जेल भरो आंदोलन by मौलाना तौकीर रज़ा खां साहब

      जैल भरो आन्दोलन अभियान !

जैल भरो आंदोलन से सरकार पर कितना असर!

अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश राज्य के जिले बरेली से सय्यद तौकीर रज़ा खां साहब ने जेल भरो आंदोलन अभियान की शुरुआत की थी जिसका मकसद था, हमारे मुल्क हिंदुस्तान के खराब होते हालत को देख कर बहुत ही आहत हुए हालांकि इस वक्त मैं हर कोई समुदाय चाहे वो मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम समुदाय के लोग हो  जितनी भी मुस्लिम तंजीमे चाहे जमीयत उलमा ए हिंद हो , मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हो या कोई और मुस्लिम तंजीम है ,जो सेकुलर दिमाग रखता हो वो हर कोई परेशान है । आज के मौजूदा दौर में जो सरकार सत्ता में है मुसलमानो के खिलाफ नए नए मुद्दे बना कर पेश करती है और मुसलमानो को आजमाती है की मुसलमान हमारी विचार धारा को किस हद तक मानता है ।
सरकार मुसलमानो के विरोध में ही कानून क्यों ला रही है ?और समुदाय के विरोध में कानून क्यों नही ला रही है ? बीजेपी सरकार का क्या उद्देश्य है ?
मौलाना तौकीर रज़ा साहब ने जो जेल भरो आंदोलन जुम्मे के दिन जो आंदोलन किया इससे उनके साथ हजारों अनुयायी बाढ़ की तरह गली मोहल्लों में बवंडर की तरह गूंज से भर गई जिसे यूपी सरकार ने पुलिस फ़ोर्स को लगा कर जेल जाने से हजारों लोगों को रोकने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी । 
तौकीर रज़ा साहब के अहम मुद्दे ?
उनका कहना था की जिस तरह सरकार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ व्यवहार कर रही है वह बहुत खतरनाक है , मौलाना ने ये भी कहां की हम मुसलमान इस सरकार के फैसलों में खामोश रहे इसलिए सरकार हमारे खिलाफ नए नए कानून और बिल ला रही है । ये सरकार मुसलमानो के खिलाफ शरीयत में छेड़ छाड़ कर रही है जो मुसलमानो को यकीनन कबूल नहीं है ।
1.सरकार मस्जिदों को तोड़ कर मंदिर में परिवर्तन कर रही है । देश की अदालतें सरकार के दबाव में आकर आस्था के आधार पर फैसले दे रही है ,जो हमे कत्तई मंजूर नहीं है ।
बाबरी मस्ज़िद का फैसला आया हम ने उस फैसले को माना मगर वो फैसला टाइटल शूट के आधार पर नही था बल्कि आस्था के आधार पर दिया ,उसमे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने ये स्वीकार किया की मस्जिद मंदिर तोड़कर नही बनाई गई है बल्कि बहुमत को आस्था के आधार पर फैसला दिया मुसलमान अमन पसंद खामोश रहा ,लेकिन बाबरी मस्जिद के फैसले पर चुप रहने से हमारे खिलाफ आए दिन आस्था के आधार पर फैसले लागू हो रहे है जो को सरकार जुल्म व जब्बर कर रही है ।
2.मुफ्ती सलमान अजहरी जो इस्लामिक स्कॉलर है उसको एक शायरी बोलने से गिरफ्तार कर दिया, जिससे सरकार आए दिन इससे पूर्व भी मुस्लिम उलेमाओं को गिरफ्तार कर चुकी है ,जो को हमारे लिए चिंता का विषय है ।
कई उलेमा आज भी जेलो में बंद है जिनके लिए जमीयत उलमा ए हिंद पुरजोर तरीके से अदालत में केस लड़ रही है और कई उलेमाओं को आजाद भी करवाया है ,चाहे वो किसी भी फिरके के आलिम हो ।
3. उनका तीसरा मुद्दा था , गैर कानूनी तौर से मदरसो और उनके घरों पर बुलडोजर चलाना ये संविधान के खिलाफ है । उनका कहना था की जिस व्यक्ति ने जुर्म किया है उसको सजा देने का काम अदालत का है न की सरकार का है उस अकेले व्यक्ति की सजा पूरे परिवार के लोगों की सामूहिक संपत्ति पर बुलडोजर चलाकर धवस्त कर देना ये कोनसा कानून है ।
4. उनका कहना है को सरकार मुस्लामनों के खिलाफ तरह तरह के कानून ला रही ,सरकार ये सोच के ला रही है की मुस्लिम लोग खामोश है । ये खामोशी कल सरकार के लिए  शायद भारी पड़ जायेगी जिससे इस देश को किसी प्रकार का नुकसान न झेलना पड़ा ,ये सोच कर अमन पसंद लोग खामोश बैठे है ।












What is this Uniform civil code in India ?









1.What is this Uniform civil code in India ?

जी हां दोस्तों सलाम व आदाब जैसा कि आपको मालूम है कि हमारे मुल्क में कई तरह के मुद्दे आए दिन चलते रहते है अभी हाल फिलहाल भारत के अंदर उत्तराखंड राज्य के अंदर वहां की भाजपा सरकार ने UCC को लागू किया है । यूनिफॉर्म सिविल कोड  क्या है ? UCC क्या है? और सरकार लागू क्यों करना चाहती है ?सरकार का क्या उद्देश्य है? और UCC का इतिहास कब का है ? UCC लागू करने के क्या फायदे हैं ? और क्या नुकसान है ? इन तमाम सवालों के एक-एक सवाल  का जवाब बारीकी से मैं आपको बताने जा रहा हूं। आप मेरे इस लेख को जरूर पढ़िए ताकि आपको इस आर्टिकल के माध्यम से मजीद जानकारी मिलती रहेगी।


UCC क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड ( समान नागरिक संहिता)  है । देश में सभी समुदायों और धर्मों को जीवन में समानता लाने की वकालत करता है ।
ये कानून सभी धर्मो और समुदायों के एक समान कानून की बात करता है जो की भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में इसका उल्लेख है ।

UCC का इतिहास !
UCC का इतिहास आज से तकरीबन सो साल पहले का है ,जो भारत में अंग्रजों ने शुरुआत की थी । 19 वी शताब्दी में अंग्रेजो ने शासकों के अपराध ,अनुबंध,और शबुतो के बारे में में। भारतीय कानून संहिता का उल्लेख किए जाने का प्रावधान है ।
 हालांकी अंग्रेजी हुकूमत ने इस कानून से मुस्लामनो और हिंदुओ को अलग रखा था। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानून से बाहर रखा था ।
क्योंकि ईसाई समुदाय एकेश्वर में। विश्वास करते थे और उन्हें भारत के अंदर हिंदू और मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक रीति रिवाज को समझना चाह रहे थे लेकिन अंग्रेजो का मुख्य उद्देश्य भारत में पैसा लूटना और व्यापार करना था न को किसी विवाद में पड़ना ।

बीजेपी सरकार UCC को  क्यों लागू करना चाहती है ? 
बीजेपी सरकार का ये एक अहम मुद्दा है की देश के अंदर UCC लागू करके सभी धर्मो और समुदायों के पारिवारिक कानूनों को एक समान रूप से  लागू करना ताकि एक देश में एक ही तरह का कानून हो और सभी नागरिकों किसी प्रकार की उलझन नही हो ,ये इनका एक लीगल बिंदु है ।
हिंदुस्तान के अंदर विश्व के लगभग सभी धर्म निवास करते है इसलिए ज़ाहिर सी बात है की सभी धर्मो के रीति रिवाज और पारिवारिक कानून और जीवन गुजारने के अलग अलग तरीके उनके अपने धर्म के अनुसार है ।
शायद ये बात बीजेपी सरकार को हज़म नहीं होती है की इस तरह भारत में सभी समुदायों को निशाना बनाकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जाए जिसे  कुछ नया परिवर्तन हो जाए ।

UCC लागू करने का उद्देश्य!
UCC की बात अंग्रेजी हुकूमत के बाद आजाद भारत में बीजेपी हुकूमत ने ही की है क्योंकि इनका मुख्य उद्देश्य जो इनकी भावना से जुड़ा हुआ ये है की इस मुल्क को आज़ाद करवाने के बाद  सभी धर्म एक साथ भाई चारे के साथ केसे रह रहे है ? बीजेपी और आरएसएस को इसी बात से दर्द है ।
बीजेपी के मेनिफेस्टो में ये बात प्रमुख रूप से उल्लेखित है ,इस बात की प्रमुख दलील है की बीजेपी के बड़े बड़े नेता पब्लिक मीटिंग में कई बार ज़िक्र कर चुके है,की देश के अंदर UCC लागू हो कर ही रहेगा । 
यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का एक और उद्देश्य ये है की इस्लाम मज़हब को मानने वाले मुस्लमानो को निशाना बनाया जाए ताकि देश को कमजोर करके हम लोग इस मुल्क पर शासन करें । हिंदुस्तान के अंदर इस्लाम और मुसलमानो को निशाना बनाने के लिए आज ये पहला कानून नहीं लाई है बल्कि इसके अलावा बहुत सारे क्वानीन हमारे सामने आ चुके है और भी आयेंगे शायद। तीन तलाक, सी ए का कानून, लव जिहाद, UCC, एनआरसी, एनपीआर, घर वापसी  ऐसे बहुत सारे कानून जो बीजेपी ने  देश में लागू कर दिए है न जाने देश में और कौन कौन से कानून लाना चाहती है ।
ऐसे कानून लाने से साफ जाहिर होता है की बीजेपी और आरएसएस मुस्लमानों के सख्त खिलाफ है ,तरह तरह के उनके खिलाफ हथकंडे अपना रहे हैं जिसे मुसलमान कमजोर हो जाए और हमारे दबाव में रह कर हमारी गुलामी करे ये उनका असली मकसद है! लेकिन ऐसी उम्मीद है इंशा अल्लाह ऐसा हो नही पाएगा वो अपने मंसूबों में कामयाब नही होगी ।


UCC संविधान के खिलाफ़!
बीजेपी की सरकार ने  आज उत्तराखंड में UCC को लागू कर दिया है जिससे वहां की आवाम ने इस कानून का सख्त विरोध भी किया ,वही प्रदेश की बीजेपी की सरकार ने बहमत के जरिए कानून पास भी करा लिया। वहां की सरकार ने एससी और एसटी ( अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति ) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा है,इससे साफ जाहिर होता है की हुकूमत मुसलमानो के खिलाफ है ।
UCC कानून संविधान के खिलाफ इसलिए है की  देश के अंदर रहने वाले सभी नागरिकों को अनुच्छेद 25,26,29,30 नागरिकों के समानता और धर्म के अनुच्छेद का उल्लघंन करता है ।
दूसरा पहलू ये है की जब प्रदेश की सरकार ने अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति को इस कानून के दायरे से बाहर कर दिया है ,तो मुसलमानो को इस कानून से बाहर क्यों नही कर सकते ये बिलकुल मुसलमानो के साथ धोखा है ।

UCC लागू करने का वैध तरीका क्या है ?
UCC लागू तभी हो सकता है जब एक संप्रदाय के लोग समान विचार धारा वाले लोग हो उनके अंदर अलग अलग कानून हो इसीलिए भारत के अंदर UCC सभी धर्मो के लोगो के लिए ठीक नहीं है । हालांकि UCC कानून सबसे ज्यादा प्रभावित इस्लाम धर्म को कर रहा है  इसीलिए मुस्लिम समुदाय ही इस कानून का विरोध कर रहा है ,क्योंकि बाकी सिख, हिंदू ,जैन और बौद्ध अन्य धर्म के पारिवारिक कानून सभी के मिलते जुलते है इसलिए ओर कोई भी समुदाय मुखर कर सरकार के सामने नहीं आ रहे है । 

UCC के महत्वपूर्ण बिंदु जिन्हे सरकार लागू करने जा रही है 
1. लड़कियों की शादी की उम्र अधिक करने पर विचार, ताकी लड़की ग्रेजुएट बन सके 

2.ग्राम पंचायत स्तर पर शादी का रजिस्टर बनेगा ,पंजीकरण करवाना अनिवार्य है अन्यथा सरकारी सुविधाएं मिलनी बंद हो जाएगी।

3.तलाक का मामला पति पत्नी समान रूप से अब तलाक दे सकेंगे ।

4. बहु विवाह पर प्रतिबंध

5.उतराधिकार में लड़के और लड़कियों का समान अधिकार ।

6.नोकरी पैसा, बेटे की मौत पर पत्नी को मिलने वाले मुआवजे में माता पिता के भरण पोषण की जिम्मेदारी ।

7.पत्नी की मौत के बाद उसके अकेले माता पिता का बनेगा पति ।

8. गोद लेना , मुस्लिम महिलाए जिनके संतान नहीं हैं तो अब वह अपने परिवार के बचे और बच्ची को गोद ले सकती है ।

9. हलाला और इद्दत पर रोक 

10. लिव इन रिलेशन शिप पर सरकार को कानूनी सूचना देना अनिवार्य है ।

11. अनाथ बच्चों की परवरिश करने का अधिकार 

12. पति पत्नी का झगडा होने पर बचे दादा दादी या नाना नानी के पास उनके सरंक्षण में रहेंगे ।

13. जनसंख्या नियंत्रण पर रोक ।

इन 13 बिंदुओ पर सरकार UCC लागू करने जा रही है,इससे इस्लाम कितना प्रभावित होगा आप लोग इस लेख को पढ़ कर कॉमेंट करके जरूर बताएं।


बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
लेख को पढ़ कर शेयर और टिप्पणी जरूर करे ,साथ ही पेज को फॉलो जरूर करे।


लेखक मुराद खान जयसिंधर,बाड़मेर 
7023347607






















One steps for success

एक कदम सफ़लता की ओर!


