*ओबीसी जनगणना विरोधी भाजपा!*
*ओबीसी विरोधी भाजपा!*जिस पंडित अटल बिहारी ने देवगोड़ा सरकार द्वारा 1998 में 2001की जनगणना में ओबीसी* *जनगणना कराने के फैसले को लंगड़ी सरकार बनते ही रद्द कर दिया था भाजपा ने उस वाजपेई की अस्थियां पूरे देश में घुमाई।*
*और जिस भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे ने बार बार संसद में ओबीसी जनगणना कराने के लिए आवाज उठाई उनकी मृत्यु के बाद भी* *भाजपा उनकी इच्छा पूरी करने को तैयार नहीं क्यों?*
*क्योंकि वाजपेई ब्राह्मण थे और गोपीनाथ मुंडे ओबीसी,*
*इससे यह भी सिद्ध होता है* *कि भाजपा ब्राह्मणों की पार्टी* *है जो ओबीसी का सिर्फ इस्तेमाल करती है उसके ही ओबीसी नेताओं के जोरदार* *मांग के बावजूद ओबीसी* *जनगणना नहीं कराना चाहती क्योंकि संख्या मालूम पड़ने पर शासन प्रशासन में* *ओबीसी को आधे से ज्यादा प्रतिनिधित्व देना पड़ेगा फिर ब्राह्मण* *वर्चस्ववाद का क्या होगा जिसे आजादी के बाद से कांग्रेस ने मजबूत* *किया टिकाया अपने शासन में वही काम भाजपा कर रही है ।*
*प्रस्तुत है दिवंगत गोपीनाथ मुंडे जी का ओबीसी जनगणना की मांग के लिए संसद में दिया गया जोरदार भाषण-- -----*
अध्यक्ष महोदय! मैं ऐसा मानता हूं कि आज इस सदन में बहुत ऐतिहासिक और महत्त्वपूर्ण बहस हो रही है,क्योंकि इस देश में 54% ओबीसी हैं, इसका मतलब 54 करोड़ लोगों के जीवन से संबंधित विषय पर बहस कर रहे हैं और इसके प्रति सरकार ने अभी तक फैसला नहीं लिया है। 1931 में सिर्फ एक बार ओबीसी की जनगणना हुई थी,80 साल हो गए मगर ओबीसी OBC की जनसंख्या आज कितनी है किसी को इसके बारे में मालूम नहीं क्योंकि OBC CENSUS (जनगणना) नहीं हुआ है। अगर हम इस समय भी census (जनगणना) में ओबीसी जनगणना नहीं करेंगे तो तो ओबीसी को Social justice (सामाजिक न्याय) देने के लिए और दस साल हम ओबीसी पर अन्याय करेंगे, लेकिन यह किसलिए? ओबीसी क्यों Census(जनगणना) मांगते हैं? इसलिए कि कि 2007 में IIT और IIM में आरक्षण देने के बाद एक पब्लिक (लिकिटेशन) में उस समय के कोर्ट ने ओबीसी के पापुलेशन के तथ्य सरकार को देने के लिए कहा, सरकार ने कहा कि आजादी के बाद हमारे पास ओबीसी OBC Population का कोई Statistics नहीं है, इसलिए आरक्षण देने के लिए कोई Statistics उपलब्ध नहीं है। तो कितना पर्सेंट आरक्षण दें? ये तय नहीं किया जा सकता,उस समय बहस मेंAddition Advocate general ने(लाॅ मिनिस्टर मोइली जी यहां पर उपस्थित हैं ,वो इस बात को रखें) उन्होंने भरी कोर्ट में कहा कि हां,OBC का Census (जनगणना) सरकार को करना चाहिए।
अब उसके बाद 2011 में Census होने जा रहा है तो उसमें ओबीसी का Census क्यों नहीं किया जा रहा है?
