मुस्लिमों का राजनीतिकरण

 दोस्तों सलाम व आदाब ।मुझे उम्मीद है कि आप हज़रात खैरो आफियत से होंगे।आज काफी दिनों बाद एक पोस्ट लिखने का मन कर रहा था।तब सोचा किस.तरह का विषय चुना जाए।एक दिमाग़ मैं विचार आया कि अभी राजस्थान के अंदर पंचायत समिति औंर जिला परिषद सदस्यों के चुनाव का माहौल गर्म जोशी के साथ चल रहा है ।हिन्दुस्तान के मुखतलिफ शूबो मैं चुनाव होते रहते है और चलते रहते है।तब एक टापिक समझ में आया कि ,"मुसलमानों का राजनीतिकरण"पर एक लेख लिखा जाए।


क्योंकि ये बात सत्य है कि जब किसी भी रियासत के अन्दर चुनाव आते हैं तब वहाँ पर हर पार्टी को मुसलमान तबका याद आता है।उससे पहले कुछ भी याद नहीं आता है।आज ये माहौल हिन्दुस्तान के अंदर चल रहा है।हर रियासत के अन्दर मुसलमानों की आबादी के मुताबिक उनकों अपना प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है और जो पार्टी मुसलमानों को पाल पोष कर बड़ा तो कर देती है ,मगर उनका पूर्ण विकास नहीं कर सकती है।

आज हिन्दुस्तान के अंदर केंद्र और अधिकतर शूबों मैं भाजपा सरकार सत्ता मैं है जिनका वर्चस्व काफी बढता नजर आ रहा है।और उसके विपक्षी बड़ी पार्टी कांग्रेस जिनका वर्चस्व काफी घटता नजर आ रहा है।ऐसा  लग रहा है कि कांग्रेस सरकार हाशिये पर आ खड़ी हुई है।यह विशलेषण खुद कांग्रेस सरकार को करना है।बाकी अन्य सभी पार्टियां जिनका वजूद अधिकांशतः राज्यों तक ही सिमीत है।

चुनाव का वक्त आता है ,मुसलमान जरूर याद आता है।एक अहम पार्टी क़ो छोड़ कर,बाकी सभी पार्टियों को।जैसे ही चुनाव का वक्त आता है और मुसलमानों के वोट लेकर ,मुसलमानों को भूल जाते हैं।जब जरूरत पड़े तभी बुलाना है, जरूरत नहीं पड़े तब क्यों बुलावे।अपनी जरूरत इनके वोटों से थी, अब अपना काम बन गया, भाड़ मैं जाए जनता।।अब मुसलमानों का कार्य है कि जिनको आप ने सत्ता की कुर्सी पर बिठाया है उनके कान मैं आवाज डालो कि जनाब हम मुसलमान हैं हमारा काम करो। बस हां हा करते  रहेंगे।क्योंकि जब बच्चा रोएगा नहीं तो मां भी दूध नहीं पिलाऐगी । ये बात सत्य है।जबहम जागते हैं तब तक हमारा काम तमाम हो जाता है।


आज हिन्दुस्तान के अंदर कोई भी पार्टी कितनी ही बड़ी सैक्यूलर क्यों न हो ,बस दिखती कुछ ओर है करती कुछ ओर है।

एक कहावत है न हाथी के दांत खाने के कुछ ओर होते है ओर दिखाने के कुछ ओर होते हैं।।

सिवाय एक पार्टी को छोड़ कर बाकी सभी पार्टियां अल्पसंख्यक और दलितों के बल बूते  पर जीत कर ही संसद या विधानसभा मैं प्रतिनिधित्व जाते हैं।

मुसलमानों का राजनीतिकरण क्यों हो रहा है ?

मुसलमानों का उपयोग वोटबैंक के रूप मे क्यों हो रहा है?

हां!मुसलमानों का उपयोग वोट बैंक के रूप में होता है।हिन्दुस्तान मुल्क के अन्दर सिवाय एक पार्टी के अलावा बाकी सभी पार्टियां, जिनके ज्यादातर प्रतिनिधित्व मुसलमानों के बल बूते पर ही जीत के संसद या विधानसभा मैं जाते हैं।

लेकिन मुसलमानों के लिए क्या कार्य करते हैं?

मुसलमानों के विकास के लिए क्या रणनीतियाँ बनाते हैं?

क्या मुसलमानों के लिये आरक्षण की व्यवस्था है?