✍️ *रातों रात सफलता पाने के लिए सालों साल कड़ी मेहनत करनी पड़ती हैं, तब ही आप अपने मां बाप की फिक्र को फक्र में बदल सकते हो।* 📚


✍️ *तुम्हें अपनी मेहनत से सूरज भी उगाना होगा, महज जागने भर से सवेरा नहीं होगा।* 📚


✍️ *गौर कीजिए आपने आज तक क्या किया जब आप अपने घर से बाहर निकले थे तो आप की आंखों में कुछ ख्वाब थे। आपके होठों पर कुछ जज्बात थे। आपके चेहरे पर एक चमक थी और आपके कर्मों में एक तूफान था। आखिर क्यों आप थम सा गए हैं। आपकी सिद्दत कहां गई। आपका जुनून कहां गया। ऐसा तो नहीं कि आप जिंदा लाश बन गए हैं। जनाब याद रखिए दुनिया उन्हीं को याद रखती है जो याद रखने जैसा कुछ कर जाते हैं।* 📚


✍️ *कल का तो मुझे पता नहीं पर आपसे इतना जरूर कहूंगा कि आप इस कदर मेहनत करो की खुद को सुकून मिले। इतिहास गवाह है इतिहास उन्हीं का लिखा जाता है जो संघर्षों से गुजरते हुए खुद को खुद के लिए खड़ा कर लेते हैं आपके अंदर। दम है, ताकत है, शिद्दत है, जुनून है, जज्बा है, जज्बात है, ख्वाब है, ख्यालात है। याद रखिए आप इंसान हैं जो लड़ सकता है, गिर के उठ सकता है जो हार के भी जीत सकता है और जीत के भी हार सकता है। इसके लिए चंद लाइने है।*।   👇🏻👇🏻👇🏻📚


✍️ *हौंसले हो बुलंद तो हर मुश्किल को आसां बना देंगे। छोटी टहनियों की क्या बिसात, हम बरगद को ही हिला देंगे। वो और हैं जो बैठ जाते हैं थक कर मंजिल से पहले, हम बुलंद हौंसलों के दम पर ✍🏻 *पढाई करते समय ध्यान देने योग्य बातें* 📚 

पढ़ाई के तरीक़े 


*1. पढाई हमेशा कुर्सी टेबल पर बैठकर ही करें, बिस्तर पर लेटकर बिलकुल भी न पढ़े । लेटकर पढ़ने से पढ़ा हुआ दिमाग में बिलकुल नही जाता बल्कि नींद आने लगती है ।*


*2. पढ़ते समय टेलीविजन न चलाये और रेडियो या गाने भी बंद रखे*


*3. पढाई के समय मोबाइल स्विच ऑफ़ कर दे या साईलेंट मोड में रखे ।*


*4. पढ़े हुए पाठ्य को लिखते भी जाये, इससे आपकी एकाग्रता भी बनी रहेगी और भविष्य के लिए नोट्स भी बन जायेंगे ।*


*5. कोई भी पाठ्य कम से कम तीन बार जरूर पढ़े।*


*6. रटने की प्रवृत्ति से बचे जो भी पढ़े उस पर विचार मंथन जरूर करें ।*


*7. शॉर्ट नोट्स जरूर बनाये ताकि वे परीक्षा के समय काम आये ।*


*8. पढ़े हुए पाठ्य पर विचार विमर्श अपने मित्रो से जरूर करें, ग्रुप डिस्कशन पढ़ाई में लाभदायक होता है।*


*9. पुराने प्रश्न पत्रों के आधार पर महत्वपूर्ण टॉपिक को छांट ले और उन्हें अच्छे से तैयार करें ।*


*10. संतुलित भोजन करें क्योंकि ज्यादा भोजन से नींद और आलस्य आता है, जबकि कम भोजन से पढ़ने में मन नहीं लगता है और थकावट, सिरदर्द आदि समस्याएं होती है ।*


*11. चित्रों, मानचित्रो, ग्राफ, रेखाचित्रो आदि की मदद से पढ़े । ये अधिक समय तक याद रहते है ।*


*12. पढाई में कंप्यूटर या इन्टरनेट की मदद ले सक


           ✍🏻 Board 𝗘𝘅𝗮𝗺 𝗔𝗹𝗲𝗿𝘁* 📚आसमां को ही झुका देंगे। हम कैसे हार मान सकते हैं अपनी मंजिल, अपने ख्वाबों से पहले, कैसे भाग सकते हैं, अपनी जिम्मेदारियों से किसी के भी प्रति। बहुत लोगों की उम्मीद की किरण हैं हम। चाहे वो हमारे माता-पिता हो, चाहे हो भाई बहन, चाहे हो रिश्तेदार कोई, चाहे हो हमारा अपना समाज (Society), चाहे हो शहर अपना, तो दोस्तो पूरी ताकत से जुट जाइए और अब बस तभी रुकना हैं, जब सफलता हमारे कदमों में हो। ऐसी कोई चीज नहीं है, जो हम मेहनत, लगन व आत्मविश्वास से नहीं पा सकते। खुद पर भरोसा कर इंसान अपनी किस्मत खुद बना सकता है।


          [06/01, 3:22 pm] +91 95889 86809: ✍🏻 *सफलता का मूल मंत्र* 📚


*अगर आपका एक टॉपिक नोट्स से खत्म हो गया है तो उस टॉपिक को प्रैक्टिस सेट और एग्जाम रिव्यु मतलब पिछले सालों के जितने भी एग्जाम हुए है उनके प्रश्नोत्तर को भी पढ़ लेना चाहिए, हर सब्जेक्ट के हर टॉपिक को प्रैक्टिस सेट और एग्जाम रिव्यु से पढ़ लेना चाहिए ताकि आपको वह टॉपिक पूरी तरह से याद हो जाए*


*हमारे सबसे बड़ी कमी यही है कि हम नोट्स को पढ़कर एग्जाम देने चले जाते हैं, ज्यादातर प्रश्नों के उत्तर नही आने पर उस पेपर को देखकर हमको यही लगता है कि पेपर बहुत हार्ड आया है लेकिन रिजल्ट आने पर मेरिट हाई देख कर फिर हमारे मन में यही ख्याल आता है कि पेपर आउट हुआ होगा तभी मेरिट इतनी हाई गई होगी जबकि ऐसा कुछ नही होता है, हां कुछ रैर केस में ऐसा हो सकता है, मेरिट हाई जाने का आजकल एक ही कारण है लोग नोट्स के साथ-साथ प्रैक्टिस सेट और एग्जाम रिव्यु भी पढ़ते हैं, आज के टाइम में बहुत ज्यादा कंपटीशन है इसलिए आपको भी नोट्स के साथ-साथ एग्जाम रिव्यु और प्रैक्टिस सेट मिलाना चाहिए*


*हर सब्जेक्ट को ज्यादा से ज्यादा 3 घंटे दो ( अगर आपकी भर्ती में कम सब्जेक्ट है तो फिर हर सब्जेक्ट को आप ज्यादा टाइम दे सकते हो ) क्योंकि एक ही सब्जेक्ट को हम पढ़ते है तो फिर बोरिंग-सा फील होता है और फिर हम ज्यादा टाइम तक नहीं पढ़ पाते है इसलिए आपको बोरिंग फील नहीं हो उसके लिए सब्जेक्ट को चेंज कर-कर के पढ़ना चाहिए और यदि आपको लगता है, आपका कोई सब्जेक्ट कमजोर है तो फिर उस सब्जेक्ट को आप ज्यादा टाइम दे सकते है और अगर आपको लगता है कि आपका कोई सब्जेक्ट पहले से अच्छा/मजबूत है तो उस सब्जेक्ट को आप कम टाइम दे*


*डेली/हमेशा का एक रूटीन बनाओ कि मुझे इतने घंटे पढ़ना है तो पढ़ना ही है फिर है अगले दिन उस रूटीन में थोड़ा ओर टाइम ऐड करते जाओ जैसे कल आपने 7 घंटे पढ़ाई की है तो आपको आज कैसे भी कर के 7:30 घंटे पढ़ाई करनी है ऐसे कर के हमेशा पढ़ाई के रूटीन मे टाइम ऐड करते जाओ वो सब आपके ऊपर है फिर एक टाइम ऐसा आयेगा कि आप हमेशा 14 से 15 घंटे हर दिन पढ़ सकोगे क्योंकि अब आपकी पढ़ाई करने की सिटिंग पावर अच्छी हो चुकी है और हर 3 से 4 घंटे बाद या फिर आपको जैसा लगता है कि मुझे इतने घंटे के बाद ब्रेक लेना चाहिए तो ले सकते है क्योंकि हम लगातार ज्यादा टाइम तक पढ़ाई नही कर सकते है ( ज्यादा से ज्यादा 3 से 4 घंटे बाद 10 या 12 मिनट का ब्रेक ले-ले )*


*पढ़ाई करने का सबसे अच्छा टाइम सुबह जल्दी उठकर और रात में देर तक पढ़ना है क्योंकि उस वक्त कोई डिस्टर्बेंस नही होता है, दोपहर के वक्त आप 2 घंटे सोने का रख सकते हो*


*इस तरह एक शेड्यूल बना लो मुझे इतने घंटे ये सब्जेक्ट पढ़नी है और इतने घंटे बाद मुझे इतना ब्रेक लेना है और दोपहर इतने घंटे सोना है वो सब कुछ आप पर निर्भर है*


*इतना कुछ कर लोगे तो आपको सफलता पाने से कोई नही रोक सकता, आप अपना सपना पूरा कर सकते है, जिस पद को आप ने पाने के लिए सोचा था, बस हमेशा पॉजिटिव रहो, कोई क्या बोल रहा है उस पर कुछ भी ध्यान मत दो और ना बाहर की बातो पर ध्यान दें*


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*पढ़ने का सबसे बेहतरीन तरीका क्या है?*


*जब भी आप कोई टॉपिक या सब्जेक्ट पढ़ें तो एक बार उसको अच्छे से पढ़े, फिर थोड़ा मनन करे कि आज आपने क्या क्या पढ़ा है।*


*अगले दिन शुरू करने से पहले कल का रिवाइज करें, एक बार फटाफट रीड आउट कर ले फिर आगे का पढ़े। उससे अगले दिन भी पहले पेज से पढ़े और उससे अगले दिन भी पहले पेज से उस दिन तक का फटाफट रिवाइज कर ले*


*इस तरीके से आप अपने नोट्स के 100% फैक्ट्स को याद कर सकते है। बस आपको हर रोज पहले पेज से शुरू करना है। शुरू में आपको थोड़ा अजीब लग सकता है, पर 10 दिन बाद फर्क साफ दिखेगा।*


*अगर आप 10 दिन में एक सब्जेक्ट खत्म करते हो तो और रोज पहले पेज से करते हो तो आपके 10 रिवीजन होते है जो कि ऐसे नोर्मल पढ़ने पर आप 7 दिन में एक बार ही पूरा कर पाते और आपको पता चलता है कि शुरू के 5 दिन आपने जो पढ़ा उसका मात्र 40-50% ही याद रहा है।*


*इससे एक प्रकार की कुंठा उत्पन्न होती है कि एक बार पढ़ तो लिए, पर याद कुछ खास नहीं हुआ।*


*इसका एक ही इलाज है हर रोज पहले पेज से शुरू करो भले ही 2 दिन ज्यादा लगेंगे पर इस बात कि गारंटी मैं लेता हूं कि 10 दिन बाद आपको 80% तक फैक्ट्स याद हो जाएंगे और उसके बाद 2-3 कंप्लीट रिवीजन के बाद आपको लाइन टू लाइन याद हो जाएगा भले ही कितना ही कठिन विषय क्यों ना हो।*


*आप टेस्ट सीरीज में भी दोनों विधियां अपनाकर एक बार ट्राई कर सकते है। एक बार अपनी विधि से पढ़ना और एक बार इससे फर्क साफ दिखेगा। इससे आप 10-15 सब्जेक्ट तक के नोट्स आराम से मुख जबानी याद कर सकते हो।*



      ✍🏻 *M J Mαɳʂυɾι* 

        



          ✍🏻 *𝗠𝗮𝗶𝗻𝗮 𝗘𝘅𝗮𝗺 𝗔𝗹𝗲𝗿𝘁* 📚

[06/01, 3:22 pm] +91 95889 86809: *✍🏻 🤝✌🏻एक कदम सफलता की ओर* 🎊🤲🏻📚


✍️ *हर नई शुरुआत थोड़ा डराती है, पर याद रखना सफलता मुश्किलों के पार ही नजर आती है।*


✍️ *जिंदगी में ऐसा भी वक्त आएगा जब तुम्हें लगेगा सब खत्म हो गया हैं, उस वक्त मेरे दोस्त आपकी कहानी की असली शुरुआत होगी*


✍️ *मजबूत होने का मजा तभी आता है, जब सारी दुनिया कमजोर करने में लगी हो*


✍️ *लोग हसेंगे जरूर जब आप कुछ अलग और असंभव की शुरुआत करोगे लेकिन सफल होने पे वही लोग तुमसे सलाह मागेंगे।*


✍️ *सपना हमेशा बड़ा से बड़ा देखो चांद नहीं मिला तो क्या हुआ आसमान तक तो पहुंचोगे*


✍️ *दुनिया आपको कैसे देखती है, वो मायने नही रखता आप खुद को कैसे देखते है वो मायने रखता है*


✍️ *"कल से करेंगे" ये शब्द आपको कभी कामयाब नहीं होने देंगे*


✍️ *टाइम बर्बाद करने वाली चीजें 👇*


*1. फालतू टीवी देखना*


*2. काम करते समय ध्यान न देना*


*3. दिनभर आलस करना*


*4. बहुत ज्यादा गेम खेलना*


*5. फालतू गप्पे लड़ाना*


*6. फालतू में घूमना*


*7. चिंता करते रहना*


*8. बिना मतलब पार्टी करना*


*9. दिनभर मोबाइल चलाना।*


*अपनी पीड़ा के लिए संसार को दोष मत दीजिये, अपने मन को समझाइये, मन का परिवर्तन ही आपके दुखों का अंत कर सकता है।*


✍️ *एक कामयाब व्यक्ति को क्या त्यागना पड़ता है 👇🏻*


*1) जरूरत से ज्यादा नींद*


*2) गुस्सा* 


*3) आलस्य* 


*4) मनोरंजन* 


*5) पार्टिया*


*6) दोस्त* 


*7) नकारात्मक सोच*


*जिंदगी Science की तरह होती है, जितना Experiment करेंगे, उतना Better Result आएगा*


                    *~पढते रहो ...*



     Murad khan jaisindher 


Mugal Empire history of Babar

 बाबर: मध्य एशिया में वर्चस्व की लड़ाई से भारत में मुग़ल सल्तनत की स्थापना तक: बीबीसी हिन्दी


अंग्रेजी के मशहूर उपन्यासकार ईएम फोस्टर लिखते हैं कि आधुनिक राजनीतिक दर्शन के आविष्कारक मैकावली ने शायद बाबर के बारे में नहीं सुना था. अगर सुना होता तो 'द प्रिंस' नामक पुस्तक लिखने के बजाय उनके (बाबर के) जीवन के बारे में लिखने में उनकी दिलचस्पी ज़्यादा होती.


