Powar Of pen कलम की ताकत


       # Kalm ki takat (कलम की ताकत ) 

जी हां दोस्तों आज बात कलम को लेकर को जा रही हैं जिस व्यक्ति के पास कलम है , वो इंसान एक ताकतवर माना जाता है अथवा यहां तक की कामयाब इंसान माना जाता है । ताकतवर व्यक्ति का नाम तो सुना होगा आप ने  जिला कलेक्टर, तहसीलदार, मुख्य नयाधीस, डॉक्टर, प्रोफेसर, मुख्य सचिव, बीडीओ, सीईओ,अध्यक्ष।इन व्यक्तियों के पास कलम की ताकत है । साथियों कलम की ताक़त अपने पास केसे आएगी? इसके लिए हम और आप को संघर्ष करना पड़ेगा। वो संघर्ष है शिक्षा,आप को इस शिक्षा के रास्ते को चुनना होगा ? सिर्फ़ शिक्षा के रास्ते को चुनना ही नही बल्कि उस पर अनुसासन और ईमानदारी से उस पर अमल करना होगा , उस शिक्षा रूपी रास्ते को हासिल करने के लिए आप को कड़ी मेहनत करनी होगी । हमारे पास शिक्षा के दो रास्ते हैं एक रास्ता है दीनी तालीम ( मज़हबी तालीम ) दूसरा रास्ता है दुनिया की तालीम ( असरी तालीम) ,हमें इन दोनो रास्तों को अपनाना होगा ,  दीनी तालीम हमें हर हाल में हासिल करनी होगी ताकि हम लोग अपने मज़हब पर सही तरीके से चल सके , हमारे दिलों में मजहबी तालीम होगी तो अल्लाह और हमारे नबी ( स.अ.स) के तरीके पर चल सकेंगे और इंसानियत की भलाई करते हुए दुनिया के सीधे रास्ते की तरफ बढ़ेंगे। अगर आप और हम लोगों को दुनिया में कामयाबी को हासिल करना है तो हम को चाहिए की हमें हमारे बच्चो को सबसे पहले दीनी तालीम हासिल करवाएं फिर उसके बाद दुनिया की तालीम दिलवाए।वो बच्चा दीन और दुनिया दोनो मैदान में सितारे की तरह चमकता नजर आएगा । मेरे प्यारे साथियों और दोस्तों हमें आज के दौर में दोनो तरह की तालीम (शिक्षा) हासिल करनी होगी क्योंकि। आज का दौर फितनो का दौर है हमें हमारे बच्चो के ईमान को बचाना सबसे जरूरी है । इस शिक्षा के दोनो रास्तों पर चलना होगा जिससे हम कामयाब हो सकते हैं, हमारे पास शिक्षा के खजाने भरे पड़े है लेकिन हम उस तरफ कभी लोटे ही नहीं,जिससे हमारी बड़ी बदकिस्मती है ।
सबसे बड़ा ताकतवर कोन ? 
आज के युग में सबसे बड़ा कामयाब या ताकतवर इंसान वही है जिसने उच्च शिक्षा प्राप्त की है और उसका इस्तेमाल सही तौर पर किया हो ? हमें ये कहने में कोई झिझक महसूस नहीं की वो एक कामयाब इंसान नही है। 
अगर किसी व्यक्ति ने कलम के जरिए संघर्ष के रास्ते को चुना और वह उस लक्ष्य को हासिल करने में काफी हद तक कामयाब हुआ , नही । लेकिन कामयाब इंसान वही 
जिसने सही तरीके से अपने पद का प्रयोग किया और गरीब व्यक्ति के दिल को जीता , असल कामयाब तो वही व्यक्ति है ।
सबसे ताकतवर वही व्यक्ति जिसने शिक्षा को कठिन प्रिस्तिथ में हासिल किया हो और वह इंसान कामयाब हो गया हो । आज दुनिया में कामयाब वही इंसान या समाज और समुदाय है जिसने कलम का प्रयोग सही तौर पर किया हो , दुनिया में उनका ही दबदबा है ,वो जो चाहते हैं वो कर भी देते है ,उनके पास सब कुछ संसाधन है ,उनके पास राजनीतिज्ञ लोग है ,उनके पास अर्थशास्त्री भी ,उनके पास वैज्ञानिक भी है ,उनके बस eniginar भी है ,उनके पास सामाजिक लोग भी है और उनके पास दानदाता लोग भी है उनके पास आर्थिक संसाधन भी है सब कुछ कुछ उनके पास ही तो है , हमारे पास है ही क्या ? ये कोन लोग है ? जिन्होने शिक्षा को को अपना हाथियार बना के इस्तेमाल किया हो ,दिन और रात उसी काम में लगे रहे ,आखिर कामयाब तो वही हुए । बाकी वाले ,इंतजार करते रहे कहते है न की इंतजार करने वालों को उतना ही मिलता है जितना इंतजार करने वाले पीछे छोड़ जाते है -DR.A.P.J.ABDUL KALAM
