहीं है न जाने कितने समय में एक नया पोधा पैड बनता है , प्रकृति🌿🍃 से हर प्राकृतिक वस्तु का उपयोग तो कर रहे है मगर इस का दुरूपयोग तो भी कर रहे हैं। लेकिन प्रकृति की वस्तु को कभी सींचने के बारे में सोचते तक भी नहीं है। न जाने कैसा समय आ गया है  प्रकृति🌿🍃 हमें खाने के लिए दे रही है हम आराम से खा रहे हैं और, प्रकृति🌿🍃 शान्त अवस्था में बैठी हूई है। उस बिचारी की ज़बान है नहीं आखिर बोले तो बोले कैसे। हाँ एक बात है वो बोलती नहीं है मगर अहसास जरूर करवाती है मानव, मानव समझ भी रहा है, लेकिन उसकी पीड़ा की तरफ कदम नहीं बढ़ा रहा है। 
                 विनम्र  अपील 

आप समस्त भाईयों और बहनों से निवेदन🙏😊 है कि पैड पोधों को बचाया जाए और इनका संरक्षण किया जाए, ये पेड पोधै अमूल्य है, इनकी दैखभाल करें ।अपने घरों में और खतों में एक पेड़ पोधा जरूर लगाएं। 


धन्यवाद🙏💕 में आप का दोस्त लेखक, वक्ता, स्वतंत्र विचारक  मुराद खान। 


   ।। जय हिंद जय भारत।।


राज्य पशु डोमेस्टिक कैमल की स्थिति

आज भले ही राज्य सरकार ने ऊंट 🐫 को राज्य स्तरीय पशु का दर्जा दिया है, लेकिन राज्य में थार का रेगिस्तान कहा जाने वाला ऊंठ धीरे धीरे घटता नज़र आ रहा है। राजस्थान सरकार ने 6जून 2014 को केबिनेट बैठक में ऊंठ को राज्य स्तरीय पशु का दर्जा दिया था। 
ऊंठ को राज्य स्तरीय पशु क्यों घोषित किया? 
इसलिए के बहुत सारी जातियाँ जो ऊंठ को बैचती है और ऊंठ को काट कर खाते है और उसका मांस बाहर जाता है। जिससे ऊठों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। इस कारण सरकार कै निर्णय लेना पड़ा। 

लेकिन आज ये नियम या निर्णय उल्टा साबित हो रहा है, जो राजस्थान सरकार ने ऊंठ संरक्षण के लिए योजनाएँ बनाई थी वो मात्र कागज़ों तक ही सीमित हो पायी ।किसी भी ऊंठ पशु पालक जाती को फायदा नही पहुंचा, और ऊंठ पशु पालकों कि ऊंठ से मोह भंग हो गया। 
आज किसी के घर में उतनै ऊंठ नहीं है जितने पहले ऊंठ थे, क्योंकि इस पर सरकार ने ऊंठ की बिक्री पर रोक लगा दी जिससे ऊंठ की संख्या में भारी गिरावट नज़र आने लगी है, 
आज हम ग्रामीण क्षेत्रों में देखते हैं तो जिनके पास पहले 10ऊंठ या ऊंठनी  होते थे अब उनके पास मात्र 1या 2 ही बच्चे हैं, बाकी वाले बीमारी से ग्रसित होकर खत्म हो चुके हैं, क्योंकि ऊंठ से लोगों को आमदनी होती थी अब वो आमदनी सरकार ने बंद कर दी जिससे पशु पालक जातियों का ऊंठ के प्रति मोह भंग हो गया है, और उन्होंने ऊंठ की देखभाल करना छोड़ दिया है जिससे ऊंठ विलूप्त  के कगार पर खड़ा है। 
सरकार ने ऊंठ संरक्षण से संबंधित योजनाएं चलाई लैकिन इन योजनाओं का कोई ऊंठ पर असर नहीं हुआ, आखिर ये यौजनाए  नाकाम रही। 
ऊंठ पालने का मुख्य उद्देश्य यही था कि लोगों की आमदनी का अहम ज़रिया था जिसे लोग👫👬👭 संपन्न शाली थे, ऊंठ का आदान प्रदान हो जाता था और ये प्रक्रिया लम्बे समय से सही से चल रही थी और इस का फायदा ऊंठ पशु पलकों को मिल रहा था। आज ऊंठ की भयंकर कमी नज़र आ रही है और मेलों में ऊंठ का रंग फीका नज़र आ रहा है। 


