5 सितम्बर शिक्षक दिवस

जी हाँ दोस्तों आज इस शिक्षक दिवस के मोके पर कुछ अपनी बातचीत रखना चाहता हूँ, शिक्षक दिवस प्रती वर्ष 5 सितम्बर को मनाया जाता है, यह दिवस डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्म के उपलक्ष में मनाया जाता है, सर्वपल्ली भारत के दूसरे राष्ट्रपति भी.रहे।उन्होने अपना आदर्श जीवन एक शिक्षक के रूप में स्वीकार किया और उन्हें पता भी था शिक्षा के बिना. व्यक्ति का विकास नहीं होता ।अगर व्यक्ति का. विकास नही. होगा तो देश का.भी विकास संभव नही. है।,देश.वही पिछड़ा हुआ हैं जिस देश के अंदर शिक्षा की ओर शिक्षा प्रणाली की.कमी होगी ।तो यकीनन वो देश गरीब गरीबी की स्थिति मैं रहेगा।
शिक्षक जीवन को कैसे जिया जाए?
एक.शिक्षक वह.जो उच्च सकारात्मक. और बोधात्मक हो.और सही.राह.दिखाने वाला हो।शिक्षक. के अन्दर सादगी और उच्च विचारों का प्रवाह होना चाहिए ।शिक्षक जीवन अपने अन्दर बिना लालच किए साधारण रहकर प्रत्येक बच्चे के अंदर मोजूद ज्ञान. को उडेलने का.काम करता ह

 दोस्तों नमस्कार आज बाद शिक्षक दिवस को लेकर की जा रही है क्योंकि आज का दिन शिक्षक दिवस डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था उनकी याद में यह दिन एक विशेष शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। तो मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं ।जी हां आज का दिन हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी भारतीय परंपरा रही है भारतीय भारतीय जो रीति रिवाज चला आ रहा है की आए दिन हम किसी महान पुरुष या विद्वान का जन्म दिवस किसी न किसी रूप में मनाते हैं। उनका स्मरण भी करते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उतारने का भरपूर प्रयास करते हैं। जैसा कि आपको मालूम है कि आज का दिन हमारे लिए यानी कि गुरु और शिष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है ।भारत जैसे विविधता के धनी और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में यह जो गुरु और शिष्य की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। पुराने जमाने में शिक्षा से गुरु का बहुत मान सम्मान अदब व अहतराम करते थे।
 आज विशेष बात डॉक्टर सर्वपल्ली को लेकर की जाएगी क्योंकि उनका आज ही के दिन जन्म हुआ था यानी 5 सितंबर 1888 को जन्मे थे । वह अपने आप को शिक्षक  के रूप में उभरते देखना चाहते थे क्योंकि उन्हें तो पता था की शिक्षक एक हथियार है और श
 शिक्षा समाज का आधार है जिस तरह मनुष्य की जिस तरह मनुष्य की रीड की हड्डी उसके शरीर का आधार है ।इसी तरह मनुष्य का आधार  उनकी अपनी शिक्षा है ।वह शिक्षा कैसी होनी चाहिए जिससे उस व्यक्ति का व्यक्तित्व निखर कर बाहर आ सके ।जो देश के लिए और समाज के लिए काम आ सके ।शिक्षा सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान पर आधारित न हो बल्कि व्यवहारिक और बोधात्मक ,सकारात्मक सोच और अनुभवजन्य शिक्षा हो ,जिसे व्यक्ति का व्यक्तित्व निखर कर बाहर आ सके और उस व्यक्ति का व्यक्तित्व उभर सके जिसे उस व्यक्ति के अंदर सोच व्यवहार ,लक्षण ,सत्य ,ईमानदारी ,साहस आदि गुणों का विकास हो सके यह डॉक्टर सर्वपल्ली राधा कृष्ण की मंशा थी उन्होंने देश की स्थिति को गहरी तरह से जांचा और परखा था की भारत के अंदर जनसंख्या बहुत है और क्षेत्रफल बहुत है। मगर विकास की दृष्टि से बिछड़ा हुआ है ।इसका मुख्य कारण है की देश के अंदर शिक्षा प्रणाली की सख्त कमी है ।जिसके परिणाम स्वरूप देश के इस की स्थिति काफी ठीक नहीं है, जो देश विकसित है उनके अंदर शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा है। वह देश यकीनन विकसित है यानी कि प्रगति के पथ पर तेजी के साथ आगे बढ़ रहा हैं ।लेकिन हमारा भारत अभी भी काफी पीछे चल रहा है तो इसका सीधा सा मतलब है कि भारत के अंदर शिक्षा की बहुत ही कमी पाई जाती है। इस कमी को दूर करने के लिए शिक्षा व्यवस्था को हमें सुदृढ़ सू व्यस्थित 
अच्छी प्रणाली बनानी होगी।
 आज भारत के अंदर 2 तरह से शिक्षा प्रणाली की व्यवस्था दी गई है। एक सरकारी स्कूलों में शिक्षा दी जाती है दूसरा निजी विद्यालयों में शिक्षा दी जाती है जिनमें दिन और रात का अंतर है जो। सरकारी विद्यालय है वहां पर शिक्षा का हाल बहुत ही बुरा है सरकारी विद्यालय में पहली बार तो पूरा स्टाफ नहीं मिलता है या स्टाफ समय पर आते नहीं हैं या उस स्टाफ को सरकारी ड्यूटी में लगा देते हैं फिर आप लोग समय पर.नहीं आते है  तो उन बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा दूसरी बात कर रहे हम प्राइवेट विद्यालयों की प्राइवेट विद्यालयों में स्टॉप होता है और उन बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान और अच्छे संस्कार अच्छी पढ़ाई की तालीम दी जाती है यहां पर हर मां बाप पैसा खर्च करते है।

अगर सरकारी विध्यालयो मैं पहली बात पूरा स्टाफ भी नही है फिर हम  आगे बढ़ने का नाम कैसे ले पाएंगे आज सरकारी स्कूल मैं गरीब आदमी का बच्चा पढाई करता है, बाकी वाले सब सरकारी कर्मचारियों के बच्चे.निजी स्कूलों मैं जाते है और राजनेताओं के बच्चे बडी बडी स्कूल और संस्थानो मैं पढाई करने जाते है, फिर सरकारी स्कूल का ख्याल कौन रखेगा।इससे परिणाम यह निकलता है कि गरीब गरीब ही रहता है और अमीर अमीर बनता जा रहा है।अगर सरकारी स्कूल पर गाँव के जागरूक लोगों का उन पर.नियंत्रण नही होगा तो भला वो अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकते हैं।
मैं आज यहाँ से स्पष्ट बात त कहना चाहता हूँ कि सरकार अपने स्कूलों को सुधारना चाहती है तो उस सरकारी स्कूलों में पूरा स्टाफ लगवाए और स्कूल के अन्दर काम आने वाले संसाधनों पर प्रबंधन करें।। 

 आज अपन बातचीत कर रहेे हैं शिक्षक दिवस पर जो हमें यह समझना चाहिए  की  हमारा मुस्तकबििल सुधारनेे वाला शिक्षक गुरु, उस्ताद, मास्टर, मौलवी कैसाा होना चाहिए जो  हमें  सही राह बताएं । जिसे  हम  अपने  मंजिल  तय कर जाए। मैं आपको बताना चाहता हूं  की  पुराने समय में  और आज के समय में  शिक्षा  के अंदर  बहुत अंतर आ गया है ,क्योंकि  पुराने जमाने के लोग  गुरु को  भगवान के रूप में मानते थे और  उनके बताए मार्ग पर  चलते थे । वह पूर्ण रूप से  गुरु पर  निर्भर थे । उस जमाने में  पढ़ाई का माहौल बिल्कुल कम था लोग जागरूक नहीं थे।  नौकरियां नहीं थी । लेकिन पढाई की  थोड़ी बहुत जरूरत थी।  जिनकी पूर्ति उस इलाके की  गुरु  पूरी कर लेता था  जिनसे  उनके अपने शिष्य  और  गांव के लोग  कस्बे या नगर के लोग उनसे डरते थे । इसलिए  उनका  अदब व.अहतराम  भी करते थे । उस जमाने में  गुरु का  बहुत बड़ा  मान सम्मान  होता था  । वह सिद्धांत का  पक्का और सच्चा था । उनके पास  असली तालीम थी  । उन्होंने  अपने जीवन में  नए हुनर से संबंधित  शिक्षा दी।  घर का काम हो या खेती का काम हो  या कोई और काम हो।  ऐसे  व्यवहारिक  जीवन को  तालीम से जोड़कर  सच्ची  और अच्छी शिक्षा दें।  इसलिए  पुराने जमाने में  लोग  गुरु की  इज्जत करते थे। हकीकत बात यह है।