आज हमारे मुल्क हिंदुस्तान के अंदर यही हाल है जिन जिन कोमो ने संघर्ष किया और शिक्षा के रास्ते को इन्होंने अपना एक मकसद बना लिया , आखिरकार वो लोग अथवा वो समुदाय कामयाब हो गए । जिन्होने शिक्षा को कुछ समझा ही नही वो आखिर कार  फेल साबित हो गए । जो समाज या समुदाय शिक्षा में आगे है उनके, है व्यक्ति हर विभाग में कार्यरत है ,चाहे वो ऑफिसर हो या अधिकारी हो या कर्मचारी हो यहां तक क्लर्क या चपरासी भी इन सभी का जुलूस  नजर आता है ,लेकिन जिस समुदाय या समाज के तबके के पास शिक्षा नही है उनका कोई व्यक्ति नजर क्यो नही आता है ? असल सवाल तो ये है ? क्योंकि उन्होंने शिक्षा को अपना मकसद समझा ही नही ,तो फिर किस चीज को अपना मकसद समझा ? जरा सोचने की बात है । ये बात हमारे लिए फख्र की बात नही बल्कि अफसोस की बात है । हमने शिक्षा को कुछ समझा ही नहीं तो फिर हम ने किस चीज की तरफ ध्यान दिया ? देश आजाद हुए को आज 76 साल हो चुके हैं ,लेकिन हमारा शिक्षा में हमारा स्तर सभी समुदाय से कम ! लेकिन पिछड़े वर्ग में हम ज्यादा !  जेल में हमारी जनसंख्या का अनुपात ज्यादा , पुलिस थानों में हमारे खिलाफ मुकदमे ज्यादा ? शिक्षा में हमारे बच्चे सबसे ज्यादा ड्रॉप आउट ? हमारे लोग फालतू पैसे खर्च करने में सबसे आगे ( शादी , ओसर,अन्य और जमीन जायदाद ) वगैरा में हम लोग आगे । अस्पतालों में हमारी संख्या ज्यादा ? 
तो फिर शिक्षा जैसे मूल्यवान चीज को प्राप्त करने में हम लोग पीछे क्यो? जिससे शिक्षा प्राप्त करने से कलम की ताकत आप के हाथ में आ जाती है , उस तरफ अपना ध्यान क्यो नही जाता ? आज जो समाज हम से दुनिया की तालीम में आगे निकले हैं उन्होने हम मुसलमानो की नकल की है एक मुस्लमान जिस तरह पूरे कुरान शरीफ़ अल्लाह की किताब को  बैगर देखे याद कर लेता है तो हम क्यो नही याद कर लेते है। इस्लाम की नकल गैरों ने अपना ली। हम लोगो ने अपना तरीका छोड़ दिया जिससे हम लोग दुनिया की तालीम से पिछड़ ही गए ,और साथ साथ में दीनी तालीम में भी पिछड़ गए ,न घर के न घाट के ,अगर एक तालीम को मजबूती से पकड़ लिया होता तो तो आज हम इस कलम की ताकत से महरूम नही होते
दीनी तालीम की इतनी महत्ता है की अगर आदमी सही से तालीम हासिल करके ईमान और अकीदे के साथ इस पर अमल करते हुए , अपने समुदाय की रहनुमाई करते नजर आते है ,जैसा की आज हमारे बीच कुछ उलेमा नजर आ रहे हैं,उनके पास दुनिया की तालीम नही है फिर भी हमारे जैसे बुज्दिलो की हौंसला अफजाही करते नजर आ रहे है । दुनिया की तालीम से बेहतर रहनुमाई करते नजर आ रहे हैं,हमें ऐसे उलमाओ पर बड़ा फख्र और नाज़ है ।  आज के इस पूर फितन दौर में हमारे कायिद और रहबर हमारी हर प्लेटफार्म से रहबरी कर रहे हैं।जिससे मुझे कहने में कोई शक नही की , दीनी तालीम एक बेहतरीन और लाज़वाब तालीम है,जिसकी ला तादात कीमत है।