मुसलमानों के विकास के लिए क्या क्या कदम उठाए जारहे हैं।

सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिस्रा कमेटी मैं बतायी गई मुसलमानो की स्थिति को लेकर सरकारें कितनी गंभीर है।

इन सब प्रशनों का उत्तर ना ही मिलेगा।क्योंकि सभी सत्ता धारी पार्टियों को आपके विकास की जरूरत नहीं है, बल्कि वोटों की जरूरत है।यही सच्चाई हमारे मुल्क हिन्दुस्तान मैं मुसलमानों की है।

जो राजनैतिक प्रतिनिधित्व जीत के जब संसद या विधानसभा में जाता है लेकिन मुसलमानों के काम काज के बारे मैं काभी बात नहीं करेगा।संसद के अन्दर मुसलमानों के खिलाफ कैसे भी बिल लाए जाएं, आपके वोटों से जीतने वाला उम्मीदवार कभी आप का मसीहा  नहीं बनेगा।बड़ै अचरज की बात है, आपके वोटों से जीतने वाला उम्मीदवार ,आपकी आवाज़ कभी नहीं बनता।मगर आपका बनेगा तो वहीं जो आपका अपना होगा।

संसद के अन्दर इतनी संख्या में, सैकडों की संख्या में प्रतिनिधित्व बैठे हैं, फिर भी आपकी आवाज मात्र 1-2 प्रतिशत ही उठाते हैं लेकिन आपके ही वोटों से 60 प्रतिशत जीत के संसद मैं जाते हैं।एसा क्यों? 

भाईयों हमें सोचने और समझने की बात है।आज का वक्त बहुत नाजुक है, अपने प्रतिनिधित्व को सही तरीका से पहचान कर ,ही उसको वोट देंवे।आपकी भलाई और आपका विकास वही बन्दा करेगा जो अपना होगा।।

अपना नेतृत्व करना खुद सीखें, आपकी मुसीबत मैं कोई भी पार्टी सहायता नहीं करेगी, न कांग्रेस और न कोई दीगर पार्टियां ।अपना संघर्ष खुद करिए ,अपना संबल खुद बनिए।वरना लोग तो आप की जड़ें उखाडऩे के लिए तैयार हैंं।


अपन

                   💐💐धन्यवाद💐💐

                   जय हिन्द जय भारत 

मुराद खान जयसिंधर ,अध्यापक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता।



12 वीं कला वर्ग का परिणाम (आशा और निराशा)

जी हाँ दोस्तों सलाम आदाब,   जैसे ही कल 12वीं क्लास का कला वर्ग का परिणाम आया / ही थोड़ी सी खुशी भी हुई थोड़ी सी गमी भी हुई / इसका कारण यह है कि मैं बाड़मेर जिले की बात कर रहा हूं/ बाड़मेर जिले का जो दैनिक भास्कर बाड़मेर भास्कर समाचार पत्र है ,उसके मेन पृष्ठ पर 40 से ज्यादा लगभग बच्चों के फोटो थे, साथ में प्रतिशत भी लिखे हुए थे / उन प्रतिशत का( दायरा) आंकड़ा 90 से 100% के मध्य था /उसमें निराशा की बात यह थी मुस्लिम बालक का कोई फोटो नहीं था/ न कोई नाम न कोई इतने प्रतिशत तो इसका मैसेज मुस्लिम समाज में नकारात्मक जाता है, क्योंकि मुस्लिमों का जो छात्रों का जो प्रतिशत है वह 90 से कम है मुस्लिम समाज का अनुपात भी कम है यह सोचनीय प्रश्न है/
मुस्लिम छात्र  आज के  दौर में दो जगह पर शिक्षा हासिल करते हैं/ एक वह संस्थान जो राजकीय संस्थान है, यानी सरकारी संस्थान सरकारी कॉलेज हो सरकारी विद्यालय हो सरकारी विश्वविद्यालयों चाहे कोई भी हो  राजकीय हो/ दूसरी वे संस्थान जो प्राइवेट हो या निजी हो जैसे  निजी विद्यालय ,निजी कॉलेज, निजी आईटीआई संस्थान, निजी डिप्लोमा ,संस्थान आदि / इन संस्थानों में मुस्लिमों के बच्चे शिक्षा हासिल करते हैं इनमें सबसे ज्यादातर बच्चे सरकारी संस्थानों में शिक्षा हासिल करते हैं /सरकारी शिक्षण संस्थानों की बात करें तो सबसे ज्यादा सरकारी विद्यालय हैं/ और सरकारी विद्यालय में जो पढ़ाने वाले जो अध्यापक हैं ,उनमें सबसे ज्यादा हमारे मुस्लिम नौकर अध्यापक ही है /अफसोस की बात यह है इन विद्यालयों में अपने ही टीचर अपने ही  पैरों पर कुल्हाड़ी मारते हैं/ मैं सब की बात नहीं कर रहा हूं/ कुछ अध्यापक अच्छे भी है कुछ अध्यापक ईमानदार मेहनती भी है / शिक्षा की अहमियत को समझते भी है/ लेकिन अधिकतर अध्यापकों की मैं बात कर रहा हूं , अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतते हैं हमारे लिए सबसे बड़ा अफसोसजनक/ विषय है/

