C. A. B, और N. R. C के मायने क्या❓

 दोस्तों नमस्कार सी ए बी और एनआरसी के मायने क्या जब से मोदी सरकार 2014 से सत्ता में आई है तब से लेकर आज तक विशेष 1 वर्ग के खिलाफ आए दिन संविधान से लेकर हमले हो रहे हैं । यह सरकार आर एस एस के एजेंडे पर काम करती  है । इसमें कोई शक नहीं ,क्योंकि इनके अपने संकल्प पत्र में इन्होंने आरएसएस बहुत सारे वादे कर चुका  हैं ,और उन वादों को पूरा करने के लिए देश में आग फैलाने का काम कर रहे यह लोग  धारा 370 जम्मू कश्मीर का मसला हो या ट्रिपल तलाक का कानून हो।हिन्दू. मुस्लिम के नाम पर ये. लोग मुल्क के दो टुकड़े कर रहे है।अब जो भाजपा देश मैं खैल खेल रही हैं ये सब उन की सोची समझी प्लानिंग हैं, क्योंकि इनका एक ही मकसद है मुसलमानों को इस मुल्क से बाहर खदेड़ना जैसे अभी रोहंगिया मुसलमानों को खदेड़ा था।मुसलमानों से मेरी गुजारिश है कि आप इस मुल्क के बा इज्ज्त शहरी हैं और बा इज्ज्त बाशिंदे भी हैं आपको डरने की कोई जरुरत नहीं हैं,।आपको बाबा साहब.भीमराव अंम्बेडकर का बनाया हुआ संविधान बोलने का हक दे रहा है तब तक मत रूको.जब तक संविधान ज़िन्दा है।  विरोध कानून के मुताबिक आगे बढाते रहो ।ये मुल्क जितना आप का है. उतना ही हमारा है , इस मुल्क को आजाद करवाने में सबसे ज्यादा भूमिका मुसलमानों की रही हैं,अगर किसी को शक है. तो इण्डिया गेट पर जा के इतिहास देखो ।
ये.लोग मुसलमानों को बाहर भगाने के लिए देश मैं जो.लोग गैर मुस्लिम हैं उनको नागरिक प्रमाण पत्र दे देंगे और मुसलमानों को नागरिक प्रमाण पत्र नही होगा ,उसके बाद एन आर सी का सिस्टम चालू होगा ,उसके जरिए दादा के कागजात मागे जाएंगे फिर अगर वो कागजात नही हो ने पर उस को देश से बाहर कर दिया जाएगा।।
मुसलमानों से नहीं बल्कि सच्चे हमारे भाई हिन्दुओं से भी इल्तिजा हैं कि आप इन्सानियत के नाते आप संविधान को बचाएं ।ये लोग कुछ मक्खी के बराबर हैं जो मुल्क को बरबाद करने मैं लगै हैं।
इनको देश से कोई पड़ी नहीं हैं, क्योंकि देश मैं बेरोजगारी, शिक्षा ,स्वास्थ्य, पानी  आए दिन ब्लात्कार की घटनाएं. और न  जाने कैसी कैसी समस्याएं देश मैं उठ खडी हुई है।
 उन समस्याओं से आम लोगों का ध्यान भटकाने के लिये ये नफरत के बीज बो रहे है।
चुनाव के समय हिन्दू मुसलमान के मुद्दे बना कर चुनाव जीत जाते हैं।फिर जब सत्ता में आते ही असली समस्याएं भूल जाते हैं जिससे किसान और बेरोजगार यूवा दर दर की ठोकरें खाता हुआ घूमता फिरता है।इन लोगों को यूवा, किसान, मजदूर से कोई पडी नहीं है।
मैं सभी भारतीय आम जनता से अनुरोध करता हूँ कि देश मैं तरह तरह की समस्याएं उठ खड़ी हुई है इनका पुरजोर विरोध करें।अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहैं।जाती या धर्म के चक्कर मैं न पडें ,अपने आप को भारतीय मान कर देश पर गर्व करें औरदेश के लिये अच्छा काम करें।याद रखें बुरा काम करने वाले को बुरा नतीजा ही मिलता है।

