What are doing by Indian Muslim's ?
जी हां दोस्तों आज बात भारतीय मुसलमानो को लेकर की जा रही है जो की सबसे अहम मुद्दा बन चुका है ,मुद्दा इसलिए बन चुका है की आए दिन मुसलमानो को प्रताड़ित किया जाता है , भीड़ का शिकार बनाया जाता है ,कहीं धर्म यात्रा के नेम से दंगे भड़काए जाते , भेदभाव किया जाता है ,कभी दलितो को मौत का निशाना बनाया जा रहा है, ये कह कर की मुस्लिम लोग बीच में बाधा डालकर । आखिर सोचिए ये सब काम कोन करवा रहा है? इसके पीछे एक बहुत बड़ा संगठन है ,पार्टी है एक असामाजिक तत्वों की सोच है जो देश के पुर सुकून माहोल को खराब करना चाहते है । इस प्यारे से मुल्क के लिए सही नही है आने वाले दिनों में बहुत है खतरा उत्पन्न होने का डर हैं! लेकिन हम लोगो ऐसे असामाजिक तत्व जो अराजकता फैला रहे है उससे डरना नहीं है ,जागरूक रहना है ,अपने आप को संभालना है ,अपने भाइयों और बहिनों को संभालना है ,कमजोर को हौसला। देना है ,सब्र और हिम्मत से काम लेना है ,जल्दबाजी में आकर कानून को हाथ में नही लेना है , जोश में होश नही खोना है ,क्योंकि अभी पानी सर से ऊपर नहीं आया है ।अभी सब्र से काम लेना है,इंसानियत को जिंदा रखना ,भाई चारे और दोस्ती को बढ़ाना है और हिंदू मुसलमान सिख इसाई इत्तिहाद को कायम करना है।हिंदू मुस्लिम इत्तेहाद वाले प्रोग्राम चलाने होंगे । मोहब्बत को बढ़ाना होगा ,भाई चारा रिश्ते को कायम रखना होगा । नफरत की आग को नफरत से नही बुझाया जा सकता मगर नफरत की आग को प्यारो मोहब्बत से बुझाया जा सकता है। हमे वो काम करने है जो देश को ऊंची दिसा और तरकी की ले जाए ऐसे काम करने होंगे जिसे अमन कायम हो भाई चारा कायम रहे ।
आप और हम जिस शहर या गांव में रहते है वहां अपने पड़ोसी का ख्याल रखना होगा , उनके साथ अच्छा व्यवहार रखना होगा ,उनके साथ मधुर संबंध बनाने होंगे ,उनके साथ दुख सुख में खड़ा होना पड़ेगा । इस्लाम ने आज से 1400 साल पहले जो सिखाया वो काम अमली तौर पे करना होगा तभी तो ये फिटने फसादत खत्म होंगे ऐसे ही खत्म नहीं होंगे ।
अमली काम क्या करना है ?
1 दीन ए इस्लाम पर जिंदगी गुजारनी होगी
2 दीनी तालीम और दुनियावी तालीम पर गौर आ फिक्र करना होगा
3 हिंदू मुस्लिम इत्तेहाद वाले प्रोग्राम को आम करना
4 अपने ईमान को मजबूत करना होगा।
5आपस में firka प्रस्ती को खत्म करना होगा ।
6.अपने समुदाय हॉस्पिटल खोलने होंगे
7.अपने मुस्लिम समाज के कॉलेज खोलने होंगे ।
8.गरीब और मजलूम की मदद दिल खोल कर करनी होगी ।
1.अपने ईमान को मज़बूत करना होगा !
