जेल भरो आंदोलन by मौलाना तौकीर रज़ा खां साहब

      जैल भरो आन्दोलन अभियान !

जैल भरो आंदोलन से सरकार पर कितना असर!

अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश राज्य के जिले बरेली से सय्यद तौकीर रज़ा खां साहब ने जेल भरो आंदोलन अभियान की शुरुआत की थी जिसका मकसद था, हमारे मुल्क हिंदुस्तान के खराब होते हालत को देख कर बहुत ही आहत हुए हालांकि इस वक्त मैं हर कोई समुदाय चाहे वो मुस्लिम हो या गैर मुस्लिम समुदाय के लोग हो  जितनी भी मुस्लिम तंजीमे चाहे जमीयत उलमा ए हिंद हो , मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हो या कोई और मुस्लिम तंजीम है ,जो सेकुलर दिमाग रखता हो वो हर कोई परेशान है । आज के मौजूदा दौर में जो सरकार सत्ता में है मुसलमानो के खिलाफ नए नए मुद्दे बना कर पेश करती है और मुसलमानो को आजमाती है की मुसलमान हमारी विचार धारा को किस हद तक मानता है ।
सरकार मुसलमानो के विरोध में ही कानून क्यों ला रही है ?और समुदाय के विरोध में कानून क्यों नही ला रही है ? बीजेपी सरकार का क्या उद्देश्य है ?
मौलाना तौकीर रज़ा साहब ने जो जेल भरो आंदोलन जुम्मे के दिन जो आंदोलन किया इससे उनके साथ हजारों अनुयायी बाढ़ की तरह गली मोहल्लों में बवंडर की तरह गूंज से भर गई जिसे यूपी सरकार ने पुलिस फ़ोर्स को लगा कर जेल जाने से हजारों लोगों को रोकने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी । 
तौकीर रज़ा साहब के अहम मुद्दे ?
उनका कहना था की जिस तरह सरकार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ व्यवहार कर रही है वह बहुत खतरनाक है , मौलाना ने ये भी कहां की हम मुसलमान इस सरकार के फैसलों में खामोश रहे इसलिए सरकार हमारे खिलाफ नए नए कानून और बिल ला रही है । ये सरकार मुसलमानो के खिलाफ शरीयत में छेड़ छाड़ कर रही है जो मुसलमानो को यकीनन कबूल नहीं है ।
1.सरकार मस्जिदों को तोड़ कर मंदिर में परिवर्तन कर रही है । देश की अदालतें सरकार के दबाव में आकर आस्था के आधार पर फैसले दे रही है ,जो हमे कत्तई मंजूर नहीं है ।
बाबरी मस्ज़िद का फैसला आया हम ने उस फैसले को माना मगर वो फैसला टाइटल शूट के आधार पर नही था बल्कि आस्था के आधार पर दिया ,उसमे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने ये स्वीकार किया की मस्जिद मंदिर तोड़कर नही बनाई गई है बल्कि बहुमत को आस्था के आधार पर फैसला दिया मुसलमान अमन पसंद खामोश रहा ,लेकिन बाबरी मस्जिद के फैसले पर चुप रहने से हमारे खिलाफ आए दिन आस्था के आधार पर फैसले लागू हो रहे है जो को सरकार जुल्म व जब्बर कर रही है ।
2.मुफ्ती सलमान अजहरी जो इस्लामिक स्कॉलर है उसको एक शायरी बोलने से गिरफ्तार कर दिया, जिससे सरकार आए दिन इससे पूर्व भी मुस्लिम उलेमाओं को गिरफ्तार कर चुकी है ,जो को हमारे लिए चिंता का विषय है ।
कई उलेमा आज भी जेलो में बंद है जिनके लिए जमीयत उलमा ए हिंद पुरजोर तरीके से अदालत में केस लड़ रही है और कई उलेमाओं को आजाद भी करवाया है ,चाहे वो किसी भी फिरके के आलिम हो ।
3. उनका तीसरा मुद्दा था , गैर कानूनी तौर से मदरसो और उनके घरों पर बुलडोजर चलाना ये संविधान के खिलाफ है । उनका कहना था की जिस व्यक्ति ने जुर्म किया है उसको सजा देने का काम अदालत का है न की सरकार का है उस अकेले व्यक्ति की सजा पूरे परिवार के लोगों की सामूहिक संपत्ति पर बुलडोजर चलाकर धवस्त कर देना ये कोनसा कानून है ।
4. उनका कहना है को सरकार मुस्लामनों के खिलाफ तरह तरह के कानून ला रही ,सरकार ये सोच के ला रही है की मुस्लिम लोग खामोश है । ये खामोशी कल सरकार के लिए  शायद भारी पड़ जायेगी जिससे इस देश को किसी प्रकार का नुकसान न झेलना पड़ा ,ये सोच कर अमन पसंद लोग खामोश बैठे है ।












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