कुछ बच्चे और बच्चियाँ निजी शिक्षण संस्थानों में
पढते हैं,अपने लाडलों  की पढ़ाई करवाते हैं, उनके पास काफी  रूपया पैसा है/  सही बात है जिनके पास रुपया और पैसा वही अपने बच्चों को अच्छी तरह  से निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करवाएगा/ हर कोई आदमी इतना अमीर नहीं है,  हर कोई आदमी इतना गरीब भी नहीं है ,फिर भी आज कल सरकारी स्कूलों में स्टाफ की सूची देखी जाए प्रत्येक विद्यालय में छोटे स्तर पर तो सबसे ज्यादा मुस्लिम अध्यापक ही होंगे /और वहां आबादी उस गांव की आबादी मुसलमानों की ही होगी/ लेकिन अफसोस की बात यह है उस स्कूल का रिजल्ट देखा जाए बड़ा चिंता का विषय हमारे सामने आ जाए /क्योंकि उस गांव के पटेल स्कूल के अध्यापक के बीच तालमेल बैठ जाता है लेनदेन का फिर पढ़ाई को कौन देखता है/ अध्यापक  अपनी कागजी कार्रवाई करने में मस्त रहता है ,और उस गांव का पटेल उस अध्यापक से वसूली करने में व्यस्त रहता है फिर शिक्षा का क्या हाल होगा?

 निजी विद्यालयों का परिणाम उन विद्यालय में पढ़ाने वाले जो अध्यापक होते हैं यह सरकारी अध्यापक नहीं होते हैं /सिर्फ और सिर्फ उनके पास डिग्री होती है और अनुभव होता है/ वह कम तनख्वाह में अधिक से अधिक बच्चों को मेहनत करवा कर अच्छी शिक्षा ग्रहण करवाते हैं /ताकि उन बच्चों का और बच्चियों का भविष्य सुधर जाए/ निजी विद्यालय के जितने भी अध्यापक होते हैं वह सब अच्छी मेहनत करवाते हैं /उनके सामने दो शर्तें होती है एक तो वह मजबूरी में पढ़ाना पड़ता है, उन्हें दूसरा उनके अपनी पैठ जमाने कै लिए पढ़ाते हैं ,तीसरे नंबर कम तनख्वाह में अच्छी मेहनत करवाते हैं, अगर वह नहीं अच्छी मेहनत करवाएंगे तो उन्हें बाहर का रास्ता भी दिखा दिया जाता है / इस वजह से निजी विद्यालयों में कड़े कानून और अनुशासन की पालना जरूरी होती है /तब जाकर उन बच्चों का और बच्चियों का अच्छा भविष्य तय होता है /और उनका परिणाम भी अच्छा आता है प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे और बच्चियां जिन का रिजल्ट आजकल देखा जाता है औसत 60 से 90 के बीच रहता है /और सरकारी विद्यालयों की बात करें परिणामों की तो उनका जो औसत परिणाम रहता है वह 40 से 70 के बीच रहता है तो दोनों की स्कूलों में दिन-रात का अंतर है /प्राइवेट स्कूलों में फैसिलिटी ज्यादा है /बाहरी नॉलेज आंतरिक नॉलेज भी दिया जाता है /सरकारी स्कूलों में सिर्फ और सिर्फ किताबी ज्ञान दिया जाता है /सरकारी स्कूलों के जो अध्यापक हैं उनकी तनख्वाह 60 हजार से ऊपर दी जाती है ,लेकिन निजी  स्कूलों में टीचर होते हैं उनकी तनख्वाह 10 हजार से 20 हजार  के बीच रहती है  अधिकतम/ इतना दिन रात का अंतर होते हुए भी बच्चों के परिणाम में परिणामों में इतना अंतर क्यों ?यह बड़ा सोचनीय प्रश्न है इसके जिम्मेदार कोई सरकारी विद्यालय के अध्यापक और उनके अभिभावक है/ चाहे कोई भी अब विद्यालय हो उनके जिम्मेदार विद्यालय के स्टाफ और उस विद्यालय के गांव के लोग और उन बच्चों के अभिभावक ही जिम्मेदार हैं/  क्योंकि हमारे मुस्लिम समाज के अंदर अभी तक लंबी सोच नहीं चल पा रही है /जिसकी वजह से हमारा नाम और फोटो अखबार के उस मेन पृष्ठ पर आना चाहिए /वो  नहीं आ रहा है ,जो कहीं ना कहीं बीच में बाधा बन रही है/