धन्यवाद🙏💕 में आप का दोस्त लैखक, स्वतंत्र विचारक मुराद खान। 


  । । जय हिंद जय भारत।। 





इन्सानियत

दोस्तों सलाम आदाब आज में आप के सामने एक  नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ हूँ। उस अध्याय का नाम है "इन्सानियत"। 
आज का दौर बहुत ही नाजुक है, लेकिन इस दौर में एक बेदाग इन्सान मिलना बहुत ही मुश्किल है। आज दूनिया इन्सानियत के पैगाम पर जरुर चल रही है, नहीं तो ये दुनिया तभी मिटती नजर आ जाती है। 
इन्सानियत की मतलब है कि दुनिया में कोई भी धर्म हो या कोई भी जाति क्यों न हो जो सुख दुःख में एक दूसरे के काम आए उसे इन्सान कहते हैं। 
आज के वक्त में इन्सानियत किसी धर्म या जाती में नहीं बस्ती है बल्कि वो एक सैवा  के बहाने बाहर ही दिखाई देती है। 
इन्सानियत के विपरीत हैवानियत है, जहाँ हैवानियत खत्म हो जाती है वहाँ से फिर इन्सानियत दोडती नज़र आती है। जी इस इन्सानियत और हैवानियत का ताअ़लुक़ किसी भी जाती और धर्म से नहीं होता है, आज के दौर में हर धर्म या सम्प्रदाय में कुछ अच्छे लोग👫👬👭 और कुछ बुरे लोग भी होते हैं, जहाँ आज अच्छे लोग निवास करते हैं वहां इन्सानियत नज़र आती है, तो इस का मतलब यह नहीं कि दुनिया में अच्छे लोग खत्म हो गये, नहीं लोग अभी भी ज़िन्दा है और इन्सानियत उनके दिलों में भी ज़िन्दा है। यह भी बात सत्य है कि हैवानियत के बदले इन्सानियत नहीं मिलती, मगर इन्सानियत के बदले इन्सानियत जरूर मिलती है। 
आज किसी अस्पताल में एक हिन्दू मरीज को खून की सख्त जरूरत है तो उस को उस अस्पताल में खून नहीं मिलता है तो वो जगह जगह पता करता है है लेकिन अचानक एक मुस्लिम युवक को इस बात का पता चलता है🔍👀❗ यकीनन वो रोजेदार  होता है और रोज़ा खोल कर एक हिन्दू बहिन की खून देकर जान बचाता है तब उस  शख़्स के अन्दर हिंदू और मुस्लिम की भावना जागृत नहीं होती है तब वाकई मे ं उस के अन्दर इंसानियत की भावना जागृत हो जाती है। तो इसी तरह हिंदू भाई भी मुस्लिम की जान बचाता है तो उस के अन्दर हिन्दू मुस्लिम की भावना जागृत नहीं होती है बल्कि उस के अन्दर इंसानियत की भावना जागृत होती है। 
आप दूसरे लोगों के सामने जेसा बरताव (व्यवहार)  करोगै, आप के साथ वैसा ही बर्ताव करेंगे। अगर आप दूसरे लोगों के साथ मीठै मूंह से बात करोगे तो आप के साथ सामने वाला भी मीठे मूंह से बात करैगै। आप जिस को इज्जत दोगे सामने वाला आप को भी इज्जत देगा, अगर आप उन को बैइज़्त करोगे तो आप को भी बैइज़्ती मिलेगी। 
इन्सानियत का मतलब लोगो के सुख दुःख में काम आना और भाईचारा क़ायम रखना। 