बाबर एक ऐसा किरदार थे जो न केवल सफल थे, बल्कि सौंदर्य बोध और कलात्मक गुणों से भी भरपूर थे. मुग़ल सल्तनत के संस्थापक ज़हीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर (1483-1530) को जहां एक विजेता के रूप में देखा और वर्णित किया जाता है, वहीं दूसरी ओर उन्हें एक बड़ा कलाकार और लेखक भी माना जाता है.


एक इतिहासकार स्टीफन डेल बाबर के बारे में लिखते हैं कि यह तय कर पाना मुश्किल है कि बाबर एक बादशाह के रूप में अधिक महत्वपूर्ण हैं या एक कवि और लेखक के रूप में.


आज के भारत में, बाबर को बहुसंख्यक हिंदू वर्ग की एक विशेष विचारधारा के लोग आक्रमणकारी, लुटेरा, सूदखोर, हिंदू दुश्मन, अत्याचारी और दमनकारी बादशाह भी मानते हैं. यह मुद्दा यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सत्तारूढ़ पार्टी, बाबर ही नहीं, मुग़ल सल्तनत से जुड़ी हर चीज़ के ख़िलाफ़ नज़र आती है.


आज से लगभग पांच सौ साल पहले, बाबर ने एक सल्तनत की स्थापना की जो अपने आप में बेनज़ीर है. उन्होंने 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोधी को हराया और भारत में एक नई सल्तनत की स्थापना की. अपने बुलंदी के दिनों में इस सल्तनत के क़ब्ज़े में दुनिया की एक चौथाई से अधिक दौलत थी. इस सल्तनत का क्षेत्रफल अफ़ग़ानिस्तान समेत लगभग पूरे उपमहाद्वीप पर फैला हुआ था.


बाबर का सबसे बड़ा परिचय

लेकिन बाबर का जीवन एक निरंतर संघर्ष है. आज की दुनिया में बाबर का सबसे बड़ा परिचय उसकी अपनी आत्मकथा है. उनकी किताब को आज 'बाबरनामा' या 'तुज़्क़ ए बाबरी' के नाम से जाना जाता है.


जामिया मिलिया इस्लामिया में इतिहास विभाग की अध्यक्षा निशात मंज़र का कहना है कि, बाबर के जीवन को दो भागों में बांटा जा सकता है: एक हिस्सा सीर दरिया और आमु नदी के बीच मध्य एशिया में वर्चस्व के लिए संघर्ष का है और दूसरा हिस्सा बहुत छोटा है लेकिन बहुत महत्वपूर्ण है. क्योंकि इस हिस्से में केवल चार वर्षों में उन्होंने भारत की एक महान सल्तनत की स्थापना की जो लगभग तीन सौ वर्षों तक चलती रही.


ऑक्सफ़ोर्ड सेंटर फॉर इस्लामिक स्टडीज में दक्षिण एशियाई इस्लाम के फेलो मुईन अहमद निजामी ने बीबीसी को बताया कि, तैमूरी और चंगेज़ नस्ल के बाबर, को अपने पिता उमर शेख़ मिर्ज़ा से फरग़ना नाम की एक छोटा सी रियासत विरासत में मिली थी. फ़रग़ना के पड़ोसी रियासतों में उनके रिश्तेदारों का शासन था.

वो बताते हैं कि, "यहां तक कि उन्हें अपनी रियासत भी गंवानी पड़ी. उन्होंने अपना अधिकांश जीवन अभियान और रेगिस्तान में भटकते हुए बिताया. अपनी रियासत को फिर से हासिल करने के उनके प्रयास विफल होते रहे. यहां तक कि परिस्थितियों ने उन्हें भारत की ओर रुख़ करने के लिए मजबूर किया."


बाबर की आत्मकथा

बाबर ने उस समय की अपनी लगातार होती असफलताओं का ज़िक्र करते हुए अपनी आत्मकथा में लिखा है: "जितने दिन मैं ताशकंद में रहा, उतने दिन मैं बहुत ही दुखी और तंगदस्ती में रहा. देश कब्ज़े में नहीं था और ना ही इसके मिलने की कोई उम्मीद थी. ज़्यादातर नौकर चले गए थे, और जो कुछ साथ रह गए थे, वह ग़रीबी के कारण मेरे साथ नहीं घूम सकते थे..."


वह आगे लिखते हैं, "आखिरकार मैं इस भटकने और बेघर होने से थक गया और जीवन से ऊब गया. मैंने अपने दिल में कहा कि, ऐसा जीवन जीने से अच्छा है कि जहां संभव हो सके वहां चला जाऊं. ऐसा छिप जाऊं कि कोई देख न सके. लोगों के सामने ऐसी बेइज़्ज़ती और बदहाली में जीने से अच्छा है जितना हो सके दूर चला जाऊं, जहां मुझे कोई न पहचाने. ये सोच कर उत्तरी चीन के इलाक़े की तरफ जाने का इरादा कर लिया. मुझे बचपन से ही यात्रा करने में दिलचस्पी थी, लेकिन मैं सल्तनत और संबंधों के कारण नहीं जा सकता था.


मुईन अहमद निजामी ने बताया कि उन्होंने अन्य जगहों पर भी इस तरह की बातें लिखी हैं. एक जगह लिखा है, "क्या अब भी कुछ देखना बाकी रह गया है,अब क़िस्मत की कैसी विडंबना और उत्पीड़न देखना बाकी रह गया है?"


एक शेर में, उन्होंने अपनी स्थिति व्यक्त की है, जिसका अर्थ यह है, "न तो मेरे पास अब यार दोस्त हैं, न ही मेरे पास देश और धन है, मुझे एक पल का भी चैन नहीं है." यहां आना मेरा फैसला था लेकिन मैं अब वापस भी नहीं जा सकता. '


अपने आत्मकथात्मक उपन्यास, 'ज़हीर-उद-दीन बाबर' में डॉक्टर प्रेमकिल कादरॉफ ने बाबर की इसी उत्तेजक और अशांत स्थिति को दर्शाया है. एक जगह पर वह लिखते हैं कि "बाबर सांस लेने के लिए थोड़ा सा रुका लेकिन उसने अपनी बात जारी रखी ... सब कुछ फ़ानी (नश्वर) है. बड़ी बड़ी सल्तनतें भी अपने संस्थापकों के दुनिया से जाते ही टुकड़े टुकड़े हो जाती हैं. लेकिन शायर के शब्द सदियों तक जीवित रहते हैं.


उन्होंने एक बार अपना एक शेर जमशेद बादशाह के उल्लेख के बाद एक पत्थर पर कुंदवा दिया था, जो अब तज़ाकिस्तान के एक संग्रहालय में है. वह उनकी स्थिति की सही व्याख्या करता है.


गिरफ़्तेम आलम ब मर्दी व ज़ोर

व लेकिन न बर्देम बा ख़ुद ब गोर


इसका अनुवाद यह है कि बल और साहस से दुनिया पर विजय तो प्राप्त की जा सकती है, लेकिन ख़ुद अपने आप को दफ़न तक नहीं किया सकता.


इससे पता चलता है कि वह हार मानने वालों में से नहीं थे. बाबर में एक पहाड़ी झरने की तरह शक्ति थी जो पथरीली ज़मीन को चीर कर ऊपर से इतनी ताक़त से निकलता है कि पूरी भूमि को सिंचित करता है. इसी लिए, एक स्थान पर,प्रेमकिल क़ादरॉफ ने इस स्थिति का वर्णन इस तरह किया है.


"उस समय, बाबर को शक्तिशाली झरने का दृश्य बहुत आनंदित कर रहा था... बाबर ने सोचा कि इस झरने का पानी पेरिख़ ग्लेशियर से आता होगा. इसका मतलब यह था कि पानी को पेरिख़ से नीचे आने और फिर आसमान जैसे ऊंचे माउंट लाओ की चोटी तक चढ़ने के लिए, दोनो पहाड़ों के बीच की घाटियों की गहराई से भी अधिक गहराई तक जाना पड़ता था. पानी के झरने को इतनी ताक़त आखिर कहाँ से मिल रही थी?... बाबर को अपने जीवन की तुलना ऐसे झरने से करना बिलकुल ठीक लगा. वह ख़ुद भी तो टूट कर गिरती चट्टान के नीचे आ गया था."


बाबर भारत की तरफ

बाबर का ध्यान भारत की ओर कैसे आकर्षित हुआ, इस बारे में अलग-अलग दृष्टिकोण दिए जा सकते हैं, लेकिन प्रोफेसर निशात मंज़र का कहना है कि, भारत की तरफ उनका ध्यान बहुत उचित था. क्योंकि काबुल में कर लगाने के लिए केवल एक चीज थी. और शासकीय प्रशासन के लिए धन की सख़्त आवश्यकता थी, इसलिए बाबर के पास भारत की ओर रुख़ करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.


इसलिए हम देखते हैं कि सिंधु नदी को पार करने से पहले, उन्होंने भारत के पश्चिमी हिस्से पर पहले भी कई बार हमला किया था और वहां से लूटपाट के बाद वापिस काबुल लौट गए थे.

उनका कहना है कि बाबर जिस तरह से अपनी आत्मकथा शुरू करता है, किसी बारह साल के लड़के से इस तरह की हिम्मत और निश्चय की उम्मीद नहीं की जा सकती. लेकिन बाबर के ख़ून में शासन के साथ साथ बहादुरी भी शामिल थी.


निशात मंज़र का कहना है कि उन्हें भाग्य और ज़रूरत दोनों इधर खींच लाये थे, अन्यथा उनके सभी प्रारंभिक प्रयास उत्तरी एशिया में उनके पैतृक साम्राज्य को मज़बूत करने और एक महान साम्राज्य स्थापित करने पर आधारित थे.


उन्होंने यह भी कहा कि यह बहस का एक अलग विषय है कि, क्या राणा साँगा या दौलत ख़ान लोधी ने उन्हें दिल्ली साम्राज्य पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं. लेकिन यह निश्चित था कि, आज के लोकतांत्रिक मूल्यों से हम सल्तनत काल की परख नहीं कर सकते. उस दौर में, कोई कहीं भी जाता और विजयी होता तो उसे वहां के आम और ख़ास दोनों स्वीकार करते, उसे हमलावर नहीं समझते थे.


लेकिन बाबर के भारत के सपने के बारे में, एलएफ रुशब्रुक ने अपनी पुस्तक 'ज़हीर-उद-दीन मोहम्मद बाबर' में लिखा है कि बाबर ने सबसे थक हार कर 'देख़ कात' नामक गाँव में रहने का फैसला किया.


उन्होंने अपने आपको पूरी तरह से वहां के माहौल के अनुकूल बनाया. उन्होंने अपने सभी दावों को छोड़ दिया और एक साधारण अतिथि की तरह ग्राम मुक़द्दम (सरदार) के घर पर रहने लगा. यहां एक ऐसी घटना घटी कि जिस पर भाग्य ने यह तय कर दिया था कि, बाबर के आने वाले जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. मुक़द्दम 70 या 80 साल का होगा. लेकिन उसकी माँ 111 साल की थी और वह जीवित थी. इस वृद्ध महिला के कुछ रिश्तेदार तैमूर बेग की सेना के साथ भारत गए थे. यह बात उनके दिमाग में थी और वह उसकी कहानी सुनाती थी.


बाबर के बुजुर्गों के कारनामों के बारे में उन्होंने जो कहानियां सुनाईं, उन कहानियों ने युवा शहज़ादे की कल्पना में एक उत्साह पैदा कर दिया. इसमें कोई शक नहीं कि उस समय से ही, भारत में तैमूर की विजय को ताज़ा करने का सपना उसके दिमाग़ में घूमता रहा.