जी हां दोस्तों आज का दौर बहुत है नाज़ुक दौर है,इस पुरफितन दौर में अपने ईमान को बचाना सबसे ज़रूरी है।अगर हमारे पास ईमान नहीं तो गोया कुछ भी नही इस्लाम मजहब में दाखिल होने के लिए कालिमा ए तोहीद पढ़ते हैं,उसका मतलब ही तो ईमान है । उस कलीमे के मुताबिक अपनी जिंदगी गुजारना ।इसलिए आप और हम सबको ईमान बचाना अनिवार्य है।
ईमान का मतलब क्या है? ईमान का मतलब ये है की अल्लाह के हुकुम को मानना और हमारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीके पर जिंदगी गुजारना ।ईमान का मतलब है जो हक उसको बर हक़ कहना होगा ,जो सच है उसको सचाई बयान करनी होगी ,जो बातिल हो उस को बातिल कहना पड़ेगा ,जो आतंकवादी है उसको आतंकवादी कहना पड़ेगा ,जो अमांतदार है उसको अमांतदार कहना होगा,जालिम को जालिम कहना पड़ेगा ,मजलूम को मजलूम कहना पड़ेगा अगर ये सब आंखों देखे हाल नही कहिंगे तो हमारा ईमान खतरे में पड़ जायेगा हम लोग ईमान से निकल जायेंगे ।
जो अहले हक पर है चाहे वो कोई भी काम करता हो लेकिन शर्त ये है की वो काम सही हो हकीकी हो ,दीनी हो या दुनियावी लेकिन शरई एतबार से सही होना चाहिए ।अगर कोई काम दीनी और दुनियावी एतबार से सही नही है तो उसको गलत खुल कर कहना होगा ।अगर हम लोग नही कहींगे,अपनी ज़बान नही खोलेंगे तो हम लोग भले ही कितनी भी उस परवरदिगार की इबादत करे कोई फायदा नही , क्योंकि हम लोग ईमान से निकल चुके है ।
ईमान के तीन दर्जे या स्तर है
अगर कोई व्यक्ति गलत काम कर रहा है , तो उसको मना करने के लिए आप के पास तीन विकल्प है
पहला अगर आप हाथ से रोक सकते हो तो रोको ,अगर आप जबान से रोक सकते हो तो रोको ,अगर आप हाथ से या जबान से नही रोक सकते तो कम से कम दिल से उसे बुरा मानो । ये है ईमान के तीन दर्जे।अगर हम इन तीनो में से नही है तो समझो हम लोग ईमान से निकल चुके हैं फिर हम नाम के मुस्लमान है ।अपने ईमान को मजबूत करना होगा ।
2. दीन ए इस्लाम पर जिंदगी गुजारना
जी हां दोस्तों आज हमारे सामने ये खतरनाक हालत बद से बदतर क्यो आ रहे है कभी इसपर गौर किया ? ये हालात हमारे अपने ही कर्मों का नतीजा है इसलिए की हम लोग अपने परवरदिगार को भूल बैठे है और उसके दो अहम हुकूक है ,हम सब ने उन पर अमल किया ही नही । इस दुनिया में हालात बहुत ही सख्त आने वाले है , अल्लाह का साफ साफ हुकुम है की ईमान वालों पर में आजमाइश भेजूंगा लेकिन जो मेरे खास बंदे होंगे जो इस मुश्किल घड़ी को सब्र और हिम्मत से पार कर लेंगे लेकिन जिनका पक्का ईमान नहीं होगा वे लोग ईमान की परीक्षा से नाकाम हो जाएंगे।ये केसे हो सकता है की दुनिया में ईमान वाले बंदे हो और में उनको आजमाओ ना ये तो हो ही नही सकता ! इसलिए दुनिया के ये 14 वी सदी चल रही है कुर्बे कयामत का दौर नजदीक है ,हमें डरने और घबराने की जरूरत नहीं ! हालात अभी और सख्त से सख्त आयेंगे ,इसकी ज्यादा तफसील उलमा हजरात बताएंगे ,लेकिन ईमान वाला होगा वो कभी भी इन हालात को देख कर अपना पाला नही बदलेगा ।
जो बंदा अल्लाह के हुकुम के मुताबिक दुनिया में जिंदगी गुजरता है अल्लाह के पांचों हुक्मों को (कालिमा ए तोहिद, नमाज, रोज़ा,जकात और बैतुल्लाह शरीफ का हज) दूसरा हुकुम है हुकुकुल इबाद यानी अपने बंदों के मामलात में सही और अमंतदारी पर काम करता है । हमारे और आप के नबी हजरत मोहम्मद (स अ स) के तौर तरीके के मुताबिक जिदंगी गुजरता है यकीनन वो बंदा कामयाब है जिसे दुनिया में अपने परवरदिगार के हुकुम के अनुसार जिंदगी गुजारी।
आज हमारी जिंदगियों में सुख और चेन नही है ,हमारी रोज़ी में बरकत नहीं है , मुसलमानो का कत्ल ए आम हो रहा है ,ये सब वो नतीजा है जो हम अपने रब को भूल बैठे है जो दुनिया में जिंदगी गुजारने का तरीका था वो नबवी तरीका था पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श तरीका था इस तरीके पर जिस जिस ने अमल किया वो दुनिया में खुश हाल रहा और जिस जिस ने ये तरीका तर्क कर दिया वो नाकाम रहा और दौर ए हाजिर में फितनों का शिकार रहा ।