धन्यवाद।आप इस लेख को पढैं और आगे से आगे शैयर करें ंं धन्यवाद।

पंचायती राज चुनाव,एक खास नज़र में।

 दोस्तों नमस्कार !आज मैं बात कर रहा हूं  राजस्थान के पंचायती राज चुनाव की, क्योंकि चुनाव का समय नजदीक आने वाला है। राज्य निर्वाचन विभाग ने चुनाव के समय सारणी भी बना दी है। चुनाव लड़ने वाले जो प्रतिनिधित्व होंगे उनकी योग्यता क्या रखी है, जरा आप सोचो बिना योग्यता वाला आदमी वह प्रतिनिधित्व ग्राम पंचायत का या पंचायत समिति का नेतृत्व कैसे कर पाएगा नेतृत्व करने का मतलब यह है की की जनता के लिए कल्याणकारी कार्य करना , जनता के अनुरूप योजनाएं बनाना और उसको पूर्ण रुप से लागू करना। यह जो कांग्रेस सरकार ने जो ग्राम पंचायत के लिए प्रतिनिधित्व करने वाले सरपंचों के लिए जो आठवीं पास योग्यता थी उस योग्यता को हटाया। ये  बिल्कुल गलत है इससे राजशाही शासन ग्राम पंचायतों में चलता रहता है । जो उस ग्राम पंचायत का युवा वर्ग शिक्षित और बड़ी सोच वाला जनता की सेवा करने के लिए मौका तलाश रहा है। मगर उस बेचारे को यह मौका नहीं मिल रहा है क्योंकि उनके पास योग्यता है लेकिन उनके सामने वाला आदमी पैसे से लबालब है ,वह अपनी पंचायत को पैसे के बलबूते पर दबा लेता है। भ्रष्टाचार करके चुनाव जीत जाता है। मेरे जैसे हजारों युवाओं की इच्छा होती है चुनाव लड़ने की उनका चुनाव लड़ने का मकसद होता है कि जनता की सेवा की जाए । जनता की समस्याओं को हल किया जाए युवाओं से पूछना चाहता हूं। आप चुनाव लड़ना क्यों चाहते हैं ? उन युवाओं का उत्तर निकल कर आता है कि इतने साल हो गए 60 से 70 साल हो गए। पंचायती राज चल रहा है लेकिन तब से लेकर आज तक अनपढ़ लोग ज्यादातर चुनाव में हिस्सा लेते हैं क्योंकि उनके पास पैसा ज्यादा है और वह चुनाव आते हैं तब खर्चा ज्यादा करते हैं । लेकिन जब चुनाव जीत जाते हैं तब वे आदमी खर्चा किया हुआ सबसे पहले अपनी भरपाई करते हैं। फिर बचा खुचा माल जो अपने नजदीकी आदमी होते हैं उनके लिए कुछ काम करते हैं उनके काम और नजरिए को देखकर युवाओं में नौजवान साथियों में यह आक्रोश है । सरकार की बडी बडी योजनाओं मैं धांधली करके अपना बिजनैस करते हैं , सरकारी पैसे का दुरुपयोग  करते हैं।
 जब पिछली सरकार ने पंचायती राज चुनाव में कुछ निश्चित योग्यताएं लागू की थी। योग्यताएं थी ग्राम पंचायत में प्रतिनिधित्व सरपंच डेलिकेट प्रधान सबकी अलग-अलग योग्यताएं थी। सरपंच की योग्यता आठवीं पास योग्यता थी। पिछली भाजपा सरकार ने लागू की थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने आते ही बदल दी ।
आज की तारीख मैं नौजवान यूवा ही. देश की तकदीर को बदलने की ख्वाहिश रख के बैठा है, मगर उन्हें मौका नही मिल रहा है।
उनके आगे परेशानियां बहुत है,क्योंकि उनके पास सबसे बडी आर्थिक स्थिति की किल्लत और नेटवर्क की कमी ।एक देश का नोजवान देश को बदलने का ख्वाब लेकर मन मैं बैठा है मगर करे तो क्या करें, क्योंकि उनकी सुनने वाला कोई नहीं है, अगर सरकार चाहे तो अच्छा कदम उठा सकती है । ग्रामपंचायत मैं सरपंच के रूप में चुनाव लडऩे वाले प्रतिनिधित्व की योग्यता आठवीं से ऊपर की जाए और चुनावी खर्चे को कम किया जाए तो नौजवान की आस जग सकती है। ग्राम पंचायत का मुखिया के रूप में भूमिका निभाने वाला सरपंच के पास अगर शिक्षा और सोच है तो ग्राम पंचायत की तकदीर भी बदल सकता है।
उससे दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती। मैं आप लोगों से विनम्र निवेदन करता हूँ कि मत देने का अधिकार आप को है ,मगर आप का फर्ज बनता है चुनाव मैं एसै प्रतिनिधित्व को वोट दें जो शिक्षित हो, ईमानदार हो ,काम करने योग्य हो, सबसे अहम बात ये है कि जो चुनाव में अधिक खर्चा करता है उस को मत कभी न  देना क्योंकि वो चुनाव जीतने के बाद अपनी भरपायी करने मैं लग जाएगा और खुद का कर्ज दूर करेगा।आप लोगों की तरफ शायद ही देख पायेगा। ऐसै उदाहरण देखने को बहुत मिलते है
पंचायती राज के पा 29 विषय है कार्य करने के ,जिससे वो.उन पर काम कर सकता है।
आज.कल हमारे सरपंचों मैं एक ये परम्परा बैठी हुई है कि ,ग्राम पंचायत में चुनाव लडऩे वाले प्रतिनिधित्व दो खेमों मैं बंटे होते है ,उनको जनता वोट देती ,जनता अपना फर्ज पूरा करती ,जनता को भी यह इख्तियार हासिल है कि वो जिसको चाहे उसको अपना  मत दे सकती है, लेकिन वे सरपंच चुनाव जीतने के बाद वे अपने कार्यकाल तक नाराज रहते है कि आप ने मुझे वोट नहीं दिये और आप को काम नही दूंगा।वो बेचारा आदमी कहांं जाए? ये है हमारे अनपढ़ सरपंचों की स्थिति ।तो फिर विकास क्या करेगा सरपंच उस पंचायत का ,भला कैसे पंचायत का.सपना पूरा कर सकता है।
आज की.तारीख मैं हर.यूवा अपनी पंचायत में चुनाव. लडऩे के लिए अपना प्रचार प्रसार कर रहे है,सोशल मीडिया पर ज्यादा और धरातल पर कम । सोशल मीडिया पर बडी बडी बातें फेंक रहे हैं ,मानो.ऐसा लगता हैं कि ये सारा काम आज ही कर लेंगे.और पंचायत को वाकई सुधारने का सपना संजो के बैठे हैं। आप अपने शिक्षित और ईमानदार आदमी, जनता और पंचायत की भलाई करने वाला होना चाहिए। 