जामिया मिलिया विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग में सहायक प्रोफेसर रहमा जावेद राशिद का कहना है, यह तो सब जानते हैं कि बाबर पिता की ओर से तैमूर वंश का पांचवी पीढ़ी के वंशज थे और माता की तरफ से महान विजेता चंगेज खान की 14 वीं पीढ़ी के वंशज थे. इस प्रकार एशिया के दो महान विजेताओं का ख़ून बाबर में शामिल था, जिससे उन्हें अन्य क्षेत्रीय शासकों पर श्रेष्ठता मिली.


शिक्षा और प्रशिक्षण

बाबर का जन्म और शिक्षा फरग़ना की राजधानी अंदजान में हुई थी. प्रोफ़ेसर निशात मंज़र कहती हैं कि, हालांकि उनके दोनों पूर्वज चंगेज़ ख़ान और तैमूर लंग दोनों ही पढ़े लिखे नहीं थे. लेकिन वे इस बात से अच्छी तरह वाक़िफ़ थे कि शिक्षा के बिना शासन चलना मुश्किल काम है. इसलिए उन्होंने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दी. बाबर की शिक्षा भी इस्लामी परंपरा के अनुसार चार साल और चार दिन की उम्र में शुरू की गई थी.


उन्होंने आगे बताया कि, चंगेज ख़ान के वंशजों को शिक्षित करने वाले लोग उइगर समुदाय से थे, जो अब चीन के शिनजियांग प्रांत में परेशान हाल हैं, लेकिन मध्य पूर्व में उन्हें सबसे अधिक पढ़ा लिखा माना जाता था.


इसी तरह, अपने बच्चों की शिक्षा के लिए, तैमूर बेग ने चुग़ताई तुर्कों को रखा, उन्हें भी अपने समय का सबसे अधिक पढ़ा लिखा माना जाता था. उन्होंने अरबी और फ़ारसी के प्रभुत्व के बावजूद अपनी भाषा को साहित्यिक दर्जा दिया था.


जब मैंने प्रोफ़ेसर निशात से पूछा कि इतनी कम उम्र में बादशाह बनने, इतनी जंगी मुहिमों और दरबदर भटकने के बावजूद ज्ञान और कौशल के क्षेत्र में उन्हें यह स्थान कैसे मिला है. उन्होंने कहा कि बाबर जहां भी गए, उनके शिक्षक भी उनके साथ जाते थे. वह सभी प्रकार के लोगों से मिलना पसंद करते थे, और उन्होंने विशेष रूप से अली शेर नवाई जैसे कवियों का संरक्षण किया था.


उन्होंने कहा कि बाबर ने जिस तरह से ख़ुद का खुले तौर पर वर्णन किया है, वह किसी अन्य बादशाह के बारे में नहीं मिलता है. उन्होंने अपनी शादी, प्यार, शराब पीने, रेगिस्तान में पैदल भटकना, तौबा और अपनी दिल की स्थिति तक हर बात का उल्लेख किया है.

स्टीफन डेल ने अपनी पुस्तक 'गार्डेन ऑफ एट पैराडाइज़' में, बाबर के गद्य को "दिव्य" कहा और लिखा कि यह उसी तरह प्रत्यक्ष है जिस तरह आज पांच सौ साल बाद लिखने की शैली आम है, या जिस तरह से आज भी लिखने को कहा जाता है.


उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने अपने बेटे हुमायूं के लेखन को कैसे सही किया. उन्होंने लिखा था कि "आपके लेखन में विषय खो जाता है" और इसलिए उन्हें प्रत्यक्ष लिखने के लिए कहा था.

उर्दू के मशहूर शायर ग़ालिब ने लगभग तीन सौ साल बाद उर्दू में लिखने की जिस शैली का आविष्कार किया और जिस पर उन्हें गर्व भी था. ऐसा स्पष्ट और सरल गद्य बाबर ने उनसे पहले अपने उत्तराधिकारियों के लिए लिखा था.


बाबरनामा पढ़ने से पता चलता है कि उनकी पहली शादी उनके चचेरी बहन आयशा से हुई थी. आयशा से एक बेटी पैदा हुई थी जो 40 दिन भी जीवित नहीं रह सकी. लेकिन बाबर को अपनी पत्नी से कोई प्यार नहीं था.

उन्होंने लिखा है कि "उर्दू बाज़ार में एक लड़का था, बाबरी नाम का जिसमें हम नाम का भी एक जुड़ाव था. उन्ही दिनों मुझे उससे एक अजीब सा लगाव हो गया.

इस परिवश पे क्या हुआ शैदा

बल्कि अपनी ख़ुदी भी खो बैठा

उनका एक फ़ारसी शेर ये है:

हेच किस चूं मन ख़राब व आशिक़ व रुस्वा मबाद

हेच महबूब चोत व बे रहम व बे परवा मबाद


"लेकिन स्थिति यह थी कि अगर बाबरी कभी मेरे सामने आ जाता, तो मैं शर्म की वजह से निगाह भर कर उसकी ओर नहीं देख पाता था. भले ही मैं उससे मिल सकूं और बात कर सकूं. बेचैन मन की ऐसी अवस्था थी कि उसके आने का शुक्रिया तक अदा नहीं कर सकता था. उसके न आने की शिकायत भी नहीं कर सकता था और ज़बरदस्ती बुलाने की हिम्मत भी नहीं थी..."

शोम शर्मिंदा हर गह यार ख़ुदरा दर नज़र बेनम

रफ़ीक़ा सूए मन बेनंदू मन सूए दीगर बेनम


"उन दिनों में मेरी स्थिति ऐसी थी, इश्क़ और मोहब्बत का इतना ज़ोर और जवानी व जुनून का ऐसा प्रभाव हुआ कि कभी कभी नंगे सिर नंगे पैर महलों, बगीचों और बागों में टहला करता था. न अपने और पराये का ख्याल था, न ही अपनी और दूसरों की परवाह.

वैसे, बाबर की सबसे प्रिय पत्नी माहिम बेगम थी, जिसके गर्भ से हुमायूँ का जन्म हुआ, जबकि गुलबदन बेगम और हिंदाल, असकरी और कामरान का जन्म अन्य पत्नियों से हुआ था.


शराब पीना

बाबर का एक शेर कई जगहों पर नज़र आता है:

नौ रोज़ व नौ बहार व दिलबरे ख़ुश अस्त

बाबर बह ऐश कोश के आलम दोबारा नीस्त

"नौ रोज़ हैं, नई बहार है, शराब है, सुंदर प्रेमी है, बाबर, बस ऐश और मस्ती में ही लगा रह कि दुनिया दोबारा नहीं है."


प्रोफ़ेसर निशात मंज़र कहती हैं कि बाबर ने 21 साल तक एक पवित्र जीवन व्यतीत किया. लेकिन फिर उन्हें शराब पीना की महफिले रास आने लगी. इसलिए, उनकी महफिलों में शराब पीने वाली महिलाओं का भी उल्लेख किया गया है. बाबर ने उनके उल्लेख को छिपाने की कोशिश नहीं की है. वह अपने पिता के बारे में भी लिखते हैं कि, वह शराब के आदी थे और अफ़ीम भी लेने लगे थे. जबकि हुमायूँ के बारे में तो मशहूर है कि वह अफ़ीम का आदी था.


निशात मंज़र कहती हैं कि जब बाबर ने शराब से तौबा की, तो यह उसकी रणनीति थी. उनके सामने भारत का सबसे बड़ा जंगजूं राणा सांगा था. जो इससे पहले कभी किसी युद्ध में नहीं हारा था. पानीपत की लड़ाई के बाद बाबर की सेना आधी रह गई थी. जंग के दौरान एक समय आया जब बाबर को सामने हार दिखाई दे रही थी. तब उसने पहले एक उग्र भाषण दिया और फिर तौबा की.


कुछ आलिमों का मानना है कि बाबर के इस सच्चे पश्चाताप के कारण, अल्लाह ने मुग़लों को भारत में तीन सौ वर्षों की सल्तनत आता कर दी. लेकिन जामिया मिलिया इस्लामिया में इतिहास के प्रोफेसर रिज़वान क़ैसर कहते हैं कि, यह बाबर के कार्यों की धार्मिक व्याख्या तो हो सकती है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व नहीं है. क्योंकि यह किसी भी तरह से साबित नहीं किया जा सकता है. हाँ यह ज़रूर कहा जा सकता है कि बाबर ने युद्ध जीतने के लिए धार्मिक उत्साह का इस्तेमाल किया होगा.


इससे पहले, जब बाबर ने अपने पैतृक वतन फरग़ना को पाने के लिए ईरान के बादशाह का समर्थन लिया था. तब उसने ख़ुद को शिया कहा था, तो उस समय के एक प्रमुख आलिम ने बाबर के बारे में बहुत बुरा भला कहा था और उसका विरोध किया था.

प्रोफेसर निशात ने यह भी कहा कि बाबर ने कई स्थानों पर अपने दुश्मन मुस्लिम शासकों के लिए "काफिर" शब्द का इस्तेमाल किया और उन्हें बुरा भला कहा.


बाबर ने अपनी इस तौबा का उल्लेख इस प्रकार किया है: "मैंने काबुल से शराब मंगाई थी और बाबा दोस्त सूजी ऊंटों की तीन पंक्तियों पर शराब के मटके भर कर ले आया. इस बीच, मोहम्मद शरीफ़ नजूमी (ज्योत्षी) ने यह बात फैला दी कि, मंगल इस समय पश्चिम में है और यह अशुभ है, इसलिए जंग में हार होगी. इस बात ने मेरी सेना का दिल हिला दिया..."

"जमादी-उल- सानी (अरबी महीना) की 23 तारीख थी मंगलवार का दिन था. अचानक मुझे एक विचार आया कि क्यों न शराब से तौबा कर लूँ. ये इरादा करके मैंने शराब से तौबा कर ली. शराब के सभी सोने और चांदी के बर्तनों को तोड़ दिया गया. और उस समय छावनी में जो भी शराब थी सब बाहर फिंकवा दी. शराब के बर्तनों से जो सोना चांदी मिला उसे ग़रीबों में बंटवा दिया. इस काम में मेरे साथी अस ने भी साथ दिया."


"मेरी तौबा की खबर सुनकर, मेरे तीन पदाधिकारियों ने भी उसी रात तौबा कर ली. चूंकि बाबा दोस्त ऊंटों की कई पंक्तियों पर काबुल से शराब के अनगिनत मटके लाया था और यह शराब बहुत ज्यादा थी. इसलिए इसे फेंकने के बजाय, इसमें नमक मिला दिया ताकि इसका सिरका बन जाये. जहां मैंने शराब से तौबा की और शराब को गड्ढों में डाला वहां तौबा की याद के तौर पर एक पत्थर लगवा दिया और एक इमारत बनवाई..."


मैंने यह भी इरादा किया था कि अगर अल्लाह राणा साँगा पर विजय देगा, तो मैं अपनी सल्तनत में सभी प्रकार के करों को माफ़ कर दूंगा. मैंने इस माफ़ी की घोषणा करना आवश्यक समझा और लेखकों को इस विषय के लेख लिखने और इसे दूर-दूर तक प्रसिद्ध करने का आदेश दिया.


"दुश्मनों की बड़ी संख्या के कारण सेना में बद दिली फ़ैल गई थी. इसलिए मैंने पूरी सेना को एक जगह इकट्ठा किया और कहा: 'जो कोई भी इस दुनिया में आया है उसे मरना है. जीवन ख़ुदा के हाथ में है, इसलिए मृत्यु से नहीं डरना चाहिए. तुम अल्लाह के नाम पर क़सम खाओ कि, मौत को सामने देख कर मुंह नहीं मोड़ोगे और जब तक जान बाक़ी है तब तक लड़ाई जारी रखोगे." " मेरे भाषण का बहुत प्रभाव पड़ा. इससे सेना में उत्साह भर गया, लड़ाई जम कर हुई और अंत में जीत हुई. यह जीत 1527 में हुई.


बाबर और उनके रिश्तेदार

पानीपत की लड़ाई के बाद, बाबर को जो धन हाथ लगा उसने वह उदारतापूर्वक अपने रिश्तेदारों और पदाधिकारियों के बीच बांट दिया. बाबर ने भी इसका उल्लेख किया है और उनकी बेटी गुलबदन बानो ने भी अपनी पुस्तक 'हुमायूँनामा' में इसका विस्तार से उल्लेख किया है.

प्रोफेसर निशात मंज़र और डॉक्टर रहमा जावेद ने बीबीसी को बताया कि बाबर के व्यक्तित्व की ख़ास बात महिलाओं के साथ उनका रिश्ता था. उन्होंने बताया कि महिलाएं उनके मश्वरों में शामिल होती थी. उनकी मां उनके साथ थीं तो उनकी नानी भी समरकंद से अंदजान पहुंचती थीं. उन्होंने अपनी जीवनी में चाचियों, मासियों, बहनों और फूफियों का विशेष रूप से उल्लेख किया है.

बाबर की जीवनी में जितनी महिलाओं का उल्लेख है उतनी महिलाओं का नाम बाद की पूरी मुग़ल सल्तनत में सुनने में नहीं आया. इस संबंध में, प्रोफ़ेसर निशात मंजर ने कहा कि अकबर बादशाह के शासनकाल से पहले तक, मुग़लों के बीच तुर्क और बेग परंपराओं का प्रभाव ज़्यादा था, जिसके कारण महिलाओं की उपस्थिति हर जगह दिखाई देती है.