।। जय हिंद जय भारत।। 






अमीर आदमी की 10 आदतें

जी हाँ दोस्तों👭👬👫  आज में आप के सामने ऐक नया अध्याय लेकर हाज़िर हुआ हूँ उस अध्याय का नाम है "अमीर आदमी की 10 आदतें"। तो दोस्तों आज के समय में हर कोई आदमी अमीर बनना चाहता है, उस के लिए कड़ी मेहनत करता है , लेकिन कयी लोग सफल होते हैं और कयी लोग सफल नहीं हो पाते हैं। अमीर आदमी के लिए में कुछ आदतें बताने जा रहा हूँ। 
1.खान-पान पर ध्यान देना  
2.सुबह जल्दी उठना। 
3.अमीर आदमी अपनी गलतियां दूसरों पर नहीं थोपता। 
4.अमीर की सोच💭 बड़ी होती है। 
5.अमीर लोग जल्दी 🏃शादी नहीं करते हैं। 
6.अमीर आदमी अपने स्वास्थ्य को समय समय पर  जांच करवाते हैं। 
7.अमीर आदमी ज़िन्दगी में जोखिम लेने से नहीं डरता। 
8.अमीर आमदनी से पहले पैसा खर्च नहीं करता है। 
9.जल्दी उठना अमीर की आदत है। 
10.सुबह जल्दी नहाना🚿 अमीर आदमी की विशेषता है। 


   ।। य हिंद जय भारत।। 




Story, कहानी📖

जी हाँ दोस्तों👭👬👫 आज में आप के सामने एक नयी कहानी📖 लेकर हाज़िर हुआ हूँ। 
एक आदमी दिन☀ में बाजार जाता है और हाथ में लालटेन ली हुई है और उस को टोर्च को चालू कर के पूरे बाज़ार में ईधर से ऊधर घूम रहा है, तब एक आदमी की नज़र उस टोर्च वाले आदमी पर पड़ी और कहा जनाब दिन☀ में लालटेन लेकर क्यों घूम रहे हो?  और क्या 👀 देख रहे हो, तब उस आदमी ने कहा जनाब में बाजार में आदमी को देख👀 रहा हूँ। 
तो सामने वाले आदमी ने कहा जनाब बाज़ार में तो इन्सानो की कोई कमी नहीं है ,यहाँ तो आदमी कंधे से कंधा टकरा कर चल रहा है इतनी भीड़ है, तो आप किसको देख रहे हो, तो उस शख्स ने कहा कि जनाब बाजार में ऐसे आदमी को देख रहा हूँ जो ईमानदार, दयानतदार, सच्चा, और नेक दिल और शरीफ इन्सान को देख रहा हूँ। 
तो उस शख्स ने कहा कि जनाब बाजार में ऐसे आदमी मिलना बहुत ही मुश्किल है, क्योंकि जो ज़माना शरीफ था वो चला🚶👣👣 गया अब ज़माना पहले वाला नहीं रहा है। जमाने के साथ लोग भी बदल चुके हैं। 

प्रेरणा और मार्गदर्शन

जी हाँ दोस्तों👭👬👫 आज में आप के सामने एक नया महत्वपूर्ण बिंदु लेकर हाज़िर हुआ हूँ वो बिंदु है-प्रेरणा और मार्गदर्शन। 
इन दो शब्दों का हर इंसान की ज़िन्दगी में बहुत ही महत्व है। आज विशेष सन्दर्भ इन दो शब्दों के बारे में छात्रों के लिए बात करना चाहता हूं। 
जी हाँ इस मुल्क के अन्दर यूवाओं की कोई कमी नहीं है और आज कल हर यूवा वर्ग का तबका रोटी🍞 कमाने के लिए या नोकरी करने के लिए मेहनत करता नज़र आता है। आज भारत के अन्दर लगभग 22करोड़ छात्र यूवा वर्ग बेरोजगार है। तो मैं आज उनके लिए विशेष बातचीत💬 करुंगा। 

