जी हाँ आज का अध्याय है "सेहत" ये सेहत किसी ओर की नहीं है, ये सेहत हमारी खुद की है। हम हमारी सेहत की कितनी देखभाल करते हैं ये सबसे महत्वपूर्ण है। आज के समय हर इंसान शारीरिक रूप से अपने आप में अलग है, कोई मोटा, कोई पतला, कोई मध्यम अथवा कोई दुबला, कोई बड़ा कोई छोटा। ये सेहत का असर खान पान अथवा वातावरण पर निर्भर करता है, कितना खाते हैं और कैसा खाते है। प्रत्येक व्यक्ति के शरीर का रंग अलग अलग होता है, किसी का काला, कोई लाल रंग,सावला रंग, किसी का सफेद। तो हर व्यक्ति का रंग भी अलग अलग होता है ये भी वातावरण का ही प्रभाव पड़ता है।
व्यक्ति को अपनी सेहत सुधारने के लिए खान पान पर ज़्यादा तवज्जो देना होगा, और उस की पूरी जानकारी चिकित्सक से पूछ कर ही उस खान पान में बदलाव लाना होगा। आज कल समय तेजी से भाग रहा है तो व्यक्ति भी समय के साथ तेजी से दोड़ता नज़र आ रहा है, लेकिन वे व्यक्ति कठिन काम करते हैं या सरल कार्य करते हैं जो भी हो मगर उतना भोजन🍴 पर ध्यान नही देते हैं जो देना चाहिए था। आज कल व्यक्ति खाना खाते समय मोबाईल का उपयोग ज्यादा करते हैं जिनकी वजह से उनका ध्यान खाने पर नहीं होता है उन का ध्यान मोबाइल फोन पर चला जाता है, जिसे उनका खाना सही रुप से हजम नही हो पाता है।
दूसरा एक ओर कारण है कि व्यक्ति भागदौड़ की ज़िन्दगी में खाना भी जल्दी से खाता है और बारीक चबाता नहीं है जिनकी वजह से खाना सीधा आहार नाल में निगल जाता है जो कि सही रूप से पाचन नहीं हो पाता है।
तीसरा कारण है लोग पानी कम पीते हैं, लोग कठिन काम करने वाले बहुत कम पानी पीते हैं, क्योंकि उनको पानी💧की पीने पूरी जानकारी नहीं होती है। बहुत सारे बड़े बड़े वी आई पी लोग ज्यादा पानी पीते हैं और उनके पास काम बहुत कम होता है। फिर भी वे लोग पानी ज्यादा पीते हैं। खाना खाने से तुरंत पहले पानी पीना चाहिए और उसके बाद खाना चबा चबा कर खाना चाहिए। खाना खाने के बाद आधा घंटा बाद पानी पीना चाहिए, ता की भोजन🍴 की पाचन क्रिया सही रुप से होनी चाहिए जिससे आप की सेहत सही रह सकें।
आप जो खाना खाते है वो उच्च पोष्टिक वाला होना चाहिए, न तो ज्यादा जला हूआ होना चाहिए और न ही कच्चा होना चाहिए खाना शुद्ध और स्वच्छ होना चाहिए। उस भोजन के अन्दर मिर्ची, हल्दी और तेल की मात्रा कम होनी चाहिए।
अगला कारण है कि लोग अपने काम से इतराते है जिसकी वजह से उनके अन्दर आलस्य पन आ जाता है जिसे उनका शरीर मोटा होता चला जाता है। वे लोग अपने काम को समय पर नहीं कर पाते हैं, जिससे उनका शरीर ढीला ढाला हो जाता है। एक ये है कि बहुत सारे लोग समय पर खाना नहीं खाते है और समय पर निश्चित समय तक नींद नहीं लेते हैं जिनकी वजह से शरीर में आलस आ जाता है। अगर खाना खाते भी है तो बाज़ार की चीज़ें ज्यादा खाते है जिससे उनके बदन में शिथिलता आ जाती है।