इसलिए बाबर ने अपनी दो फूफियों का उल्लेख किया है, जो पुरुषों की तरह पगड़ी बाँधती थी. घोड़े पर सवार होकर तलवार लेकर चलती थी. वैसे तलवार चलाना और बहादुरी उनमें आम थी, लेकिन वो दरबार और सभाओं में अक्सर हिस्सा लेती थी. उनका दायरा केवल शादी तक सीमित नहीं था.


प्रोफेसर निशात का कहना है कि मुग़लों का भारतीयकरण अकबर के समय में शुरू हुआ था और उसके बाद महिलाएं पिछड़ती चली गईं. बाद में जब जहांगीर की बज़ावत के मामले में समझौता कराने में जो आगे आगे नज़र आती हैं वो जहांगीर की फूफियां और दादियां हैं. उनकी असली माँ जिनके पेट से वो पैदा हुए वो कहीं दिखाई नहीं देती है. हालांकि फिल्मों में उनकी भूमिका को ख़ूब बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है. क्योंकि ये फिक्शन पर आधारित है."


बाबर के व्यक्तित्व में विरासत

बाबर पर भारत में हमलावर होने और मंदिरों को तोड़ने , जबरन हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित करने के आरोप लगाए जाते हैं. जबकि उनके पोते जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर को "शांति दूत" कहा जाता है और धार्मिक सहिष्णुता को उन्हीं का हिस्सा माना जाता है.

लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग में सहायक प्रोफेसर सैफुद्दीन अहमद कहते हैं, "इतिहासकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों ने अक्सर अकबर बादशाह और अशोक को एक मज़बूत शासक के रूप में देखा और उनके महत्व पर प्रकाश डाला है. इन दोनों व्यक्तित्वों को भारत के लंबे इतिहास में साम्राज्य निर्माण की नब्ज़ माना जाता है, इसके उलट बाबर अयोध्या में मंदिर को तोड़ कर मस्जिद के निर्माण करने के लिए बदनाम है."


वह आगे कहते हैं कि, "बाबर का वसीयत नामा, जो उसने अपने बेटे और उत्तराधिकारी हुमायूँ के लिए बनाया था, वह खुरासान में विकसित राजनीतिक विचारधारा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. बाबर ने कई ऐसे मुद्दों की ओर इशारा किया है, जिन्हें आज के राजनीतिक दल पूरी तरह से अनदेखा करते हैं, या उस पर अमल करने से बचते हैं. बाबर को लंबे समय तक भारत में रहने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उसने जल्द ही यहां के तौर तरीके अपना लिए. उसने हुमायूँ के लिए जो वसीयत लिखी वह उसके न्याय और विवेक को दर्शाता है."


बाबर ने लिखा: "मेरे बेटे, सबसे पहले तो ये कि, धर्म के नाम पर राजनीति न करो,आप अपने दिल में धार्मिक नफरत को बिलकुल जगह न दो. लोगों की धार्मिक भावनाओं और धार्मिक अनुष्ठानों का ख्याल रखते हुए सब लोगों के साथ पूरा न्याय करना."


सैफुद्दीन अहमद कहते हैं कि, बाबर की यही विचारधारा तो आज सेक्यूलरिज़्म कहलाता है.

उन्होंने आगे कहा कि बाबर ने राष्ट्रीय संबंधों की विचारधारा में तनाव न पैदा करने की नसीहत करते हुए लिखा था: गौकशी से ख़ास तौर से परहेज़ करो ताकि इससे तुम्हें लोगों के दिल में जगह मिले और इस तरह वो अहसान और शुक्रिया की ज़ंजीर से तुम्हारे वफ़ादार हो जाए.


सैफुद्दीन अहमद के अनुसार, बाबर ने तीसरी बात यह कही: "आपको किसी भी समुदाय के प्रार्थना स्थल को ध्वस्त नहीं करना चाहिए और हमेशा पूर्ण न्याय करना. ताकि बादशाह और रियाया के बीच संबंध दोस्ताना रहें और देश में शांति व्यवस्था बनी रहे."

चौथी बात उन्होंने यह कही कि, इस्लाम का प्रचार अन्याय और दमन की तलवार के बजाय अहसान और परोपकारी की तलवार से बेहतर होगा. इसके अलावा, बाबर ने शिया-सुन्नी मतभेद को नज़रअंदाज़ करने और जाति के आधार पर लोगों की उपेक्षा करने से बचने की सलाह दी. अन्यथा, यह देश की एकता को नुकसान पहुंचाएगा और शासक जल्द ही अपनी सत्ता को खो देंगे.


सैफुद्दीन के अनुसार, बाबर ने यह भी कहा कि "अपनी जनता की विभिन्न विशेषताओं को वर्ष के विभिन्न मौसमों के रूप में समझो, ताकि सरकार और लोग विभिन्न बीमारियों और कमज़ोरियों से बच सकें."


प्रोफेसर निशात मंज़र ने कहा कि सच यह है कि, बाबर का दिल भारत की तरह विस्तृत था और वह निरंतर संघर्ष में विश्वास करता था. प्रकृति में उनकी रुचि और भारत में बाग़ों के निर्माण ने एक नए युग की शुरुआत की है, जिसकी परिणति हम जहाँगीर के बाग़ों और शाहजहाँ की वास्तुकला में देखते हैं.


बाबर के जीवन में धर्म का बहुत समावेश था और वह बहुत से लोगों के बारे में बताते हुए, इस बात का उल्लेख करना नहीं भूलता कि वह नमाज़ का पाबंद था. या ये कि उसने किस समय की नमाज़ के वक़्त अपनी यात्रा शुरू की और उस समय की नमाज़ वहां पढ़ी।


हालांकि वो ज्योतिषियों से हालात पता करते थे, लेकिन अंधविश्वास से दूर थे. इसलिए, काबुल में अपने बयान में, बाबर ने लिखा है कि, "यहाँ के एक संत मुल्ला अब्दुल रहमान थे. वे एक विद्वान थे और हर समय पढ़ते रहते थे. उसी हालत में उनकी मौत हो गई... लोग कहते हैं कि गज़नी में एक मज़ार है और अगर आप उस पर दरूद का पाठ करते हैं, तो वह हिलने लगता है. मैंने जाकर देखा तो ऐसा महसूस हुआ कि वह मक़बरा हिल रहा है. जब इसके बारे में जांच की, तो पता चला कि यह मज़ार पर रहने वालों की चालाकी है. कब्र के ऊपर एक जाल बनाया गया है, जब जाल पर चलते हैं, तो वह जाल हिलता है. इसके हिलने से क़ब्र भी हिलती हुई प्रतीत होती है. मैंने उस जाल को उखड़वा दिया और गुंबद बनवा दिया. '


बाबरनामा में इसी तरह की कई घटनाएं हैं लेकिन बाबर की मृत्यु अपने आप में एक बहुत ही आध्यात्मिक घटना है.

गुलबदन बानो ने इसका विस्तार से वर्णन किया है कि, कैसे हुमायूँ की हालत बिगड़ती जा रही थी. इसलिए बाबर ने उनके बिस्तर के चारों ओर चक्कर लगाया और एक प्रतिज्ञा की. वह लिखती हैं कि हमारे यहाँ ऐसा हुआ करता था. लेकिन बाबा जानम ने अपने जीवन के बदले में हुमायूँ का जीवन माँगा था. इसलिए यह हुआ कि हुमायूँ बेहतर होते गए और बाबर बीमार. और इसी हालत में 26 दिसंबर 1530 को एक महान विजेता ने दुनिया को अलविदा कहा और अपने पीछे अनगिनत सवाल छोड़ गया.

Muslims community of raility report

 *फ्रांसीसी पत्रकार फ्रांसिस गुइटर* की रिपोर्ट है जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं : 


*दिल्ली के 150 शुलभ शौचालयों में तकरीबन 1325 सफाई कर्मचारी हैं। इनमे से आधे से अधिक मुस्लिम वर्ग के हैं।*


*दिल्ली और मुंबई के 50% रिक्शा चालक मुसलमान हैं। इनमें से अधिकतर नाई, जुलाहे, पठान, सिद्दीकी, शेख़ यानी पूर्वांचल और बिहार के मुसलमान हैं।*


*पूर्वी भारत में मुसलमानो की स्तिथि अछूत सी है कुछ जगहों पर। बाकी जगहों पर लोगों के घरों में काम करने वाले 70% बावर्ची और नौकर मुसलमान हैं।*


*मुसलमानो में प्रति व्यक्ति आय दलितों से भी कम हैं। यहां और अधिक चिंता का विषय यह है कि 1991 की जनगणना के बाद से दलितों की प्रति व्यक्ति आय सुधर रही है लगातार वहीं मुसलामानो की और कम हो रही है।*


*मुसलमान भारत का दूसरा सबसे बड़ा कृषक समुदाय है। पर इनके पास मौजूद खेती के साधन अभी 40 वर्ष पीछे हैं। इसका कारण मुसलमान होने की वजह से इन किसानों को सरकार से उचित मुआवजा, लोन और बाकी रियायतें न मिलना रहा है। अधिकतर मुसलमान किसान कम आय की वजह से जमीन बेचने को मजबूर हैं।*


*मुसलमान छात्रों में "ड्रॉप आउट" यानी पढ़ाई अधूरी छोड़ने की दर अब भारत में सबसे अधिक है। वर्ष 2001 में मुसलमानों ने इस मामले में दलितों को पीछे छोड़ दिया और तब से टॉप पर कब्जा किये बैठे हैं।*


*मुसलमानों में बेरोजगारी की दर भी सबसे अधिक है। समय पर नौकरी/रोजगार न मिल पाने की वजह से 14% मुसलमानों हर दशक में विवाह सुख से वंचित रह रहे हैं। यह दर भारत के किसी एक समुदाय में सबसे अधिक है। यह मुसलमानों की आबादी लगातार गिरने का बहुत बड़ा कारण है।*


*आंध्र प्रदेश में बड़ी संख्या में मुसलमानों परिवार 500 रुपये प्रति महीने और तमिलनाडु में 300 रुपए प्रति महीने पर जीवन यापन कर रहे हैं। इसका कारण बेरोजगारी और गरीबी है। इनके घरों में भुखमरी से मौतें अब आम बात है।*


*भारत में ईसाई समुदाय की प्रति व्यक्ति आय तकरीबन 1600 रुपए, sc/st की 800 रुपए, ओ॰बी॰सी॰ की 750 के आस पास है। पर मुसलमानों में यह आंकड़ा सिर्फ़ 537 रुपये है और यह लगातार गिर रहा है।*


*मुसलमानों युवकों के पास रोजगार की कमी, प्रॉपर्टी की कमी के कारण सबसे अधिक मुसलमानों लड़कियों लव जिहाद का शिकार हो रहीं हैं।*


 *उपरोक्त आकंड़े बता रहे हैं कि मुसलमानों कुछ दशकों में वैसे ही खत्म हो जाऐंगे। जो बचे खुचे रहेंगे उन्हें वह जहर खत्म कर देगा जो सोशल मीडिया पर दिन रात मुसलमानों के खिलाफ गलत लिखकर नई पीढ़ी का ब्रेनवाश करके उनके मन में मुसलमानों के प्रति अंध नफरत से पैदा किया जा रहा है।* महाशय हम कहाँ जा रहे हैं,ध्यान देना होगा हमे अपने भविष्य पर।

: *मुसलमानों से सात यक्ष प्रश्न*

1-मुसलमान एक कैसे होंगे और कब होंगे?

2- मुसलमान एक दूसरे की सहायता कब करेंगे?

3-मुसलमान संगठनों में एकता कैसे होगी?

4-मुसलमान अपना वोट एक जगह कब देंगे?

5- मुसलमान अपनी अपनी जातियों का गुणगान कब बंद करेंगे?

6-उच्च पदों पर बैठे अफसर, मुसलमान मंत्री, mp, MLA अपने निहित स्वार्थ से ऊपर उठ कर मुसलमानों की बिना शर्त सहायता कब करेंगे?

7-गरीब मुसलमानों की सहायता करने के लिए मुसलमान महाकोष का गठन कब होगा?

भारत मे 30 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम आबादी है 

हर महीने एक मुसलमान 10 र₹ भी महाकोष में जमा करेगा तब भी हर महीने 300 करोड़ जमा होंगे

और उसमे से हर ग़रीब मुस्लिम को स्वयंरोजगार मुहैया कराया जा सकता है

गरीब मुस्लिमो की बच्चे  बच्चीयों का निकाह कराया जा सकता है

मुस्लिमों के लिए फ्री स्कूले कॉलेज खोले जा सकते हैं

इसका उत्तर एक कट्टर मुसलमान चिंतक प्राप्त करना चाहता है l


    *यदि आप सही में मुसलमानो का  उद्धार चाहते हैं तो इसे मानना प्रारंभ करें पढ़कर कम से कम दस मुसलमानों को अवश्य भेजें!*

Election results of Rajasthan 2023

चुनाव परिणाम राजस्थान 2023

जी हां दोस्तों आप ने राजस्थान विधानसभा के परिणामों को देख लिया और समझ भी लिया ।जिस तरह चुनाव से पहले कांग्रेस की एक लहर महसूस हो रही थी ,भारत के तीन हिंदी भाषी  राज्यों में जिस तरह बीजेपी की सरकार को लेकर आक्रोश और गुस्सा था 




Vot kisko den वोट किसको दें !