3.दीनी तालीम और दुनियावी तालीम पर तवज्जो देना
जी हां दोस्तों आज का दौर बहुत ही नाजुक दौर है,ये दौर शिक्षा का दौर है , जिसमे हम मुसलमानो के लिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है ,अगर हम लोग शिक्षा हासिल नहीं करेंगे तो हमारा जीवन अधूरा है ,फिर हम उस अंधे व्यक्ति की तरह भटकते रहेंगे जिनकी बीनाई जा चुकी होगी वही स्तिथि हमारी न बन जाए की शिक्षा के बिना उजाला कहां होने वाला है ,दोस्तो आज के दौर में हमारी स्तिथि यहीं है की हम लोग दीनी तालीम और दुनियावी तालीम में सभी कॉम और समुदाय में पीछे है तो हम लोग ही है । दीनी तालीम और दुनियावी तालीम में पीछे रहने पर आज हमारा ये हाल हो चुका है की किसी सरकारी ऑफिस में हमारा अधिकारी तो दूर की बात लेकिन चपरासी भी कहीं तक नजर नही आता है । इक्के दुक्के विभागो में कोई मुस्लमान बंदा नजर आता है वो बस उतना है जितना सब्जी में नमक के मामूली बराबर! बस यही स्तिथि!लेकीन साथियों जरा गौर करने की बात है की अपने आप के अंदर झांको की हम लोग कोन से किनारे पर खड़े है ।
आज जिनके पास शिक्षा है उनके क्या हाल है ? आप पता लगाओ ! भले ही उनके पास दुनिया की तालीम हैं। उनके पास एक तालीम है अपने पास दोनो तालिम्स है फिर भी हम लोग पीछे क्यो? क्योंकि हमने कभी तालीम पर अपना ध्यान फोकस किया है नही ।हम में अपना ध्यान दूसरे कामों में दिया , फिजुल खर्ची में दिया , सोशल मीडिया पर facbool, इंस्टाग्राम, वाट्सअप पर ध्यान दिया लेकिन दुनिया का सबसे important knowledge, शिक्षा जो मनुष्य का हाथियार है उस पर कभी ध्यान दिया ही नहीं।
हम लोगों को चाहिए की अपने बच्चो को और बच्चियों को अपने मदरसे में एक ही छत के नीचे दुनिया और दीन की तालीम दिलाएं। मकतब की तालीम दिलान मां बाप के जिम्मे है अगर वालीदैन ने अपनी ओलाद को बेसिक शिक्षा तालीम नही दिलाई तो वो बच्चे कयामत में आप को जहन्नम की तरफ ले जायेंगे ।इसलिए अपनी नस्लों को दीन की तालीम और दुनिया की तालीम जरूर दिलाए साथ साथ में अच्छे लक्षण और अदब का तरीका भी सिखाए ताकि वो बच्चा बड़ा हो कर समाज का आदर्श रोल मॉडल बन सके ।
4.आपस में फिरका परस्ती को खतम करना होगा !
जी हां दोस्तों आज के हालात को देखते हुए हमे अपने आप को firka परस्ती को खत्म करना होगा।जो भी समाज का या सोसाइटी का काम है उसको firka प्रस्ती से ऊपर उठ कर काम करना होगा ,हमारे अंदरूनी मसाइल को छोड़ना होगा , हमे एक दुसरे को गले लगा a होगा ,एक दूसरे को मोहब्बत की निगाह से देखना होगा ,अपने मसाइल को अपने तक ही सीमित रखना होगा ,आप को जालिमों के खिलाफ लड़ना होगा ,सच और इंसाफ का खुलंकर साथ देना होगा ,हक को हक और बातिल को बातिल कहना होगा ,ये सब काम तभी होगा जब हम लोग फिरका परस्ती ऊपर उठ कर गौर ओ फिक्र करेंगे।
हमे क्या करना चाहिए?
आज के इस दौर में हमे अपने ईमान को मजबूत करना होगा , बगैर ईमान के हम कुछ भी नही कर सकते है ,अपनी जिंदगी तब तक सलामत है जब तक हमारे पास ईमान की ताकत जिंदा है , अगर हमारे दिलों में ईमान नहीं गोया कुछ भी नही तो सबसे पहले ईमान को मजबूत बनाए ,ईमान की परिभाषा मेने पहले ही समझा दी हैं।उसके बाद दीन ए इस्लाम पर जिंदगी गुजारनी होगी जो के बिना दीन के इंसान का कोई महत्व नहीं है इसलिए अपने आप को अपने परवरदिगार के हुक्मो के मुताबिक जिंदगी गुजारे।
उसके बाद खिदमत ए खल्क में अपना वक्त लगाएं।गरीबों की खिदमत करे और मजलूमों की हर सम्भव मदद करे और बेसहारों की मदद करे और एक दूसरे भाई के साथ नरमी के साथ पेश आए , पड़ोसियों का अच्छी तरह ख्याल रखें चाहे आप का पड़ोसी मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम कोई भी हो उनके साथ अच्छा मामलात रखे ।अपनी दीनी तालीम और दुनियावी तालीम पर ध्यान दें और अपने बच्चो को खास कर तालीम दिलाएं और उन पर पैनी नजर रखे । उनके हमेशा राब्ता रखें और नेक काम करते रहे ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें