इन्सान के शरीर पर नशे का प्रभाव

जी हाँ आज कल हर 10 में से एक व्यक्ति नशे का शिकार है, यानी 90 फीसदी लोग नशे में लिप्त रहते हैं जिनकी वजह से उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। नशे के बारे में व्यक्ति कभी सोचता ही नहीं है कि इसके आने वाले समय में क्या परिणाम हो सकते हैं। व्यक्ति कयी प्रकार के नशे का सेवन करता है, धुम्रपान, शराब, गुटखा, तम्बाकू एवं अफीम, अमल इत्यादि ये कयी प्रकार के नशे हैं जिनके प्रभाव से व्यक्ति की सेहत जल्दी खराब हो जाती है। एक बगैर नशे वाला और दूसरा नशे वाला व्यक्ति दोनों सेहत का चेक अप कर लो जो नशे वाला आदमी है उसका शरीर कमकमज़ोरी और कुछ न कुछ बीमारी बताएगा। 
1. नशे का प्रभाव :- व्यक्ति नशे का सेवन करने से उनके स्वास्थ्य संबंधी सबंधित कयी बीमारियां उत्पन्न होती है जिससे वो इंसान इस नशे से बेखबर होता है, अगर उसको मालूम भी है तो जानबूझकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का काम करता है। 
नशे का सेवन करने से शरीर का कमज़ोर होना, यादाश्त का कम होना, शरीर में थकावट का आ जाना, आलस ज्यादा आना, कम उम्र में ही व्यक्ति के अन्दर टेढापन  आ जाना, न जाने एसी बहुत सारी समस्याएं है जो शरीर को जल्दी नष्ट कर देती है। 
2.नशे से क्या खोया क्या पाया:- दोस्तों नशे का सेवन करने से आप ने पाया तो कुछ  भी नहीं मगर सब कुछ खोया ही है। क्योंकि नशा आप लोग करते हैं, उस दुकानदार को पैशा भी आप लोग ही देते , आप अपने शरीर को बिगाड़ते भी आप ही है , नशे का सेवन करने से आप की सेहत खराब होती है और पैसा अलग से बर्बाद करते हैं। इस में आप ने सब कुछ खोया ही है पाया कुछ भी नहीं है। हकीकत में आप शरीर को स्वच्छ और सेहतमंद रखना चाहते हैं तो नशे  से दूर रहो। 

3.लोग नशे को क्या समझते हैं? :- आज कल हर यूवा वर्ग बहुत बड़ा तबका जो नशे को शौक की तरह खाते है, और वो लोग अपने भविष्य🔮 के बारे में कभी सोचते भी नही है कि इसका सेवन करने से क्या परिणाम हो सकते हैं, इस तरह वो लोग बेखबर है । इस तरह नशे को खाते है जैसे मान लो खाना खा रहे हैं, उतना ये लोग अगर खाना भी खाते तो इन लोगों का शरीर हट्टा कट्टा होता। मगर अफसोस की बात ये है कि नशा करने वाले लोग उतना खाना भी उनको नहीं भाता है ।
4.सरकार नशे को लेकर क्या कर रही है:- आज कल नशे के बारे में सरकार भी उतनी गंभीर नहीं है, क्योंकि सरकार को इस नशे जैसी चीज़ो से ही उनको राजस्व कर मिलता है, सरकार को भी नशा चाहिए मगर स्वास्थ्य नहीं चाहिए, क्योंकि सरकार को भी नशे से आमदनी चाहिए। सरकार अगर चाहे तो नशा प्रबंधन पर रोक लगा सकती है और कठोर नियम भी लागू कर सकती है। सबसे ज्यादा खतरनाक नशा है शराब, अफीम और अमल है, लेकिन इनको भी इसी नशे से सबसे ज्यादा टैक्स मिलता है। तो फिर सरकार क्यों गंभीर होगी नशे के प्रति। हमें अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना होगा। 


सुझाव :- आप श्रीमान जी से निवेदन है कि आप लोग नशे से दूर रहें, नशा सबसे बुरी चीज़ है और आप अपना एक तो धन दोलत बर्बाद करते हैं, दूसरा आप स्वास्थ्य को गंवाते है । तो आप लोग नशे का सेवन नहीं करें। 
धन्यवाद🙏शुक्रिया। 