 इस्लाम मैं वोट की अहमियत 

जी हां दोस्तों मुझे उम्मीद है कि आप सभी हजरत खैरो आफियत से होंगे । जैसा कि आप को मालूम है कि अभी हमारे परदेस और मुल्क के दीगर सबों में भी चुनाव चल रहे हैं और हमारे सूबे राजस्थान में अभी 2
5 नवंबर को शनिवार के दिन होने है । ये चुनाव प्रत्येक राज्य के हर पांच साल बाद होते रहते है ,लेकिन ये चुनाव सबसे अलग  चुनाव क्यूंकि इन राज्यों में जिस पार्टी की सरकारें बनेगी वो पार्टी  पूरे देश पर हुकूमत हासिल करने में कामयाब होगी ।
वोट देना हमारा एक संवैधानिक और राजनेतिक अथवा सार्वभौमिक वयस्क अधिकार है ,वोट देने का अधिकार हमे संविधान से मिला है जो की हमारा ये फर्ज बनता है की हम अपने अच्छे और सच्चे उम्मीदवार को वोट अवश्य करें अन्यथा नुकसान अपना होने वाला है क्योंकि हम जिस जनप्रतिनिधि को चाहते हैं की ये उम्मीदवार जीत जाए लेकिन हमारी छोटी सी गलती की वजह से वो नही जीत रहा है तो उसकी हार के जिम्मेदार हम लोग हैं और कोई नही

वर्तमान समय में देश के अंदर चुनावी माहौल चल रहा है और हम लोगों की क्या जिम्मेदारी है? वर्तमान के चुनावी माहौल में हमारी क्या भूमिका है ? हमे इन चुनावों की किस तरह देखना है ? में इन सारे सवालों के जवाब देने की कोशिश करता हूं।
सबसे पहले हम लोगो के पास सबसे शक्तिशाली हथियार है वो है वोट या मत । वोट या मत के अलग अलग अर्थ है  राय ,फैसला , सलाह,शहादत ,गवाही जो अपना उम्मीदवार होने वाला है या अपना दल जो
 अपनी पसंद का है उसको हम लोग वोट के माध्यम से चुन सकते है । आज के मौजूदा हालात को देखते हुए
 हमे देश की सबसे प्रमुख दलों की भूमिका का

 मूल्यांकन करना जरूरी है और इस पर गोर ओ फिक्र
 करना बहुत जरूरी है इसलिए हमें चाहिए की हम
लोग सोच समझ कर अपने मत का सही इस्तेमाल 
 करे ,ताकि मुल्क गलत दिशा में न जाए।



              वोट कौनसी पार्टी को दें?                   वर्तमान में हमारे मुल्क में काफी राष्ट्रीय दल और बहुत सारे राज्य अथवा राष्ट्रीय दल लेकिन इस देश में सबसे विस्तार प्रमुख रूप से दो दलों का ही है वो एक कांग्रेस और बीजेपी ये दोनो दल देश में अलग अलग समय पर देश में हुकूमत कर रहे हैं।
हमारा फर्ज ये बनता है की हम लोग सोच समझ कर  इन दलों के हित में वोट करे ।आप अपनी
 पसंद और  नापसंद के आधार पर न  चुने बल्कि ये देखे की कौनसी पार्टी और दल देश के लिए सही कार्य करता है और मुल्क के हित में कानून बनाता है और जनता के लिए कल्याणकारी कार्य करता है , जनता के लिए और गरीब आवाम के लिए मूलभूत सुविधाओं से संबधित योजनाएं लागू करता है ,कोनसा दल है जो देश को मोहब्बत और भाईचारे के साथ लेकर चलता है ,कोनसा दल है जो समय पर सही गलत फैसलों पर कार्यवाही करता हैं,वो कोनसा दल है जो सबसे ज्यादा  रोजगार देता है इन सब पहलुओं पर अच्छी तरह तुलना करे और फिर सोचे जो आप को दिल और दिमाग निर्णय दे वही निर्णय आप को लेना है ।
 

        किस तरह के  उम्मीदवार को चुने?
जी हां ये आप के क्षेत्र में आप का जनप्रतिनिधि होने वाला आप उसको किस नजरिए से देखते है ।
आप की असेंबली में बहुत सारे उम्मीदवार  दावेदार होते है लेकिन उनमें से जीतेगा वही जिससे जनता चाहे । आप के क्षेत्र में दो या तीन जनप्रतिनिधि प्रत्यासी खड़े है उनमें तीनो का अच्छी तरह मूल्यांकन करे और आपस में तुलना करे ये लोग किस दल से है? और इन की छवि कैसी है?आवाम के लिए किस हद तक सही है ?पिछले कार्यकाल में किस तरह के विकास कार्य करवाए है?   ये भी देखे की ये उम्मीदवार किस पार्टी से जुड़े हुए है और इनका और इसकी पार्टी की क्या स्तिथि हैं ? सब चीजें देख कर फिर आप फैसला ले की कोनसा उम्मीदवार आप के लिए सही रहेगा और कोनसा गलत होगा ।



दीन ए इस्लाम क्या कहता है वोट के बारे मे?

जी हां इस्लाम मजहब ने दुनिया में हर क्षेत्र में  रहनुमाई की है । इस्लाम ने हुकूमत करने का तरीका सिखाया भी है और हुकूमत भी की है ।
इस्लाम ये कहता है की दो लोग जो आप के क्षेत्र में उम्मीदवार है आप उनमें से किनको मुनतख्ब करना चाहते हो ,इसका मतलब आप किसके पक्ष में शहादत या गवाही देते हो ? आप को गवाही इस आधार पर देनी है की कोनसा उम्मीदवार सही है और नेक है ,उसमें बुराइयां कम है और ईमानदार है ? कोन आवाम के लिए सही फैसले लेने वाला होगा ? आप दोनो पक्षों की तुलना करें और स्तिथि का जायजा लें की किस के पक्ष में गवाही देने से हमारी दलील मजबूत होगी ? 
आप को फैसला जाति या धर्म और रिश्तेदार के आधार पर नही लेना होगा बल्कि आप को हक और इंसाफ को देखकर फैसला लेना होगा ।
एक तरफ आप का भाई खड़ा है दूसरी तरफ गैर मुस्लिम खड़ा है आप के भाई में बहुत सारी बुराइयां है लेकिन सामने वाला आदमी गैर मुस्लिम है तो आप अपने भाई  के पक्ष में गवाही नहीं दे सकते ,अगर आप ने गवाही दे दी तो कल आप की पकड़ होगी किसी और की नही । इसलिए वोट एक गवाही है गवाही सचाई,ईमानदारी ,और हक बात पर होती है न की भाई ,जाती या धर्म के आधार पर । इसलिए हमे वोट सोच समझ कर देने चाहिए । हम लोग अच्छे , सच्चे, नेक ईमानदार ,और हक पसंद आदमी को चुने ताकि आवाम की समस्या का समाधान कर सके और जनता की भलाई के कार्य कर सके ।


                 वोट की अपील!
आप सभी प्रदेश वासियों से निवेदन है की हमारे  सूबे राजस्थान में 25 नवंबर 2023 शनिवार के दिन चुनाव है ।आप हजरात अपने अपने वोट की कीमत समझ कर अपने अच्छे और नेक  ,ईमानदार व्यक्ति को चुने ।वोट आप का राजनेतिक सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार है इसलिए वोट करने अवश्य जाएं और अपने रिश्तेदार ,भाई बहिनों और पड़ोसी और दोस्तों को वोट देने की विशेष अपील करे । वोट देने के मामले में किसी के बहकावे में न आवे ,किसी से रुपए या लालच न लें यहां तक को आप उनकी गाड़ी में भी न बैठे । आप अपने पसंद के नेता को चुने जो पांच साल के लिए जनता के लिए काम कर सके  और देश प्रदेश में अपनी सही भूमिका निभा सके ।


        चुनाव लोकतंत्र का पर्व है 


                बहुत बहुत धन्यवाद
में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जैसिंधर 

















What are doing Indian Muslim's . भारतीय मुस्लामानों को क्या करना चाहिए?

What are doing by Indian Muslim's ?

जी हां दोस्तों आज बात भारतीय मुसलमानो को लेकर की जा रही है जो की सबसे अहम मुद्दा बन चुका है ,मुद्दा इसलिए बन चुका है की आए दिन मुसलमानो को प्रताड़ित किया जाता है , भीड़ का शिकार बनाया जाता है ,कहीं धर्म यात्रा के नेम से दंगे भड़काए जाते , भेदभाव किया जाता है ,कभी दलितो को मौत का निशाना बनाया जा रहा है, ये कह कर की मुस्लिम लोग बीच में बाधा डालकर । आखिर सोचिए ये सब काम कोन करवा रहा है? इसके पीछे एक बहुत बड़ा संगठन है ,पार्टी है एक असामाजिक तत्वों की सोच है जो देश के पुर सुकून माहोल को खराब करना चाहते है । इस प्यारे से मुल्क के लिए सही नही है आने वाले दिनों में बहुत है खतरा उत्पन्न होने का डर हैं! लेकिन हम लोगो ऐसे असामाजिक तत्व जो अराजकता फैला रहे है उससे डरना नहीं है ,जागरूक रहना है ,अपने आप को संभालना है ,अपने भाइयों और बहिनों को संभालना है ,कमजोर को हौसला। देना है ,सब्र और हिम्मत से काम लेना है ,जल्दबाजी में आकर कानून को हाथ में नही लेना है , जोश में होश नही खोना है ,क्योंकि अभी पानी सर से ऊपर नहीं आया है ।अभी सब्र से काम लेना है,इंसानियत को जिंदा रखना ,भाई चारे और दोस्ती को बढ़ाना है और हिंदू मुसलमान सिख इसाई इत्तिहाद को कायम करना है।हिंदू मुस्लिम इत्तेहाद वाले प्रोग्राम चलाने होंगे । मोहब्बत को बढ़ाना होगा ,भाई चारा रिश्ते को कायम रखना होगा । नफरत की आग को नफरत से नही बुझाया जा सकता मगर नफरत की आग को प्यारो मोहब्बत से बुझाया जा सकता है। हमे वो काम करने है जो देश को ऊंची दिसा और तरकी की ले जाए ऐसे काम करने होंगे जिसे अमन कायम हो भाई चारा कायम रहे ।
आप और हम जिस शहर या गांव में रहते है वहां अपने पड़ोसी का ख्याल रखना होगा , उनके साथ अच्छा व्यवहार रखना होगा ,उनके साथ मधुर संबंध बनाने होंगे ,उनके साथ दुख सुख में खड़ा होना पड़ेगा । इस्लाम ने आज से 1400 साल पहले जो सिखाया वो काम अमली तौर पे करना होगा तभी तो ये फिटने फसादत खत्म होंगे ऐसे ही खत्म नहीं होंगे ।
अमली काम क्या करना है ?
1 दीन ए इस्लाम पर जिंदगी गुजारनी होगी 
2 दीनी तालीम और दुनियावी तालीम पर गौर आ  फिक्र करना होगा 
3 हिंदू मुस्लिम इत्तेहाद वाले प्रोग्राम को आम करना 
4 अपने ईमान को मजबूत करना होगा।
5आपस में firka प्रस्ती को खत्म करना होगा ।
6.अपने समुदाय  हॉस्पिटल खोलने होंगे 
7.अपने मुस्लिम समाज के कॉलेज खोलने होंगे ।
8.गरीब और मजलूम की मदद दिल खोल कर करनी होगी ।

