जी हाँ दोस्तों आज बात जम्मू कश्मीर की की जाएगी, क्योंकि जम्मू कश्मीर जो पहले था, अब वो नहीं रहा, इस स्थिति के बारे में आप को भी पता है काफी। पहले भारत का राज्य था और भारत का अभिन्न अंग भी था लेकिन अब एसा क्या हुआ कि मोदी सरकार को जम्मू कश्मीर पर धारा 144 लागू करके अवाम की की आवाज को दबा देना और जम्मू और लद्दाख को दो केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा देना, ये सब करने के पीछे सरकार का क्या रूख है?
अनुच्छेद 370 और 35 A हटाने की प्रक्रिया:-
सबसे पहले तो ये समझो कि ये धारा नहीं है बल्कि ये एक अनूच्छेद है जो 370 और 35 a है जो कि ये कश्मीर इस अनुच्छेद में बंधा हुआ था, आज राजनेता और अवाम को ये पता नहीं कि धारा है या अनुच्छेद है। अब इस को हटाने की प्रक्रिया क्या है? वो जरा समझ लीजिये पहली बात अनुच्छेद 370 को खत्म करने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है। ये अनूच्छेद हटाने की मांग जम्मू कश्मीर के भवन में में ही उठनी चाहिए और वहाँ से ये मसला केन्द्र सरकार के पास जाएगा, फिर केन्द्र सरकार इस पर बिल लोकसभा में पैश करेगी ,लोकसभा में पास होना अनिवार्य है, उसके बाद राज्यसभा में बिल जाएगा वहाँ से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के पास जाएगा, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही ये बिल कानून का रूप इख़्तियार करेगा।
केन्द्र सरकार किस तरह बिल लायी है?
हमारी केन्द्र सरकार तो बहुत ही तगड़ी चलती है और जो चाहती है वो कर लेती है, उनहोंने न तो कश्मीर की अवाम की सुनी और न ही प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं की सुनी। जो कानून लाया गया वो तुरंत एक घंटा पहले लोकसभा के सदस्यों को प्रतियां दी गई, मगर ये सब जल्द बाजी में। हालांकि जो कानून संसद में पैश करना होता है उस को चार से पांच घंटे पहले लोकसभा सदस्यों को बताना होता है और वो सदस्य इस पर अध्ययन करते हैं, उसके बाद लोकसभा में सदस्यों से राय ली जाती है, फिर बहुमत के हिसाब से ही बिल को पास कराया जाता है। आप को बता दे कि जम्मू कश्मीर में अभी रष्ट्रपति शासन लागू जो कि वहाँ पर किसी भी पार्टी की सरकार नहीं है। तो कानून लाना भी गलत है, क्योंकि इनके पास बहुमत है जो चाहे वो कर सकते हैं।
अगर अनूच्छेद को उचित तरीके से हटाते तो इतना जम्मू कश्मीर में बवाल उत्पन्न नहीं होता, क्योंकि उस कानून के साथ बहुत सारे लोग खड़े होते तो इतनी राज्य की अवाम परेशान नहीं होती और न ही भारी सिक्योरिटी का इन्तिजाम करना पड़ता। अब आपने जो यह कदम उठाया है चाहे उचित हो या अनुचित हो, इस फैसले के ख़िलाफ़ है अवाम, और आप को उस अवाम को दबाने के लिए या मनाने के लिए भारी बल का सेना💂💂💂 के जरिये से प्रयोग करना पड़ रहा है। तो यकीनन आप को आर्थिक स्थिति मतलब देश की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। देश पहले से ही आर्थिक स्थिति में डूब जा रहा है, लेकिन अब पूरा ही डूबने वाला।
अनुछेद 370 और अनुच्छेद 35 A हटाने के क्या परिणाम आए हैं?
