Triple Tlaaqq तीन तलाक

आज मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल को लोकसभा में पास करके , राज्य सभा में बिल को पास करवा दिया और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही तीन तलाक बिल कानून का रुप ले लेगा। इस बिल को मोदी सरकार तीसरी बार संसद में पेश कर रही है। हालांकि उससे पहले मोदी सरकार के पास राज्यसभा में अल्पमत संख्या की वजह से बिल कयी बार वापस स्टैडिंग कमेटी के पास बिल भेजा गया। जब मोदी सरकार दुबारा बनी तो उनके पास लोकसभा में तो बहमत तो थी ही मगर राज्यसभा में भी सदस्यों की संख्या में काफी इज़ाफ़ा हो गया दूसरे दल जो NDA में शामिल हैं, कुल मिलाकर उनकी राज्यसभा में बहुमत  हो गई है, और अब जो चाहे वो कर सकता है क्योंकि उनकी लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत हो गई है, अब जो उनकी मर्जी होगी वही होगा  ,विपक्ष में बैठे लोग कुछ भी करें, उनके आगे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। 

तीन तलाक बिल मुस्लिम औरतों के खिलाफ ही क्यों लाया गया?  तीन तलाक का मुद्दा और जम्मू कश्मीर की धारा 370 और 35 a भाजपा के मेनिफेस्टो में ये मुद्दा शामिल था, क्यों लाया गया और किसलिए लाया गया ये तो वो लोग ही जानते हैं जो चाहे तो वो अपनी इच्छा अनुसार कर भी सकते हैं, किसी की राय मशोरा  सुनने की कोई जरूरत नहीं है। 

तीन तलाक क्या है?  
तीन तलाक का मतलब है कि शादी शुदा जोड़ा अगर, उनके अन्दर कोई अनबन हो जाती है तो पति अपनी मर्जी के अनुसार तीन बार तलाक तलाक तलाक शब्द बोलते ही शादी टूट जाती है  हालांकि शादी टूटती नहीं, बल्कि सख्त गुनाह (पाप)  होता है। तीन बार शब्द तलाक बोलने से शादी नहीं टूटी है। उसके लिए 90 दिन यानी 3 माह का समय होता है, उस दौरान पति और पत्नी के मध्यस्थता आलिम और उनके घर के समझदार इन्सान ही करेंगे। अगर 90 दिन के अन्दर तक अगर समझोता नहीं होता है तो तलाक वास्तव में हो जाती है। आज कल के यूवा लोग मीडिया पर या लिखित मे या मोखिक  रुप से तलाक बोल कर अपनी पत्नी को बिना सलाह मशोरा के छोड़ देते हैं जबकि ये बिदअत है और सख्त गुनाह है। हालांकि शरिया के मुताबिक शादी नहीं टूटती। 

सुप्रीम कोर्ट ( उच्चतम न्यायालय)  का कहना है कि अगर तीन बार एक शब्द तलाक तलाक तलाक बोलता है या मीडिया के ज़रिए या लिखित में अगर अपनी पत्नी को को छोड़ने की सूचना दे देता है तो शादी यकीनन नहीं टूटती है None aset.   यहाँ तक सुप्रीम कोर्ट ने वही कहा है जो शरियत कह रही है तो सरकार ने कैसे इस फैसले को अपनी मर्जी से बदल दिया। और किसी से सलाह मशोरा भी नहीं किया, लगता है अब मुल्क के अन्दर लोकतंत्र की बजाय राजतंत्र ने स्थान ले लिया है। 

सरकार ने जो कानून बनाया है उस कानून के तहत तीन बार तलाक बोलने वाला आदमी जाएगा सीधा जैल , न कोई पूछताछ न कोई राय मशोरा, और वो भी तीन साल की जैल, और जैल में बैठा आदमी अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता दैगा, आखिर आप लोग सोचो वो आदमी जैल में बैठा कैसे देगा भत्ता। 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बना हुआ है😝सरकार ने उस बोर्ड को भी नहीं पूछा कि आखिर आप के मुस्लिम समाज में तलाक के मसले को कैसे हल करें और उसके सही रास्ता क्या होना चाहिए। अगर सरकार उनको अपने पावर के जरिये यहाँ तक कह सकती थी कि आप अपने समाज में तीन तलाक के मुद्दे को खत्म करने का प्रयास करें नहीं तो हम संसद में बिल पैशन करके कानून बनाएंगे फिर आपको स्वीकार करना पड़ेगा। यहाँ तक भी नहीं बोला मगर बिना किसी को पूछे सीधा ही बिल लाए और पास करवा दिया। वो भी एक मुस्लिम समाज के विरुद्ध, बाकि सब साफ है ।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी इस बात को गंभीरता से लेता आया है कि मुस्लिम समाज में तलाक का मसला कम से कम हो और उसको सुलझाने का प्रयास करता आ रहा है। वैसे भी मुस्लिम समाज में इतना तलाक का मसला नहीं होता है जितना गैर इसलाम का होता है। खैर जो भी कानून बनाने की शक्ति संसद को है, और संसद में जिस राजनीतिक पार्टी की बहुमत है तो वो जो चाहे उधर पलट सकती है।






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