1.अपने ईमान को मज़बूत करना होगा !
जी हां दोस्तों आज का दौर बहुत है नाज़ुक दौर है,इस पुरफितन दौर में अपने ईमान को बचाना सबसे ज़रूरी है।अगर हमारे पास ईमान नहीं तो गोया कुछ भी नही  इस्लाम मजहब में दाखिल होने के लिए कालिमा ए तोहीद पढ़ते हैं,उसका मतलब ही तो ईमान है । उस कलीमे के मुताबिक अपनी जिंदगी गुजारना ।इसलिए आप और हम सबको ईमान बचाना अनिवार्य है।
ईमान का मतलब क्या है? ईमान का मतलब ये है की अल्लाह के हुकुम को मानना और हमारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीके पर जिंदगी गुजारना ।ईमान का मतलब है जो हक उसको बर हक़ कहना होगा ,जो सच है उसको सचाई बयान करनी होगी ,जो बातिल हो उस को बातिल कहना पड़ेगा ,जो आतंकवादी है उसको आतंकवादी कहना पड़ेगा ,जो अमांतदार है उसको अमांतदार कहना होगा,जालिम को जालिम कहना पड़ेगा ,मजलूम को मजलूम कहना पड़ेगा अगर ये सब आंखों देखे हाल नही कहिंगे तो हमारा ईमान खतरे में पड़ जायेगा हम लोग ईमान से निकल जायेंगे ।
जो अहले हक पर है चाहे वो कोई भी काम करता हो लेकिन शर्त ये है की वो काम सही हो हकीकी हो ,दीनी हो या दुनियावी लेकिन शरई एतबार से सही होना चाहिए ।अगर कोई काम दीनी और दुनियावी एतबार से सही नही है तो उसको गलत खुल कर कहना होगा ।अगर हम लोग नही कहींगे,अपनी ज़बान नही खोलेंगे तो हम लोग भले ही कितनी भी उस परवरदिगार की इबादत करे कोई फायदा नही , क्योंकि हम लोग ईमान से निकल चुके है ।
ईमान के तीन दर्जे या स्तर है 
अगर कोई व्यक्ति गलत काम कर रहा है , तो उसको मना करने के लिए आप के पास तीन विकल्प है 
पहला अगर आप हाथ से रोक सकते हो तो रोको ,अगर आप जबान से रोक सकते हो तो रोको ,अगर आप हाथ से या जबान से नही रोक सकते तो कम से कम दिल से उसे बुरा मानो । ये है ईमान के तीन दर्जे।अगर हम इन तीनो में से नही है तो समझो हम लोग ईमान से निकल चुके हैं फिर हम नाम के मुस्लमान है ।अपने ईमान को मजबूत करना होगा ।
2. दीन ए इस्लाम पर जिंदगी गुजारना 
जी हां दोस्तों आज हमारे सामने ये खतरनाक हालत बद से बदतर क्यो आ रहे है कभी इसपर गौर किया ? ये हालात हमारे अपने ही कर्मों का नतीजा है इसलिए की हम लोग अपने परवरदिगार को भूल बैठे है और उसके दो अहम हुकूक है ,हम सब ने उन पर अमल किया ही नही । इस दुनिया में हालात बहुत ही सख्त आने वाले है , अल्लाह का साफ साफ हुकुम है की ईमान वालों पर में आजमाइश भेजूंगा लेकिन जो मेरे खास बंदे होंगे जो इस मुश्किल घड़ी को सब्र और हिम्मत से पार कर लेंगे लेकिन जिनका पक्का ईमान नहीं होगा वे लोग ईमान की परीक्षा से नाकाम हो जाएंगे।ये  केसे हो सकता है की दुनिया में ईमान वाले बंदे हो और में उनको आजमाओ ना ये तो हो ही नही सकता ! इसलिए दुनिया के ये 14 वी सदी चल रही है कुर्बे कयामत का दौर नजदीक है ,हमें डरने और घबराने की जरूरत नहीं ! हालात अभी और सख्त से सख्त आयेंगे ,इसकी ज्यादा तफसील उलमा हजरात बताएंगे ,लेकिन ईमान वाला होगा वो कभी भी इन हालात को देख कर अपना पाला नही बदलेगा ।
जो बंदा अल्लाह के हुकुम के मुताबिक दुनिया में जिंदगी गुजरता है  अल्लाह के पांचों हुक्मों को (कालिमा ए  तोहिद, नमाज, रोज़ा,जकात और बैतुल्लाह शरीफ का हज) दूसरा हुकुम है हुकुकुल इबाद यानी अपने बंदों के मामलात में सही और अमंतदारी पर काम करता है ।  हमारे और आप के नबी हजरत मोहम्मद (स अ स) के तौर तरीके के मुताबिक जिदंगी गुजरता है यकीनन वो बंदा कामयाब है  जिसे दुनिया में अपने परवरदिगार के हुकुम के अनुसार जिंदगी गुजारी।
आज हमारी जिंदगियों में सुख और चेन नही है ,हमारी रोज़ी में बरकत नहीं है , मुसलमानो का कत्ल ए आम हो रहा है ,ये सब वो नतीजा है जो हम अपने रब को भूल बैठे है जो दुनिया में जिंदगी गुजारने का तरीका था वो नबवी तरीका था पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श तरीका था इस तरीके पर जिस जिस ने अमल किया वो दुनिया में खुश हाल रहा और जिस जिस ने ये तरीका तर्क कर दिया वो नाकाम रहा और दौर ए हाजिर में फितनों का शिकार रहा ।
3.दीनी तालीम और दुनियावी तालीम पर तवज्जो देना 
जी हां दोस्तों आज का दौर बहुत ही नाजुक दौर है,ये दौर शिक्षा का दौर है , जिसमे हम मुसलमानो के लिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है ,अगर हम लोग शिक्षा हासिल नहीं करेंगे तो हमारा जीवन अधूरा है ,फिर हम उस अंधे व्यक्ति की तरह भटकते रहेंगे जिनकी बीनाई जा चुकी होगी वही स्तिथि हमारी न बन जाए की शिक्षा के बिना उजाला कहां होने वाला है ,दोस्तो आज के दौर में हमारी स्तिथि यहीं है की हम लोग दीनी तालीम और दुनियावी तालीम में सभी कॉम और समुदाय में पीछे है तो हम लोग ही है । दीनी तालीम और दुनियावी तालीम में पीछे रहने पर आज हमारा ये हाल हो चुका है की किसी सरकारी ऑफिस में हमारा अधिकारी तो दूर की बात लेकिन चपरासी भी कहीं तक नजर नही आता है । इक्के दुक्के विभागो में कोई मुस्लमान बंदा नजर आता है वो बस उतना है जितना सब्जी में नमक के मामूली बराबर! बस यही स्तिथि!लेकीन साथियों जरा गौर करने की बात है की अपने आप के अंदर झांको की हम लोग कोन से किनारे पर खड़े है ।
आज जिनके पास शिक्षा है उनके क्या हाल है ? आप पता लगाओ ! भले ही उनके पास दुनिया की तालीम हैं। उनके पास एक तालीम है अपने पास दोनो तालिम्स है फिर भी हम लोग पीछे क्यो? क्योंकि हमने कभी तालीम पर अपना ध्यान फोकस किया है नही ।हम में अपना ध्यान दूसरे कामों में दिया , फिजुल खर्ची में दिया , सोशल मीडिया पर facbool, इंस्टाग्राम, वाट्सअप पर ध्यान दिया लेकिन दुनिया का सबसे important knowledge, शिक्षा जो मनुष्य का हाथियार है उस पर कभी ध्यान दिया ही नहीं।
हम लोगों को चाहिए की अपने बच्चो को और बच्चियों को अपने मदरसे में एक ही छत के नीचे दुनिया और दीन  की तालीम दिलाएं। मकतब की तालीम दिलान मां बाप के जिम्मे है अगर वालीदैन ने अपनी ओलाद को बेसिक शिक्षा तालीम नही दिलाई तो वो बच्चे कयामत में आप को जहन्नम की तरफ ले जायेंगे ।इसलिए अपनी नस्लों को दीन की तालीम और दुनिया की तालीम जरूर दिलाए साथ साथ में अच्छे लक्षण और अदब का तरीका भी सिखाए ताकि वो बच्चा बड़ा हो कर समाज का आदर्श रोल मॉडल बन सके ।
4.आपस में फिरका परस्ती को खतम करना होगा !
जी हां दोस्तों आज के हालात को देखते हुए हमे अपने आप को firka परस्ती को खत्म करना होगा।जो भी समाज का या सोसाइटी का काम है उसको firka  प्रस्ती से ऊपर उठ कर काम करना होगा ,हमारे अंदरूनी मसाइल को छोड़ना होगा , हमे एक दुसरे को गले लगा a होगा ,एक दूसरे को मोहब्बत की निगाह से देखना होगा ,अपने मसाइल को अपने तक ही सीमित रखना होगा ,आप को जालिमों के खिलाफ लड़ना होगा ,सच और इंसाफ का खुलंकर साथ देना होगा ,हक को हक और बातिल को बातिल कहना होगा ,ये सब काम तभी होगा जब हम लोग फिरका परस्ती ऊपर उठ कर गौर ओ फिक्र  करेंगे।

हमे क्या करना चाहिए? 
आज के इस दौर में हमे अपने ईमान को मजबूत करना होगा , बगैर ईमान के हम कुछ भी नही कर सकते है ,अपनी जिंदगी तब तक सलामत है जब तक हमारे पास ईमान की ताकत जिंदा है , अगर हमारे दिलों में ईमान नहीं गोया कुछ भी नही तो सबसे पहले ईमान को मजबूत बनाए ,ईमान की परिभाषा मेने पहले ही समझा दी हैं।उसके बाद दीन ए इस्लाम पर जिंदगी गुजारनी होगी जो के बिना दीन के इंसान का कोई महत्व नहीं है इसलिए अपने आप को अपने परवरदिगार के हुक्मो के मुताबिक जिंदगी गुजारे।
उसके बाद खिदमत ए खल्क में अपना वक्त लगाएं।गरीबों की खिदमत करे और मजलूमों की हर सम्भव मदद करे और बेसहारों की मदद करे और एक दूसरे भाई के साथ नरमी के साथ पेश आए , पड़ोसियों का अच्छी तरह ख्याल रखें चाहे आप का पड़ोसी मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम कोई भी हो उनके साथ अच्छा मामलात रखे ।अपनी दीनी तालीम और दुनियावी तालीम पर ध्यान दें और अपने बच्चो को खास कर तालीम दिलाएं और उन पर पैनी नजर रखे । उनके हमेशा राब्ता रखें और नेक काम करते रहे ।

























All India Muslim Parsonal Board

All India Muslim Parsonal Board ?

जी हां दोस्तों आज बात हिंदुस्तान के अंदर एक ऐसी संस्थान की  बात हो रही है जिसका नाम है all India Muslim Parsonal low board  
है जो की अपने आप में एक हिंदुस्तान के अंदर मुस्लिम समुदाय के लिए एक अहम किरदार अदा करता हैं,जिससे हर मुसलमान को जानना जरूरी है ।ये संस्थान एक गैर राजनीतिक है ,जो अल्पसंख्यक समुदाय मुस्लिम को संविधान सभा ने जो मौलिक अधिकार दिए हैं अनुच्छेमें
द 29और 30 ,उनकी सुरक्षा करना ।हिंदुस्तान के अंदर जो भी कानून संसद में  बनते है उनकी कहीं शरीयत से टकराव की स्तिथि उत्पन्न न हो । एआईएमपीएलबी बना इसी मकसद के लिए है  बना है की किसी भाई हाल में इस्लामी शरीयत की हिफाजत की जाए ।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ?
1937 में गठित एक गैर सरकारी संगठन है ,जिसने भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ को सुरक्षा और निरंतर प्रायोज्यता को अपनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है । मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शरिया (1937) का आवेदन  अधिनियम का ,व्यक्तिगत मामलों में भारत शरिया की हिफाजत करने के लिए गारंटी देता है ।
अधिनियम इस तरह की उतराधिकारियों को छोड़ कर व्यक्तिगत मामलों में  कानून के सभी मामलों में  लागू होता है ।




संक्षेपाक्षर              ए आई एम पी लो बो

स्थापना                  27 अप्रैल,1972

संस्थापक                मुस्लिम धर्म गुरुओं द्वारा 

प्रकार                      गैर राजनीतिक 

वैधानिक स्थिति।        सक्रिय

मकसद।                     शरिया क़ानून की 
                                 हिफाजत करना 

मुख्यालय।                ओखला , नई दिल्ली ,भारत 


सेवा क्षेत्र                     भारत 


विधि।                          राय मशोरे से  शरिया         
                                 कानून की हिफाजत करना।

सदस्य।                      201

आधिकारिक भाषा      उर्दू और अंग्रेजी 


महासचिव                    मौलाना मोहम्मद वली
                                   रहमानी 

सदर                          मौलाना खालिद सैफुल्लाह 

संबंधित                     भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ

ध्येय वाक्य।               शरिया कानूनों का संरक्षण 
                                करना ।


                                                         
जी हां दोस्तों ये जानकारी आप के लिए बहुत ही कहा है की आप के पास आप का अपना मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड है जो गैर राजनीतिक संगठन है । बोर्ड का काम ही इस्लामी शरिया की हिफाजत करता है ।जो की भारतीय सविंधन सभा ने मुसलमानो को मौलिक अधिकार और मूल कर्तव्य दिए है जो हमारे लिए एक खास तोहफा है जो हम ने ये सब संघर्ष करके हासिल किए है ,इन मौलिक अधिकरो की सुरक्षा करने का जिम्मा aimp का है जो सभी 51 उलेमाओं की समिति है जिसमे सभी मसलक के ulma उपस्थित है  सिवाय कादयान के ।

धन्यवाद आपका दोस्त लेखक साथी 
मुराद खान जयसिंधर।









Ek aadrsh adhyapak ke gun

 

Acche adhyapak ki visheshtayen.