थार मुस्लिम एज्युकेशन एण्ड वेलफेयर सोसाइटी, बाड़मेर


थार मुस्लिम एज्यूकेशन एण्ड वेलफेयर सोसायटी बाडमेर, जिला बाडमेर आपका.बहुत बहुत स्वागत एव अभिन्नदन।
कल दिनांक 15सितंबर,2019 को बहुत ही शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया गया।मैं थार सोसाइटी के अध्यक्ष जनाब आदिल भाई साहब और सभी सदस्यों को बधाई।मुझे उम्मीद है और पूरा यकीन है कि आप इस तरह.के सम्मान समारोह जैसे कार्यक्रम आगे भी जारी रखें मुस्लिम।प्रतिभाओं को इस तरह हमेशां सम्मानित करते रहैं।ये सोसायटी पूरे मुस्लिम समाज को एक साझा मंच प्रदान करती है।ये बहुत खुशी की बात है।
ये मुस्लिम समाज का दूसरा प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम रखा गया है, लगातार सिलसिला जारी है।इस कार्यक्रम में हर वर्ग के प्रतिभा को सम्मानित आप ने किया और सभी प्रतिभा अपने आप को गोर्वानित महसूस कर रहे हैं ।इस तरह के कार्यक्रम करने वालों की सराहनीय पहल है।अभी आप के द्वारा छोटी सी शुरुआत हुई है, लैकिन आने वाला वक्त ही बताएगा कि आप और आप की सोसायटी कहाँ पर खड़ी होगी। आपकी मेहनत और लगन से ही ये काम हो रहा है , नहीं तो यहाँ पर साझा मंच के बारे में किसने सोचा था। सोसायटी में जो सदस्य हैं उनके अन्दर वाकई ये गुण जरूर झलकते होंगे -मेहनत, लग्न, ईमानदारी, सच्चाई, मोहब्बत, प्रेम उत्साह आदि गुणों की अहमियत आपके अन्दर पायी जाती है, तभी ये सब कुछ कर पाना संभव है। 

इस प्रकार के पास प्रोग्राम करने से बच्चों में उत्साह और प्रेम का संचार होता है, जिससे सम्मानित व्यक्ति के अन्दर नयी ऊर्जा पैदा होती है और अपना ध्यान लक्ष्य कीओर केन्द्रीत करता है सम्मान। पिछले चार से पांच सालों में बाड़मेर के अन्दर बहुत बड़ा बदलाव आया है शिक्षा को लेकर, क्योंकि जगह जगह मुस्लिम प्राईवेट हास्टल खुल रहैं है, और स्कूलों में बढती मुस्लिम बच्चों की तादाद। और शहर से बाहर जगह जगह पर मुस्लिम समाज के स्कूल खुलना। सरकार द्वारा भी सरकारी छात्रावास में रहने वाले बच्चों को मदद दी जा रही है बहुत बहुत अच्छी पहल है। 

आजकल सरकारी नौकरी के क्षेत्र में देखा जाए तो, जरूर अब मुसलमान दैखनै को मिल रहा है, पिछली रीट में बाडमेर के 24 छात्रों का सलेक्शन हुआ था, और अभी आर्मी की भर्ती का परिणाम आया तो उसमें जोधपुर संभाग के 16 छात्रों का और बाड़मेर के पांच छात्रों का सलेक्शन हुआ है बड़ी खुशी की बात है, पिछली पुलिस की भर्ती में बाड़मेर के तीन लोगों का सलेक्शन हुआ, जो कि अभी तक हमारा अनुपात कम है। फिर भी अच्छे प्रयास है। ।

मेरा थार मुस्लिम एज्युकेशन ऐण्ड वेलफेयर सोसाइटी, बाड़मेर को सुझाव:- 
1.प्रतिभा सम्मान समारोह को दो हिस्सों में रखने की कोशिश करैं
(१) एक वै छात्र जो कक्षा 10 वीं से लैकर हाई एज्युकेशन तक। जो 70%से ऊपर हैं। 
(२) दूसरे वे अभ्यर्थी है जो सरकारी नये  नौकर हो, उनको  अलग से सम्मानित किया जाए। 

2.एक छात्रों का बडे़ स्तर पर मार्गदर्शन अथवा Get Together👭👫 कार्यक्रम रखा जाए, इस कार्यक्रम में केवल उन्ही  लोगों को बुलाया जाए जो  शिक्षा के क्षेत्र में विद्वान हों, विषय विशैषज्ञ हो, ता की प्रत्येक छात्रों को सुनने और समझने का मोका मिले। इस कार्यक्रम में किसी नेता वगैरह को बुलाने की कोई जरूरत नही है। 
जरूरत इन लोगों की है- डाक्टर, इंजीनियर, वकील, अध्यापक व्याख्याता, आर ए एस अधिकारी जो मुस्लिम हौ, और आर्मी आफिसर। इत्यादि।। 

3.गरीब छात्रों के लिए फण्ड की व्यवस्था जरूर करवाएं। ता की शिक्षा अपना भविष्य बना सकें। 



ये मेरे सुझाव थे, अगर आप को बडि़या लगे हो तो अच्छी बात है, नहीं तो फिर सोसायटी की मर्जी। हमारा कहना फर्ज है  आप का करना फर्ज है। इतने बड़े मुस्लिम समाज में आप फण्ड की व्यवस्था आराम से कर सकते हैं।। 

राजस्थान पुलिस की भर्ती प्रक्रिया जारी,2019

दोस्तों आप के लिए खुशखबरी।5500 पदों पर होगी पुलिस की भर्ती
जी हाँ राजस्थान सरकार पुलिस की जिले वार भर्ती निकालने जा रही हैं।सितंबर के अन्तिम महीने से फार्म भरना चालू हो जाएगा ।आप अपनी तैयारी जारी रखें।इसकी तैयारी मैं गृह विभाग जुट चुका है, जल्द ही फार्म सितंबर माह के अंत मैं चालू  हो जाएगा।
योग्यता:-1. 10  वीं पास होना चाहिए।
             2.18-28 तक होनी चाहिए।
            
1.लिखित परीक्षा
2.शारीरक दक्षता
3.मेडिकल टेस्ट
4.डाक्यूमेंट वेरिफिकेशन
5.फाईनल मेरीट

पाठ्यक्रम:- 
राजस्थान का सामान्य ज्ञान
भारत का.सामान्य ज्ञान/सामान्य विज्ञान
करंट जी.के.
गणित
मानसिक योग्यता( तर्क शक्ति) 


