Wahy is need in education for muslims

 *शिक्षा क्यों ज़रूरी है*?

जी हाँ दोस्तों अस्सलामु अलैकुम! उम्मीद करता हूँ की आप सभी खैरो आफियत से होंगे।

आज बात तालीम की हो रही है,हमारे मुल्क हिदुस्तान मे सबसे ज्यादा कोई पिछड़ा है वर्ग है वो समुदाय है तो मुस्लिम, ये भारत सरकार की मिश्रा कमेटी, कुंडू कमेटी ये सब कमेटीयों ने स्पष्ट कर दिया की मुसलमान सरकारी नौकरीययों मे, स्कूली विद्यालय मे, और कॉलेज शिक्षा मे और मदरसों मे बच्चों की की शिक्षा का अनुपात पिछड़ा हुआ है। राजनीती मे सबसे ज्यादा मुसलमानो की स्तिथि दलितों से भी खराब है, आज अगर आरक्षण की ज़रूरत है तो मुस्लिम समुदाय कों है।


*लफ्ज़ इक़रा*

मुसलमान कौम का माज़ी बहुत ही अच्छा गुज़रा है जिसमे कोई शक नहीं, लेकिन उन्होंने अपने तरीके कों छोड़ दिया. जो तरीका पेगम्बर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दिया था, उसके साथ मुसलमानो कों मुकद्दस क़ुरआन शरीफ जैसी किताब दी जो कयामत तक बाकी रहने वाली है, उस का पहला शब्द या अल्फाज़ या सूरह इकरा की आयत इक़रा नाज़ी हुई जिसका मतलब है पढ़ो. पढ़ो पढ़ो.

ये हमे मेसेज मिला है पढ अपने रब के नाम से, क्योंकि पढ़ेंगे नहीं तो समझ नहीं पाएंगे, अपने कों, दूसरों कोंऔर अपने आस पास के माहौल कों इसलिए पैगंबर सहाब ने हमें ये मेसेज दिया है की *इल्म हासिल करना हर मुसलमान मर्द और औरत पर फर्ज़ है*।

लेकिन अफ़सोस हमने इल्म हासिल करना छोड़ दिया इल्म चाहे दीन का हो या दुनिया का इल्म, दुनिया कों समझने के लिए असरी तालीम है जो हयात तक काम आती है।दीनी तालीम जो मुक्कमल दुनिया मे अमल के साथ आख़िरत मे भी काम आती है, लेकिन हमें दीनी तालीम इतनी हासिल करनी ज़रूरी है की हमें हलाल और हराम की समझ और अपना अज़ीज़ कोई गुज़र जाए या अपने बाप दादा तो उसकी नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ा सके।

हमें इस्लाम से ये मेसेज मिला है की आप कों आलिम बनना फर्ज़ नहीं है मगर आप बनते हैं तो बहूत अच्छी बात है, मुफ़्ती, हाफ़िज़, कारी, आलिम बनते है तो बहुत अच्छी बात अगर उस पर अमल करें और उससे फैलाये तो बहूत काबिल ए फ़ख्र है,।

लेकिन अफ़सोस आज का मुसलमान उस तालीम से भी पिछड़ गया जो हलाल और हराम की की समझने की जरूरत थी।

लेकिन उससे भी दुनिया की तालीम (असरी) तालीम से काफ़ी हद तक पिछड़ गया है।


*मुसलमन कैसे पिछड़ गया*?

1.मुसलमानो ने इल्म हासिल करना छोड़ दिया

2.मुसलमानो ने अल्लाह की इबादत करना छोड़ दिया है, जिसका सबूत मस्जिदे खाली नज़र आप रही है।

3.मुसलमनो ने हुकुकुल्ला और हुकुकुल इबाद मे सख्त कोताही की।

4.मुसलमानो ने मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के तरीका छोड़ दिया।

5.मुसलमान मुत्ताहिद होने की बजाय मुंतशीर(बिखर) गये।

6.मुसलमानो ने गलत रस्मो कों अपना हथियार बना लिया।

7.मुसलमनो ने शादी और मरने पर फिज़ूल खर्ची कों बढ़ा दिया है.

8.मुसलमनो ने मुकद्दस कुरआन पाक कों पढ़ना और समझना छोड़ दिया।


9.मुसलमानो ने एक दूसरे की मदद करना छोड़ दिया।


10.मुसलमान ने कारोबार कारोबार कों छोड़ दिया, जो नबी की सुन्नत है।


11.मुस्लिम युवा अक्सर गंदे कामो मे व्यस्त हो गये.