में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर। 

आप मेरे लेख को जरूर देखें और आगे भी शैयर करें। 



महात्मा गांधी Mahatma Gandhi

जी हाँ आज में उस शख्सियत की बात करने जा रहा हूँ, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी, जिन्होंने इस देश भारत को एक सूई के धागे में पिरोने से लेकर इस देश को कैसे मजबूत किया जा सकता है।
बापू का जन्म गुजरात के पोरबंदर साबरमती नदी के किनारे आश्रम में 2 अक्टूबर 1869 में हुआ था, उनका परिवार गरीब और साधारण परिवार से था और कोई इतना बड़ा पैसे से अमीर आदमी  नहीं था, हाँ जानकारी के जरिये सबसे पहले होशियार था। 
उनकी  शुरुआती तालीम अपने राज्य में ही हूई मगर उच्च शिक्षा के लिए बाहर विदेश जाकर पढाई की। और वकालत करने के लिए इंग्लैंड के लिए गए थे। वकालत की डिग्री पास करके वापस अपने मुल्क आए, वहाँ से वापस दक्षिणी अफ्रीका गए वहाँ पर एक मुस्लिम व्यापारी का फैसला सुना था लेकिन बदकिस्मती से असफल हो गये।      दक्षिणी अफ्रीका में काले और गोरों का भैद चल रहा था तब गाधीं जी ने वहाँ पर इस चीज़ को हकीकत में समझा और परखा। जब अपने मुल्क लोट रहे थे तब एक रेल 🚄 के फ्रस्ट क्लास के डब्बे में बैठ कर यात्रा कर रहे थे, तब वहाँ पास में बैठे अंग्रेज ने पूछा तुम यहाँ क्यों बैठे हो तो गाधीं जी ने मेरे पास टिकट है में बैठ सकता हुं, तो अंग्रेज ने कहा आप नहीं बैठ सकते क्योकि आप काले लोग हो हम गोरे लोग है हमारे पास अधिकार है, जब बीच में कोई एक रेलवे स्टेशन🚏 आ जाता है और वहाँ पर गांधी जी को वे लोग धक्का देकर बाहर उतार देते हैं, तब गांधी जी मन ही मन कहते हैं अंग्रेजो आज आप मुझे इस रेल से उतारा है कल आपको एक दिन में अपने मुल्क से बाहर खदेडूगा।ये गांधी जी का दृढ निश्चय था।  आखिरकार वापस अपने मुल्क भारत आने का फैसला किया उस समय 1915 का  सन था जब देश में पहली बार कदम रखा था उस समय देश अंग्रेजी हुकूमत की दास्ताँ बयान कर रहा था। महात्मा गांधी जी के राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले था जिन्होंने उनको सलाह दी कि आप देश की स्थितियों से निपटना चाहते हैं तो सबसे पहले देश का भ्रमण करो और लोगों की हकीकत आप को पता चल जाएगी, तब गांधी जी 1917 में पंजाब के अमृतसर में किसानों की हकीकत हालातों से वाकिफ होते हैं और अंग्रेज़ी सरकार से अनुरोध करवाकर उनकी मांगो को स्कवीकर  कररवाते हैं। इसी तरह बापू पूरे भारत का भ्रमण करके किसान ौ और गरीब लोगों की मदद करते हैं, भारतीय जनता को संगठित करने का काम भी करते हैं। भारत में उनके द्वारा तीन प्रमुख ा आंदोलन चलाए गए जिन्हें देशव्यापी आंदोलन का जाता है। महात्मा गांधी जी ने देश का प्रतिनिधित्व किया था कोई अपने स्वार्थ के लिए नहीं किया। जो आंदोलन चलाए थे वो तीन आंदोलन महत्वपूर्ण है 1. असहयोग आंदोलन 2.सिविन्य अवज्ञा आंदोलन 3.भारत छोडो़ आंदोलन। ये तीन आंदोलन गांधी जी के नेतृत्व में चलाए गए थे। और ये आंदोलन कोई लाठी कै जोर में नहीं बल्कि बात और सत्य और अंहिसा के बलबूते पर आधारित था। 
अगर गांधी चाहते तो लठ और हथियार🔫 से विद्रोह करवा सकते थे मगर ऐसा नहीं किया, उन्होंने इस बात को गहराई से जांचा और परखा फिर कदम उठाया उस की तरफ, क्योंकि उन्हें पता था कि अगर हथियार से अंग्रेजों🇬🇧 से मुकाबला किया जाए तो हमारे लिए नुकसान की बात है, तो गांधी जी ने बात चीत और सुलह , और असहयोग द्वारा विद्रोह करने का फैसला किया। गांधी जी दो शब्दों से भलीभाँति और अच्छी तरह परिचित थे, सत्य और अंहिसा। क्योंकि हमेशा सच बात की ही जीत होती है, झूठ की हार होती है। और अगर हिंसा होगी तो आपस में मर कर खत्म हो जाएंगे और गलत दिशा में जाकर गिर जाएंगे। इसलिए उनहोंने सत्य और अहिंसा शब्दों का प्रयोग किया और इन दोनों शब्दों के पुजारी बन गये।और दूसरे लोगों को सत्य और अहिंसा पर चलने का आग्रह किया। देश को आजादी महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में ही मिली थी, इस में कोई शक की बात नहीं है। 

आज बहुत सारे लोग राजनीति की रोटियां सेकने वाले गांधी जी को नमन तो करते हैं मगर उनके द्वारा अपनाए गये सिद्धांत पर नहीं चलते हैं। अगर लोग👫👬👭 गांधी जी के सिद्धांतों पर चले तो देश की स्थिति में काफी परिवर्तन देखने को मिलेगा। उन को राष्ट्र पिता के नाम से और किसान मजदूर उसको बापू के नाम से पुकारते है, क्योंकि वो यही चाहते थे कि देश के अन्दर हर गरीब तबके का विकास हौ और सुख चैन से रह सके। उन्होंने हर गरीब और मजलूम लोगों की मदद की, रोजगार चलाने के लिए खुद ने खादी का चरखा चलाया ंऔर लोगों को इस काम के लिए प्रेरित किया। ताके लोग रोजगार के लिए आत्मनिर्भर रह सके किसी दूसरे के मोहताज न हो। 

आज हमे ऐसी शख्सियत से सबक लेकर देश के अन्दर नवाचार स्थापित करने चाहिए। देश को ऊंचाईयों तक ले जाकर कामयाब बनाएं। किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, खुद मेहनत करके रोजीरोटी कमानी चाहिए। 

गांधी जी की चार गजब बातें जो दुनिया ने अपनाई हमने भुला दी- 
1.घी का दिया क्यों जलाया। 
2. शिक्षा का फार्मूला। 
3.दूसरों को उठाईये। 
4.खुद उदाहरण बनिए। 