 कुछ ऐसे गांव है जहां पर जाट या बिश्नोई समाज के लोग रहते हैं /उन सरकारी विद्यालयों में बच्चों का परिणाम निजी विद्यालयों से भी अच्छा रहता है, क्योंकि वहां के जो अध्यापक है उस गांव के लोगों के कहने पर चलते हैं उन लोगों के इशारों पर चलते हैं /उनका इशारा है शिक्षा की और है,इसलिए वे लोग जागरुक है उनका समाज जागरूक है और उन विद्यालयों की पढ़ाई शिक्षा प्राइवेट विद्यालय से भी बेहतर है/  यानी कि एक सरकारी विद्यालय होते हुए भी प्राइवेट विद्यालय से भी अच्छी पढ़ाई करवाते हैं /तब जाकर उनके रिजल्ट बच्चे प्रति बच्चे के परिणाम 90 से ऊपर रहते हैं/

  मेरे कहने का मतलब यह है सरकारी विद्यालय में पढ़ाई अच्छी नहीं होती या गुणात्मक नहीं होती है/ तो इसका कारण यह है की जिस गांव में यह विद्यालय है वहाँ  के लोग जागरुक नहीं है, चाहे कोई भी समाज में मुस्लिम समाज व मेघवाल समाज और चाय भी समाज और चाय राजपूत समाज हो मैं किसी की बात पर्सनल नहीं कर रहा हूं / लेकिन वहां के लोग जागरूक नहीं होंगे तो उस विद्यालय की पढ़ाई का स्तर नहीं सुधरेगा/  यह बात हकीकत है क्योंकि सरकार सिर्फ और सिर्फ कागजी कार्रवाई देखती है/ ना कि उनकी असली मूल्यांकन नहीं करती है / जिन गांव में सरकारी स्कूल है और जहां उन गांव में अध्यापक भी है और उस गांव के लोग विश्नोई हो जाए चौधरी समाज के हो तो वहां पढ़ाई अच्छी हो जाती है प्राइवेट विद्यालय से बेहतर  है,तो इसका यही कारण है कि समाज के अंदर जागरूकता / तो सबसे पहले समाज के अंदर जागरूकता लाना है /उसे पहले अपने बच्चों को शिक्षित बनाना जरूरी है यह मैसेज आगे फॉरवर्ड करें/

धन्यवाद🙏💕 

मिट्टी का बर्तन

दोस्तों सलाम आदाब आज मैं आपको एक नए प्रयोग  की ओर ले जा रहा हूं क्योंकि आज उस पेशेवर जाति के पास ले जाता हूं जो मिट्टी के बर्तन बनाते हैं ।हर इंसान के दिमाग में यह प्रश्न उठता है कि ,मिट्टी के बर्तन जो बनाते हैं वह कुमार जाती है । लेकिन वह बर्तन को घड़े को उसका रूप कैसे देते हैं ,?उसको पकाते कैसे हैं? मिट्टी कहां से लाते हैं? चित्रकारी कैसे करते हैं य?दिमाग हर आदमी के दिमाग में उपस्थित होता है तो आइए मैं आपको यह सारी स्तिथि क्लियर करवा देता हूं।
कुम्हार के बर्तन बनाने की कार्य की कारीगरी विश्व प्रसिद्ध अपने आप में अद्भुत है। वाकई इस दुनिया में कुम्हार जितनी कोई मेहनत नहीं करता होगा ,क्योंकि जितने कुमार की मेहनत है उतना फल कुम्हार को नहीं मिल पाता है।
तो आइए मिट्टी के बर्तन कैसे बनाते हैं?
सबसे पहले कुमार मिट्टी लेने के लिए बहुत दूर जाता होगा वह मिट्टी हर जगह उपलब्ध नहीं होती है वह ऐसी जगह होती है जहां कोई पुराने जमाने में कोई तालाब हो या कोई टोबा हो तो वहां बहुत गहराई में मिट्टी मिलती है जो चिकनी मिट्टी होती है उस मिट्टी को ऊंट गाडा या गधे पर लादकर मिट्टी लाता है उसके बाद मिट्टी को कूटकर शंकर आटे की तरह गोदकर तैयार करता है फिर उस मिट्टी को जैसा रूप देना चाहे जैसा आकार देना चाहे तो वह दे सकता है क्योंकि जैसा बर्तन बनाना है उसे हिसाब से वह मिट्टी के पेड़े मिट्टी के ढेले बनाकर इकट्ठे करता है फिर बर्तन बनाने की मशीन होती है जिसको बोलते हैं उसको एक गोल आकृति होती है उसको लकड़ी से घुमाया जाता है फिर उसके ऊपर कोई सा भी बर्तन बनाना हो चाहे घड़ा हो या मटका हो कोई अन्य बर्तन हो आकार में बर्तन को रूप दे दिया जाता है
फिरौन बर्तनों को कुछ सूखने दिया जाता है फिर कुमार उन बर्तनों को अपने गोद में लेकर उनके अंदर एक गोल पत्थर होता है जिसको कुनेरा बोलते हैं ऊपर दूसरे हाथ में एक हाथ की आकृति की भरी होती है जो लकड़ी की बनी होती है उससे कूट-कूट कर बड़ा करते हैं इसी तरह पूरा दिन लग जाता है घुटने में फ्रेंड बर्तनों को बर्तनों में चित्रकारी की जाती है महिलाओं द्वारा किरण को पकाया जाता है