 आज के दौर में आधुनिक गुरुजनों की बात  की जाए तो बहुत ही सख्त मामला है,इसलिए के  मौजूदा हाल में शिक्षक भी दो तरह सेे तालीम देते हैं एक तो वह जो सरकारी स्कूलोंं  मे शिक्षा देते हैं दूसरे  वह है  जो निजी विद्यालयों में शिक्षा देते हैं। लेकिन  काम  दोनों का  एक ही है शिक्षा देना  और  अपने शिष्यों को  सही राह दिखाना  ताके  वह अपनी मंजिल पर आसानी से  पहुंच सके। मंजिल तक पहुंचने के लिए जो कठिनााइयाां आए  और जो बाधाएं हैं उनको  सुलझाए और उन्हें  अपने लक्ष्य तक जाने के लिए  प्रेरित करें।  ताकि  उस गुरु के द्वारा  बताए हुए मार्ग पर चलें तो यकीनन वह शिष्य  सफल हो सकता है ।

 दोस्तों बात बहुत सत्य ,है लेकिन आज शिक्षकों के कार्यशैली पर ध्यान दिया जाए तो दिन और रात का अंतर है। यानी कि सरकारी विद्यालय में पढ़ाने वाला टीचर गुरु जो बच्चों का सपना साकार करने आता है । न जाने वह कैसे-कैसे कामों में सरकारी कामों में कागजों में, कागजी पूर्ति करने में व्यस्त हो जाता है और जो देश का भविष्य उनके हाथ में होता है ,वे हाथ से निकल जाता है अध्यापक उन सरकारी कागजों में व्यस्त रह कर अपना मुख्य उद्देश्य भूल बैठता है । फिर बच्चों पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पाता है। दूसरी तरफ वे शिक्षक जो प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ाते हैं उनको सैलरी बहुत कम मिलती है 15 से 20000 लगभग। उनके पास समय निश्चित होता है और उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों पर पाठ्यक्रम पूरा करवाना, उनको मार्गदर्शन देना ,उनको सही रास्ते पर ले कर जाना। फिर अंतर कहां आता है स्कूल वह भी है स्कूल यह भी है अध्यापक वह भी है अध्यापक  यह भी है सरकारी अध्यापक को 40 से 50000 के बीच तनख्वाह मिलती है और प्राइवेट अध्यापक को तनख्वाह कम से कम 10 से 20000 के बीच मिलती है । लेकिन सिस्टम उल्टा हैं   जो ज्यादा मेहनत करता है उसको कम मिलता है जो मेहनत कम करता है उसको ज्यादा मिलता है ।सरकारी अध्यापक अपने बच्चों पर सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों पर ध्यान कम देता है। दूसरे कामों में ज्यादा व्यस्त रहता है । लेकिन इसके उलट निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे उनका भविष्य ऊंचाइयों को छूता हुआ नजर आता है क्योंकि उनके अंदर अनुशासन संस्कार शिक्षा कंपटीशन कई तरह की शिक्षाएं दी जाती है ताकि वे छात्र व्यक्तित्व के रूप में उभर कर बाहर आ सकें।

 आज आज सरकार शिक्षकों कि  कौनसी क्वालिटी के अध्यापकों को सम्मानित करते हैं प्रतिवर्ष 5 सितंबर को, उस स्कूल के परिणाम को देखकर या बच्चों के अंदर अनुशासन को देखकर या स्कूल के कागज समय पर पूरा करने में या स्कूल समय पर खोलने में उसके बावजूद अच्छी बात है प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाए ताकि और अच्छे से समाज की और बच्चों का भविष्य रोशन कर सकें ।सरकारी स्कूलों के बावजूद प्राइवेट जो निजी विद्यालय उनके टीचर्स भी दिन रात मेहनत करते हैं और बच्चों को किताबी ज्ञान उसके साथ व्यवहारिक ज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान को जोड़कर सिखाते हैं ।और वह बच्चे समाज और देश के आईना बनते हैं तो फिर सरकार प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापकों को सम्मानित क्यों नहीं करती बच्चे सरकार के लिए चाहे प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले या सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे एक समान है फिर क्यों सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले पढ़ाने वाले टीचर तनख्वा ज्यादा देते हैं। फिर भी अध्यापक वे अध्यापक इतनी मेहनत ने करते जितने प्राइवेट स्कूल के टीचर्स मेहनत करते हैं। वह चाहते हैं कि कि हमारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा अच्छी लाइन पकड़ जाए अच्छी मेहनत करें मार्गदर्शन सही समय पर मिलता रहे ताकि देश और समाज के नाम पर काम आ सके।

धन्यवाद दोस्तोँ।



ओसर एक सामाजिक कुप्रथा है।

दोस्तो आज बात एक ऐसी सामाजिक कुप्रथा  मैं आपसे बात करने जा रहा हूं एक ऐसी सामाजिक रीति जिन्हें औसर या मृत्यु भोज के नाम से जाना जाता है। यह रिती हर मजहब वह हर समाज में प्रचलित है ,लेकिन मैं आज मुस्लिम समाज में इस औसर जैसी प्रथा के बारे में बात करना करने जा रहा हूं जिसका  का प्रचलन मुस्लिम समाज में बहुत अधिक पाया जाता है इस प्रथा में दिक्कत  वाली बात यह है कि किसी के घर कोई शख्स या बुजुर्ग इंसान का इंतकाल हो जाए तो उसके घर पर बड़े स्तर पर भोज की तैयार करते हैं ,और बड़ी-बड़ी दावते देते हैं,तो इस बात की  हमारा इस्लाम मजहब यह ऐसा काम करने की इजाजत नहीं देता है , क्योंकि इस्लाम धर्म के मानने वाले प्रत्येक आदमी माल और पैसे के हिसाब से एक समान नहीं है कोई गरीब है कोई मध्यम वर्ग का है कोई अमीर आदमी है तो अपनी अपनी गुंजाइश के अनुसार खर्च करने की हिदायत देता है। इस्लाम मैं यह जो ओसर जैसी प्रथा है इस प्रथा में गरीब आदमी चाहे मध्यमवर्ग का आदमी कोई भी क्यों ना हो सबको ओसर यानी मृत्यु भोज करना और बड़े स्तर पर समाज को दावत देना और सात पकवान बनाना फिर फिर ज्यादा पब्लिक को खाना खिलाना यह सब गलत काम है। इस्लाम मजहब किसी को मजबूर नहीं करता हां हो सके तो गरीब आदमियों को मुक्तसर से दावत देकर सवाबे दारेन  हासिल करें। अगर दीन इस्लाम में देखा जाए तो औसर जैसी प्रथा का कोई महत्व नहीं है ,लेकिन आज समाज के अंदर  एक ऐसी रिती अपना मुकाम बना चुकी है की चाहे गरीब हो चाहे मध्यमवर्ग का हो उनको यह काम अमीर आदमी के बराबर करना चाहिए इस काम के अंदर कम से कम 4 से 5 लाख. तक खर्च हो जाते हैं और दूसरी जो रिती है  शादी के दिन  बड़े बड़े स्तर पर उस पर हजारों लाखों रुपए खर्च होते हैं मेरे कहने का मतलब इतना है की आज की दिनांक में हर आदमी पैसे वाला नहीं होता ,कोई गरीब है, लेकिन उसको आप मजबूर मत करें हो सके तो उसकी आप लोग सहायता करें इसका सवाब इसका जवाब आप लोगों को मिलेगा क्योंकि अल्लाह की राह में खर्च करना और गरीब लोगों की सहायता करना यह अल्लाह को बहुत बड़ा पसंद है । अल्लाह को सखावत पसंद है।अल्लाह उसको  दुनिया मैं. खूब रिज्क  देता है। बात इस नजरिए से की जा रही है आज हमारे समाज में शिक्षा पर और अच्छी जगह पर हम लोग ₹1 भी खर्च करना नहीं चाहते हैं ,मगर शादी ब्याह के  अवसर जैसी रिती हो या कोई और फंक्शन हो या कोई जन्मतिथि की पार्टी हो उस पर हम लोग लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं। वह लाखों रुपए हम चाहे सेठों से ब्याज लाना है चाहे जमीन बेच कर लाए चाहे.जेवर गिरवी रख कर लाए मगर खरच फालतू कामों में करेंगे लेकिन हमें जिस रास्ते पर जाना है इल्रमे दीन. इलमे दुनिया उस रास्ते पर अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे ।जब बच्चा दुनिया में आता है 6 से 7 साल का होता है उसके बाद उस बच्चे को मदरसे और स्कूल मैं भेजा जाता है उसके बाद वह बच्चा मदरसे की तालीम धीरे धीरे सीखता है ।साथ-साथ में दुनिया की तालीम भी सीखता है ।जब उस बच्चे को बड़े स्तर पर पढ़ाई करने के लिए अधिक रुपयों की जरूरत पड़ती है तब और उस के मां.बाप के पास.पैसे  नहीं होते हैं क्योंकि उन्होंने अपने रुपए सोच समझकर खर्च नहीं किये ।  उन्होंने रुपए फालतू के कामों में सबसे ज्यादा खर्च किए अच्छे कामों में कम खर्च किए लेकिन जहां हमें खर्च करने हैं वह हम खर्च कर नहीं पाए जहां खर्च नहीं करने थे वह हमने. खर्च नहीं.कीये। यह हमारी सबसे बड़ी  गलत आदत है। लेकिन आज का वक्त देखा जाए तो बहुत ही नाजुक है क्योंकि इस वक्त में दुनिया को समझना बहुत जरूरी है ।आज दुनिया के अंदर सबसे ज्यादा आधुनिक टेक्नोलॉजी से बनी हुई चीजें और उनकी सुविधाएं हमें मिल रही है। बाकी का काम नेटवर्क पर ऑनलाइन किया जा रहा है। आजकल रुपयों का काम लेन-देन का हिसाब किताब सारा ऑनलाइन सिस्टम से हो रहा है। हम लोग अभी भी बेवकूफी की .तरह कतारों में खड़े हैं ,क्योंकि हमारे पास शिक्षा नहीं है। हमने शिक्षा को गहराई से समझा भी नहीं है अगर शिक्षा की अहमियत मालूम होती तो हम आज तक पिछड़े हुए नहीं रहते ।इस मैसेज से मैं यह आप सब को पैगाम देना चाहता हूं कई हमें हमारे घर में कोई भी छोटा मोटा प्रोग्राम हो हमें सोच समझकर खर्च करना होगा ।ताकि उनसे हमारा रुपया सही जगह लग जाए और बचे हुए रुपए हम अपने बच्चों के पालन पोषण और तालीम पर खर्च कर सकें जिसे समाज के नए हीरे बन सके और और वही देश और समाज का नाम रोशन कर सकें।


हमारा भारत और हमारे राष्ट्रीय प्रतीक

जी हाँ दोस्तों आज में आप को महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ, आप श्रीमान जी से निवेदन है कि इस अध्याय को जरूर देखें और दूसरे साथियों तो भी पहूंचाए, भारत के राष्ट्रीय प्रतीक हर किसी को याद नहीं होते हैं, तो आप ऐसी रोचक जानकारी को जरूर पढ़ें। 

राष्ट्रीय प्रतीक और मुख्य कारक 
1. राष्ट्रीय ध्वज:- तिरंगा 

2.राष्ट्रीय गान :- जन गण मन

3.राष्ट्रीय गीत:- वंदेमातरम 

4.राष्ट्रीय खेल :- होकी 

5.राष्ट्रीय फल :- आम 

6.राष्ट्रीय वृक्ष:- बरगद 

7.राष्ट्रीय पशु;- बाघ 🐯 

8.राष्ट्रीय चिन्ह:- अशोक स्तंभ

9.राष्ट्रीय वाक्य:- सत्य मेव जयते

10.राष्ट्रीय पुष्प:- कमल का फूल

11.राष्ट्रीय पक्षी:- मयूर

12.राष्ट्रीय पंचाग:- शक संवत

13.राष्ट्रीय मुद्रा💱:- रूपया 

14.राष्ट्रीय मिष्ठान :- जलेबी 

15.राष्ट्रीय जलील जीव :- डाल्फिन  मछली🐠🐋🐟

16.राष्ट्रीय 🚣नदी :- गंगा 

17.राष्ट्रीय सूचना पत्र :- श्वेत पत्र

18.राष्ट्रीय योजना:- पंचवर्षीय योजना

19.राष्ट्रीयता :- 🇮🇳👳भारतीय, इण्डियन

20.राष्ट्रीय पकवान:- खिचड़ी

21.राष्ट्रीय पर्व:- गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता          दिवस, गांधी जयंती

22.राष्ट्रीय विदेश नीति:- गुट निरपेक्ष

23.राष्ट्रीय पुरस्कार:-भारत रत्न

24.राष्ट्रीय पिता:- महात्मा गांधी

25.राष्ट्रीय भाषा:- हिन्दी

26.राष्ट्रीय लिपि:- देवनागरी लिपि

27.राष्ट्रीय नारा :- श्रमेव जयते

28.राष्ट्रीय ध्वज गीत :- हिन्द रंग का प्यारा        झण्डा


दोस्तों तो ये थी महत्वपूर्ण जानकारी  आप इस को जरूर आगे से आगे भेजैं  दूसरे समुहों में धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया दोस्तों। 

जय हिंद जय भारत।। 

Help line 🔢number, सहायतार्थ नम्बर

दोस्तों नमस्कार आज में आप के सामने एक नया अधिगम बिंदु लेकर हाज़िर हुआ हुं, आप लोग इन नंबरों को जरूर देखें और आगे भी शैयर करें। ये नम्बर हमारी बहुत सहायता करते हैं, हमारे जीवन में इन नम्बरों की विशेष महत्व है, समय समय जरूरत पड़ने पर हम इन नम्बरों का उपयोग प्रत्यक्ष रूप से करते हैं। 

1. पुलिस 👮सेवा :- 100

2.अग्नि सेवा:-       101

3.एम्बूलैस सेवा :-108 /102 

4.जननी एक्सप्रेस:- 104 

5.यातायात पुलिस:- 103

6.आपदा प्रबंधन :-108

7.इमरजंसी नबंर :- 112

8.रेलवे पूछताछ:- 139

9.वीमैन हेल्पलाइन नंबर:- 181

10.भ्रष्टाचार विरोधी:- 1031

11.हाईवे हेल्पलाइन नंबर:- 1033

12.रेलवे दुर्घटना नंबर:- 1072

13.सड़क दुर्घटना नम्बर:-1073

14.CM हेल्पलाइन नंबर:- 1076

15.वीमेन पावर लाईन:- 1090


16.महीला हेल्पलाइन नंबर:- 1091

17.पृथ्वी भूकंप:- 1092

18.चिल्ड्रेन हेल्पलाइन नंबर:- 1098 


19.किसान काल  नंबर:- 1551

20.बल्डबैंक नबंर;- 9480044444


धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया।


Population is Controlle जनसंख्या नियंत्रण

जी हाँ आज बात जनसंख्या नियंत्रण को लेकर की जाए, क्योंकि जब हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर लाल किले की प्राचीर से कर ही लिया है तो हमें भी  उस विषय पर जरुर चर्चा करनी चाहिए। कि जनसंख्या क्यों बढ रही है?  इस के क्या मायने हैं?  देश के लिए कितना संकट है?  इन परिस्थितियों के बारे में हमें ग़ौर करना भी चाहिए। 

ज़ाहिर सी बात है कि जनसंख्या अगर बढ रही है तो हमारे पास जो उपलब्ध संसाधन है, वो भी कम हो जाएंगे, और जो हमारा खज़ाना है वो भी धीरे धीरे घटता चला जाएगा, खजाने का मतलब ये है कि भुमि के अन्दर से प्राप्त होने वाली वस्तुएँ तेजी से घटती जा रही है, क्योंकि जनसंख्या तेजी से बढ रही है, उन संसाधनों की समाज के प्रत्येक सदस्य को प्राप्त नहीं हो रही है, तो इसका मतलब ये बात उचित है कि जनसंख्या नियंत्रण होना चाहिए, वैसे भी जनसंख्या नियंत्रण हो रहा है और लोग खुद जागरूक हो रहे हैं ,। लोग खुद देश और समाज की परिस्थितियों को देख कर ही जनसंख्या नियंत्रण को अपने वश में कर रहे हैं। 2014 से पहले की सरकारों ने देश के अन्दर समाज को जागरूक किया और सार्वजनिक स्थानो पर स्लोगन ( नारे)  जो समाज को जागृत करे ऐसे नारे लिखवाए और प्रचार प्रसार भी किया गया। तो यकीनन समाज के अन्दर काफी हद तक जागरुकता आई है इस में कोई शक की बात नहीं है , जहाँ पर ज्यादा शिक्षित लोग है, वहाँ पर जनसंख्या को लेकर सोच समझ कर कदम उठाया गया है। हाँ ये भी बात सही है कि जहाँ पर या जिस समाज में शिक्षा की कमी हो वहाँ पर हालात काफी नाजुक है। 
भारत विश्व🌏 में जनसंख्या के हिसाब से दूसरे नंबर पर है, पहला नबंर चाईना का है  । तो चाईना में जनसंख्या नियंत्रण पर सख्त कानून लागू भी और वहाँ की आबादी भी काफी भारत से कयी गुना शिक्षित और जागरूक है, तो उनहोंने इस कदम को उचित ठहराया है। जब भारत की बात करें तो, भारत काफी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है और लोगों के अन्दर कुछ हद तक जागरूकता की  कमी भी है। अगर सरकार जनसंख्या नियंत्रण पर संसद में कानून लाती है और अगर कानून पास भी हो जाता है और हो भी जाएगा, कोई शक की बात नहीं है। मगर लोग कितने उस कानून के मुताबिक चलने की हिमायत करेंगे, ये बात कानून के बाद की है। 

आंकड़े ये बता रहे हैं कि 2030 तक भारत की जनसंख्या चाईना को भी पार कर देगी। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर पर इस बात का जिक्र किया कि हमारे देश की जनसंख्या लगातार तेजी से बढ रही है, इस बात की हमें सख्त चिंता है, एक तबका जो जागरूक है वो जनसंख्या को नियंत्रण में लेकर चल रहा है और दूसरा तबका जो अनपढ़ और गरीब तबका है जो जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। उनका इशारा किसी विशेष समाज को लेकर था, अच्छी बात ये है कि उन्होंने उस समाज का नाम नहीं लिया। जब देश के अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर लाल किले की प्राचीर से सम्बोधन दिया था कि जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और इस के जिम्मेदार मुस्लिम समाज है। 2021 तक भारत की जनसंख्या 132 करोड़ हो जाएगी। 
अच्छी बात तो ये है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जरूर बात कही है मगर  आज सबसे ज्यादा यूवा आबादी वाला देश भारत  है, उन यूवाओ के लिए रोजगार को लेकर कोई बात नहीं की, ये भी अच्छी बात है शायद। 
भारत में महीलाएं जो बच्चों को जन्म देती है उनका हम कुछ जिक्र करते हैं धर्म के अनुसार, बाद में कुछ राज्यों की स्थिति के बारे में जिक्र करेंगे। 
1955 से लेकर यानि 2005 तक का जिक्र 

हिन्दू धर्म में प्रति महिला बच्चे को जन्म देती है उस का रेस्कयू 
2.59  जो कि अब 1.3 पर आ  गया है। 
मुस्लिम मे 3.40 था जो कि अब 2.62 पर आ गया है। 
ईसाई धर्म में 2.4 था
क्रिश्चियन में 1.95 था 
बुध्दिष्ट में 2.25 था। 

अब राज्यों की स्थिति 
बिहार राज्य में प्रति महिला 2.5 यानि ढाई बच्चे पैदा करती है  
गुजरात में 1.9  बच्चे महिला पैदा करती है। मध्यप्रदेश में 2.0 है। 
जम्मू कश्मीर में जो मुस्लिम बहुल आबादी वाला राज्य है वहाँ पर 1.5  है जो कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। 


भारत में यूवाओ की आबादी बढ रही है और प्रधानमंत्री द्वारा बेरोजगारी को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया, भारत में अगर आत्महत्या या खुदकुशी होती है तो उस में दो वर्ग निकल कर सामने आते है वो है- बेरोजगार यूवा और किसान। दोस्तों जो में आप को आंकड़े बता रहा हूँ इससे आप जरूर विचलित होंगे - 
1.     2001 से 2017 तक यानि बीते 17 वर्षों में किसानों की तादाद 2,64,152  है जो इन किसानों ने खुदकुशी की है। 
अब दूसरी स्थिति जरा समझ लीजिये
2. जो कि छात्रों की है 1,17,874 ऐसे छात्र है जो कि परीक्षा में फैल हो जाते हैं, जिन्होंने अपने जीवन को त्याग दिया। 
3.तीसरी स्थिति का भी जिक्र कर लेते हैं 
जो बेरोजगार यूवक है 1,67,606 ऐसे विद्यार्थी है जिन्होंने बीते 17 सालों में खुदकुशी की है। 

हमारा ध्यान ⚠ उस दिशा में जाता ही नही है, बड़ी अजीब ओ ग़रीब स्थिति है, हम किसानों का जिक्र करके बच जाते हैं, मगर न किसानों की समस्या का समाधान होता है और न ही बेरोजगार यूवाओ और छात्रों की समस्या का हल भी नहीं होता है और न ही उन्हें रोजगार दिया जाता है।। 

बीते 17 साल की स्थिति हर दिन 42 किसान प्रतिदिन खुदकुशी करता है, मगर बीते चार साल में किसान प्रतिदिन 41 खुदकुशी करता है यानि एक कम हो गया। 

बीते 17 साल में 18.9 छात्र प्रतिदिन खुदकुशी कर लेते हैं मगर बीते चार साल प्रतिदिन 24छात्र खुदकुशी करते हैं। 

बेरोजगारों की तादाद बीते 17 सालों में हर दिन☀ 27 बेरोजगार खुदकुशी के शिकार हो जाते हैं। 
बीते चार साल में 29.6 छात्र हर दिन खुदकुशी कर लेते हैं। 

आत्महत्या, खुदकुशी, मोत, हत्या के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं और समाज के भीतर तनाव की स्थिति बनी हुई है। लेकिन सरकार का ध्यान इस तरफ जाता ही नहीं है, मगर सरकार का ध्यान उस तरफ बहुत है। अगर हमारी सरकार देश को  विकसित बनाने चाहत रखती है तो देश को शिक्षा के ऊपर रूपये खर्च करने पडेंगे, क्योंकि आज सरकारी स्कूल और निजी स्कूल की कार्यशैली में दिन रात का अंतर क्यों आ गया है। जरा सरकार को सोचना चाहिए और सरकारी स्कूलों पर अगर सरकार तवज्जो दे तो यकीनन देश की स्थिति में काफी बदलाव आएगा। 
आज अगर सरकारी कर्मचारी और राजनेताओं के बच्चे निजी और हाई क्लास के विध्यालय में दाखिला लेता है, मगर एक सरकारी स्कूल में गरीबों के बच्चे और मध्यम वर्ग के विद्यार्थी पढते है। तो भला आप बताओ भारत विकसित केसै होगा, आज भारत के अन्दर बहुत सारे सरकारी स्कूल है मगर उस विध्यालय की स्थिति बदल से बदतर है, उस स्थिति का जिम्मेदार कोन?  सरकार या हम। आखिर बड़ा सोचनीय विषय है। 
मुख्य बात ये है कि हमारे पास शिक्षा सिर्फ कागज़ और डिग्री तक ही सीमित है, उस के बाद रोजगार की कोई गारन्टी नहीं है, तब यूवा मजबूर होकर खुदकुशी कर लेता है। हम देशको डिजिटल इंडिया🇮🇳 बनाना चाहते हैं मगर ज्यादातर आबादी अनपढ़ है, बताओ वो आबादी डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कैसे करेंगे। हर देश के विकास का पैमाना शिक्षा और संसाधनों पर टिका होता है, भारत के अन्दर संसाधनों की कोई कमी नहीं है, मगर हमारे पास उचित शिक्षा🎒🏫📚🎓 नीति लागू नहीं है। पूरा देश का एक पाठ्यक्रम नहीं है।