Important day of celebrating reasons, महत्वपूर्ण दिवस मनाने के पीछे का कारण

जी हाँ दोस्तों आज का अध्याय बहुत ही महत्वपूर्ण है। वो है " महत्वपूर्ण दिवस मनाने का पीछे का कारण"। महत्वपूर्ण दिवस हम क्यों मनाते है और किसलिए मनाते है किस उद्देश्य से मनाते है, इससे क्या प्रेरणा मिलती है हमें?  इन सारे सवालो के जवाब आप को दे रहा हूँ। 
हम  भारतीय महत्वपूर्ण दिवस किसी महापुरुष की जयंती या पुण्यतिथि, या शहीद दिवस, या कोई ऐसा बड़ा दिवस जो हमे एक खास दिवस मनाने की प्रेरणा देता हो और उससे हमे बहुत कुछ संदेश अथवा सीखने के लिए मिलता है। 
आज भारत के दो - तीन दिवस ऐसे है जो 
हमें भारतियों को एक साथ प्रेरणा के साथ रहने अथवा भाईचारे की भावना का विकास होता है सभी भारतीय इन कार्यक्रम में एक तिरंगे के नीचे खड़े होकर एक प्रकार की अच्छी शपथ लेते हैं। आज हम सभी देशवासी राष्ट्रीय दिवस मनाते तो बड़ी शानो शौक़त से, उस दिन हम देश के लिए सब कुछ कुर्बान होने के लिए हम लोग बड़ी बड़ी बातें तो खूब करते, अथवा भाषण भी बढ चढ कर करते हैं, ये बातें तो अच्छी है मगर देश के लिए कुर्बान होना और सच्ची मोहब्बत दिखाना बहुत दूर की बात है। क्योंकि जो लोग महत्वपूर्ण दिवस के मोके पर जितना गर्व से भाषण देते हैं उतना अगर देश की सच्ची सेवा करे तो देश की आज कुछ रोनक ही अलग होती। हाँ यह हमारी भारत की सभ्य संसकृति की परंपरा है कि बड़े महान क्रांतिकारी एवं स्वतंत्रता सेनानी जैसे वाद्वान लोगों को याद करना चाहिए और उन्होंने देश के लिए और अपनी समाज के लिए क्या किया, वो बातें गौर से समझनी चाहिए। फिर उन से शिक्षा लेकर हमें आगे बढ़ना चाहिए, ये होता है महत्वपूर्ण दिवस मनाने का मुख्य कारण है। 
स्तंभ
स्वतंत्रता दिवस
गणतंत्र दिवस
शहीद दिवस
विज्ञान दिवस
शिक्षक दिवस
हिन्दी भाषा दिवस
पर्यावरण दिवस
जल दिवस
न जाने और भी बहुत सारे दिवस हम लोग बडे़ शान और गर्व से मनाते है और उनसे सबक लेकर कुछ समय जरूर आगे बढते हैं। लेकिन बाद में ये सब बातें भूल जाते हैं।अलग अलग मोके पर अलग अलग सीख जरूर मिलती है, लेकिन उस अच्छी प्रेरणा को लेकर जीवन में आगे कैसे बढ़ा जाए ये सबसे समझना अनिवार्य है। हमारी एक बडे स्तर पर परंपरा बन गयी है कि हम लोग महत्वपूर्ण दिवस मनाते तो बड़ी धूम धाम से, मगर उन महत्वपूर्ण दिवस से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना भूल जाते हैं। व्यक्ति को अपने जीवन में आगे बढने के लिए बहुत कुछ अभ्यास करना जरूरी है और हर चीज को समझना और उस पर गौर करना जरूरी है। महत्वपूर्ण दिवस मनाने से हमें बहुत सारी जानकारी मिलती है और उन महान आदर्श लोगों की सफलता के राज मिलतें है ं जिससे हम लोग आगे बढ़ पाते हैं जल्दी से कामयाब होते हैं। आज हम लो जैसे महात्मा गांधी जी का दिवस शहीद दिवस के रूप में याद करते हैं, याद तो सब करते हैं अपने अपने स्वार्थ के लिए मगर उनके सिंधातो पर कोई भी नहीं चल पाता है, और तभी तो देश इतना पीछे चल रहा है, महात्मा गांधी जी के बताए हुए नियमों पर देश चलता तो देश तभी अमेरिका जैसे विकसित देशों से आगे निकल जाता ।आज ये गांधी जी की बातें विदेशों ने अपना ली है और वो देश तरक्की की रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, आखिर हम लोग कहां जा रहे हैं। ये सबसे बड़ा सोचनीय विषय है

धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया। 
   में आप का दोस्त लेखक वक्ता, निजी अध्यापक मुराद खान जयसिंधर। 
Mobile phone📱 6378616491
muradjiyand1234@gmail.com


https://socialworkerandeducationist.blogspot.com/2019/07/man-is-capitalism-in-three-qutions.html?m=1





Government schools✏📚🏫 of conditions, सरकारी स्कूलों के हालात



 Government school of village.

जी हाँ ऊपर दिये गये स्क्रीन शॉर्ट को देख कर लगता है कि वाकई मे एक नया अध्यापक जिनकी अभी वर्तमान में जोइनिंग हुई है वो ये सोच कर स्कूल जाता होगा कि मैं भारत के भविष्य का निर्माण करने जा रहा हूँ, लेकिन उस अध्यापक को 🏫स्कूल की स्थिति से हालात का पता नहीं है। आगे क्या होने वाला है और क्या नहीं। लेकिन पहले दिन☀ नया जोश व जुनून के साथ स्कूल के बच्चो के साथ जरूर ज्ञान💯📖📚📝 बांटता है और बच्चों को शिक्षा के प्रति उन्हें प्रेरित करता है  कुछ दिन बाद जैसे ही स्कूल की डाक बनाने का काम का पता चलता है तो फिर वो नया अध्यापक उसी काम में व्यस्त रहता है, फिर बच्चों की पढाई धीरे धीरे भूल जाता है और फिर उसी के सिलसिले में आफिस के चक्कर लगाता रहता है। सरकारी स्कूलों में भयंकर स्टाफ की कमी, उसके बावजूद एक ही सरकारी अध्यापक वो भी सरकारी स्कूल के कागजी कार्रवाई में पूरा समय लगाता है, फिर पढानै का नाम मतलब स्कूल जाना है, पढाना या न पढाना हमारे बस की बात नहीं है क्योंकि ये किसी अध्यापकों का दोष नहीं है ये दोष किसी ओर का नहीं ये सरकार का दोष है जो हमे शिक्षा नीति से पीछे धकेल रही है। सरकार जितना कागजी कार्रवाई में व्यस्त रखती है उतना ही अगर पढाई में अध्यापकों को व्यस्त करवाती तो शायद ही आज इस भारत की तस्वीर दुनिया में बदल चुकी होती  क्योंकि शिक्षा से ही देश का विकास होता है न कि कागजी कार्रवाई पूरी करने से। 
मेरा एक सरकार से सुझाव है कि आप हर सरकारी विद्यालयो में एक कलर्क पद का गठन कीजिये ताकि अध्यापक का भार कागजों के प्रति कम हो और छात्रों को पढाई आराम से करवा सके। 
सरकार जो चाहे वो कर सकती है, क्योंकि सरकार शिक्षा के प्रति चाहे तो बडा़ बदलाव करवा सकती। शिक्षा के प्रति सुधार करवा सकती है शिक्षा के प्रति नवाचार स्थापित कर सकती है। अगर सरकार ही न चाहे कि देश का भविष्य सुधर जाएगा। 
ये समस्या सरकारी विद्यालय उच्च प्राईमरी तक तो ज्यादा दिखाई देती है।
सरकार ऊपर से सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती है लेकिन बच्चा स्कूल तो चला जाता है मगर खाली दिमाग वापस लोट आता है, भरा हुआ दिमाग जाता है। कहने का मतलब यह है कि सरकारी स्कूलों में पढाने वाले अध्यापक सिर्फ कागजी कार्रवाई में व्यस्त रहते हैं उधर बच्चों की पढाई गायब हो जाती है, अध्यापक बच्चों पर पढाई के प्रति पूरा ध्यान नही दे पाते हैं। 



सेहत Health

जी हाँ आज का अध्याय है "सेहत" ये सेहत किसी ओर की नहीं है, ये सेहत हमारी खुद की है। हम हमारी सेहत की कितनी देखभाल करते हैं ये सबसे महत्वपूर्ण है। आज के समय हर इंसान शारीरिक रूप से अपने आप में अलग है, कोई मोटा, कोई पतला, कोई मध्यम अथवा कोई दुबला, कोई बड़ा कोई छोटा। ये सेहत का असर खान पान अथवा वातावरण पर निर्भर करता है, कितना खाते हैं और कैसा खाते है। प्रत्येक व्यक्ति के शरीर का रंग अलग अलग होता है, किसी का काला, कोई लाल रंग,सावला रंग, किसी का सफेद। तो हर व्यक्ति का रंग भी अलग अलग होता है ये भी वातावरण का ही प्रभाव पड़ता है।
व्यक्ति को अपनी सेहत सुधारने के लिए खान पान पर ज़्यादा तवज्जो देना होगा, और उस की पूरी जानकारी चिकित्सक से पूछ कर ही उस खान पान में बदलाव लाना होगा। आज कल समय तेजी से भाग रहा है तो व्यक्ति भी समय के साथ तेजी से दोड़ता नज़र आ रहा है, लेकिन वे व्यक्ति कठिन काम करते हैं या सरल कार्य करते हैं जो भी हो मगर उतना भोजन🍴 पर ध्यान नही देते हैं जो देना चाहिए था। आज कल व्यक्ति खाना खाते समय मोबाईल का उपयोग ज्यादा करते हैं जिनकी वजह से उनका ध्यान खाने पर नहीं होता है उन का ध्यान मोबाइल फोन पर चला जाता है, जिसे उनका खाना सही रुप से हजम नही हो पाता है।
दूसरा एक ओर कारण है कि व्यक्ति भागदौड़ की ज़िन्दगी में खाना भी जल्दी से खाता है और बारीक चबाता नहीं है जिनकी वजह से खाना सीधा आहार नाल में निगल जाता है जो कि सही रूप से पाचन नहीं हो पाता है।

तीसरा कारण है लोग पानी कम पीते हैं, लोग कठिन काम करने वाले बहुत कम पानी पीते हैं, क्योंकि उनको पानी💧की पीने पूरी जानकारी नहीं होती है। बहुत सारे बड़े बड़े वी आई पी लोग ज्यादा पानी पीते हैं और उनके पास काम बहुत कम होता है। फिर भी वे लोग पानी ज्यादा पीते हैं। खाना खाने से  तुरंत पहले पानी पीना चाहिए और उसके बाद खाना चबा चबा कर खाना चाहिए। खाना खाने के बाद आधा घंटा बाद पानी पीना चाहिए, ता की भोजन🍴 की पाचन क्रिया सही रुप से होनी चाहिए जिससे आप की सेहत सही रह सकें।

आप जो खाना खाते है वो उच्च पोष्टिक वाला होना चाहिए, न तो ज्यादा जला हूआ होना चाहिए और न ही कच्चा होना चाहिए खाना शुद्ध और स्वच्छ होना चाहिए। उस भोजन के अन्दर मिर्ची, हल्दी और  तेल की मात्रा कम होनी चाहिए।

अगला कारण है कि लोग अपने काम से इतराते है जिसकी वजह से उनके अन्दर आलस्य पन आ जाता है जिसे उनका शरीर मोटा होता चला जाता है।  वे लोग अपने काम को समय पर नहीं कर पाते हैं, जिससे उनका शरीर ढीला ढाला हो जाता है। एक ये है कि बहुत सारे लोग समय पर खाना नहीं खाते है और समय पर निश्चित समय तक नींद नहीं लेते हैं जिनकी वजह से शरीर में आलस आ जाता है। अगर खाना खाते भी है तो बाज़ार की चीज़ें ज्यादा खाते है जिससे उनके बदन में शिथिलता आ जाती है।