अध्यापक शिक्षण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग है। अध्यापक के बिना शिक्षा की प्रक्रिया सफल रुप से नहीं चल सकती।अध्यापक न केवल छात्रों को शिक्षा प्रदान करके ही अपने दायित्वत से मुक्ति पा लेता है वरन उसका उत्तर दायित्व है तो इतना अधिक और महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक व्यक्ति उन्हें पूर्ण करने में समर्थ नहीं है। शिक्षक की क्रिया और व्यवहार का प्रभाव उसके विद्यार्थियों,विद्यालय और समाज पर पड़ता है।इस दृष्टि से कहा जाता है कि अध्यापक राष्ट्र का निर्माता होता है।अतः अध्यापक अपने कार्यों को सफलतापूर्वक एवं उचित प्रकार से करने के लिए आवश्यक है कि उसमें कुछ गुण अथवा विशेषताएं होनी चाहिए। सामान्यतः एक अच्छे अध्यापक में निम्नलिखित गुणों का होना अति आवश्यक है-
शिक्षक में मुख्य रुप से 4 गुण होने जरुरी है
1.शैक्षिक गुण/ योग्यताएं
2.व्यावसायिक गुण
3.व्यक्तित्व संबंधी गुण और
4. संबंध स्थापित करने का गुण

1. शैक्षिक योग्यता -
एक अध्यापक में अध्ययन के लिए स्तरअनुसार न्यूनतम शैक्षिक योग्यता का होना अनिवार्य है। साथ ही अध्यापक का प्रशिक्षित होना भी आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर-
प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने के लिए अध्यापक को कम से कम हायर सेकेंडरी कक्षा पास होना तथा एस.टी.सी. के रूप में शिक्षण कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त किया हुआ होना चाहिए।
इसी प्रकार सेकण्डरी कक्षाओ को पढ़ाने वाले अध्यापक के लिए कम से कम शैक्षिक योग्यता के रूप में स्नातक एवं B.Ed किया हुआ होना चाहिए।
उच्च माध्यमिक कक्षा को पढ़ाने वाला अध्यापक संबंधित विषयों में स्नातकोत्तर की डिग्री लिया हुआ होना चाहिए।साथ ही B.Ed की डिग्री भी उसके पास होना आवश्यक है।
कई विद्यालयों में अप्रशिक्षित अध्यापक या अध्यापिकाओ को रख लिया जाता है जो उचित नहीं है।अतः अध्यापक का चयन करते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि उसमें न्यूनतम योगिता हो तथा प्रशिक्षित हो।
2. व्यावसायिक गुण--
एक अच्छा अध्यापक बनने के लिए आपमें व्यवसायिक गुणों का होना भी आवश्यक है-
1. व्यवसाय के प्रति रुचि निष्ठा 
एक अध्यापक को अध्यापन व्यवसाय में रुचि ओर उसके प्रति निष्ठा होनी चाहिए।वह उसे केवल अपनी कमाई का साधन ही ना समझे ।अध्यापक यदि मजबूरी में अध्यापक बनता है तो वास्तव में वह अध्यापक बनने के योग्य नहीं है।
2. विषय का पूर्ण ज्ञान
एक कुशल अध्यापक में इस गुण का होना अति आवश्यक है।अध्यापक को विषय का पूर्ण ज्ञान नहीं होगा तो वह विद्यार्थियों की विषय संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगा जिससे छात्र उसका आदर सम्मान नहीं करेंगे और न ही उसे आत्म संतुष्टि हो पाएगी।
3. शिक्षण विधियों का प्रयोग 
एक अच्छा अध्यापक में यह गुण होना भी आवश्यक है कि छात्र उसकी बात को अच्छी तरह से समझ सके इसके लिए उसे छात्रों के स्तर अनुसार एवं विषय की प्रकृति अनुसार उचित शिक्षण विधि का प्रयोग करना चाहिए। जैसे छोटे बालको के लिए खेल विधि,प्रदर्शन विधि और कहानी विधि का प्रयोग प्रभावशाली रहता है तथा उच्च कक्षाओं में व्याख्यान प्रयोगशाला प्रयोगात्मक विधि उपयुक्त रहती है।
4. सहायक सामग्री का प्रयोग-
वर्तमान समय में विषय वस्तु की जटिलता कि समाप्ति की दृष्टि से अध्यापन में शिक्षा तकनीकी के साधनों का प्रयोग किया जा लगा है एक अच्छा अध्यापक वही है जो छात्रों के स्तर, उनकी योग्यता एवं क्षमता तथा विषय-वस्तु की प्रकृति को ध्यान में रखकर वस्तु को सरल और रुचिकर बनाने की दृष्टि से समुचित शिक्षण सहायक सामग्री का प्रयोग करें।
5. मनोविज्ञान का ज्ञान-
एक कक्षा में अलग-अलग प्रकार के बालक होते हैं उनकी भिन्न समस्या होती है वह अधिगम भली-भाति कर सके इसके लिए उनकी समस्याओं का समाधान होना आवश्यक है।एक शिक्षक उसी स्थिति में बालको की समस्याओं का समाधान कर सकता है जब वह उन से परिचित हो और समस्याओं के संबंध में जानने के लिए शिक्षक को मनोविज्ञान का ज्ञान होना आवश्यक है।
मनोविज्ञान का ध्यान होने पर ही शिक्षक बालक की रूचि योगिता क्षमता बुद्धि आदि को समझ सकता है और उसके आधार पर अपना जो शिक्षण है उस और निर्देशन का कार्य सफलतापूर्वक कर सकता है।
6. ज्ञान पिपासा  -
एक अच्छा शिक्षक वही है जिसमें हमेशा सीखने की ललक बनी रहती है दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि' एक अच्छा अध्यापक वही है जो हमेशा विद्यार्थी बना रहता है 'इससे अध्यापक का खुद का ज्ञान तो बढ़ता ही है साथ ही वह अपने विद्यार्थियों को भी लाभ दे सकता है।
7. पाठ्य सहगामी क्रियाओं में रूचि -
एक अच्छे अध्यापक के लिए यह आवश्यक है कि वह विद्यालय में विभिन्न पाठ्य सहगामी क्रियाओं का आयोजन करने एवं उन्हें सफलतापूर्वक संपन्न कराने में रूचि ले।साथ ही इसके लिए उसे अपने विद्यार्थियों में रुचि विकसित करने के लिए प्रयत्न करने चाहिए।
8. समय का पाबंद -
अच्छे अध्यापक का एक महत्वपूर्ण गुण उसका समय के प्रति पाबंद होना है।वह समय पर विद्यालय में जाएं,प्रार्थना सभा में उपस्थित हो तथा कालांश प्रारंभ होते ही कक्षा में जाएं और कालांश समाप्ति के पूर्व क्लास छोड़े अध्यापक यदि समय का पाबंद नहीं है तो उसके विद्यार्थी भी समय के पाबंद नहीं हो सकते।
9. कुशल वक्ता -
एक शिक्षक को अपनी बात को छात्रों तक पहुंचाने के लिए उसे रुचिपूर्ण,अच्छे स्तर तथा निश्चित अर्थ वाले शब्द का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही प्रवाह पूर्ण तरीके से बोलने में उसे झिझकना नहीं चाहिए।अत्यधिक गति से भी नहीं बोलना चाहिए। दूसरे शब्दों में उसे अपनी बात इस प्रकार के रखनी चाहिए कि विद्यार्थियों पर उसका प्रभाव पड़े और वे उसे सुनने में रुचि ले।
10. छात्रों के प्रति प्रेम व सहानुभूति -
एक शिक्षक केवल अध्यापक के प्रति रुचि रखें यह पर्याप्त नहीं है।उसे अपने विद्यार्थियों में भी रुचि रखनी चाहिए।साथ ही विद्यार्थियों से प्रेम, सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना चाहिए। विद्यार्थियों के द्वारा पूछे गए प्रश्नों का संतोषजनक रूप से उत्तर देना चाहिए।उनकी समस्याओं का सहानुभूतिपूर्ण समाधान करना चाहिए।इससे विद्यार्थी भी अध्यापक आदर करेंगे।
3.व्यक्तित्व संबंधी गुण -
एक अच्छे टीचर की पर्सनैलिटी भी प्रभावशाली होना आवश्यक है टीचर का व्यक्तित्व प्रभावशाली तब ही हो सकता है जब उसमें निम्न गुण हो-
1.वेशभूषा -
टीचर का व्यक्तित्व प्रभावशाली होने के लिए उसका बाहरी स्वरूप अध्यापक के सम्मान ही होना आवश्यक है।अध्यापक के समान बाहरी सवरूप होने का अर्थ उसके सुंदर या असुंदर होने से न होकर उस की वेशभूषा आदि से है।अध्यापक को साफ सुथरी प्रेस किये हुए तथा उचित कपड़े पहने चाहिए। बालों को ढंग से सँवारकर कक्षा में जाना चाहिए। इससे शिक्षार्थी के ऊपर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
2. अच्छा स्वास्थ्य -
एक अच्छे अध्यापक का शारीरिक रूप से स्वस्थ होना भी आवश्यक है।यदि शिक्षक स्वस्थ नहीं होगा तो वह कक्षा में क्या पढ़ाएगा वह किस रूप से पढायेगा। शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने पर मानसिक रुप से भी अस्वस्थ रहेगा और साइकोलॉजिस्ट के द्वारा कहा गया है कि "स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है" शिक्षक का शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है।
3. उच्च गुणवत्ता-
एक शिक्षक को चारित्रिक रुप से दृढ़ होना चाहिए।क्योंकि शिक्षक के चरित्र का प्रभाव उसके विद्यार्थियों पर शीघ्र ही पड़ता है। अतः अध्यापक को अपने विद्यार्थियों के समक्ष अपने आपको अच्छे रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। कभी भी उनके सामने कोई गलत या अनैतिक हरकत नहीं करनी चाहिए।
4. नेतृत्व शक्ति-
एक अच्छे शिक्षक में नेतृत्व शक्ति भी होनी चाहिए।उसे अपने विद्यार्थियों को प्रत्येक क्षेत्र, शिक्षक अधिगम, पाठ्य सहगामी प्रक्रिया, किसी विषय में विचार-विमर्श अनुशासन बनाए रखने आदि में कुशल एवं प्रभावशाली नेतृत्व प्रदान करना चाहिए।जिससे विद्यार्थी इन सभी क्षेत्रों में सफलता पूर्वक कार्य कर सकें।
5. धैर्यवान -
एक अच्छे शिक्षक में धैर्य का गुण होना आवश्यक है।छात्रों के प्रश्न पूछने पर उसे उखड़ना नहीं चाहिए। बात-बात में झुंझलाना नहीं चाहिए। बल्कि धैर्य के साथ सोच समझकर उनके प्रश्नों के उत्तर देकर उन्हें संतुष्ट करना चाहिए।
6. विनोदप्रिय -
विनोद प्रिय का तात्पर्य हंसी-मजाक करने वाले व्यक्ति से होता है।यदि कोई शिक्षक अपना चेहरा गुस्से से लाल रखता है तो विद्यार्थी उस अध्यापक से अप्रसन्न रहते हैं। उससे प्रश्न पूछना वह बात करना पसंद नहीं करते हैं अतः अध्यापक को विद्यार्थियों से प्रेम पूर्व मधुर संबंध बनाने एवं कक्षा शिक्षण में रस और रुचि उत्पन्न करने के लिए विनोद प्रिय होना आवश्यक है।
7. उत्साह -
प्रभावशाली अध्यापक उत्साह ही होता है जो भी कार्य उसे दिया जाता है वह पूर्ण उत्साह के साथ उसे करता है इससे छात्रों में भी रुचि उत्पन्न होती है और वह भी अध्यापक का पूर्ण उत्साह के साथ सहयोग करते हैं जिससे कार्य मैं पूर्ण सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
8. आत्म-सम्मान -
जिस शिक्षक में आत्म सम्मान की भावना नहीं होती है। वे अध्यापक कहलाने के योग्य नहीं है। एक अच्छा और प्रभावशाली अध्यापक वह है जो विद्यार्थियों,प्रधानाध्यापक तथा अन्य के सामने इसी गलत बात के लिए नहीं झुकता है। किसी प्रकार का अन्याय सह नहीं करता है,गलत बात का समझोता नहीं करता है। जो अध्यापक अपने कर्तव्यों और अधिकारों के प्रति सचेत रहता है वही अपने आत्मसम्मान की रक्षा कर पाता है।
4. संबंध स्थापित करने का गुण-
एक अच्छा अध्यापक वह है जो हमें लोगों के साथ अच्छा संबंध रखता है और उन्हें बनाए रखता है एक अच्छे शिक्षक का निम्न लिखित व्यक्तियों से अच्छे संबंध होने चाहिए-
1. विद्यार्थियों के साथ संबंध-
अध्यापक का कार्य सिर्फ़ इतना ही नहीं है कि वह कक्षा में जाकर अपना पाठ पढ़ा दे।उसे यह भी देखना चाहिए कि छात्रों पर उसका कितना प्रभाव पड़ता है। वह इस बात को तब ही देख सकता है जब उसका विद्यार्थियों के साथ मधुर संबंध स्थापित हो। इसके लिए उसे प्रत्येक छात्र की और व्यक्तिगत रूप से ध्यान देना चाहिए। उनकी समस्याओं का उचित समाधान करना चाहिए उनके साथ मित्रता करें।
2. साथी अध्यापकों के साथ संबंध-
अध्यापक को अपने साथी अध्यापकों के साथ मैं भी मधुर संबंध बनाने चाहिए। अच्छा शिक्षक वही है जो अपने साथी अध्यापक के साथ प्रेम और सहयोग का व्यवहार करें।उनके विचारों का आदर करे,उनकी नींद न करें।
3. प्रधानाध्यापक के साथ संबंध-
एक अच्छा टीचर वही है जो प्रधानाध्यापक की साथ सहयोग पूर्ण व्यवहार करता है।विद्यालय में चलने वाली विभिन्न क्रियाओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में अपना योगदान करता है।
4. अभिभावको के साथ संबंध-
एक अच्छा टीचर वह है जो छात्रों के साथ-साथ उनके माता-पिता से भी मधुर संबंध बनाता है। इसके लिए उसके विद्यार्थियों को माता-पिता को समय-समय पर बालक की प्रगति से परिचित कराते रहना चाहिए। बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए विचार विमर्श करना चाहिए, अध्यापक को शिक्षक अभिभावक संघ बनाने में अधिकाधिक रुचि लेनी चाहिए।
5. समाज के साथ संबंध-
जिस समाज मे विद्यालय स्थित है। अध्यापकों को चाहिए कि वह उस समाज से भी अच्छे संबंध बनाएं इससे समाज के व्यक्ति विद्यालय की उन्नति में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।समुदाय के साथ संबंध बनाने की दृष्टि से टीचर विद्यार्थियों का सहयोग ले सकता है।
एक श्रेष्ठ वह अच्छे शिक्षक मैं शिक्षक के गुण होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उस में उपयुक्त सभी गुणों का होना आवश्यक है। जिस शिक्षक में उपयुक्त सभी गुण होंगे तो कहा जा सकता है कि वह अध्यापक कुशल और प्रभावशाली है।
अध्यापक केवल व्यक्ति का मार्गदर्शन ही नहीं करता बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के भाग्य का निर्माण करता है।

Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...