12.मुसलमानो ने दीनी तालीम हासिल करना छोड़ दिया।

13.मुस्लिम कौम के रहबरी का चोला ओढ़ कर मिंबरे रसूल पर एक दूसरे कों जन्नत और जहन्नम का टिकट फिक्स करने वाले बाअज़ उलमा ने फिरके वारियत की हवा कों तेज़ कर दिया जिससे मुसलमान बिखर गया।

14.मुसलमान एक दूसरे से लड़ कर ही हारे है किसी और ने नहीं हराया है, अंग्रेजो के खिलाफ जंग हो या लोकतंत्र मे चुनावी जंग हो, अफ़सोस मुसलमान कों मुसलमान ने ही हराया है किसी और ने नहीं ये कटु सत्य है।

15.मुसलमान एक दूसरे से टांग खींचाई मे सबसे आगे है।

16मुसलमानो कों दुनिया मे आने का मकसद इल्म सीखना और एक रब की इबादत करना मगर उन्होंने अपना मकसद रोजी रोटी और पेट भरना लगा दिया।

17.मुसलमानो ने शिक्षा पर पैसा खरच करना छोड़ दिया जिससे उनकी औलाद अनपढ़ रह गयी है।

18.मुसलमनो कों हॉस्पिटल, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, और मीडिया हॉउस जैसी संस्थाएं खोलनी चाहिए थी मगर ये संस्थाएं आज न के बराबर है।

19. मुसलमान युवा मोबाइल और सोशल मीडिया मे फंस गया।

20. अक्सर मुस्लिम युवा जो नशे मे रहते है जो बर्बादी की वजह बना।


21.अक्सर मुस्लिम नौजवान माँ बाप के ना फरमाबरदार बन गए है इसलिए उनकी बद दुआ लग जाती है, इसलिए ज़िन्दगी मे माँ-बाप और अपने उस्ताज़ का जिससे अपने इल्म सीखा है उसका अदब करें।


22. आज नौजवान पीढ़ियों अपनी ऊर्जा कों खेलो मे खर्च कर रही है जिसका भविष्य मे कोई फायदा नहीं है।

23. आज हमने किताबों से ताल्लुक तोड़ दिया।

24. आज हमने सादगी कों छोड़ दिया और मौज मस्ती, और अय्याश पसंद बन गए।


जो मैंने लिखा है आज के समय के हालात कों महसूस करते हुए लिखा है, ये हम मुसलमानो मे सख्त सुधार की आवश्यकता है, ये लेख किसी के खिलाफ भी नही है जो देखा वो ही लिखा है। आप सब साथी इस पर जरुर ध्यान दे और अपने भाइयों कों, पड़ोसियों कों या रिश्तेदारों कों जो भी अपना बंदा स्कूलो मे पढ़ रहा है उसको प्रेरित करें, जीवन मे आगे बढ़ने की नसीहत करें और उनकी कोई समस्या हो तो सुने और उसका समाधान करें। साथ अपने बच्चों कों मकतब की तालीम ज़रूर से ज़रूर दिलाये, मदरसे मे और मकताब मे पढ़ा हुआ बचा अदब और अनुसासन वाला बनेगा और आप की क़द्र भी करेगा ताकि आप की वजह से अगर अच्छा काम होता है तो उसका सवाब आप कों मिलेगा।



*हमें क्या करना होगा*


*मेरी पोस्ट पढ़ने वालो कों अहद करना होगा तभी हम सब और हमारे भाई बहिन कामयाब होंगे और आगे सही दिशा कों और मंज़िल तक पहुंचेंगे। इंशाअल्लाह.

हमारी बर्बादी की वजह ऊपर लिखे हुए बिन्दु है।

अगर हम चाहे तो अपने आप कों बदल कर और अपने मुआशरे कों सुधार सकते है।

हर पढ़ा लिखा जागरूक बने, और अपने आस पास के जितने भी भाई बहिन पढ़ रहें है या पढ़ने से वंचित है उनको प्रेरित करके स्कूलो से जोड़े जिसने 12 वी पास कर लिए है अब आगे नहीं पढ़ना चाहहता तो उसको आईटीआई या rscit कंप्यूटर कोर्स करवा ले ताकि उसको भविष्य मे फायदा जरुर मिलेगा।


लेखक :- मुराद खान बाड़मेर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...