जो लोग कठिन कार्य करते हैं उनका शरीर मजबूत एवं हठ्ठा कट्टा होता है, जो कि बहुत क्षमता रखता है, जो लोग सिर्फ छाया में बैठ कर कार्य करते हैं उनका शरीर आलसी एव हलका होता है। जो लोग कठिन कार्य करते हैं वे खाना भी ज्यादा खाते है और पाचन क्रिया भी जल्दी से होती है। हाँ ये बात जरूर है कि कठिन कार्य करने वालों का शरीर काला तथा पतला जरूर होगा मगर अंदरूनी क्षमता बहुत मजबूत होगी। छाया अथवा आफीस में बैठ कर कार्य करने वालों का शरीर पर चमक एव साफ सुथरा जरूर होगा। फर्क बस इतना ही है।

शहर🌇 वासियों से ग्रामीण वासी ज्यादा ताकतवर होते हैं, क्योंकि वे लोग शुद्ध भोजन करते हैं, उनका शुद्ध वातावरण होता है। जो लोग शहरों में रहते हैं वे कमजोर होतें है क्योंकि शहरों में शुद्ध भोजन नहीं मिल पाता है, हर चीज में मिलावट की हुई मिलती है जिसे उनका शरीर कमजोर रहता है। शहर के लोग शारीरिक रूप से कमज़ोर होते हैं और गांव के लोग शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं।

इन्सान का शरीर चाहे मोटा, या पतला, दुबला कैसा भी हो ,लेकिन अपने शरीर को तंदरुस्त रखने के लिए लगातार खान पान पर ध्यान देना चाहिए और लगातार कार्य करना चाहिए, कुछ न कुछ काम करने की प्रवृत्ति डालनी चाहिए जिससे आप का शरीर मजबूत एवं तंदरुस्त रहेगा।

शरीर को नष्ट करने वाली चीज है नशा, नशा चाहे कोई भी हो तम्बाकू, सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, दारू, मीठा गुटखा, डोडा अमल ये सारे नशे शरीर को नष्ट करने वाले होते हैं जिससे इन्सान का शरीर धीरे धीरे नष्ट हो जाता है। इन्सान के शरीर को दुबला पतला ये नशा बनाता है। जो कि शरीर के लिए हानिकारक है, इसका इस्तेमाल बहुत कम या सीमित मात्रा में करना चाहिए।



दीनी तालीम ( धार्मिक शिक्षा) Religious education

जी हाँ आज का नया अध्याय है" दीनी तालीम।  बात 
बहुत बड़ी है। व्यक्ति का अस्तित्व परिवार से है, और परिवार का अस्तित्व समाज से है और समाज का अस्तित्व  एक विशेष समुदाय से है और समुदाय का अस्तित्व मज़हब से है। बिना मजहब के व्यक्ति का अभी दुनिया में अस्तित्व तो हो सकता है मगर दुनिया से चले जाने के बाद उसका कोई अस्तित्व नहीं होता है। इस दुनिया में जन्म लेने वाला हर इंसान अपने अपने धर्म से जुडा़ हुआ रहता है और वही व्यक्ति जो अपने मज़हब की सच्ची शिक्षा  और अपने मज़हब के ऊसूलो पर  आगे बढ़ पाता है वही कामयाब होता है। इस पृथ्वी नामक गृह पर जो दुनिया बसी है, उनमें से हर एक व्यक्ति का अस्तित्व अपने अपने धर्म से जुड़ा हुआ है, मगर कोई व्यक्ति अपने धर्म के वास्तविक नियमों एवं रीति रिवाजों पर नहीं चलता है तो उन को दर दर की ठोकरें खानी पड़ती है। चाहे धर्म कोई भी, क्यों न हो मगर उसके उसूलों पर चलना अनिवार्य है, अगर हम नहीं चलते हैं तो यह गलती हमारी है किसी ओर की नहीं। हकीकत में देखा जाए तो कोई भी व्यक्ति  मज़हब से अगर बाहर है तो वो इंसान के लायक नहीं है उस को जानवर कहा जाएगा क्योंकि उस इंसान के अन्दर इंसानियत नाम की चीज नही होगी। इन्सान धर्म से जुडा़ हुआ है धर्म ही इंसान को लेकर चलता है। दुनिया और आखिरत की वास्तविक सच्ची शिक्षा धर्म से ही मिलती है। जो व्यक्ति मज़हब के नियमों पर चलता है उनके अन्दर  अच्छे अखलाक, इन्सानियत, प्रेम मोहब्बत, आपसी भाईचारा, दुख दर्द, सच और झूठ, अपने और सही और गलत ये सब बातें इन्सान मज़हब से ही सीखता है। तब वो व्यक्ति धर्म के रास्ते पर चल कर दूसरे लोगों को अच्छी सलाह और सही राह पर चलने की प्रेरणा देता है।
हकीकत में असली शिक्षा धार्मिक शिक्षा ही है, कोई भी मज़हब  क्यों न हो , कोई भी मज़हब बुरी तालीम नहीं देता है, हर कोई धर्म अच्छी और सच्ची बात बताता है, अपने मज़हब की खूबी जरूर बताता है। हाँ यह भी बात सत्य है कि कोई भी धर्म आपस में भेदभाव रखने की सलाह  नहीं देता है। हाँ यह कुछ ऐसे लोग होते हैं जिन्हें अपने मज़हब की तालीम के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं होती है  जिसकी वजह से वै व्यक्तियों को  कयी तरफो में बांटते हैं और वे काल्पनिक विरोध उत्पन्न करते हैं। जिनकी वजह से हम उनको दौष देते हैं और लेकिन वे लोग धर्म के नियमों को समझते नही है।
##मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
    हम हिन्दी है हिन्दुस्तान हमारा।।
कोई भी मज़हब आपस में विरोध करने की शिक्षा नहीं देता है, विरोध या गन्दी हरकतों के कुछ दूसरे पहलू होते हैं जिनकी वजह से इन्सान के अन्दर उलफत और कलह पैदा होतीं हैं।
सभी धर्म अपनी अपनी जगह पर सब सही है मगर अपने अपने मज़हब की तालीम बहुत ही कम गिने चुने लोगों के पास होती है जिनकी वजह से लोगों के अन्दर नकारात्मकता, अंधविश्वास और छूआछूत जैसी भावनाएं भरी हुई है।इन्सान को धर्म ही बुरी बातों से बचाता है, इन्सान को पता है कि गलत कार्य करुंगा तो मुझे पापज्ञ( गुन्ना)  होगा और मुझे आगे भी सजा मिलेगी। इसलिए इन्सान थोड़ा सोच समझ कर कदम उठाता है। इन्सान की वास्तविक तालीम मजहबी तालीम है, बाकी दुनिया की तालीम तो रोजी रोटी कमाने के लिए है।