अध्यक्ष महोदय! OBC का Census इसलिए कीजिए कि अभी हमारे भक्त चरणदास कह रहे थे कि Casteless Society होनी चाहिए, गुणवत्ता के आधार पर समाज में न्याय मिलना चाहिए ,आप दूसरे मनु दिख रहे हैं मुझे ( उनकी तरफ हाथ करते हुए ...... सांसद खुलकर हंसते हैं) , कहां है सोसायटी में इक्वलिटी?( सबकी तरफ देखकर सवाल पूछा) आप दलित होते हुए Scheduled caste से होते हुए Open seat पर चुनकर आए हैं मैं आपका अभिनन्दन करता हूं , लेकिन हमारे Constitution में Sheduled caste और Sheduled tribe को आरक्षण नहीं होता तो क्या बाकी सदस्य जीतकर आ सकते थे?( सांसदों का जोरदार सपोर्ट .... नहीं!.... नहीं!...क्या बात है .. कहते हुए)।
आप(भक्त चरणदास)की सोच सच्चाई से कोसों दूर है, और आप अकेले को न्याय मिला इसलिए सबको अन्याय में मत ढकेलिए। (संसद से जोरदार तालियां और Response मिल रहा था)।
अध्यक्ष महोदय! क्या (खुद आप Sheduled caste से हैं?) मैं पूछना चाहता हूं कि छूत अछूत भेदभाव बंद हुआ है क्या?( जोर से कुछ सांसद नहीं हुआ है.....! नहीं हुआ है.....! चिल्लाते हैं) क्या आज भी दलितों को मंदिर में प्रवेश है? बाबा साहेब अम्बेडकर को ही नहीं हर अम्बेडकर को मंदिर प्रवेश से नकारा जा रहा है, छोड़िए कल की बातें, परसों हरियाणा में दलितों के घर नहीं जलाए गए? (Shame.... Shame सांसदों का सपोर्ट) और एक सांसद बोले घर ही नहीं बल्कि दलितों को भी जलाया गया...। हां वही तो कह रहा हूं मैं।
अध्यक्ष महोदय! दलितों के घर जलाए दलितों को जलाया, महाराष्ट्र के खैरलांजी गांव में बहन , बेटी, मां और सारा एक दलित परिवार को नंगा करके (गुस्से में जोर से) जुलूस निकालकर जलाया गया।(विरोधियों ने बड़ा हंगामा किया चीखे चिल्लाए ....) मैं किसी सरकार को दोष नहीं दे रहा हूं बल्कि सामाजिक वास्तविकता बता रहा हूं। तालियां....!
हम हर दिन मंच से कहते हैं ,छूत अछूत सब बंद हो गया,हम सब बराबरी के हैं,यह सब कहने की बात है, हकीकत और कथनी में अंतर है। वास्तविकता अलग है। आप बिना देखे Casteless class निर्माण करना चाहते हो। मैं पूछना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान में पुनर्जन्म में विश्वास नहीं रखता हूं लेकिन अगर मुझे हिन्दुस्तान में फिर से जन्म लेना है और भगवान को मैंने अप्लीकेशन किया कि Without caste यानी कि बिना जाति के घर में मुझे जन्म दो ! संभव है ये??( नहीं......! नहीं.......! कहकर जोरदार प्रतिसाद बेंच बजाकर सांसदों ने दिया) बिना जाति के आधार पर कौन सा ऐसा घर होगा बिना जाति के घर में ( सांसद लालू यादव जी का नाम लेते हुए कुछ सांसद कहते हैं Next time यादव के घर चलेगा और यादवजी मुंडे के घर में आयें( सांसद खुलकर हंसते हैं)।
देखिए ओबीसी कास्ट नहीं एक क्लास है, क्योंकि अब तीन क्लास बनाए गए हैं, Sheduled caste एक Class हो गया, Sheduled tribe दूसरा Class हो गया और OBC तीसरा Class हो गया। Sheduled Caste बोले तो उसमें कई जातियां आती हैं Sheduled tribe में भी कई जातियां आती हैं वो Class हो गया है और Constitution ने अधिकार दिया , मैंने या आपने नहीं।