पंचायती राज चुनाव ,राजस्थान भाग -1

राजस्थान के पंचायती राज चुनावी तारीखों का ऐलान माननीय राज्य चुनाव आयुक्त श्री राम लुभाया ने कर दिया है।पंचायती राज चुनाव तीन चरणों में सम्पन्न होंगे।बता दें कि राजस्थान में सरपंचों के चुनाव दो चरणों मैं सम्पन्न होंगे,प्रथम चरण18 जनवरी और.द्वितीय चरण 24 जनवरी को सम्पन्न होंगे,उसके अलावा तीसरे चरण के चुनाव 1 फरवरी को होंगे।मतदान सुबह 8:00 बजे से साम 5:00 बजे तक होंगे।
वहीं सरपंच की योग्यता 
1.21 साल की उम्र होनी चाहिए ।
2.दो से अधिक संतान न होनी.चाहिए।
3 साक्षर होना चाहिये।
4.उस ग्राम पंचायत का नागरिक होना चाहिये।


बाड़मेर का उभरता सितारा

में आज बात कर रहा हूँ बाड़मेर के चमकते सितारे की जिन्होंने  मुस्लिम समाज के हर पल सुख - दुख की घड़ी में साथ दिया, और समाज में जागरूक रह कर समाज के साथ खड़े रहे और खड़े है और आगे भी रहेंगे। और जहाँ भी जाते हैं अपने अन्दाज़ की खास एक खास पहचान रखते हैं और बेबाक अन्दाज में  अपनी राय रखने के काबिले तारीफ है ं। 
 मुस्लिम समाज का एक ऐसा हीरो जो उभरता हुआ और समाज का नेतृत्व करने वाला जनाब अशरफ अली खिलजी साहब उर्दू एकेडमी चैयरमेन पूर्व मंत्री राजस्थान सरकार। 

मैं आप को बताना चाहता हूँ कि इस शख्सियत को हमने करीब से देखा है कि बच्चे के सामने बच्चा बन कर बातें करता है और बड़े लोगों के साथ बड़ा बन के बातें करता है। किसी भी किसी समय याद कर लो तो हर दम तैयार रहते हैं। इस बंदे ने पार्षद से लेकर राज्य स्तरीय मंत्री तक सफर तय किया है। चाहे वह किसी भी पार्टी में रहे उन्हें उस पर कोई शिकवा गिला नहीं है लेकिन गिला शिकवा तब होती है जब आप समाज को पीछे मुड़कर नहीं देखें , लेकिन हकीकत में आपने ऐसा नहीं किया ,क्योंकि हरदम समाज के अंदर उतार-चढ़ाव के पल आते रहते हैं, कुछ समस्याएं आती रहती है आप हमेशा समाज के साथ समाज के भीतर रहकर समाज की समस्याओं को आपने उठाया ।चाहे आपने अपने तेली समाज का भला किया ,आपने पूरी मुस्लिम  समाज का भला किया। आपने जो काम किए वह हम भी जानते हैं आप ने क्या किए हैं कहने की जरूरत नहीं है। सब लोगों को पता है आपने यह सब काम किया तो बस तालीम के जरिए से आगे बढ़कर कानून को समझ कर अपने और पराए में फर्क करके नए और पुराने को परखा। जो कि आपका सफर बहुत महत्वपूर्ण रहा और आगे भी रहेगा इंशाल्लाह। हकीकत में देखा जाए तो आप छोटे से बच्चे से लेकर बड़े अजीब हंसते-हंसते के बीच आप सदा मुस्कुराते नजर आते हैं और यकीनन इंसान को मुस्कुराना भी चाहिए।आने वाली समस्याओं का मुस्कुराकर ही सामना करना चाहिए ।आपके अंदर यह बहुत बड़ी खूबी है। मैं आपको काफी दिनों के बाद लंबे अरसै से  देख रहा हूं कि आप जगह-जगह जाते हैं और अपनी बात भी रखते हैं दिल खोल कर बोलते हैं जरा भी संकोच नहीं रखते हैं। 
आप किसी भी पार्टी से हो हमें उस में कोई एतराज नहीं है, आप दिल खोलकर  अपनी पार्टी के प्रति वफादार रहे और समाज के साथ बिताया हुआ वक्त आप को पीछे मुड़ने नहीं देगा। क्योंकि राजनीति तो करना बहुत सख्त मसला है मगर उस राजनीति में हर समाज का सदस्य प्रतिनिधित्व को मत देता है, फिर आप का दायित्व बनता है कि आप प्रत्येक समाज को पीछे मुड़ कर देखते हैं या नहीं। ये आप के ऊपर निर्भर करता है। बड़े स्तर पर आप चुनाव अभी तक नहीं लड़े, लेकिन इन्शा अल्लाह आने वाले दिनों में आप जरूर बड़ा चुनाव लड़ैगै और अच्छी तरह जीत 🏆 भी मिलेगी। ये मेरी और मेरे जैसे हजारों यूवाओ की सोच है, हम लोग चाहते हैं कि आने वाले दिनों में आप किसी भी पार्टी से टिकट लाओ और चुनाव लडो,उसके लिए जगह जगह पर जाओ प्रत्येक समाज के सुख दुःख के भागीदारी बनोगे और जरूर कामयाबी मिलेगी। 
तब एक शायर ने कहा था 
" खुद ही को कर इतना बुलंद कि हर तकदीर से पहले खुदा खुद बंदे से पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है? "


"रख होंसला वो मंजर भी आएगा, प्यासे के पास समन्दर भी चल कर आएगा।थक कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर ,मंजिल भी मिलेगी, जीने का मजा भी आएगा।।

"मांझी तेरी कशती के तलब दार बहुत है, इस पार कुछ मगर उस पार बहुत हैं।
जिस शहर मैं खोली हैं तूने शीशे की दुकान उस शहर मैं पत्थर के खरिदार बहुत है।।"

"अगर आप जलेबी की तरह उलझ ही गए है तो फिर क्यों न डूब कर चाशनी का मज़ा लिया जाए।।"