धन्यवाद, में आप का दोस्त लेखक  वक्ता, अध्यापक मुराद खान जयसिंधर। 






प्रेरणा और दिशा निर्देश

जी हाँ आज के ये दो शब्द बहुत ही अति महत्वपूर्ण है, आप लोग इन शब्दों से भली भाँति परिचित हैं कि इन शब्दों का उपयोग कहाँ पर क्यों किया जाता है। इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल विद्यार्थी के जीवन में जरूर होता है ,इन शब्दों की ज्यादा जरूरत विद्यार्थी को होती है उतनी ही शायद किसी को होती होगी। छात्रों के संदर्भ में ही इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल विशेष रूप मे किया जाता है क्योंकि विद्यार्थी का स्तर और सही लाईन पर आसानी से चल सके और अपनी मंजिल आराम से तय कर सके। 
आज कल हर स्कूली शिक्षा और कोलैज स्तरीय शिक्षा हासिल कर रहे है उन दोनों विद्यार्थियों के लिए बहुत ही जरूरी है, ता की छात्र सही रास्ता पकड़ कर अपने लक्ष्य को आसानी से पार  कर सके। और अपना उद्देश्य पूरा कर सके। 

प्रेरणा:- जी हाँ यह शब्द बहुत ही महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति किसी कार्य के लिए 
प्रेरित किया जाए तो वह उतना ही आत्मविश्वास के साथ प्रशन्नता से कार्य करने लगता है, क्योंकि उनके अन्दर एक नई ऊर्जा⚡ एवं सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा होता है। कोई भी व्यक्ति जो भी कार्य कर रहा है तो उसके अंदर नयी शक्ति या ऊर्जा अगर मिल जाए तो वो व्यक्ति उस काम को करने में देर नही लगाएगा। प्रेरणा व्यक्ति के अन्दर दो तरह से आती है, एक तो अपने आप व्यक्ति के अन्दर प्रेरित होती है उससे व्यक्ति खुद प्रेरित होकर काम करता है। दूसरी वे प्रेरणा जो व्यक्ति को जगाना पड़ता है अथवा उनके अन्दर नयी सोच और जोश जुनून पैदा करना पड़ता है जिससे कार्य करने वाला आदमी बाह्य शक्ति द्वारा प्रेरित होकर कार्य करता है तो उस के अन्दर एक नई ताकत मिल जाती है। प्रेरणा द्वारा किया जाने वाला कार्य ही महत्वपूर्ण है। बिना प्रेरणा द्वारा किया जाने वाला कार्य उतना संतुष्ट नहीं कर सकता जितना प्रेरणा द्वारा किया गया कार्य। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी दो तरह से कार्य करते हैं कुछ ऐसे छात्र होतें है जो खुद अपने आप में स्वंय प्रेरित होते हैं और उस कार्य के लिए लगातार कोशिश करता रहता है और अपना लक्ष्य एक दिन जरूर हासिल कर लेता है। दूसरी वे प्रेरणा जो छात्र को बाह्य स्रोत द्वारा मिली हो अथवा उस  कोमोटीवे किया गया हो। 

प्रशंसा

जी हाँ आज का शब्द बहुत ही महत्वपूर्ण है वो शब्द है प्रशंसा🙏। इस शब्द की अहमियत को आप कम मत आंकिये, जितनी जिसकी प्रशंसा करनी है उस की उतनी खूब करिये, उस में जरा भी कंजूसी न करें। आप अपने दोस्त या किसी स्टाफ की लोगों के सामने जितनी सकारात्मक तारीफ करना चाहो, उतनी खूब करो, उस तारीफ का फल आप को कयी गुना लाभ पहुंचा सकता है। चाहे आपका दोस्त हो, या आप का स्टाफ हो, या आप का कोई नोकर हो या आप का कोई छोटा मोटा मज़दूर हो, या आप का कोई घर का सदस्य ही क्यों न हो हां ये लोग आपके आस पास जरूर रहते होंगे मगर इनकी प्रशंसा करने से कभी मत चूके। हाँ इन लोगों के अन्दर कितनी भी बुरी आदतें क्यों न हो मगर प्रशंसा लोगों के सामने दिल 💜❤ खोल कर करिये और कोई गन्दी हरकत है तो या उनके अन्दर कोई कमी पायी जाती है तो उनको अकेले में कहिये और उनको सुधारने के लिए कहिये। अपने दोस्तों👭👬👫 की बुराई कभी लोगों के सामने मत करिये नहीं तो परिणाम बदलने में देर नही लगती। अगर किसी की तारीफ करनी है तो दिल💜❤ खोल कर लोगों के सामने करिये, तारीफ कभी अकेले में मत करिये। आज कल हर इंसान प्रशंसा का भूखा होता है। उन की जितनी प्रशंसा करनी है तो उतनी खूब करिये, उस में जरा भी कंजूसी न करें। अगर आप अपने साथी या दोस्त की तारीफ करते हैं तो वो आप को सकारात्मक परिणाम दैगै, अगर आप उनकी बुराई लोगों के सामने करते हैं तो आप को परिणाम नकारात्मक मिलेगा, ये बात सत्य है। 