हाँ सरकार ने जम्मू कश्मीर का जो विशेष दर्जा था वो समाप्त करके, उसकी जगह केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया और जम्मू अलग और लद्दाख अलग यानि दो केन्द्र शासित प्रदेश हो गये। लेकिन जम्मू कश्मीर एक मुस्लिम बहुल इलाका है, वहाँ पर 70 फीसदी मुस्लिम आबादी है। जम्मू कश्मीर का एक हिस्सा लद्दाख जहाँ पर सिक्ख और पंडित है, वहाँ उन की आबादी ज्यादा है। खैर जो भी है लेकिन वहाँ की अवाम इस फैसले का सख्त विरोध कर रही है उनको भारी बल की वजह से ही दबाव बना कर रखा गया है और लगभग 1000 मोतें हो चुकी है गन और बैलट की वजह से, यानि जो भी लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी करे या विरोध करे तो सेना को पीछे से खुला आदेश था कि उस को गोली🔫💉 से उड़ाया जाए। तो वाकई सरकार लोकतंत्र के लिए मशहूर है या राजतंत्र के लिए मशहूर है। लोकतंत्र में ऐसे कानून को बनाने की नोबत क्यों पड़ी जिससे सरकार के फैसले को अवाम ( जनता) ने सख्त विरोध किया और अभी भी जारी है। और उसके बावजूद भी सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अनुच्छेद 370 और 35 A हटाने की प्रक्रिया:-
सबसे पहले तो ये समझो कि ये धारा नहीं है बल्कि ये एक अनूच्छेद है जो 370 और 35 a है जो कि ये कश्मीर इस अनुच्छेद में बंधा हुआ था, आज राजनेता और अवाम को ये पता नहीं कि धारा है या अनुच्छेद है। अब इस को हटाने की प्रक्रिया क्या है? वो जरा समझ लीजिये पहली बात अनुच्छेद 370 को खत्म करने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है। ये अनूच्छेद हटाने की मांग जम्मू कश्मीर के भवन में में ही उठनी चाहिए और वहाँ से ये मसला केन्द्र सरकार के पास जाएगा, फिर केन्द्र सरकार इस पर बिल लोकसभा में पैश करेगी ,लोकसभा में पास होना अनिवार्य है, उसके बाद राज्यसभा में बिल जाएगा वहाँ से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के पास जाएगा, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही ये बिल कानून का रूप इख़्तियार करेगा।
केन्द्र सरकार किस तरह बिल लायी है?
हमारी केन्द्र सरकार तो बहुत ही तगड़ी चलती है और जो चाहती है वो कर लेती है, उनहोंने न तो कश्मीर की अवाम की सुनी और न ही प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं की सुनी। जो कानून लाया गया वो तुरंत एक घंटा पहले लोकसभा के सदस्यों को प्रतियां दी गई, मगर ये सब जल्द बाजी में। हालांकि जो कानून संसद में पैश करना होता है उस को चार से पांच घंटे पहले लोकसभा सदस्यों को बताना होता है और वो सदस्य इस पर अध्ययन करते हैं, उसके बाद लोकसभा में सदस्यों से राय ली जाती है, फिर बहुमत के हिसाब से ही बिल को पास कराया जाता है। आप को बता दे कि जम्मू कश्मीर में अभी रष्ट्रपति शासन लागू जो कि वहाँ पर किसी भी पार्टी की सरकार नहीं है। तो कानून लाना भी गलत है, क्योंकि इनके पास बहुमत है जो चाहे वो कर सकते हैं।
अगर अनूच्छेद को उचित तरीके से हटाते तो इतना जम्मू कश्मीर में बवाल उत्पन्न नहीं होता, क्योंकि उस कानून के साथ बहुत सारे लोग खड़े होते तो इतनी राज्य की अवाम परेशान नहीं होती और न ही भारी सिक्योरिटी का इन्तिजाम करना पड़ता। अब आपने जो यह कदम उठाया है चाहे उचित हो या अनुचित हो, इस फैसले के ख़िलाफ़ है अवाम, और आप को उस अवाम को दबाने के लिए या मनाने के लिए भारी बल का सेना💂💂💂 के जरिये से प्रयोग करना पड़ रहा है। तो यकीनन आप को आर्थिक स्थिति मतलब देश की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। देश पहले से ही आर्थिक स्थिति में डूब जा रहा है, लेकिन अब पूरा ही डूबने वाला।
अनुछेद 370 और अनुच्छेद 35 A हटाने के क्या परिणाम आए हैं?