धन्यवाद ,शुक्रिया।

5 सितम्बर शिक्षक दिवस

जी हाँ दोस्तों आज इस शिक्षक दिवस के मोके पर कुछ अपनी बातचीत रखना चाहता हूँ, शिक्षक दिवस प्रती वर्ष 5 सितम्बर को मनाया जाता है, यह दिवस डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्ण के जन्म के उपलक्ष में मनाया जाता है, सर्वपल्ली भारत के दूसरे राष्ट्रपति भी.रहे।उन्होने अपना आदर्श जीवन एक शिक्षक के रूप में स्वीकार किया और उन्हें पता भी था शिक्षा के बिना. व्यक्ति का विकास नहीं होता ।अगर व्यक्ति का. विकास नही. होगा तो देश का.भी विकास संभव नही. है।,देश.वही पिछड़ा हुआ हैं जिस देश के अंदर शिक्षा की ओर शिक्षा प्रणाली की.कमी होगी ।तो यकीनन वो देश गरीब गरीबी की स्थिति मैं रहेगा।
शिक्षक जीवन को कैसे जिया जाए?
एक.शिक्षक वह.जो उच्च सकारात्मक. और बोधात्मक हो.और सही.राह.दिखाने वाला हो।शिक्षक. के अन्दर सादगी और उच्च विचारों का प्रवाह होना चाहिए ।शिक्षक जीवन अपने अन्दर बिना लालच किए साधारण रहकर प्रत्येक बच्चे के अंदर मोजूद ज्ञान. को उडेलने का.काम करता ह

 दोस्तों नमस्कार आज बाद शिक्षक दिवस को लेकर की जा रही है क्योंकि आज का दिन शिक्षक दिवस डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म हुआ था उनकी याद में यह दिन एक विशेष शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। तो मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं ।जी हां आज का दिन हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी भारतीय परंपरा रही है भारतीय भारतीय जो रीति रिवाज चला आ रहा है की आए दिन हम किसी महान पुरुष या विद्वान का जन्म दिवस किसी न किसी रूप में मनाते हैं। उनका स्मरण भी करते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में उतारने का भरपूर प्रयास करते हैं। जैसा कि आपको मालूम है कि आज का दिन हमारे लिए यानी कि गुरु और शिष्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है ।भारत जैसे विविधता के धनी और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में यह जो गुरु और शिष्य की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। पुराने जमाने में शिक्षा से गुरु का बहुत मान सम्मान अदब व अहतराम करते थे।
 आज विशेष बात डॉक्टर सर्वपल्ली को लेकर की जाएगी क्योंकि उनका आज ही के दिन जन्म हुआ था यानी 5 सितंबर 1888 को जन्मे थे । वह अपने आप को शिक्षक  के रूप में उभरते देखना चाहते थे क्योंकि उन्हें तो पता था की शिक्षक एक हथियार है और श
 शिक्षा समाज का आधार है जिस तरह मनुष्य की जिस तरह मनुष्य की रीड की हड्डी उसके शरीर का आधार है ।इसी तरह मनुष्य का आधार  उनकी अपनी शिक्षा है ।वह शिक्षा कैसी होनी चाहिए जिससे उस व्यक्ति का व्यक्तित्व निखर कर बाहर आ सके ।जो देश के लिए और समाज के लिए काम आ सके ।शिक्षा सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान पर आधारित न हो बल्कि व्यवहारिक और बोधात्मक ,सकारात्मक सोच और अनुभवजन्य शिक्षा हो ,जिसे व्यक्ति का व्यक्तित्व निखर कर बाहर आ सके और उस व्यक्ति का व्यक्तित्व उभर सके जिसे उस व्यक्ति के अंदर सोच व्यवहार ,लक्षण ,सत्य ,ईमानदारी ,साहस आदि गुणों का विकास हो सके यह डॉक्टर सर्वपल्ली राधा कृष्ण की मंशा थी उन्होंने देश की स्थिति को गहरी तरह से जांचा और परखा था की भारत के अंदर जनसंख्या बहुत है और क्षेत्रफल बहुत है। मगर विकास की दृष्टि से बिछड़ा हुआ है ।इसका मुख्य कारण है की देश के अंदर शिक्षा प्रणाली की सख्त कमी है ।जिसके परिणाम स्वरूप देश के इस की स्थिति काफी ठीक नहीं है, जो देश विकसित है उनके अंदर शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा है। वह देश यकीनन विकसित है यानी कि प्रगति के पथ पर तेजी के साथ आगे बढ़ रहा हैं ।लेकिन हमारा भारत अभी भी काफी पीछे चल रहा है तो इसका सीधा सा मतलब है कि भारत के अंदर शिक्षा की बहुत ही कमी पाई जाती है। इस कमी को दूर करने के लिए शिक्षा व्यवस्था को हमें सुदृढ़ सू व्यस्थित 
अच्छी प्रणाली बनानी होगी।
 आज भारत के अंदर 2 तरह से शिक्षा प्रणाली की व्यवस्था दी गई है। एक सरकारी स्कूलों में शिक्षा दी जाती है दूसरा निजी विद्यालयों में शिक्षा दी जाती है जिनमें दिन और रात का अंतर है जो। सरकारी विद्यालय है वहां पर शिक्षा का हाल बहुत ही बुरा है सरकारी विद्यालय में पहली बार तो पूरा स्टाफ नहीं मिलता है या स्टाफ समय पर आते नहीं हैं या उस स्टाफ को सरकारी ड्यूटी में लगा देते हैं फिर आप लोग समय पर.नहीं आते है  तो उन बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा दूसरी बात कर रहे हम प्राइवेट विद्यालयों की प्राइवेट विद्यालयों में स्टॉप होता है और उन बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान और अच्छे संस्कार अच्छी पढ़ाई की तालीम दी जाती है यहां पर हर मां बाप पैसा खर्च करते है।