शुक्रिया, धन्यवाद🙏💕। 
में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर। 

शिक्षा क्यों जरूरी है? Why education is need

जी हाँ दोस्तों आज का अध्याय है शिक्षा क्यों जरूरी है?  इस बात से आप बिल्कुल वाकिफ हैं, आज के ज़माने में ताअ़लीम ज़रूरी है बिना तालीम के इन्सान का मुस्तकबिल नहीं सुधरता।हाँ यह बात भी सही है कि बिना तालीम के ज़िन्दगी को भी एडजस्टमेंट  सही  रुप से नहीं कर पाता है इन्सान, क्योंकि शिक्षा जीवन जीने के लिए जरूरी है बिना शिक्षा के जीवन भी अधूरा है और शिक्षा का इस्तेमाल हर क्षेत्र में और हर कार्य में होता है चाहे हिसाब किताब का कितना भी  बड़ा या छोटा कार्य  क्यों न हो। शिक्षा का उद्देश्य वास्तविक यह नहीं है कि  शिक्षा हासिल करके नोकरी लग जाए बस  शिक्षा पूरी हो गई,बल्कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ यह है कि शिक्षा हासिल करने से आप की सोच बड़ी और अच्छे गुण, अच्छी आदतें और अनुशासन होना जरूरी है, ये है हकीकी शिक्षा। लेकिन वास्तविक शिक्षा में अनुशासन का  होना  बहुत ही जरूरी है। अपनी सोच💭 को बड़ा रखना और एक दूसरे भाई ,यार की सहायता करना ही वास्तविक शिक्षा है। आज हमारी  सोच यह है कि जब लोगों को अपने बच्चों के बारे शिक्षा सबंधित बात करते हैं तो ये लोग ताना मारते हैं कि फलां आदमी नोकरी लग गया अब इन की बारी है ,उनका एक ही मकसद है नोकरी के बिना पढाई किस काम की, आज कल के लोग कठिन मेहनत  कर लैगै मगर उतना उनको पैसा नहीं मिलता है, लोग स्मार्ट काम कर के बहुत ज्यादा पैसा कमाने सकते हैं, जैसे इन्टरनेट, कम्प्यूटर, अध्यापन द्वारा । लैकिन आज का दौर बहुत ही नाजुक है क्योंकि ये दौर इन्टरनेट और विज्ञान अथवा तकनीकी का दौर है। इस दौर को अनपढ़ आदमी के लिए समझना बहुत ही मुश्किल है। पुराने जमाने में कोई भी बड़े काम कै लिए लोगों की सख्त जरूरत होती थी लेकिन आज का दौर विपरीत चल रहा है लोगों की संख्या कम और मशीनों से काम ज्यादा हो रहा है।
शिक्षा सबके लिए अनिवार्य है और बिना शिक्षा के जीवन स्तर नहीं सुधर पाएगा। यह सत्य है कि हमारा विकास, यानि सकारात्मक सोच, अनुशासन, तालीम से हासिल होगी। बिना तालीम के इन्सान की जिंदगी उस जानवर जेसी है, जिस मुल्क में पढी लिखी आबादी ज्यादा होती है उस मुल्क में तरक्की की रफ़्तार भी हाई होती है। इस उदाहरण से आप जरूर समझ गए होंगे तालीम की अहमियत को। आज के वर्तमान समय में मैने ऐसे कुछ सरकारी कर्मचारी देखे हैं जो यह कहते हुए सुना है कि आज शिक्षा कहीं पर भी नहीं है ,अपने बच्चों को पढा के क्या करोगे, आप इनको मजदूरी कराओ, ये बात पढ़ें लिखे और कर्मचारी करते हैं, अनपढ लोग बेचारे इन की बात कौ मानेंगे नही तो और क्या करैगै ।
शिक्षा हमारे लिए इसलिए भी जरूरी है कि शिक्षा हमें जीवन जीने का तरीका सिखाती है और हमारे अन्दर नयी सोच और ऊर्जा पैदा करतीं हैं। में आप हज़रात को बड़े अदब से कहना चाहता हूँ कि अगर आप के पास तालीम नहीं है तो समझो आप के पास सब कुछ है। तालीम की तरबियत और अहमियत से ही आप की ज़िन्दगी में बदलाव आता है, आप के अन्दर अच्छे और बुरे का मालूम चलता है, और अपने और पराये का पता चलता है, हार और जीत 🏆 का पता चल पाता है, ठण्ड और गर्म का पता चलता है ,अपनौं के दुख दर्द का पता चलता है। आज कल के लोग  बड़ा र इस और ठाट बाट वाला उस को मानते हैं जिनके पास अधिक धन दोलत हो, में कहता हूँ कि ये सरासर गलत है, जिन के पास दीनी और दुनिया की तालीम का  ज्ञान है वो इंसान सबसे बड़ा दोलत मंद है। दुनिया के अन्दर धन दोलत बढने से कोई समाज का भला नही होता है बल्कि तालीम के फैलने से समाज के हर बच्चे का विकास होता है अथवा भला होता है।


में आप सभी हज़रात से अर्ज गुजारिश करना चाहता हूँ कि अपनी संतान को शिक्षा दिलावे, बिना शिक्षा के उनका कुछ भला नही हौ सकता है। शिक्षा से ही समाज का विकास और समाज से देश का विकास होता है।







मुल्क के अन्दर 💉🔪आत्महत्या का ग्राफ 📈 क्यों बढ रहा है?