जी हाँ आज के समय में जितनी विद्यिर्थी वर्ग मेहनत करता है, शायद ही उतनी कोई करता होगा। क्योंकि इन की मेहनत अपनी कक्षा प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण करने की होती है। और दूसरा छात्रों का वो वर्ग जो कोलेज में जाकर पढाई करते हैं और प्रतियोगिता की बहुत सारी परीक्षाएं देते हैं लेकिन कम लोग ही उत्तीर्ण कर पाते हैं। कम छात्र ही एसे होते हैं जो कठिन परीक्षाओं को उत्तीर्ण करते हैं। 
क्योंकि बहुत  सारे छात्र एसे होते हैं जिनके पास न तो आगे बढने के लिए प्रेरणा होती है और न ही मार्गदर्शन। व्यक्ति के अन्दर सबसे पहले मन या मस्तिष्क में किसी उद्देश्य के प्रति प्रेरणा जगेगी, तब वो व्यक्ति काम के प्रति कदम 👣 बढाएगा। काम करने का मन में भाव तो जाग गया लेकिन कार्य को कैसे करना है, इस के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो उस के लिए सबसे ज़रुरी चीज़ है मार्गदर्शन। अगर व्यक्ति के अन्दर मार्गदर्शन की भावना भरी हुई है तो वो व्यक्ति कभी असफल नहीं होगा। 
मार्गदर्शन का मतलब है कि व्यक्ति को किस रास्ते में जाना है और कैसे जाना है, वही दिशा बताने का जो काम करता है वो है मार्गदर्शन। यह मार्गदर्शन व्यक्ति के अन्दर होता नहीं है लेकिन बाहर से दिया जाता है, अध्यापक द्वारा या किसी अन्य अधिकारी द्वारा दिया जाता है। 

विद्यार्थी े के आगे बढने लिए कुछ टिप्स जिन का आप जरूर फोलो करैं। 
1.अपनी पढाई के लिए समय सारणी के अनुसार पढाई करें। 
2.जो कठिन विषय है उस विषय को सबसे पहले पढैं। 
3.जीवन में अनूशासन बना कर रखिये। 
4.किताबों से लगातार जुड़े रहे ं। 
5.पढाई के दौरान प्रेरणा स्रोत कहानियाँ पढैं। 
जब तक हम लोग अध्यापक एवं अन्य अधिकारी बच्चों को पढाई के प्रति दिशा निर्देश नहीं दैंगे तो वो बच्चा कामयाब कैसे हो सकता है। आज कल बहुत सारे छात्र परीक्षाओं में पिछड़ रहे है उसका महत्वपूर्ण कारण है मार्गदर्शन न मिलना। मार्गदर्शन अगर सही नहीं मिला तो  उस की मैहनत भी बैकार  चली जाएगी। 
विद्यार्थी के अन्दर सबसे पहले अपना उद्देश्य समझ में आएगा,उद्देश्य के बारे में प्रेरणा जगेगी, फिर उस को मार्गदर्शन मिलेगा, उस के बाद उद्देश्य के प्रति लगातार प्रयास करेगा, बार बार प्रयास करने से सफल हो जाता है। 
   