आज का मेरा लेख जनसंख्या नियंत्रण को लेकर था, जो कि जनसंख्या नियंत्रण करना हर आदमी को जरूरी है, क्योंकि आप को पता है कि भारत के अन्दर जनसंख्या तीव्र गति से बढ रही है और संसाधनों की मांग भी बढती जा रही, हमें और आप को सोच समझ कर कदम उठाना चाहिए। अगर सरकार इस विषय पर कानून लाती है तो भी ठीक है, अगर नही भी लाती है तो भी ठीक, मगर भारतीयों को सोच समझ कर कदम उठाना चाहिए। 


दोस्तों👭👬👫 धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया, आप लोग यकीनन मेरा लैख पढते है, तो आप लोग मुझे सुझाव भी देते रहे ं और आगे भी पोस्ट को लिंक के जरिये भी दूसरे भाईयों तक शैयर करें। 
एक बार फिर धन्यवाद🙏💕 पोस्ट पढने के लिए। 
में आप का दोस्त लेखक, ब्लोगर, और स्वतंत्र विचारक मुराद खान जयसिंधर।। 

    ज   य    हिं   द     जो   ये   भारत।। 
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जम्मू कश्मीर में अभी तक बवाल क्यों?

जी हाँ दोस्तों आज बात जम्मू कश्मीर की की जाएगी, क्योंकि जम्मू कश्मीर जो पहले था, अब वो नहीं रहा, इस स्थिति के बारे में आप को भी पता है काफी। पहले भारत का राज्य था और भारत का अभिन्न अंग भी था लेकिन अब एसा क्या हुआ कि मोदी सरकार को जम्मू कश्मीर पर धारा 144 लागू करके अवाम की की आवाज को दबा देना और जम्मू और लद्दाख को दो केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा देना, ये सब करने के पीछे सरकार का क्या रूख है?  

अनुच्छेद 370 और 35 A  हटाने की प्रक्रिया:- 
सबसे पहले तो ये समझो कि ये धारा नहीं है बल्कि ये एक अनूच्छेद है जो 370 और 35 a है जो कि ये कश्मीर इस अनुच्छेद में बंधा हुआ था, आज राजनेता और अवाम को ये पता नहीं कि धारा है या अनुच्छेद है। अब इस को हटाने की प्रक्रिया क्या है?  वो जरा समझ लीजिये पहली बात अनुच्छेद 370 को खत्म करने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं है। ये अनूच्छेद हटाने की मांग जम्मू कश्मीर के भवन में में ही उठनी चाहिए और वहाँ से ये मसला केन्द्र सरकार के पास जाएगा, फिर केन्द्र सरकार इस पर बिल लोकसभा में पैश करेगी ,लोकसभा में पास होना अनिवार्य है, उसके बाद राज्यसभा में बिल जाएगा वहाँ से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के पास जाएगा, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही ये बिल कानून का रूप इख़्तियार करेगा। 

केन्द्र सरकार किस तरह बिल लायी है?  
हमारी केन्द्र सरकार तो बहुत ही तगड़ी चलती है और जो चाहती है वो कर लेती है, उनहोंने न तो कश्मीर की अवाम की सुनी और न ही प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं की सुनी। जो कानून लाया गया वो तुरंत एक  घंटा पहले लोकसभा के सदस्यों को प्रतियां दी गई, मगर ये सब जल्द बाजी में। हालांकि जो कानून संसद में पैश करना होता है उस को चार से पांच घंटे पहले लोकसभा सदस्यों को बताना होता है और वो सदस्य इस पर अध्ययन करते हैं, उसके बाद लोकसभा में सदस्यों से राय ली जाती है, फिर बहुमत के हिसाब से ही बिल को पास कराया जाता है। आप को बता दे कि जम्मू कश्मीर में अभी रष्ट्रपति शासन लागू जो कि वहाँ पर किसी भी पार्टी की सरकार नहीं है। तो कानून लाना भी गलत है, क्योंकि इनके पास बहुमत है जो चाहे वो कर सकते हैं।

अगर अनूच्छेद को उचित तरीके से हटाते तो इतना जम्मू कश्मीर में बवाल उत्पन्न नहीं होता, क्योंकि उस कानून के साथ बहुत सारे लोग खड़े होते तो इतनी राज्य की अवाम परेशान नहीं होती और न ही भारी सिक्योरिटी का इन्तिजाम करना पड़ता। अब आपने जो यह कदम उठाया है चाहे उचित हो या अनुचित हो, इस फैसले के ख़िलाफ़ है अवाम, और आप को उस अवाम को दबाने के लिए या मनाने के लिए भारी बल का सेना💂💂💂 के जरिये से प्रयोग करना पड़ रहा है। तो यकीनन आप को आर्थिक स्थिति मतलब देश की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। देश पहले से ही आर्थिक स्थिति में डूब जा रहा है, लेकिन अब पूरा ही डूबने वाला।

अनुछेद 370 और अनुच्छेद 35 A हटाने के क्या परिणाम आए हैं?  


हाँ सरकार ने जम्मू कश्मीर का जो विशेष दर्जा था वो समाप्त करके, उसकी जगह केन्द्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया और जम्मू अलग और लद्दाख अलग यानि दो केन्द्र शासित प्रदेश हो गये। लेकिन जम्मू कश्मीर एक मुस्लिम बहुल इलाका है, वहाँ पर 70 फीसदी मुस्लिम आबादी है। जम्मू कश्मीर का एक हिस्सा लद्दाख जहाँ पर सिक्ख और पंडित है, वहाँ उन की आबादी ज्यादा है। खैर जो भी है लेकिन वहाँ की अवाम इस फैसले का सख्त विरोध कर रही है उनको भारी बल की वजह से ही दबाव बना कर रखा गया है और लगभग 1000 मोतें हो चुकी है गन और बैलट की वजह से, यानि जो भी लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी करे या विरोध करे तो सेना को पीछे से खुला आदेश था कि उस को गोली🔫💉 से उड़ाया जाए। तो वाकई सरकार लोकतंत्र के लिए मशहूर है या राजतंत्र के लिए मशहूर है। लोकतंत्र में ऐसे कानून को बनाने की नोबत क्यों पड़ी जिससे सरकार के फैसले को अवाम ( जनता)  ने सख्त विरोध किया और अभी भी जारी है। और उसके बावजूद भी  सरकार को भारी  नुकसान उठाना पड़ रहा है। 


आज भी लोग घरो में बंद है, सारा काम काज ठप है और स्कूल🏫 कोलेज सब बंद है, लोगों की सम्पर्क व्यवस्था बिल्कुल ठप है, हालांकि सरकार ने टेलीफोन लगाने का एलान किया है उस के लिए सरकार ने 96,000 लगाए थे दो चार दिन सम्पर्क व्यवस्था ठीक तरह से चली बाद में वो भी बंद हो गयी, और उस में इनकमिंग कोल की व्यवस्था थी, आउट गोइंग काल की व्यवस्था बंद हो गई थी। कयी लोगों की शादियां होनी थी वो भी दबाव के चलते बंद हो गई और उन्हें मजबूरन शादियां रोकनी पड़ी। कुछ जगह कर्फ्यू हटाया गया है और सामान्य हालात हैं लेकिन अभी तक बड़ा तबका इस कानून के खिलाफ उग्र विरोध कर रहे हैं और उन्हें विशेष दबाव के तहत दबाया गया है और उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और वहाँ के प्रतिनिधित्व करने वालों को दबा कर रखा गया है  शायद ही लोकतंत्र में एसा हो रहा है तो समझो कि अब लोकतंत्र की बजाय राजतंत्र ने स्थान ले लिया है।