आज में आप के सामने एक विशेष टोपिक पर संवाद कर रहा हूँ, हमारे मुल्क के अन्दर हर दिन☀ एक पोधा पनपता है और हर दिन एक नया पौधा उजड़ता है, ये खबर सुन कर हम और आप दुख जरूर महसूस होता होगा, और साथ ही भारत सरकार और राज्य सरकार को भी दुख जरूर होता होगा। लेकिन वो सरकारैं  क्या कर सकती है, किसी की मौत को रोकना न तो सरकार के बस की बात है न ही किसी चिकित्सक की। हाँ ये बात जरूर है कि अगर जनसंख्या बढती है तो सरकार के लिए चिंता का विषय जरूर है कि इन मौतों को कैसे रोका जाए। सरकार उस दिशा में गरीब लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाएं जरूर लागू करतीं हैं, जिससे मोत का ग्राफ जरूर घटता नजर आता है।
लोग👫👬👭 आत्महत्या क्यों करते हैं? 
हमारे लिए और आपके लिए यानी हम सब के लिए चिंता का विषय जरूर है कि लोग आत्महत्या करने पर क्यों मजबूर हो जाते हैं, ये सबसे बड़ा चिंता का विषय है। लोगों का जो सपना होता है वो पूरा नहीं हो पाता है जिसके कारण लोग अपनी ही जान लेने पर उतारू हो जाते हैं। उनका सपना किसी भी क्षेत्र से संबंधित हो सकता है, हाँ यह ज़रूर है कि अधिकतर आत्महत्या प्यार के चक्कर में पड़ने से होती है। कयी लोग ऐसे भी है जिनकी मैहनत का फल उनको पूरा नहीं मिलता है, या अच्छी सी नौकरी नहीं मिल पाती है, अधिक मेहनत करने के बाद भी, जिसके कारण भी आत्महत्याएं ज्यादा होती है। आत्महत्याओं का 📈ग्राफ बढना ये संकेत देता है कि उस देश में गरीबी की ओर इशारा करता है, उस देश के निवासियों का कोई भी छोटा मोटा काम हो कृषि / सरकारी नौकरी / निजी जाब / या किसी भी काम में असफल होना बार बार,  जिस के कारण आत्महत्याओं का ग्राफ बढ रहा है। आत्महत्याओं का ग्राफ प्यार के चक्कर में ज्यादा बढ रहा है, जिस को लेकर हम और सब दुख के भागीदार हैं।
किसी भी सपने को पूरा नहीं कर पाना क्या उसका इलाज आत्महत्या ही है?  
नहीं। इस प्रशन 💭❓ का उत्तर है कि जो भी आप काम कर रहे हौ चाहे वो काम कृषि का हो या अच्छी नोकरी का हो या कोई रिश्ता सबंध का हो, उस काम का आप डट कर मुकाबला कीजिये और संघर्ष जारी रखिये। बिना संघर्ष के तख्तो ताज हासिल नहीं होतें है। असली इन्सान तो वही है जो संघर्ष करके जीन्दगी को गुजारै और बिना संघर्ष किये इन्सान दुनिया से चला जाए वो इन्सान ही कैसा?  जिन्दगी का नाम ही संघर्ष है। तो क्यों न होंसले बुलंद करके ज़िन्दगी से क्यों  नहीं मुकाबला किया जाए। अपने आप के अन्दर झांक कर पहले प्रशन 💭❓ कीजिये 👉
में क्या  कर सकता हूँ?
में कोन हूँ? 
मेरा जीवन क्या है?
दोस्तों इन प्रश्नों के अन्दर झांकने से पता चल जाता है कि आप के अन्दर छुपी हुई योग्यता बाहर आ जाती है।
प्रशन 1। में क्या कर सकता हूँ?
इस प्रशन का उत्तर है आप वो कर सकते हैं जो आज तक नहीं किया, कोई भी काम क्यों न हो और कैसा भी आप से बड़ा नहीं होता है, बस आप की सोच का फर्क होता है अपनी सोच💭 बड़ी रख कर काम करैं।
प्रशन 2 में कोन हूँ?
इस प्रशन का उत्तर है कि आप कोन है, आप वो है इस दुनिया में सब कुछ कर सकते हैं। आप को खुद को पहचानने की जरूरत है अपने आप को।
प्रश्न 3 मेरा जीवन क्या है? 
इस प्रशन का उत्तर है कि आप का जीवन क्या है, अपनी योग्यता को पहचानीए और योग्यता के अनुरूप कार्य करिये।

दोस्तों आज में हमारे देश की बात कर रहा हूँ कि मुल्क के अन्दर आत्महत्या औं का ग्राफ बढ रहा है हर दिन न जाने कितने लोग आत्महत्या के फंदे को चूमते है ,अपनी ज़िंदगी से हारना  कोई गुनाह नहीं है लेकिन हार कर आत्महत्या करना यह सबसे बड़ा पाप है। आप अपनी जिंदगी को जैसी बनाना चाहते हैं वैसी ही बन जायेगी  आप जिनदगी को बड़ी बनाईए।

में उन माँ बाप और अभिभावकों से  अपील करता हूँ कि आप अपने बच्चों और बचियों का ख्याल रखिये और उनकी हर जरूरत उचित हो उसको पूरा करने की कोशिश कीजिये। आप का बच्चा या बच्ची कोई भी काम कर रहे हैं तो उन के ऊपर कोई दबाव न डाले जिससे आप का बच्चा आत्महत्या करने पर मजबूर न हो।
अभी राजस्थान का का बाड़मेर जिला आत्महत्या को लेकर सुर्खियों में  है हर दिन समाचार पत्र में कोई न कोई बुरी खबर जरूर सुनने को मिलती है।


धन्यवाद दोस्तों👭👬👫, में आप का दोस्त लेखक  वक़्ता, अध्यापक मुराद खान जयसिंधर ।

जय हिंद जय भारत।।


Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...