वतन का पैगाम

                       वतन का पैगाम
1
   हुब्बुल वतन है ईमान
   इसकी हिफाजत करना है ईमान

2
   वतन को मुसीबत से बचाना है ईमान
    वतन को अपनी जान समझना ईमान

3
   चाहे जंग हो या सामाजिक  मामला
   मगर राह ए वतन नेक काम है ईमान

4 कानून के मुताबिक  वतन कौ अव्वल रखना  ईमान
   आईन को अपने दिल में रखना है ईमान

5 वतन के रखवाली करने वालों को मुराद  करता है       सलाम
   कोरोना महामारी से लड़ने वाले चिकित्सकों को         मुराद करता है सलाम।।



  •           जय हिंद जय भारत

कोरोना वायरस महामारी - मुस्लिम अवाम से इल्तजा

 कोरोना वायरस महामारी- मुस्लिम आवाम  से                                     इल्तजा
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कोरोना वायरस नामक महामारी ने पूरे विश्व में तांडव मचा रखा है | मैं इस वक्त मुस्लिम आवाम से  इल्तजा करता हूं कि केंद्र सरकार और,राज्य सरकार की दिशा निर्देशों की पालना करें |यह पूरे विश्व के लिए एक मुश्किल घड़ी है | इस मुश्किल घड़ी का सामना करें| सरकार की दिशा  निर्देशों के अनुसार चले| सरकार के हर पल का पल का हुकुम माने |नहीं तो यह समस्या हमारे लिए नासूर बन जाएगी| जो कोरोनावायरस में पीड़ित है ,चाहे  कोई भी जाति का हो ,कोई भी धर्म का हो सरकार ने  मुख्यमंत्री सहायता राहत कोष के लिए एक बैंक खाता खोला है, जो व्यक्ति अपने क्षमता के अनुसार उसमें अपने राशि दान कर सकता है |राज्य स्तर पर जिला स्तर पर अलग-अलग कमेटी बनाकर बैंक अकाउंट खाता भी खोला है ,जो भी भामाशाह है दानदाता है वह दान देकर अपना फर्ज निभाए  ताकि उसमें हमारा भी योगदान हो सके | उसका फायदा कोरोना वायरस पीड़ितों को मिल सके|

मैं सभी मुसलमानों से निवेदन करता हूं कि इस महामारी से अपने आप को बचा कर कर रखें| हर समय किसी गरीब की मदद करें और वैश्विक महामारी का सामना करते हुए हर पीड़ित की मदद करें जो मुसलमान अमीर है या दानदाता है, सरपंच है या प्रधान है या जिला प्रमुख है या डेलिकेट है या एमएलए है या एमपी है या राज्यपाल है किसी भी लेवल का आदमी या गवर्नमेंट सर्विस में है या प्राइवेट बिजनेस सर्विस में है बिजनेसमैन है पैसे वाला है जो लोगों को कुछ दे सकता है मदद कर सकता है वह कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों के लिए मदद करें | बाकि सभी मुस्लिम अपने अपने स्तर के अनुसार पंचायत समिति या ग्राम पंचायत स्तर पर कमेटी बनाकर सहयोग करें| सरपंच है जो ग्राम पंचायत के प्रतिनिधित्व है वह अपने पंचायत में हमारे  मिलकर  अपने लोगों के साथ मिलकर पंचायत में गरीब या कोई बीमारी से ग्रसित है ,उनके लिए खर्च करें पैसा सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ गरीब व्यक्तियों तक पहुंचाया जा सके |जो गरीब आदमी है| जितनी मदद मुसलमान करेगा उनके माल में बरकत होगी अल्लाह पाक सखी को पसंद करता है और कंजूस को पसंद नहीं करता है क्योंकि सखी वह होता है जो अपना माल गरीबों को दान करता  है |जो लोग पीड़ित या मार हैं उनके लिए खर्च करता है तो ऐसे सखी या दानदाता को अल्लाह पसंद करता है पसंद करता है|