जो लोग कठिन कार्य करते हैं उनका शरीर मजबूत एवं हठ्ठा कट्टा होता है, जो कि बहुत क्षमता रखता है, जो लोग सिर्फ छाया में बैठ कर कार्य करते हैं उनका शरीर आलसी एव हलका होता है। जो लोग कठिन कार्य करते हैं वे खाना भी ज्यादा खाते है और पाचन क्रिया भी जल्दी से होती है। हाँ ये बात जरूर है कि कठिन कार्य करने वालों का शरीर काला तथा पतला जरूर होगा मगर अंदरूनी क्षमता बहुत मजबूत होगी। छाया अथवा आफीस में बैठ कर कार्य करने वालों का शरीर पर चमक एव साफ सुथरा जरूर होगा। फर्क बस इतना ही है।
शहर🌇 वासियों से ग्रामीण वासी ज्यादा ताकतवर होते हैं, क्योंकि वे लोग शुद्ध भोजन करते हैं, उनका शुद्ध वातावरण होता है। जो लोग शहरों में रहते हैं वे कमजोर होतें है क्योंकि शहरों में शुद्ध भोजन नहीं मिल पाता है, हर चीज में मिलावट की हुई मिलती है जिसे उनका शरीर कमजोर रहता है। शहर के लोग शारीरिक रूप से कमज़ोर होते हैं और गांव के लोग शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं।
इन्सान का शरीर चाहे मोटा, या पतला, दुबला कैसा भी हो ,लेकिन अपने शरीर को तंदरुस्त रखने के लिए लगातार खान पान पर ध्यान देना चाहिए और लगातार कार्य करना चाहिए, कुछ न कुछ काम करने की प्रवृत्ति डालनी चाहिए जिससे आप का शरीर मजबूत एवं तंदरुस्त रहेगा।
शरीर को नष्ट करने वाली चीज है नशा, नशा चाहे कोई भी हो तम्बाकू, सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, दारू, मीठा गुटखा, डोडा अमल ये सारे नशे शरीर को नष्ट करने वाले होते हैं जिससे इन्सान का शरीर धीरे धीरे नष्ट हो जाता है। इन्सान के शरीर को दुबला पतला ये नशा बनाता है। जो कि शरीर के लिए हानिकारक है, इसका इस्तेमाल बहुत कम या सीमित मात्रा में करना चाहिए।
व्यक्ति को अपनी सेहत सुधारने के लिए खान पान पर ज़्यादा तवज्जो देना होगा, और उस की पूरी जानकारी चिकित्सक से पूछ कर ही उस खान पान में बदलाव लाना होगा। आज कल समय तेजी से भाग रहा है तो व्यक्ति भी समय के साथ तेजी से दोड़ता नज़र आ रहा है, लेकिन वे व्यक्ति कठिन काम करते हैं या सरल कार्य करते हैं जो भी हो मगर उतना भोजन🍴 पर ध्यान नही देते हैं जो देना चाहिए था। आज कल व्यक्ति खाना खाते समय मोबाईल का उपयोग ज्यादा करते हैं जिनकी वजह से उनका ध्यान खाने पर नहीं होता है उन का ध्यान मोबाइल फोन पर चला जाता है, जिसे उनका खाना सही रुप से हजम नही हो पाता है।
दूसरा एक ओर कारण है कि व्यक्ति भागदौड़ की ज़िन्दगी में खाना भी जल्दी से खाता है और बारीक चबाता नहीं है जिनकी वजह से खाना सीधा आहार नाल में निगल जाता है जो कि सही रूप से पाचन नहीं हो पाता है।