लेकिन अफसोस इस बात का है की हम लोग इस दुनिया की तालीम से पिछड़ गए जो हमारे लिए दुनिया में तो कम से कम चासनी चखने का स्वाद जरूर मिलता,लेकिन बदकिस्मती से हम लोग इसे भी महरूम रह गए।आज हिंदुस्तान हमारी आबादी  20-25 फीसदी है है जनसंख्या के हिसाब से हम लोग दूसरे नंबर पर है ,लेकिन बाकी सरकार के जितने भी मानक है उनमें सबसे हम पिछड़े क्यों? शिक्षा में देख लो ,राजनीति में देख लो , व्यापार या व्यवसाय में देख लो ,आर्थिक स्थिति में देख लो और सरकारी नौकरी में देख लो ,हर स्थिति में हम लोग पिछड़ते नजर आ रहे हैं।क्योंकि हम लोगो ने हमारे बड़ों ने ,और पटेलों ने ,हमारी कॉम के रहबरी करने वाले नेताओं में कभी उस और ध्यान ही नही दिया ,अगर दिया होता तो उनकी रोटियां सेकनी बंद हो जाती शायद! 


कलम जेसी ताकत को प्राप्त करने के लिए हमें हमारे गांव या शहर में स्कूल की हालत को देखनी होगी ,तभी तो हम कलम की ताकत को हासिल कर पाएंगे ।   है । समझने वालों के लिए बहुत कुछ मगर न समझने वालों के लिए कुछ भी नही हैं।
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कलम जेसी ताकत से महरूम रहने के लिए            जिम्मेदार कोन? 
 इसके लिए जिम्मेदार तो लगभग सभी है  सबसे पहले तो हम लोग है जिन्होने कभी शिक्षा की तरफ ध्यान दिया ही नहीं ,जो की हमारी सबसे बड़ी गलती है ।और हम ने ये गलती जानबूझकर की है इसके दोषी तो हम खुद ही है और कोई नही ।
दूसरा जिम्मेदार तो सरकार है जो सरकार ने इस पिछड़े वर्ग का कभी शिक्षा की तरफ ध्यान दिया ही नहीं ,हां सरकार ने ध्यान जरूर दिया मगर उतना नहीं जितना देना चाहिए ।
तीसरा जिम्मेदार तो विद्यालय खुद है जहां पर मुस्लिम आबादी है वहां पर उस 🏫 स्कूल में न तो पर्याप्त स्टॉफ है और न ही विद्यालय में प्रमूख संसाधन उपलब्ध है,अगर स्टाफ उपलब्ध है भी तो उसको अन्य कामों में लगाया जाता है जिससे पढ़ाई बाधित रह जाती है , इसलिए भी शिक्षा से महरूम रह जाते है फिर प्रयाप्त पढाई नही हो पाती है , इसलिए हम लोग कलम की ताकत से महरूम रह जाते है ।
जब तक आज कल के पढ़े लिखे नौजवान तबका पढ़ाई की तरफ या school ki तरफ़ ध्यान नहीं देंगे तो हमारा ही नुकसान होगा ,न तो सरकार का और न ही वहां पर लगे अध्यापकों का। हमें अपने स्कूल का निरीक्षण करना होगा और अध्यपको के बारे में राय मशोरा लेना होगा ।
स्कूल में किन किन संसाधनों की कमी है उसको अध्यापकों के साथ मीटिंग करके उन चीजों की कमी को पूरा करना होगा । हमारे विद्यालय में शिक्षकों के पद रिक्त है तो हमारे जन प्रतिनिधि सरपंच हो या विधायक से मिल कर मांग करनी होगी जिससे हमारे बच्चो को सही समय पर शिक्षा मिल सकेगी ।
कलम की ताकत ऐसे ही नही मिलती है इसके लिए एक व्यक्ति को ,समाज को ,और सोसायटी को मिलजुल कर संघर्ष करना होगा ,उसके लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी । हमारे जीवन में शिक्षा आएगी तब कड़ी से कड़ी जुड़ेगी ,तभी कारवां बढ़ेगा ,कारवां बढ़ेगा तभी तो हमारी ताकत बढ़ेगी,तभी तो हम लोग जीवन मे आगे बढ़ पाएंगे । कलम की ताकत किसे कहते है ,तो इसी को तो ही दोस्तो कलम की ताकत कहते है ।

"अपनी झोली में फल यूं ही नहीं गिरते 
 मेरे दोस्त वक्त की शाख को हिलाना पड़ता है।"


         Thanks 🙏 for visiting 
 Aap ka dost , sathi ,lekhak                                       MURAD KHAN 
                 JAISINDHER 


















2 टिप्‍पणियां:

  1. मेरे प्रिय दोस्त आपकी कलम ही कलम की ताक़त को बयां कर रही है,जो मौत को जिंदगी मैं और जिंदगी को मौत बदलती है जैसे एक जज के कलम की ताक़त

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