हाँ सरकार ने जम्मू कश्मीर का जो विशेष दर्जा था वो समाप्त करके, उसकी जगह केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया और जम्मू अलग और लद्दाख अलग यानि दो केन्द्र शासित प्रदेश हो गये। लेकिन जम्मू कश्मीर एक मुस्लिम बहुल इलाका है, वहाँ पर 70 फीसदी मुस्लिम आबादी है। जम्मू कश्मीर का एक हिस्सा लद्दाख जहाँ पर सिक्ख और पंडित है, वहाँ उन की आबादी ज्यादा है। खैर जो भी है लेकिन वहाँ की अवाम इस फैसले का सख्त विरोध कर रही है उनको भारी बल की वजह से ही दबाव बना कर रखा गया है और लगभग 1000 मोतें हो चुकी है गन और बैलट की वजह से, यानि जो भी लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी करे या विरोध करे तो सेना को पीछे से खुला आदेश था कि उस को गोली🔫💉 से उड़ाया जाए। तो वाकई सरकार लोकतंत्र के लिए मशहूर है या राजतंत्र के लिए मशहूर है। लोकतंत्र में ऐसे कानून को बनाने की नोबत क्यों पड़ी जिससे सरकार के फैसले को अवाम ( जनता) ने सख्त विरोध किया और अभी भी जारी है। और उसके बावजूद भी सरकार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
आज भी लोग घरो में बंद है, सारा काम काज ठप है और स्कूल🏫 कोलेज सब बंद है, लोगों की सम्पर्क व्यवस्था बिल्कुल ठप है, हालांकि सरकार ने टेलीफोन लगाने का एलान किया है उस के लिए सरकार ने 96,000 लगाए थे दो चार दिन सम्पर्क व्यवस्था ठीक तरह से चली बाद में वो भी बंद हो गयी, और उस में इनकमिंग कोल की व्यवस्था थी, आउट गोइंग काल की व्यवस्था बंद हो गई थी। कयी लोगों की शादियां होनी थी वो भी दबाव के चलते बंद हो गई और उन्हें मजबूरन शादियां रोकनी पड़ी। कुछ जगह कर्फ्यू हटाया गया है और सामान्य हालात हैं लेकिन अभी तक बड़ा तबका इस कानून के खिलाफ उग्र विरोध कर रहे हैं और उन्हें विशेष दबाव के तहत दबाया गया है और उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और वहाँ के प्रतिनिधित्व करने वालों को दबा कर रखा गया है शायद ही लोकतंत्र में एसा हो रहा है तो समझो कि अब लोकतंत्र की बजाय राजतंत्र ने स्थान ले लिया है।
अब जम्मू कश्मीर का सहारा कौन
ये मसला भारत का है किसी और देश का नहीं है, लेकिन इस मसले पर पाकिस्तान हमेशा अपना राग अलापता आया है कि कश्मीर हमारा है हमारा है, लेकिन उनके कहने से कश्मीर उनका नहीं होगा ये बात सत्य है। अभी जब जम्मू कश्मीर में विशेष राज्य का दर्जा हटाया गया, तब भी पाकिस्तान ने दखल देने का बहुत प्रयास किया मगर उनकी कोशिश नाकाम रही, उनहोंने हर स्तर पर फैसला लिया, भारत और पाकिस्तान के जो रिश्ते खत्म किये और सम्पर्क व्यवस्था खत्म कर दी बिलकुल । और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुस्लिम मुमालिक हुकमरानों से भी बात कर जम्मू कश्मीर के मोज़ू में दखल देने का प्रयास किया मगर वहाँ से भी उन्हें संतोष जनक जवाब नहीं मिला। फिर उनके पास एक और रास्ता था वो था यू एन ओ वहा सयूक्त राष्ट्र संघ में भी दखल दिया मगर वहाँ पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम रहनुमा सैय्यद अकबर खान ने पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में जवाब दिया।पाकिस्तान के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा है, आखिर उन्होंने अपने आप से हार मान ली। अब जम्मू कश्मीर का कोई सहारा नहीं है, जनता खुद ही सहारा है। और इस फैसले की जिम्मेदार वहाँ की अवाम ही है।
आखिर कोई भी मुल्क जम्मू कश्मीर के हालात के बारे में क्यों नहीं पूछता, लगता है सोची समझी प्लानिंग है। लेकिन एक आम आदमी का दिल इस बात को लेकर दर्द करता है कि वहाँ के लोगों को इतना भारी बल पर क्यों दबा कर रखा है, भला वो लोग आपके फैसले को सम्मान जनक कैसे स्वीकार करैंगे। जम्मू कश्मीर के लोगों के पास अल्लाह के सिवा कोई उनका सहारा नहीं है और उन लोगों को अल्लाह के सामने हाथ उठाने चाहिए और दूसरी अवाम के सामने मेरी आप से गुजारिश है कि आप भी इन भाईयों के लिए दुआ 🙏करें, अल्लाह पाक इन्हें सलामत रखे।
दोस्तों👭👬👫 धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया।
जय हिंद जय भारत।।
में आप का दोस्त लेखक मुराद जयसिंधर ।
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