तीसरा कारण है लोग पानी कम पीते हैं, लोग कठिन काम करने वाले बहुत कम पानी पीते हैं, क्योंकि उनको पानी💧की पीने पूरी जानकारी नहीं होती है। बहुत सारे बड़े बड़े वी आई पी लोग ज्यादा पानी पीते हैं और उनके पास काम बहुत कम होता है। फिर भी वे लोग पानी ज्यादा पीते हैं। खाना खाने से तुरंत पहले पानी पीना चाहिए और उसके बाद खाना चबा चबा कर खाना चाहिए। खाना खाने के बाद आधा घंटा बाद पानी पीना चाहिए, ता की भोजन🍴 की पाचन क्रिया सही रुप से होनी चाहिए जिससे आप की सेहत सही रह सकें।
आप जो खाना खाते है वो उच्च पोष्टिक वाला होना चाहिए, न तो ज्यादा जला हूआ होना चाहिए और न ही कच्चा होना चाहिए खाना शुद्ध और स्वच्छ होना चाहिए। उस भोजन के अन्दर मिर्ची, हल्दी और तेल की मात्रा कम होनी चाहिए।
अगला कारण है कि लोग अपने काम से इतराते है जिसकी वजह से उनके अन्दर आलस्य पन आ जाता है जिसे उनका शरीर मोटा होता चला जाता है। वे लोग अपने काम को समय पर नहीं कर पाते हैं, जिससे उनका शरीर ढीला ढाला हो जाता है। एक ये है कि बहुत सारे लोग समय पर खाना नहीं खाते है और समय पर निश्चित समय तक नींद नहीं लेते हैं जिनकी वजह से शरीर में आलस आ जाता है। अगर खाना खाते भी है तो बाज़ार की चीज़ें ज्यादा खाते है जिससे उनके बदन में शिथिलता आ जाती है।
जो लोग कठिन कार्य करते हैं उनका शरीर मजबूत एवं हठ्ठा कट्टा होता है, जो कि बहुत क्षमता रखता है, जो लोग सिर्फ छाया में बैठ कर कार्य करते हैं उनका शरीर आलसी एव हलका होता है। जो लोग कठिन कार्य करते हैं वे खाना भी ज्यादा खाते है और पाचन क्रिया भी जल्दी से होती है। हाँ ये बात जरूर है कि कठिन कार्य करने वालों का शरीर काला तथा पतला जरूर होगा मगर अंदरूनी क्षमता बहुत मजबूत होगी। छाया अथवा आफीस में बैठ कर कार्य करने वालों का शरीर पर चमक एव साफ सुथरा जरूर होगा। फर्क बस इतना ही है।
शहर🌇 वासियों से ग्रामीण वासी ज्यादा ताकतवर होते हैं, क्योंकि वे लोग शुद्ध भोजन करते हैं, उनका शुद्ध वातावरण होता है। जो लोग शहरों में रहते हैं वे कमजोर होतें है क्योंकि शहरों में शुद्ध भोजन नहीं मिल पाता है, हर चीज में मिलावट की हुई मिलती है जिसे उनका शरीर कमजोर रहता है। शहर के लोग शारीरिक रूप से कमज़ोर होते हैं और गांव के लोग शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं।
इन्सान का शरीर चाहे मोटा, या पतला, दुबला कैसा भी हो ,लेकिन अपने शरीर को तंदरुस्त रखने के लिए लगातार खान पान पर ध्यान देना चाहिए और लगातार कार्य करना चाहिए, कुछ न कुछ काम करने की प्रवृत्ति डालनी चाहिए जिससे आप का शरीर मजबूत एवं तंदरुस्त रहेगा।
शरीर को नष्ट करने वाली चीज है नशा, नशा चाहे कोई भी हो तम्बाकू, सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, दारू, मीठा गुटखा, डोडा अमल ये सारे नशे शरीर को नष्ट करने वाले होते हैं जिससे इन्सान का शरीर धीरे धीरे नष्ट हो जाता है। इन्सान के शरीर को दुबला पतला ये नशा बनाता है। जो कि शरीर के लिए हानिकारक है, इसका इस्तेमाल बहुत कम या सीमित मात्रा में करना चाहिए।