अगर सरकारी विध्यालयो मैं पहली बात पूरा स्टाफ भी नही है फिर हम  आगे बढ़ने का नाम कैसे ले पाएंगे आज सरकारी स्कूल मैं गरीब आदमी का बच्चा पढाई करता है, बाकी वाले सब सरकारी कर्मचारियों के बच्चे.निजी स्कूलों मैं जाते है और राजनेताओं के बच्चे बडी बडी स्कूल और संस्थानो मैं पढाई करने जाते है, फिर सरकारी स्कूल का ख्याल कौन रखेगा।इससे परिणाम यह निकलता है कि गरीब गरीब ही रहता है और अमीर अमीर बनता जा रहा है।अगर सरकारी स्कूल पर गाँव के जागरूक लोगों का उन पर.नियंत्रण नही होगा तो भला वो अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकते हैं।
मैं आज यहाँ से स्पष्ट बात त कहना चाहता हूँ कि सरकार अपने स्कूलों को सुधारना चाहती है तो उस सरकारी स्कूलों में पूरा स्टाफ लगवाए और स्कूल के अन्दर काम आने वाले संसाधनों पर प्रबंधन करें।। 

 आज अपन बातचीत कर रहेे हैं शिक्षक दिवस पर जो हमें यह समझना चाहिए  की  हमारा मुस्तकबििल सुधारनेे वाला शिक्षक गुरु, उस्ताद, मास्टर, मौलवी कैसाा होना चाहिए जो  हमें  सही राह बताएं । जिसे  हम  अपने  मंजिल  तय कर जाए। मैं आपको बताना चाहता हूं  की  पुराने समय में  और आज के समय में  शिक्षा  के अंदर  बहुत अंतर आ गया है ,क्योंकि  पुराने जमाने के लोग  गुरु को  भगवान के रूप में मानते थे और  उनके बताए मार्ग पर  चलते थे । वह पूर्ण रूप से  गुरु पर  निर्भर थे । उस जमाने में  पढ़ाई का माहौल बिल्कुल कम था लोग जागरूक नहीं थे।  नौकरियां नहीं थी । लेकिन पढाई की  थोड़ी बहुत जरूरत थी।  जिनकी पूर्ति उस इलाके की  गुरु  पूरी कर लेता था  जिनसे  उनके अपने शिष्य  और  गांव के लोग  कस्बे या नगर के लोग उनसे डरते थे । इसलिए  उनका  अदब व.अहतराम  भी करते थे । उस जमाने में  गुरु का  बहुत बड़ा  मान सम्मान  होता था  । वह सिद्धांत का  पक्का और सच्चा था । उनके पास  असली तालीम थी  । उन्होंने  अपने जीवन में  नए हुनर से संबंधित  शिक्षा दी।  घर का काम हो या खेती का काम हो  या कोई और काम हो।  ऐसे  व्यवहारिक  जीवन को  तालीम से जोड़कर  सच्ची  और अच्छी शिक्षा दें।  इसलिए  पुराने जमाने में  लोग  गुरु की  इज्जत करते थे। हकीकत बात यह है।


 आज के दौर में आधुनिक गुरुजनों की बात  की जाए तो बहुत ही सख्त मामला है,इसलिए के  मौजूदा हाल में शिक्षक भी दो तरह सेे तालीम देते हैं एक तो वह जो सरकारी स्कूलोंं  मे शिक्षा देते हैं दूसरे  वह है  जो निजी विद्यालयों में शिक्षा देते हैं। लेकिन  काम  दोनों का  एक ही है शिक्षा देना  और  अपने शिष्यों को  सही राह दिखाना  ताके  वह अपनी मंजिल पर आसानी से  पहुंच सके। मंजिल तक पहुंचने के लिए जो कठिनााइयाां आए  और जो बाधाएं हैं उनको  सुलझाए और उन्हें  अपने लक्ष्य तक जाने के लिए  प्रेरित करें।  ताकि  उस गुरु के द्वारा  बताए हुए मार्ग पर चलें तो यकीनन वह शिष्य  सफल हो सकता है ।

 दोस्तों बात बहुत सत्य ,है लेकिन आज शिक्षकों के कार्यशैली पर ध्यान दिया जाए तो दिन और रात का अंतर है। यानी कि सरकारी विद्यालय में पढ़ाने वाला टीचर गुरु जो बच्चों का सपना साकार करने आता है । न जाने वह कैसे-कैसे कामों में सरकारी कामों में कागजों में, कागजी पूर्ति करने में व्यस्त हो जाता है और जो देश का भविष्य उनके हाथ में होता है ,वे हाथ से निकल जाता है अध्यापक उन सरकारी कागजों में व्यस्त रह कर अपना मुख्य उद्देश्य भूल बैठता है । फिर बच्चों पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पाता है। दूसरी तरफ वे शिक्षक जो प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ाते हैं उनको सैलरी बहुत कम मिलती है 15 से 20000 लगभग। उनके पास समय निश्चित होता है और उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों पर पाठ्यक्रम पूरा करवाना, उनको मार्गदर्शन देना ,उनको सही रास्ते पर ले कर जाना। फिर अंतर कहां आता है स्कूल वह भी है स्कूल यह भी है अध्यापक वह भी है अध्यापक  यह भी है सरकारी अध्यापक को 40 से 50000 के बीच तनख्वाह मिलती है और प्राइवेट अध्यापक को तनख्वाह कम से कम 10 से 20000 के बीच मिलती है । लेकिन सिस्टम उल्टा हैं   जो ज्यादा मेहनत करता है उसको कम मिलता है जो मेहनत कम करता है उसको ज्यादा मिलता है ।सरकारी अध्यापक अपने बच्चों पर सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों पर ध्यान कम देता है। दूसरे कामों में ज्यादा व्यस्त रहता है । लेकिन इसके उलट निजी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे उनका भविष्य ऊंचाइयों को छूता हुआ नजर आता है क्योंकि उनके अंदर अनुशासन संस्कार शिक्षा कंपटीशन कई तरह की शिक्षाएं दी जाती है ताकि वे छात्र व्यक्तित्व के रूप में उभर कर बाहर आ सकें।