    धन्यवाद🙏💕। 
में आप का दोस्त, लेखक, वक्ता एवं समाज सेवी मुराद खान।। 

     । । जय हिंद जय भारत।। 






अनुशासन Discipline

जी हाँ दोस्तों👭👬👫 आज में आप के सामने एक नया बिंदु लैकर हाज़िर हुआ हूँ वो है अनुशासन। अनुशासन अपने आप में एक महत्वपूर्ण शब्द है और इसका अर्थ भी एक 
मायने रखता है। अगर व्यक्ति कहीं पर या किसी भी क्षेत्र में काम कर रहा है तो उस के लिए अनुशासन जरूर है। अनुशासन जीवन का एक पहलू बन चुका है। 


अनुसाशन का मतलब क्या है? 
अनुशासन एक जीवन गुजारने का तरीका है और यह हर क्षेत्र में पाया जाता है। अनुशासन के बिना जीवन भी अनुचित लगता है, क्योंकि जो व्यक्ति कहीं पर या किसी भी संस्थान में काम कर रहा है तो उस के लिए अनुशासन ज़रूरी है। 
अनुशासन का मतलब यह है कि जो व्यक्ति किसी भी संस्थान में काम कर रहा है तो उसे संस्थान का नियम होता है और अपनी समय सारणी होती है उसका अपना क्षेत्र होता है। उस संस्थान के समयानुसार चलना और नियमानुसार काम करना और अपने दायरे में रह कर कार्य करना है और उस ओफिस के स्टाफ साथियों से बातचीत करने का तरीका और उनके साथ किया गया व्यवहार ही  अनुशासन है। 

अगर कोई भी व्यक्ति किसी भी संस्थान में काम कर रहा है तो उस के पास अगर अनुशासन है तो वो व्यक्ति सबसे बड़ा सम्मान पा सकता है। 
अनुशासन के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु है जिनको फोलो करके आप महत्वपूर्ण मंजिल तक जा सकते हैं
1.ईमानदारी :- आप किसी भी क्षेत्र में        काम कर रहे हैं तो आप का उस काम को ईमानदारी से कार्य करै तो आप को        अनुशासन के नाम की प्रसिद्धि मिल        सकती है। 
2.सच्चाई:- अनुशासन के मायने में दूसरा पहलू है सच्चाई। अगर आप अपनी संस्थान में सच्चाई के साथ कार्य करते हैं तो आप पर भरोसा💛 किया जा सकता है और आप की छवि उभर सामने आ जाएगी। 
3.नैतिकता:- अनुशासन का तीसरा महत्वपूर्ण पहलू है नैतिकता। जी हाँ कोई भी क्षेत्र या काम हो या कोई भी संस्थान क्यों न हो वहाँ पर आप का आचरण, आदतें अच्छी है तो आप नैतिकता के हिस्सेदार बन जाओगे। 
4.व्यवहार :- अनुशासन का चोथा महत्वपूर्ण पहलू है व्यवहार। इस का भी संस्थान में या काम में महत्वपूर्ण पहलू है। 
5.कठिन परिश्रम:- जी हाँ इस के बिना हमारी गाड़ी चलने वाली नहीं है, क्योंकि इस मैहनत की हर क्षेत्र में सख्त जरूरत होती है, कहते हैं न बिना मेहनत के तख्तो ताज हासिल👉👍👌 नहीं होते हैं। 
अगर ये पांच खास बाते जो अपने जीवन में उतार दै तो वो आदमी अनुशासन की श्रेणी में आ जाता है और वो आदमी सम्मान का अधिकार पा सकता है। 


दोस्तों👭👬👫 आप किसी भी क्षेत्र में काम कर रहे हो या किसी भी संस्थान में काम कर रहे हो तो सबसे पहले आप को अनुशासन की सख्त जरूरत है बिना अनुशासन के आप की पहचान नहीं होगी। 
अनुशासन को आप अपनी ज़िंदगी में उतारते है ं तो आप को आगे बढ़ने से दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं पाएगी। 



धन्यवाद🙏💕 ,मैं आप का दोस्त, लेखक, वक्ता, एवं समाज सेवी मुराद खान। 

।। जहाँ हिंद जय भारत।। 


Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...