, यह वायरस बीमारी एक किसी इंसान के द्वारा पैदा नहीं की गई है |यह बीमारी कुदरत के तौर पर पैदा की गई है यह एक प्रकार की आपदा हैं| यह बीमारी कुदरत के तौर पर आई हुई है| यह कोई बीमारी न तो किसी धर्म को,  न किसी जाति को देखती है |यह बीमारी किसी का रिश्ता नहीं रखती है |और कई हमारे साथी ऐसे समझ  रहे हैं, कि यह बीमारी मुसलमानों के कुछ नहीं कर सकती है, मैं कहता हूं इस बीमारी में जो भी चपेट में आया उसको ले डूबूगी |इस से अच्छा है कि अपने आप को बचा कर रखें| और जो इस वक्त आप लोग सरकार का साथ दें| नई नहीं तो चाइना और इटली जैसे हालात पैदा होंगे| अपने घरों से बिना काम बिल्कुल बाहर नहीं निकलना ह|हमें भीड़ में इकट्ठा नहीं होना ही क्योंकि धारा 144 लागू है | क्योंकि आप बिना  वजह है बाहर जाएंगे तो पुलिस  वालों के डंडे भी  बरसेंगे, क्योंकि आपने बहुत सारे वीडियो देखे होंगे अलग-अलग चौराहे पर अलग-अलग शहरों के, पुलिस डंडे बरसा रही है जो लोग बिना  वजह है बाहर जा रहे पुलिस वाले डंडे बरसा  रही है|
       

भारत लोक डाउन -- प्राइम मिनिस्टर श्री नरेन्द्र मोदी

भारत लोक डाउन - प्राइम मिनिस्टर श्री नरेंद्र मोदी
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हमारे देश के प्रधानमंत्री ने कोरोना   के चलते पूरे भारत को 21 दिन यानी 14 अप्रैल तक लोक         डाउन रखा है| धारा 144 लागू है पुलिस प्रशासन मुस्तैदी के साथ काम कर रहा है |अस्पताल, एटीएम पेट्रोल पंप खुले रहेंगे,बैंक ,किराना स्टोर, अन्य दफ्तर खुले रहेंगे| बाकी सभी प्रकार की दुकानें और सभी प्रकार की फैक्ट्रियां, कारखाने सब बंद रहेंगे |कोरोना वायरस ने पूरे विश्व में तबाही मचा रखी है| हमारे देश में भी कम से कम 10 लोग  कोरोना की वजह से मर चुके हैं |बाकी स्थिति काफी सुधार में हो रहा है धीरे-धीरे |500 के पास मरीजों के ऊपर पॉजिटिव केस चल रहे| भारत  की राजधानी दिल्ली और राजस्थान राज्य में काफी सुधार आ रहा है| राजस्थान में  पिछले 12 घंटे से पॉजिटिव कोरोना का अभी तक पॉजिटिव केस नहीं मिला है ,यह अच्छी खबर आ रही है दिल्ली में 36 घंटे से एक भी करुणा का पॉजिटिस नहीं आया है, तो हर राज्य की सरकारें लोगों भी समय-समय पर दिशा निर्देश एवं जागरूकता अभियान चला रही है|  राज्य सरकारों ने और केंद्र सरकार ने पूरे देश में कर्फ्यू लगा रखा है |मीडिया जनता को जागरूक कर रही है ,प्रशासन जनता को जागरूक करने में लगा हुआ है |कोरोनावायरस के चलते आज शाम को हमारे देश के प्रधानमंत्री ने भी घोषणा कर दी है कि 3 सप्ताह  तक लोक डाउन रखा गया है  | यह जनता का कर्फ्यू है और धारा 144 लागू है| उसको इसका कोई भी उल्लंघन करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी| क्योंकि कोरोना का अभी परफेक्ट इलाज नहीं मिला है, सभी डॉक्टर कोशिश कर रहे हैं वैज्ञानिक कोशिश कर रहे हैं| और कानून तोड़ना सबसे बड़ा अपराध है| आपने आपका बचाव ही उपचार है | यह लॉकडाऊन  जनता का जनता के लिए जनता द्वारा सबको अनिवार्य कर दिया |  14 अप्रैल तक कोरोना से लड़ने के लिए अनावश्यक बाहर ना निकले| कोई जरूरी काम हो तो बाहर निकले| और अपने घरों में बैठे रहे अपने परिवार के साथ जिंदगी  बिताएं| अपने प्लानिंग बनाएं अपनी पढ़ाई करें अपने किताबों से मन लगाएं|  बिना फालतू मुसीबत मोल नहीं ले| और पुलिस प्रशासन की नजर नजर में नहीं आना चाहिए|