 आज आज सरकार शिक्षकों कि  कौनसी क्वालिटी के अध्यापकों को सम्मानित करते हैं प्रतिवर्ष 5 सितंबर को, उस स्कूल के परिणाम को देखकर या बच्चों के अंदर अनुशासन को देखकर या स्कूल के कागज समय पर पूरा करने में या स्कूल समय पर खोलने में उसके बावजूद अच्छी बात है प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाए ताकि और अच्छे से समाज की और बच्चों का भविष्य रोशन कर सकें ।सरकारी स्कूलों के बावजूद प्राइवेट जो निजी विद्यालय उनके टीचर्स भी दिन रात मेहनत करते हैं और बच्चों को किताबी ज्ञान उसके साथ व्यवहारिक ज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान को जोड़कर सिखाते हैं ।और वह बच्चे समाज और देश के आईना बनते हैं तो फिर सरकार प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने वाले अध्यापकों को सम्मानित क्यों नहीं करती बच्चे सरकार के लिए चाहे प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले या सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे एक समान है फिर क्यों सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले पढ़ाने वाले टीचर तनख्वा ज्यादा देते हैं। फिर भी अध्यापक वे अध्यापक इतनी मेहनत ने करते जितने प्राइवेट स्कूल के टीचर्स मेहनत करते हैं। वह चाहते हैं कि कि हमारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा अच्छी लाइन पकड़ जाए अच्छी मेहनत करें मार्गदर्शन सही समय पर मिलता रहे ताकि देश और समाज के नाम पर काम आ सके।

धन्यवाद दोस्तोँ।



ओसर एक सामाजिक कुप्रथा है।

दोस्तो आज बात एक ऐसी सामाजिक कुप्रथा  मैं आपसे बात करने जा रहा हूं एक ऐसी सामाजिक रीति जिन्हें औसर या मृत्यु भोज के नाम से जाना जाता है। यह रिती हर मजहब वह हर समाज में प्रचलित है ,लेकिन मैं आज मुस्लिम समाज में इस औसर जैसी प्रथा के बारे में बात करना करने जा रहा हूं जिसका  का प्रचलन मुस्लिम समाज में बहुत अधिक पाया जाता है इस प्रथा में दिक्कत  वाली बात यह है कि किसी के घर कोई शख्स या बुजुर्ग इंसान का इंतकाल हो जाए तो उसके घर पर बड़े स्तर पर भोज की तैयार करते हैं ,और बड़ी-बड़ी दावते देते हैं,तो इस बात की  हमारा इस्लाम मजहब यह ऐसा काम करने की इजाजत नहीं देता है , क्योंकि इस्लाम धर्म के मानने वाले प्रत्येक आदमी माल और पैसे के हिसाब से एक समान नहीं है कोई गरीब है कोई मध्यम वर्ग का है कोई अमीर आदमी है तो अपनी अपनी गुंजाइश के अनुसार खर्च करने की हिदायत देता है। इस्लाम मैं यह जो ओसर जैसी प्रथा है इस प्रथा में गरीब आदमी चाहे मध्यमवर्ग का आदमी कोई भी क्यों ना हो सबको ओसर यानी मृत्यु भोज करना और बड़े स्तर पर समाज को दावत देना और सात पकवान बनाना फिर फिर ज्यादा पब्लिक को खाना खिलाना यह सब गलत काम है। इस्लाम मजहब किसी को मजबूर नहीं करता हां हो सके तो गरीब आदमियों को मुक्तसर से दावत देकर सवाबे दारेन  हासिल करें। अगर दीन इस्लाम में देखा जाए तो औसर जैसी प्रथा का कोई महत्व नहीं है ,लेकिन आज समाज के अंदर  एक ऐसी रिती अपना मुकाम बना चुकी है की चाहे गरीब हो चाहे मध्यमवर्ग का हो उनको यह काम अमीर आदमी के बराबर करना चाहिए इस काम के अंदर कम से कम 4 से 5 लाख. तक खर्च हो जाते हैं और दूसरी जो रिती है  शादी के दिन  बड़े बड़े स्तर पर उस पर हजारों लाखों रुपए खर्च होते हैं मेरे कहने का मतलब इतना है की आज की दिनांक में हर आदमी पैसे वाला नहीं होता ,कोई गरीब है, लेकिन उसको आप मजबूर मत करें हो सके तो उसकी आप लोग सहायता करें इसका सवाब इसका जवाब आप लोगों को मिलेगा क्योंकि अल्लाह की राह में खर्च करना और गरीब लोगों की सहायता करना यह अल्लाह को बहुत बड़ा पसंद है । अल्लाह को सखावत पसंद है।अल्लाह उसको  दुनिया मैं. खूब रिज्क  देता है। बात इस नजरिए से की जा रही है आज हमारे समाज में शिक्षा पर और अच्छी जगह पर हम लोग ₹1 भी खर्च करना नहीं चाहते हैं ,मगर शादी ब्याह के  अवसर जैसी रिती हो या कोई और फंक्शन हो या कोई जन्मतिथि की पार्टी हो उस पर हम लोग लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं। वह लाखों रुपए हम चाहे सेठों से ब्याज लाना है चाहे जमीन बेच कर लाए चाहे.जेवर गिरवी रख कर लाए मगर खरच फालतू कामों में करेंगे लेकिन हमें जिस रास्ते पर जाना है इल्रमे दीन. इलमे दुनिया उस रास्ते पर अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे ।जब बच्चा दुनिया में आता है 6 से 7 साल का होता है उसके बाद उस बच्चे को मदरसे और स्कूल मैं भेजा जाता है उसके बाद वह बच्चा मदरसे की तालीम धीरे धीरे सीखता है ।साथ-साथ में दुनिया की तालीम भी सीखता है ।जब उस बच्चे को बड़े स्तर पर पढ़ाई करने के लिए अधिक रुपयों की जरूरत पड़ती है तब और उस के मां.बाप के पास.पैसे  नहीं होते हैं क्योंकि उन्होंने अपने रुपए सोच समझकर खर्च नहीं किये ।  उन्होंने रुपए फालतू के कामों में सबसे ज्यादा खर्च किए अच्छे कामों में कम खर्च किए लेकिन जहां हमें खर्च करने हैं वह हम खर्च कर नहीं पाए जहां खर्च नहीं करने थे वह हमने. खर्च नहीं.कीये। यह हमारी सबसे बड़ी  गलत आदत है। लेकिन आज का वक्त देखा जाए तो बहुत ही नाजुक है क्योंकि इस वक्त में दुनिया को समझना बहुत जरूरी है ।आज दुनिया के अंदर सबसे ज्यादा आधुनिक टेक्नोलॉजी से बनी हुई चीजें और उनकी सुविधाएं हमें मिल रही है। बाकी का काम नेटवर्क पर ऑनलाइन किया जा रहा है। आजकल रुपयों का काम लेन-देन का हिसाब किताब सारा ऑनलाइन सिस्टम से हो रहा है। हम लोग अभी भी बेवकूफी की .तरह कतारों में खड़े हैं ,क्योंकि हमारे पास शिक्षा नहीं है। हमने शिक्षा को गहराई से समझा भी नहीं है अगर शिक्षा की अहमियत मालूम होती तो हम आज तक पिछड़े हुए नहीं रहते ।इस मैसेज से मैं यह आप सब को पैगाम देना चाहता हूं कई हमें हमारे घर में कोई भी छोटा मोटा प्रोग्राम हो हमें सोच समझकर खर्च करना होगा ।ताकि उनसे हमारा रुपया सही जगह लग जाए और बचे हुए रुपए हम अपने बच्चों के पालन पोषण और तालीम पर खर्च कर सकें जिसे समाज के नए हीरे बन सके और और वही देश और समाज का नाम रोशन कर सकें।