हमारे कहने से क्या होने वाला है? Constitution ने Sheduled tribe और Sheduled caste को आरक्षण दिया,OBC को Parliament में नहीं दिया है, लेकिन काका कालेलकर कमीशन बनी और उसमें विभिन्न प्रदेशों को अधिकार दिया कि वो अपने अपने प्रदेशों में ओबीसी को अधिकार दें।
मैं कहता हूं आजादी की बात छोड़ो हमारे जमाने में मद्रास और कर्नाटक ऐसे प्रदेश हैं जिन्होंने आजादी के पहले भी एससी एसटी ओबीसी को आरक्षण दिया था, और मैं उस महाराष्ट्र से हूं जहां शाहू महाराज ने आजादी से पहले ओबीसी और एससी को आरक्षण दिया था और बाबा साहेब अम्बेडकर को Scholarship शाहू महाराज ने दी थी।
अध्यक्ष महोदय! ये Caste system कोई आपके,या कोई सत्ता के कारण यह कुछ गड़बड़ हुई है ऐसा मैं नहीं मानता लेकिन यह वास्तविकता है,जाति है जो कभी जाती नहीं। जिन्होंने ईसाई धर्म स्वीकार किया जो मुगलों के जमाने में मुस्लिम हुए वो जाति को साथ लेकर वहां गए , धर्म बदला पर जाति नहीं बदली।
और जाति के आधार पर हमें जनगणना की आवश्यकता क्यों है? क्योंकि पिछड़ापन जाति से जुड़ा हुआ है और जाति पिछड़ेपन से जुड़ी हुई है,जन्म के आधार पर पिछड़ापन है,जन्म के आधार पर गरीबी है।वो पिछड़े हैं जो गांव में रहते हैं,जिनको पीने का पानी नहीं है जिनको सड़क बिजली नहीं जिनके तन पर पहनने के लिए वस्त्र भी नहीं है।ये लोग पिछड़े हैं अब 63 साल के आजादी के बाद भी आप उनको न्याय नहीं देना चाहते, जनगणना में ओबीसी की जनगणना नहीं करना यानी ओबीसी को सोशल जस्टिस नकारना है, सरकार सोशल जस्टिस नहीं देना चाहती ।डा. बाबा साहेब अम्बेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले,शाहू महाराज नहीं होते तो ये वर्ग संगठित भी नहीं होते वो अपनी लड़ाई लड़ने की ताकत भी नहीं रखते और उन्होंने समता का विचार रखा समानता का विचार रखा ।
हमारे देश में विभिन्न जातियां होते हुए भी गड़बड़ क्यों है, अलग अलग जाति है इसका मतलब क्या है? यह बुराई है या अच्छाई है? यह सोचने का समय नहीं है। जातियां विविधता में........
अलग जाति अलग देश।
अलग भाष अलग प्रदेश।
फिर भी हमारा एक देश। (तालियां)
इसलिए पिछड़े हुए वर्गों की देशभक्ति के बारे में आशंका जताना गलत है।
(जोर देकर बोले) किसी भी काम के लिए होते हैं हम,वो पिछड़ापन सालों से है सदियों से है उनको हम Welfare State Government में न्याय देना चाहते हैं कि नहीं देना चाहते? यह सवाल है , और काका कालेलकर के बाद मंडल आयोग आया , मंडल आयोग ने कितनी जातियां ढूंढ़ी? 3743 इतनी कास्ट हैं कितनी कास्ट हैं ?(आश्चर्य से चौंककर बोले) उसमें उपजातियां भी हैं, अब वो कहते हैं रोटी बेटी का व्यवहार होता है, मगर नहीं होता है । होना चाहिए। अरे भाई जातियां इतनी हैं कि जय प्रकाश नारायण ने जाति तोड़ो आंदोलन किया, कई लोगों ने Intercaste Marriage किया मैंने भी किया अब Intercaste करने वालों की अलग जाति हो गई है जाति तो नहीं गई ।(सांसद हंसते हैं) , तो जाति नहीं जाती।
तो मंडल आयोग ने कहा कि 52% ओबीसी हैं उनको 52% आरक्षण मिलना चाहिए लेकिन कोर्ट ने फैसला किया 50% आरक्षण क्यों?