थैंक यू धन्यवाद बहुत-बहुत शुक्रिया जय हिंद जय भारत||

कोरोना वायरस कैसे फैलता है, CORONA VIRUS

कोरोना वायरस नामक बीमारी बहुत ही खतरनाक है ।  पूरा विश्व इस बीमारी की चपेट में आ चुका है । इस कू  बारे में अपने आप को बचाना बहुत ही जरूरी है ।पहली बात तो यह यह वायरस हवा में हवा मैं नहीं फैलता है। एक वायरस किसी कोरोना के संक्रमित व्यक्ति से फैलता है।,उसने अपने शरीर को कहीं पर छुआ है या कोई उसने ऐसी चीज पकड़ी हो उसके तुरंत बाद हम लोगों ने उस चीज को छुआ तो हो सकता है वह हमारे भी हो सकता है । क्योंकि जिस चीज पर यह जो वायरस फैलता है कोरोना का मरीज   किसी वस्तु को छूता है तो  उस वस्तु पर 10 से 12 घंटे तक वह वायरस एक्टिव रहता है । उसके बाद डीएक्टिवेट हो जाता है। अगर हमने उस वस्तु को छुआ है तो उसके बाद तुरंत हाथ धोने से  या साबुन से हाथ धोने से वह खत्म हो जाता है । अगर हमने हाथ नहीं धोऐं तो वह हाथ हमारे चेहरे या मुंह पर किसी भी भाग पर पर टच होते हैं तो हमसे संपर्क हो सकता है।
 बीमारी में शामिल हो जाते हैं।
 यह  वायरस एक व्यक्ति के  पास में बैठै व्यक्ति के संपर्क में हो सकता है । छींकने वाले व्यक्ति को यह सावधानी रखनी है, की वह अपने मुंह पर रुमाल या टिशू पेपर से ढके । ताकि पास में बैठे व्यक्ति को दखल ना हो।
# इस  वायरस मैं  अभी आपको यह सावधानी        रखनी जरूरी है -
1.आप लोग अपने घरों से बाहर ना निकले।
 2.अपने आसपास की जगह को साफ रखें।
 3.अपने हाथ और मुंह बार बार धोएँ। कोई भी कार्य      करते हो तो तुरंत बाद में  हाथ जरूर धोएं।
4. किसी बीमार व्यक्ति के संपर्क में न जाए उनसे दूरी      बनाए रखें।
5. अपने मुंह पर रुमाल  या टिशू पेपर लगाना चाहिए।6. अगर किसी अपने परिवार में या रिश्तेदार में किसी    को  स्वास्थ्य संबंधितकोई परेशानी है  तो तुरंत ही   नजदीकी अस्पताल में जाकर इलाज करवाएं।
7.घर से अनावश्यक बाहर ना निकले।
8.प्रशासन की गाईड लाईन का जरूर ध्यान रखें।
9.समय समय पय अपने आप को अपडेट रखें।
10.लोगों की हर समय मदद करें।
11.जनता कर्फ्यू का ध्यान रखें, धारा 144 का ध्यान        रखें

              कोरोना के लक्षण

1. नाक में पानी बहना।
2. गले में खराश होना।
3.खासी होना।
4.बुखार आना।
5.सांस  लेने में तकलीफ होना।

 कोरोना वायरस से  बिल्कुल ना घबराएं इसका इलाज बचाव ही उपचार है। आपको जरूर जरूर सावधानी रखनी चाहिए।