हमारा भारत और हमारे राष्ट्रीय प्रतीक

जी हाँ दोस्तों आज में आप को महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ, आप श्रीमान जी से निवेदन है कि इस अध्याय को जरूर देखें और दूसरे साथियों तो भी पहूंचाए, भारत के राष्ट्रीय प्रतीक हर किसी को याद नहीं होते हैं, तो आप ऐसी रोचक जानकारी को जरूर पढ़ें। 

राष्ट्रीय प्रतीक और मुख्य कारक 
1. राष्ट्रीय ध्वज:- तिरंगा 

2.राष्ट्रीय गान :- जन गण मन

3.राष्ट्रीय गीत:- वंदेमातरम 

4.राष्ट्रीय खेल :- होकी 

5.राष्ट्रीय फल :- आम 

6.राष्ट्रीय वृक्ष:- बरगद 

7.राष्ट्रीय पशु;- बाघ 🐯 

8.राष्ट्रीय चिन्ह:- अशोक स्तंभ

9.राष्ट्रीय वाक्य:- सत्य मेव जयते

10.राष्ट्रीय पुष्प:- कमल का फूल

11.राष्ट्रीय पक्षी:- मयूर

12.राष्ट्रीय पंचाग:- शक संवत

13.राष्ट्रीय मुद्रा💱:- रूपया 

14.राष्ट्रीय मिष्ठान :- जलेबी 

15.राष्ट्रीय जलील जीव :- डाल्फिन  मछली🐠🐋🐟

16.राष्ट्रीय 🚣नदी :- गंगा 

17.राष्ट्रीय सूचना पत्र :- श्वेत पत्र

18.राष्ट्रीय योजना:- पंचवर्षीय योजना

19.राष्ट्रीयता :- 🇮🇳👳भारतीय, इण्डियन

20.राष्ट्रीय पकवान:- खिचड़ी

21.राष्ट्रीय पर्व:- गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता          दिवस, गांधी जयंती

22.राष्ट्रीय विदेश नीति:- गुट निरपेक्ष

23.राष्ट्रीय पुरस्कार:-भारत रत्न

24.राष्ट्रीय पिता:- महात्मा गांधी

25.राष्ट्रीय भाषा:- हिन्दी

26.राष्ट्रीय लिपि:- देवनागरी लिपि

27.राष्ट्रीय नारा :- श्रमेव जयते

28.राष्ट्रीय ध्वज गीत :- हिन्द रंग का प्यारा        झण्डा


दोस्तों तो ये थी महत्वपूर्ण जानकारी  आप इस को जरूर आगे से आगे भेजैं  दूसरे समुहों में धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया दोस्तों। 

जय हिंद जय भारत।। 

Help line 🔢number, सहायतार्थ नम्बर

दोस्तों नमस्कार आज में आप के सामने एक नया अधिगम बिंदु लेकर हाज़िर हुआ हुं, आप लोग इन नंबरों को जरूर देखें और आगे भी शैयर करें। ये नम्बर हमारी बहुत सहायता करते हैं, हमारे जीवन में इन नम्बरों की विशेष महत्व है, समय समय जरूरत पड़ने पर हम इन नम्बरों का उपयोग प्रत्यक्ष रूप से करते हैं। 

1. पुलिस 👮सेवा :- 100

2.अग्नि सेवा:-       101

3.एम्बूलैस सेवा :-108 /102 

4.जननी एक्सप्रेस:- 104 

5.यातायात पुलिस:- 103

6.आपदा प्रबंधन :-108

7.इमरजंसी नबंर :- 112

8.रेलवे पूछताछ:- 139

9.वीमैन हेल्पलाइन नंबर:- 181

10.भ्रष्टाचार विरोधी:- 1031

11.हाईवे हेल्पलाइन नंबर:- 1033

12.रेलवे दुर्घटना नंबर:- 1072

13.सड़क दुर्घटना नम्बर:-1073

14.CM हेल्पलाइन नंबर:- 1076

15.वीमेन पावर लाईन:- 1090


16.महीला हेल्पलाइन नंबर:- 1091

17.पृथ्वी भूकंप:- 1092

18.चिल्ड्रेन हेल्पलाइन नंबर:- 1098 


19.किसान काल  नंबर:- 1551

20.बल्डबैंक नबंर;- 9480044444


धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया।


Motivetional speech of social workars

 *"जमाना तुम्हें जाहिल, अनपढ़ और भीख मांगता देखना चाहता है, हिंदुस्तान के मुस्तकबिल का हिस्सेदार नहीं बनाना चाहता, याद रखो अगर तुम आज न...