Why 52% Reservation? जिन लोगों को आज तक सोशल जस्टिस नहीं मिला , सामाजिक न्याय नहीं मिला जो दूसरों के बराबरी के नहीं हैं उनको न्याय देने के लिए ही आरक्षण है । और उनको आरक्षण किस आधार पर दिया जाता है केवल जाति के ही आधार पर दिया जाता है आरक्षण, इसलिए जातिगत जनगणना आवश्यक है।....... तालियां!
अध्यक्ष महोदय! रेंडके आयोग की 2004 में अटलजी की सरकार के काल में उनकी नियुक्ति हुई थी, उन्होंने 2008 में हमारे अध्यक्ष ने सोशल वेलफेयर मिनिस्टर जी को अपना रिपोर्ट दिया, उनमें भी ओबीसी जातियां आती हैं , उन्होंने कहा 47% ओबीसी यों को राशनकार्ड नहीं है,ऐसे कई लोग हैं जिनका मतदान लिस्ट में नाम नहीं है यह आयोग Nomadic Tribe के लिए नियुक्त किया गया था। रेंडके आयोग की जो रिपोर्ट है वो सरकार ने जारी नहीं की, मेरी मांग है कि सरकार को रेंडके आयोग की रिपोर्ट को जारी करना चाहिए और ओबीसी को न्याय देना चाहिए,उनको घर नहीं, उनको जमीन नहीं!!
अध्यक्ष महोदय! ये तीन काका कालेलकर कमीशन, मंडल कमीशन और रेंडके कमीशन इन सबका परिणाम यही है कि देश का सबसे बड़ा सवाल पूछा जा रहा है कि ओबीसी की जनसंख्या कितनी है? इसका अंदाजा किसी को नहीं है, और क्या कहा Scientific Base तैयार होगा? किसी को कहने का कोई अधिकार नहीं रहेगा कि यह Scientific Base तैयार है। और ये ओबीसी की जनसंख्या है और इस जनसंख्या के आधार पर विभिन्न प्रदेशों में आरक्षण दिया जा सकता है अब संविधान में Sheduled Caste के लिए Shedule है। राजीव गांधी ने संविधान में संशोधन करके पंचायत राज में शेड्यूल लाया मेरी मांग है कि Schedule Casteके लिए Schedule Tribe के लिए Schedule है Constitution में अभी OBC के लिए भी Schedule होना चाहिए।
उसके लिए अलग मंत्रालय भी होना चाहिए। बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन उनके लिए सब जातियां बराबर हैं।
क्रीमीलेयर जारी है। एससी एसटी को क्रीमीलेयर नहीं है लेकिन ओबीसी को क्रीमीलेयर है मेरा बेटा ओबीसी की सहूलियत नहीं ले सकता, यादवजी का बेटा ओबीसी की सहूलियत नहीं ले सकता क्योंकि अभी क्रीम निकालो , निकालने के लिए क्रीम बचा ही कहां है? क्रीमीलेयर लगाया है जिसके कारण उनकी सहूलियतें उनको मिलती नहीं , एक ही बात कहना चाहता हूं अध्यक्ष महोदय अभी आपने जो तथ्य बताए इन्होंने ओबीसी का तथ्य बताया। एससी को 13% आरक्षण है एसटी को 9% है कुछ राज्यों में 7% आरक्षण है इतने लोग सर्विस में हैं क्या? जैसे सच्चर आयोग से आपने मुसलमानों की स्थिति का जायजा लिया मैं मांग करता हूं कि एससी एसटी और ओबीसी के आरक्षण उनको 63 वर्षों में मिले क्या ? नहीं मिले।