Corona virus, World🌏 Alert 🚨

कोरोना वायरस को लेकर विशैष जानकारी
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लेकर भारत भी अलर्ट मोड पर है ।भारत और सरकार राज्य सरकारों ने देश में चल रही सभी प्रकार की परीक्षाएं ,स्कूल, कॉलेज ,सिनेमाघर ,होस्टल. वगैरह मदरसे, मस्जिदें, दरगाहें, मंदिर,सम्मेलन किसी भी प्रकार के भीड़भाड़ वाले संस्थान बंद करा दिए हैं। 30 मार्च तक किसी प्रकार का सार्वजनिक कार्य नहीं होगा। केंद्र सरकार हमारे भारतीयों को अलर्ट मोड पू रखा है।हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी 22 मार्च को जनता कर्फ्यू रखा है ।,इसमें सभी को सहयोग करने की आवश्यकता है ।भारत सरकार व राज्य सरकार ने जनता से अपील की है कि ,आप लोग इस वायरस से बिल्कुल ना घबराएंं और अपने आप को बचाए और सक्रिय रखें ।दूसरों की हर समय मदद करें । अपने आसपास के वातावरण को साफ रखें इस बीमारी का अभी तक कोई इलाज स्पष्ट रूप से नहीं निकला है ।इसका इलाज बचाव ही उपचार है । हर देश के निवासी अपने अपने देश में डॉक्टर और वैज्ञानिक
ऐन्टी प्रतिरोधक दवाओं की खोजबीन चल रही है 
कोरोना वायरस को लैकर पूरा
विश्व अलर्ट मोड पर है । यह बीमारी चाइना के वुआन शहर से शुरू हुई थी, आज पूरी दुनिया में तांडव मचा रखा है । दुनिया के कुछ ऐसे शहर जहां भीड़-भाड़ इतनी होती की पैर रखने की जगह नहीं मिलती। आज वो भीड़भाड़ वाले शहर कोरोना कै  कारण वीरान नजर आ रहे हैं ।कोरोना को लैकर दवाओं की खोज कर रहे हैं। एंटी  प्रतिरोध दवाइयां बना रहे हैं। भारत में कोरोन वायरस के लगभग  केस 200 के पॉजिटिव पाए गए हैं और 4 की मौत हुई है अभी तक और स्थिति गंभीर होती जा रही है, इसलिए सरकार ने यह निर्णय लिया है 31 मार्च तक सभी प्रकार के इंस्टिट्यूट  शहर भीड़भाड़ वाले संस्थान बंद रहेंगे। इस महत्वपूर्ण जानकारी को आप आगे फॉरवर्ड करें, और सरकार और प्रशासन का के द्वारा जो भी सूचना आती है, आप तुरंत उसका फॉलो करें ।उनके नियमों का उल्लंघन न करें । सरकार जनता के हित में और जनता के कल्याण के लिए यह कार्य करती है।

 धन्यवाद आप इस समाचार को आगे से आगे फॉरवर्ड करें।

शाहीन बाग!!

दोस्तों सलाम आदाब।आज मैं आपके सामने एक नया अध्याय लेकर हाजिर हुआ हूँ, जो.शाहीन.बाग के नाम से प्रचलित है।
आज तकरीबन दो.महीने हो चुके है देश में सी.ए.ए लागू हुआ है।ये कानून लोकसभा में तो पास हो चुका है, राज्यसभा मे भी पास हो चुका है और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी हो चुके हैं।अब यह कानून भी बन चुका है ।ये कानून अपने आप मैं गलत है और अधूरा है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हुए प्रताड़ित लोगों के लिये हैं, उनमें से हिंदू, सिख,बौद्ध, जैन, पारसी ईसाई इन छः धर्मों के लिए है बाकी.मुसलमानों का.नाम नहीं है,क्योंकि मुसलमानो की कोई. जरूरत नहीं है।

इन.लोगों की मुसलमानो के प्रति क्या है योजना?
इन्होंने देश के आसाम राज्य में एन.आर.सी करवाया उद्देश्य ये था कि मुसलमानों को बाहर खदेड़ना लेकिन इनका सपना उल्टा पड गया।19 लाख लोग एन.आर.सी से बाहर हो गए उनमें से 14लाख गैर मुस्लिम थे बाकी 5 लाख मुस्लिम जो एन आर सी से बाहर हो गए।अब ये आसाम की एन आर सी इन के गले पड़ गयी।तब इन लोगों ने विचार करके देश मैं सी.ए.ए लाया जाए ताकि देश मैं एन आर सी होगी तो अपने लोगौ को सी.ए.ए के तहत नागरिकता प्रमाण पत्र दे देंगे।बाकी डिटेन्शन सेन्टर मैं सिर्फ और सिर्फ मुसलमान ही रहेंगे।

लेकिन ये सरकार देश मैं उस समय एन.आर.सी ला रही हैं जब मुल्क की जी.डी.पी 4%से नीचे लुढकी है।हर क्षेत्र मैं मंहगाई का दौर चल रहा।जनता को जवाब देने के लिये इनके पास कुछ नहीं है,यूवा बेरोजगार है ,

Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...