अब जम्मू कश्मीर का सहारा कौ
ये मसला भारत का है किसी और देश का नहीं है, लेकिन इस मसले पर पाकिस्तान हमेशा अपना राग अलापता आया है कि कश्मीर हमारा है हमारा है, लेकिन उनके कहने से कश्मीर उनका नहीं होगा ये बात सत्य है। अभी जब जम्मू कश्मीर में विशेष राज्य का  दर्जा हटाया गया, तब भी पाकिस्तान ने दखल देने का बहुत प्रयास किया मगर उनकी कोशिश नाकाम रही, उनहोंने हर स्तर पर फैसला लिया, भारत और पाकिस्तान के जो रिश्ते खत्म किये और सम्पर्क व्यवस्था खत्म कर दी बिलकुल । और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मुस्लिम मुमालिक हुकमरानों से भी बात कर जम्मू कश्मीर के मोज़ू में दखल देने का प्रयास किया मगर वहाँ से भी उन्हें संतोष जनक जवाब नहीं मिला। फिर उनके पास एक और रास्ता था वो था यू एन ओ   वहा सयूक्त राष्ट्र संघ  में भी दखल दिया मगर वहाँ पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम रहनुमा सैय्यद अकबर खान ने पाकिस्तान को दो टूक शब्दों में जवाब दिया।पाकिस्तान के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा है, आखिर उन्होंने अपने आप से हार मान ली। अब जम्मू कश्मीर का कोई सहारा नहीं है, जनता खुद ही सहारा है। और इस फैसले की जिम्मेदार वहाँ की अवाम ही है।
आखिर कोई भी मुल्क जम्मू कश्मीर के हालात के बारे में क्यों नहीं पूछता, लगता है सोची समझी प्लानिंग है। लेकिन एक आम आदमी का दिल इस बात को लेकर दर्द करता है कि वहाँ के लोगों को इतना भारी बल पर क्यों दबा कर रखा है, भला वो लोग आपके फैसले को सम्मान जनक कैसे स्वीकार करैंगे। जम्मू कश्मीर के लोगों के पास अल्लाह के सिवा कोई उनका सहारा नहीं है और उन लोगों को अल्लाह के सामने हाथ उठाने चाहिए और दूसरी अवाम के सामने मेरी आप से गुजारिश है कि आप भी इन भाईयों के लिए दुआ 🙏करें, अल्लाह पाक इन्हें सलामत रखे।



दोस्तों👭👬👫 धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया।

   जय हिंद जय भारत।।

में आप का दोस्त लेखक मुराद जयसिंधर ।






Why are Indian muslims bacword.हिन्दुस्तान का मुसलमान पिछड़ा क्यों? जानिए इस रिपोर्ट से।

हिंदुस्तान का मुस्लमान पिछड़ा क्यों?                          जी हा दोस्तों आज में बात कर रहा हूँ हिन्दुस्तान के मुसलमानों की, जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है, और सब को पता है कि हिन्दुस्तान का मुसलमान पिछड़ा है। आखिर मुसलमानों के पिछड़ेपन का क्या कारण रहा होगा। 

आज भारत के अन्दर मुसलमानों की जनसंख्या लगभग 25 करोड़ है। और मुसलमानों का कोई खास एक राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व नहीं है, हर राज्य में मुसलमान दूसरी पार्टियों के साथ जुड़े हुए है, वो संगठन उनका वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन उनकी मूलभूत सुविधाओं की ओर कोई भी संगठन ध्यान नही दे रहा है, मुख्य कारण ये है कि मुसलमानो के पास शिक्षा🎒🏫📚🎓 नहीं है और बिना शिक्षा के उनके अन्दर जागरूकता नहीं है, इस वजह से मुसलमान फिरका परस्त पार्टियों में बंटे हुए है और उनका ज़िम्मेदार कोई संगठन नहीं है।
आज भारत का मुसलमान किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि बहुत सारे क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है, कारण बस एक ही है वो है  शिक्षा। हम लोग अपने परिवार के सदस्यों को शिक्षा हासिल नहीं करवाते हैं। अगर हमारे पास शिक्षा होती तो हम लोग राजनीति में चले जाते, हम लोग बहुत सारी नोकरियों में बड़े बड़े पदों पर चले जाते, हम लोग निजी क्षेत्र की कंपनियों में चले जाते, हम लोग बड़े बड़े बिजनेस मैन बन जाते थे, लेकिन हमने शिक्षा के ऊपर कभी भी महत्व नहीं दिया, अगर महत्व दिया होता तो आज ये हालात नही होते हमारे। 
आज सरकार आरक्षण गरीबों को दे रही है, जैसे sc st को दिया, लेकिन उस आरक्षण से भील और मेघवाल समाज का भला नही बल्कि मीणा जाती का भला हुआ। क्योंकि मीणा सबसे ज्यादा है, और भील सबसे कम अनुपात में है इसलिए उस आरक्षण का फायदा मीणा जाती को मिल रहा है। वही आरक्षण OBC  कोटे से अल्पसंख्यकों को भी आरक्षण दिया गया है, लेकिन उस आरक्षण का फायदा जाट समुदाय को मिल रहा है, और मुसलमानों का अनुपात बहुत ही कम है। लेकिन उस आरक्षण का फायदा मेहनत करने वालों के लिए कोई मायने नहीं रखता। 
आज में आप लोगो को सच्चर कमेटी की कुछ तथ्य बताने जा रहा हूँ, आप लोग इन तथ्यों पर गौर करें और अपने आप को समझने की कोशिश करैं मतलब मेहनत करें। 
U. P. A सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जस्टिस राजेन्द्र सच्चर की अध्यक्षता में समीति गठित की थी। उन्होंने 403 पैज वाली रिपोर्ट 30 नवम्बर 2006 को लोकसभा में पैश की, और उस रिपोर्ट में क्या क्या खुलासा किये गए हैं जो आप को जानना बहुत जरूरी है। बता दे ं इस समीति में तीन मुस्लिम सदस्य भी थे
सय्यद हामीद, ज़फ़र महमूद, और डो अबुसलेह शरीफ। 

1.6-14 वर्ष के बच्चे 75 प्रतिशत विद्यालय छोड़ देते हैं। 
2.17 वर्ष के बच्चे 26 % 10  वीं पास करते हैं। 
3.  50 % 8 वीं पास करते हैं। 
4.  62%   12 वीं उत्तीर्ण करते हैं। 
5.मुसलमानो की कुल आबादी का 4.9 % सरकारी नोकरी में है। 
6.  3.2% उच्च पदों पर लोग है, जबकि दलित जैसी जातियों में 15 %लोग सरकारी उच्च पदों पर है। 
7.पुलिस कांस्टेबल में मात्र 6% ही मुस्लिम है ।
8.परिवहन क्षेत्र में 4.4% ही है। 
9. रेलवे में 6.5 सरकारी कर्मचारी है। 
9
10.बैंक में 4.5% ही सरकारी कर्मचारी हैं। 
11.जो मुस्लिम लोग ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं उन लोगों में 62% लोग ऐसे है जिनके पास पट्टा सुदा ज़मीन भी नहीं है। 
12.100 में से 33% लोगों के पास ही रोजगार है, बाकी के सब बेरोजगार है। 
13.भारत में 584 कुल मुसलमानो की जातियाँ हैं, जिनमें 80 जातियाँ पैशागत या जातीय कार्य करती है जो कि सख्त पिछड़ी जातियाँ हैं। 


सच्चर समिति द्वारा दिए गए सुझाव-
मुस्लिम बहुल इलाकों में स्कूल, आई टी आई, पोलोटेक्निक कोलेज।  मुसलमानो को छात्रवृत्तियां देना, बैंक शाखाएँ उपलब्ध करवाना  ,ऋण सुविधा उपलब्ध करवाना । रंगनाथ मिश्रा जी की कमेटी का प्रमुख सुझाव था कि मुसलमानो को अल्पसंख्यक कोटे से 10 फीसदी आरक्षण देना। 

जब कांग्रेस सरकार ने इस रिपोर्ट को लोकसभा में पैश किया गया तब लोकसभा सदस्यों से प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के बारे में ली गयी तब भाजपा के कयी सदस्यों ने इस रिपोर्ट के बारे में विरोध किया
#गिरिराज - अल्पसंख्यक का दर्जा समाप्त होना चाहिए मुसलमानो का। 
#शिवराज सिंह चौहान- ये रिपोर्ट साम्प्रदायिकता की भावना को बढ़ावा वाली रिपोर्ट है, इस को नहीं लागू करना चाहिए। 
#दीन दयाल उपाध्याय- मुसलमानो को परिषकृत करने की जरूरत है। 

#सावरकर - मुसलमान और ईसाई भारत के नहीं है ब्लकि ये लोग बाहर के है। 

तो दोस्तों ये थी कुछ सच्चर समिति की सिफारिश और खुलासे, और उस समिति की प्रति क्रिया भी आप लोगो ने पढ ली है, जो लोग भाजपा को वोट देते हैं वो सावधान और जो बाकी पार्टियों के वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल होते हैं वो भी सावधान। तो दोस्तों में आप से गुजारिश करना चाहता हूँ कि आप लोग अपने भाई बहनों और संतान को दुनिया  की तालीम और दीनी तालीम जरूर दिलावें, ता की आप का बच्चा एक बड़ा अफसर तो न पर छोटा सा कर्मचारी जरूर बनेगा, फिर उसी रास्ते धीरे धीरे प्रगति भी कर लेगा  । आज हम मुसलमान फालतू के खर्चे ज्यादा करते हैं, अपने पास हिसाब किताब निश्चित नहीं रहता है, हम लोग शादी ब्याह में और औसर में कयी गुना फालतू में खर्च करते हैं जो कि ये इस्लाम के खिलाफ कर रहे है। हमें अपना पैसा सोच समझ कर खर्च करना चाहिए। हमारी सहायता सरकार करे या ना करे ये कोई जरूरी नही है, मगर हमें जो अल्लाह पाक ने जो दिमाग़ दिया है उसके ज़रिए जरूर सोच समझ कर कदम उठाएं। 

भाईयों आप लोगो से गुजारिश है कि मेरी बात को आप आगे तक पहुंचाए और सुझाव भी दे मुझे। धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया।
में आप का दोस्त लेखक मुराद खान जयसिंधर।








प्रतियोगिता का समय अथार्त प्रतियोगिता की तैयारी

जी हाँ दोस्तों आज का युग प्रतियोगिता का युग है। हर कोई व्यक्ति अपनी तरफ यही चाहता है कि मैं इस प्रतियोगिता की नदी को कैसे पार कर सकूँ। सबसे ज्यादा जिस वर्ग की भीड़ है वो है विद्यार्थी वर्ग। क्योंकि स्कूल और कोलेज में पढ़ने वाला हर छात्र/ छात्रा  यही चाहता है कि मैं एक सरकारी नौकरी हासिल करूँ, और मेरी ज़िन्दगी आसानी से निकल जाए, में अपने परिवार को सही दिशा में ले जा सकूँ। हर विद्यार्थी वर्ग की यही आस होती है, वो आस हर किसी की पूरी भी नहीं होती है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है, जितना बड़ा देश है उतनी ही बेरोजगारों की भरमार है। लेकिन बेरोजगारी की समस्या को  दूर करने के सरकार द्वारा प्रयास किये जाने चाहिए, वेसे भी सरकार बेरोजगारी समस्याओं का हल निकाल रही है, फिर भी उस विषय की मोनिटरिंग सही से नहीं हो पाती।
आज कल हर यूवा नोकरी हासिल करना चाहता है आज के समय में नोकरी मिलना बहुत ही मुश्किल काम हो गया है, क्योंकि नोकरी उन्ही को जल्दी से मिलती है जिनको मार्गदर्शन मिलता है और साथ में कठिन परिश्रम की सख्त जरूरत पड़ती है। आज के वक्त में कयी यूवा कठिन मेहनत तो करते हैं पर वो एक बड़ी गलती कर देते हैं वो क्या है? उनके पास सही से रणनीति नहीं होती है और मार्गदर्शन नहीं होता है जिसकी वजह से वो लोग पीछे रह जाते हैं। अथार्त अपना लक्ष्य हासिल करने से चूक जाते हैं। आज कल के बहुत सारे यूवा लोग अपने उद्देश्य की रणनीति नहीं होती है उनके पास, इसलिए वो उद्देश्य भटक जाते हैं और सफलता🏆💪 से चुक  जाते हैं। बिना कोचिंग के आप जल्द ही सफल हो सकते हैं इसके लिए में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु बता रहा हूँ जो आप इन बिन्दुओं पर जरूर चर्चा करें।
Competition exam प्रतियोगिता की परीक्षा में पास होने के तरिके
@    मित्रों में आप को प्रतियोगिता की परीक्षा की तैयारी से संबंधित कुछ ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु बताने जा रहा हूँ जिसको लेकर 100 % सफल हो सकते हैं। जो बिंदु में आप को बताने जा रहा हूँ, जरूर आप को पसंद आएंगे और आप की तैयारी में मदद करेंगे। 

1.सभी विषयों की अलग अलग पुस्तक रखने:- अगर आप सरकारी नोकरी की तैैयारी कर रहे हो तो आप प्ररत््य्््य्य््ं्््य्् 
प्रत्येक विषय की महत्वपूर्ण पुस्तक को अलग अलग छांट कर रखें, किसी भी भर्ती परीक्षा में एक गाईड नहीं चलेगी बल्कि सभी विषयों की अलग अलग गाईड या पुस्तक खरीद कर पढाई करें। 

2.अपना ग्रूप बनाएं:- 
अगर आप लोग मोबाईल या कम्प्यूटर पर ओनलाइन तेयारी कर रहे है तो आप लोग वाट्सएप, फैसबुक, टेलिग्राम और इन्टरनेट जैसे सोसलमिडिया पर कम्पीटीशन एज्युकेशन जैसे ग्रूपों में जुड़ जाईए और अपनी तैयारी का सिलसिला जारी रखिये। 

3.एकान्त व शुद्ध वातावरण में पढें:-
आप प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे है तो एकान्त वास में पढें जहाँ आप को पढाई में खलल नहीं होता हो, ता की आप के द्वारा पढा हुआ याद रहे। अगर आप के नज़दीक कोई लाएबरेरी हो तो वहाँ पर एकान्त में जाकर पढाई करें। 

4.एक ही लक्ष्य बनाएं:- आप जो भी बनना चाहते हैं, उस के लिए आप पूर्ण तैयारी करें और एक उद्देश्य की तैयारी जारी रखैं। एक लक्ष्य की तैयारी करते रहोगे तो जल्दी सफल हो जाओगे। धन्यवाद। 

5.समय सारणी बनाएं:- आप जो भी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो सबसे पहले जरूरी है कि आप अपना टाईम टेबल बनाएं, फिर उसमें सभी विषयों को बराबर समय दीजिये और जो विषय कठिन है उस को ज्यादा टाईम दीजिये। 

6.समय का सदुपयोग करें:--आप प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो उस के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि समय को फालतू में न गंवाते हुए अपना कीमती वक्त पढाई में लगाएं ता की आप का उद्देश्य पूरा हो सके। 

7.अन्य प्रतियोगिता  की परीक्षाएं भी दे ं:
कम्पीटीशन की तैयारी करने वालों के लिए सबसे जरूरी है कि आप के सामने आने वाले हर परीक्षा देते रहे ता की आपको उन भर्ती परीक्षा से सीखने के लिए बहुत कुछ मिलता है। जिससे आप को जल्दी अपने उद्देश्य में कामयाबी मिल सकती है। 

8.ज्यादा अंधविश्वास से बचें। कयी विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी करने वाले, अंधविश्वास में पड़ जाते हैं कि मेने बहुत सारी परीक्षाए दी अभी तक सफल नहीं हुआ। मेरी किस्मत अच्छी नहीं है,मेरा लक साथ नहीं दे रहा है, अब मैं तैयारी करके क्या करूँ मैं। 

9 सब्र रखें। 
बहुत सारे विद्यार्थी 5-6 परीक्षाए दे कर हिम्मत हार जाते हैं कि अब मेरा नम्बर नहीं आएगा, अब परीक्षा दे कर क्या करूँ मैं। इसी वजह से कयी विद्यार्थी अपनी हिम्मत हार जाते हैं। तो ये आप सबसे बड़ी गलती कर रहे हो। आप अपनी कोशिश जारी रखैं, बेशक हिम्मत करने वालों की हार कभी नहीं होती है।

10.पूरी मेहनत व लगन से पढ़े ं। 
आप अपने उद्देश्य की तैयारी कर रहे है तो उस को पूरी मेहनत व लगन के साथ तैयारी करें। पढाई को रूचि में लेकर काम करें। 

दोस्तों आप को यह लेख बहुत पसंद आया होगा। मेरे साथ जुड़े रहें और मुझे अपने लेख के बारे में सुझाव भी देते रहे ं ताकि मुझे नयी नयी जानकारी सीखने को मिले।

में आप का दोस्त लेखक वक्ता मुराद खान जयसिंधर।


Triple Tlaaqq तीन तलाक

आज मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल को लोकसभा में पास करके , राज्य सभा में बिल को पास करवा दिया और अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही तीन तलाक बिल कानून का रुप ले लेगा। इस बिल को मोदी सरकार तीसरी बार संसद में पेश कर रही है। हालांकि उससे पहले मोदी सरकार के पास राज्यसभा में अल्पमत संख्या की वजह से बिल कयी बार वापस स्टैडिंग कमेटी के पास बिल भेजा गया। जब मोदी सरकार दुबारा बनी तो उनके पास लोकसभा में तो बहमत तो थी ही मगर राज्यसभा में भी सदस्यों की संख्या में काफी इज़ाफ़ा हो गया दूसरे दल जो NDA में शामिल हैं, कुल मिलाकर उनकी राज्यसभा में बहुमत  हो गई है, और अब जो चाहे वो कर सकता है क्योंकि उनकी लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत हो गई है, अब जो उनकी मर्जी होगी वही होगा  ,विपक्ष में बैठे लोग कुछ भी करें, उनके आगे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। 

तीन तलाक बिल मुस्लिम औरतों के खिलाफ ही क्यों लाया गया?  तीन तलाक का मुद्दा और जम्मू कश्मीर की धारा 370 और 35 a भाजपा के मेनिफेस्टो में ये मुद्दा शामिल था, क्यों लाया गया और किसलिए लाया गया ये तो वो लोग ही जानते हैं जो चाहे तो वो अपनी इच्छा अनुसार कर भी सकते हैं, किसी की राय मशोरा  सुनने की कोई जरूरत नहीं है। 

तीन तलाक क्या है?  
तीन तलाक का मतलब है कि शादी शुदा जोड़ा अगर, उनके अन्दर कोई अनबन हो जाती है तो पति अपनी मर्जी के अनुसार तीन बार तलाक तलाक तलाक शब्द बोलते ही शादी टूट जाती है  हालांकि शादी टूटती नहीं, बल्कि सख्त गुनाह (पाप)  होता है। तीन बार शब्द तलाक बोलने से शादी नहीं टूटी है। उसके लिए 90 दिन यानी 3 माह का समय होता है, उस दौरान पति और पत्नी के मध्यस्थता आलिम और उनके घर के समझदार इन्सान ही करेंगे। अगर 90 दिन के अन्दर तक अगर समझोता नहीं होता है तो तलाक वास्तव में हो जाती है। आज कल के यूवा लोग मीडिया पर या लिखित मे या मोखिक  रुप से तलाक बोल कर अपनी पत्नी को बिना सलाह मशोरा के छोड़ देते हैं जबकि ये बिदअत है और सख्त गुनाह है। हालांकि शरिया के मुताबिक शादी नहीं टूटती। 

सुप्रीम कोर्ट ( उच्चतम न्यायालय)  का कहना है कि अगर तीन बार एक शब्द तलाक तलाक तलाक बोलता है या मीडिया के ज़रिए या लिखित में अगर अपनी पत्नी को को छोड़ने की सूचना दे देता है तो शादी यकीनन नहीं टूटती है None aset.   यहाँ तक सुप्रीम कोर्ट ने वही कहा है जो शरियत कह रही है तो सरकार ने कैसे इस फैसले को अपनी मर्जी से बदल दिया। और किसी से सलाह मशोरा भी नहीं किया, लगता है अब मुल्क के अन्दर लोकतंत्र की बजाय राजतंत्र ने स्थान ले लिया है। 

सरकार ने जो कानून बनाया है उस कानून के तहत तीन बार तलाक बोलने वाला आदमी जाएगा सीधा जैल , न कोई पूछताछ न कोई राय मशोरा, और वो भी तीन साल की जैल, और जैल में बैठा आदमी अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता दैगा, आखिर आप लोग सोचो वो आदमी जैल में बैठा कैसे देगा भत्ता। 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बना हुआ है😝सरकार ने उस बोर्ड को भी नहीं पूछा कि आखिर आप के मुस्लिम समाज में तलाक के मसले को कैसे हल करें और उसके सही रास्ता क्या होना चाहिए। अगर सरकार उनको अपने पावर के जरिये यहाँ तक कह सकती थी कि आप अपने समाज में तीन तलाक के मुद्दे को खत्म करने का प्रयास करें नहीं तो हम संसद में बिल पैशन करके कानून बनाएंगे फिर आपको स्वीकार करना पड़ेगा। यहाँ तक भी नहीं बोला मगर बिना किसी को पूछे सीधा ही बिल लाए और पास करवा दिया। वो भी एक मुस्लिम समाज के विरुद्ध, बाकि सब साफ है ।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी इस बात को गंभीरता से लेता आया है कि मुस्लिम समाज में तलाक का मसला कम से कम हो और उसको सुलझाने का प्रयास करता आ रहा है। वैसे भी मुस्लिम समाज में इतना तलाक का मसला नहीं होता है जितना गैर इसलाम का होता है। खैर जो भी कानून बनाने की शक्ति संसद को है, और संसद में जिस राजनीतिक पार्टी की बहुमत है तो वो जो चाहे उधर पलट सकती है।






हातिम ताई की कहानी📖

दोस्तों आज एक अजीब कहानी बताने जा रहा हूँ, आप हज़रात जरूर से जरूर पढ़ें और इससे शिक्षा🎒🏫📚🎓 लैं।
किसी गाँव में एक अमीर और दौलतमंद इन्सान रहता था जो कि वह अमीर और बड़े बड़े र ईस लोगों को खाना खिलाता था। उसी गाँव के पास में गरीब और दरवेश रहता था, उस का नाम हातिम ताई था, वो एक दिन भुखा था, उसने सुन रखा था तब हातिम ताई उस आदमी के घर🏡 गया और वहाँ पर सफेद कपड़े पहने हुए बहुत सारे लोग बैठे थे, तब उस घर के मालिक ने मुलाकात भी नहीं की और पानी की सलाह तो दूर बैठने तक की जगह भी नहीं दी। और हातिम ताई को उस आदमी ने वहाँ से वहाँ से भगा दिया और वह दरवेश बाजार की तरफ एक दर्जी के पास गया और दर्जी से कहा कि मुझे नये कपड़े सफेद किराए पर चाहिए, और परसों तक वापस लोटा दूंगा। तब हातिम ताई नये कपड़े पहनकर उस आदमी के घर गया और उसने सलाम किया और घरके मालिक ने जवाब  भी दिया, हाल चाल भी पूछे, पानी भी पिलाया गया, जब खाना आगे रखा तब उस ने लुकमा उठा कर अपने कपड़ों पर रखा, तब उस आदमी की नज़र हातिम ताई पर पड़ी और कहा, ये कर रहे हो, पागल हो गये क्या?  तब हातिम ताई ने जवाब दिया जनाब में पागल नहीं हूँ, पागल आप लोग हैं, क्योंकि मैं आदमी वही हूँ, जब मैं पहली बार पुराने गंदे कपड़ो में आया था तब आपने मुझे बैठने की जगह भी नहीं दी और पानी की बात तो दूर रह गयी। जब मैं नये कपड़े पहनकर आया तो आप ने मुझे इतनी बड़ी इज्जत दी और अच्छा खाना परोसा। क्योंकि आप लोग व्यक्ति की इज्जत नही करते हौ बल्कि आप लोग लोगों के कपड़ो और फैशन को देखते हैं। तब उस आदमी को शर्म महसूस हुई और फोरन उस हातिम ताई से माफी मांगी। 

दोस्तों👭👬👫 जीवन में इन्सान कै रंग रूप और फैशन 💄💋👠👝💍को कभी मत देखना। व्यक्ति के दिल💜❤ को जरूर देखना। क्या पता कोनसा इन्सान आप को दुआ दे कर चला जाए। 


दोस्तों एसी कहानियों को पढ कर आगे से आगे फार्वरड  करे। 

धन्यवाद 🙏💕शुक्रिया। 



Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...