13% में से केवल 4% मिला, ओबीसी को तो केवल 2.4% ही मिला है, आरक्षण 27% है लेकिन मिला कितना है? कागजों पर केवल फैसले करने से उनको न्याय नहीं मिला है जब उनका अधिकार उनको मिलेगा तब न्याय मिला ऐसा कहा जायेगा और वह न्याय आज तक नहीं मिला है। इसलिए यह लड़ाई है सोशल जस्टिस की, जनगणना में केवल नाम लिखना इतना ही नहीं है। जाति बचाने से ढकने वाली नहीं है, हमारे संघर्ष भी हो रहे हैं। अब अमीरों और गरीबों में भी अंतर बढ़ता गया है। चरणदास जी मैं आपसे पूछना चाहता हूं 63 साल में सबको बराबरी का दर्जा होता, सबको बराबरी का अवसर होता तो ओबीसी भी आरक्षण नहीं मांगते ( आवाज बढ़ाकर सांसद बोले क्या बात है.....क्या बात है सांसदों का प्रतिसाद)।
लेकिन क्यों वो पिछड़े ज्यादा पिछड़े हुए हैं? उनको किसी Education में नहीं, Politics में नहीं हर स्तर पर वे पिछड़े रहेंगे।54% population अगर विकास से, सुविधा से,प्रगति से दूर रहेगी तो देश कैसे आगे बढ़ेगा? मुझे लगता है कि ओबीसी को राष्ट्रीय मुख्यधारा में लेकर उनको आरक्षण सुविधा और जनगणना करना ही चाहिए!(बेंच बजते हैं...... तालियां बजती हैं)।
OBC की जनगणना की मांग हम इसलिए कर रहे हैं कि ये अवसर है सरकार को भी और आपको भी,ये मौका खोना नहीं चाहिए। स्वामीजी! मोइली जी! ऐसे मंत्रिमंडल में तुम्हारी बात नहीं सुनते हैं तो क्यों बैठे हो ऐसे मंत्रिमंडल में? (सांसद जोर से हंसते हैं तालियां बजाकर) होने दो ओबीसी के लिए एक लड़ाई! लोग सर पर उठायेंगे आपको।
तो अध्यक्ष महोदय! ये मामला जनसंख्या का है 80 साल ओबीसी की जनगणना नहीं हुई। एक कालम भरना है बस्स, Sheduled Caste, Shedule Tribe और OBC का एक और कालम ।OBC लिखकर उसमें अपनी Caste लिखेगा। उसमें नुकसान क्या है? और क्या नुकसान है सरकार का भी?
सारे ओबीसी संगठन देश में मांग कर रहे हैं कि उनकी जनसंख्या का Census होना चाहिए,यह मांग उठा रही हैं, सरकार क्या गूंगी है? क्या उसके कानों पर ओबीसी की आवाज नहीं जा रही है? ओबीसी आवाज उठा रहे हैं,आज मैं कहना चाहता हूं सरकार को...... आज मंत्री महोदय जबाब देंगे, तो उनको यहां घोषणा करनी चाहिए कि ओबीसी की अलग जनगणना होगी।(आवाज उठाकर जोरदार तालियां)
अगर आप नहीं करेंगे तो OBC,SC,ST यानी 75% Population का गुस्सा आप पर होगा। आज एक समय सरकार आपकी है, सरकार किसी भी हो, सरकार को होता है समाज को न्याय देना, तो न्याय देने काम आप करें ।एक Constitutional Responsibility आप पर आई है और वो Constitutional Responsibility है। जिस Constitution में पिछड़े हुए वर्गों को न्याय देने की भूमिका डा. बाबा साहेब अम्बेडकर ने लिखी है,उस बाबा साहेब का सपना और भारत के सभी गरीब लोगों की आशा, आकांक्षा है कि लोकतंत्र में हमें न्याय मिलेगा इस विश्वास के साथ 63 साल वो जीते आए हैं,वो विश्वास कभी न कभी पूरा करो।
ज्यादा मांग नहीं है केवल हमारी जनगणना करो।हम इस देश के नागरिक हैं हमारी भी गिनती करो! तो एक बार ये गिनती करो!
*जय हिन्द! जय भारत
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें