अल्लाह की गैबी मदद कब तक 🤔
*स्पेन* हाथों से निकल जाते वक़्त ग़ैबी मदद नहीं आई, *न खिलाफत ए उस्मानिया* खत्म होते वक़्त आई, न *इज़राइल* के क़याम को रोकने आई, न *बाबरी मस्जिद* शहीद होते और छिनते वक़्त आई, न *इराक़* और *सीरिया* बर्बाद होते वक़्त आई, न *म्यांमार(बर्मा)* मुसलमानों के क़त्ल ओ ग़ारत पर आई......
फिर भी घरों और मस्जिदों में बैठकर ग़ैबी मदद की सदा..????
ग़ैबी मदद कब आती हे👇
ग़ैबी मदद *जंग ए बद्र* में आई थी जब हज़ारों के मुकाबले सिर्फ 313 मैदाने जंग में उतरे।
ग़ैबी मदद *जंगे खन्दक* में आई,जब *मेहबूब ए इलाही ﷺ* ने पेट पर पत्थर बांधकर ख़ुद ख़न्दक खोदी और मैदाने जंग में उतरे।
अल्लाह की मदद *जंगे ओहद, हुनैन, तबूक, और फतह ए मक्का* के वक़्त आई थी,
अल्लाह की मदद, *उमर बिन ख़त्ताब, ख़ालिद बिन वलीद, तारिक़ बिन ज़ियाद, सलाह उद्दीन अय्यूबी, मोहम्मद बिन क़ासिम, अरतुगरुल बिन सुलेमान* जैसे *मर्दे मुजाहिद ग़ाज़ीयों, जियालों* के पास आती है।
और हम हैं कि...
तागूती निज़ाम पर राज़ी हैं,..
*और ग़ैबी मदद के मुन्तज़िर-???*🤔
क़ीमती लिबास पहनकर, *माल* और *ज़र* जमा करके, लक्ज़री ऐरकंडिशन गाड़ियों में बैठकर,
झुके-झुके लोगों से हाथ चुमवाकर, मिम्बर पर बैठकर लोगों की वाह वाह की खुहाइश लेकर, मुसल्ले पर बैठकर दुआओं में, ज़ालिम को सिर्फ बद्दुआ देकर...
*ग़ैबी मदद के मुन्तज़िर???*🤔
मातम, नात खुआनी, महफ़िल ए मिलाद, वज़ीफ़े, इमली दाने या तस्बीह के दानों को 10लाख, 20लाख बार घुमाकर....
*ग़ैबी मदद के मुन्तज़िर...??*🤔
*आफ़ाक़ी दींन* को चन्द जुज़याते इबादत में महदूद और कैद करके...
*ग़ैबी मदद के मुन्तज़िर..??*🤔
नोजवान नस्ल को *उक़ाब* से *मुर्ग़ा* बनाके, *मुजाहिद* से *मुजाविर* बनाके, *निज़ाम ए इलाही* की जद्दो-जहद और *जज़्बा ए शहादत* से दूर करके, *तागूती निज़ाम* को ख़ुशी ख़ुशी तस्लीम करके, ज़ालिम और बातिल को सिर्फ बद्दुआ देके....
*ग़ैबी मदद के मुन्तज़िर??*🤔
*फिलस्तीन, सिरिया, इराक़, सूडान, नाइजीरिया*, के हालात जानकर भी हलक़ तक खाना खाके, मीठी और गहरी नींद सोके..
*ग़ैबी मदद के मुन्तज़िर??*🤔
यानी सब कुछ *अल्लाह* के ज़िम्मे करके, ख़ुद बुज़दिली इख़्तेयार करके..
*ग़ैबी मदद के मुन्तज़िर??*🤔
*सीरत ए नबी ﷺ* और *सीरत ए सहाबा* तो हमें बताती हैं कि पहले ये *मैदान ऐ जंग* सजाते फिर अल्लाह से ग़ैबी मदद के लिए हाथ उठाते🤲,
और हमारे हाथ सिर्फ अपनी ख्वाहिशात पूरी करने और ज़ालिम ओ बातिल को बद्दुआएं देने के लिए उठते हैं।
*ऐसी सूरत में सिर्फ अल्लाह का अज़ाब आता है ,, ना कि ग़ैबी मदद।।*
*आज हमारी हालत ऐसी है कि हम गफलत की नींद सो कर गैबी मदद का इंतजार कर रहे हैं, और हमारे हालात दिन पर दिन बद से बत्तर होते जा रहे हैं*
*अगर गैबी मदद से कौम के हालात सुधर ते तो अल्लाह के नबी सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम जंग के मैदान में कभी ना उतरते*
*ए लोगो याद रखना अगर घरों में बैठकर गैबी मदद का इंतजार करा जाता तो जंग ए खैबर कभी ना होती और हज़रत अली शेरे खुदा खैबर कभी ना उखड़ते*
*अगर घरों मैं बैठकर गैबी मदद का इंतज़ार कर कौम के हालात सुधारे जाते तो हजरत खालिद बिन वलीद रजि अल्लाह ताला अन्हू जंग कभी ना करते*
*यहां पर जंग से मुराद लड़ने से नही है, बल्कि मैदान में उतरकर अपने हक के लिए खड़े होने से है, अपनी हक़ की लड़ाई लड़ने से है, ना के अपनी आराम गाहो में गफलत की नींद सोने से*
*तुम कहते हो कि तुम तादाद में कम हो याद रखना तुम्हारी ताकत तुम्हारी तादात नहीं तुम्हारा ईमान है मत भूलो वो 113 हम में से ही थे, तुम अपना ईमान मज़बूत करो अल्लाह तुम्हे मज़बूत कर देगा*
*कसम खुदा की तुम अपने दिल में खुदा का खौफ पैदा तो करो उसका डर पैदा तो करो कसम से दुनिया के खौफ से दुनिया के डर से आज़ाद हो जाओगे*
*याद रखना इंसान को मौत उस वक्त तक नहीं आती है जब तक मौत उसके नसीब में ना हो, मौत खुद ज़िंदगी की हिफाजत करती है, अपना वक्त पूरा होने तक, और जब मौत नसीब में होती है तो ज़िंदगी खुद मौत से जाकर गले लग जाती है।*
*ज़रा सोचो मरने के बाद अपने रब को क्या जवाब दोगे*। फिर कहते हैं की अल्लाह की गैबी मदद कब आएगी !
अल्लाह की गैबी मदद कब तक !
उस वक्त तक नहीं आएगी जब तक हम अंदर और बाहर से अल्लाह की रस्सी को मजबूती से पकड़ेंगे नही और मोहम्मद सल्लाहू अलैहि व सल्ल्म का तरीका नही पकड़ेंगे,अल्लाह के हुकुम को नही मानेंगे और नबी अलैहिस्सलाम का तरीक ए कार पर अमल नहीं करेंगे ,तो सोचो हमारे साथ क्या मामला होगा !
हमें ईमान पर चलना होगा ,और ईमान के लिए अमली काम करना पड़ेगा तभी कुछ अल्लाह की मदद आएगी ,और साहबाओं जैसा ईमान होना चाहिए तभी तो हालात अपने मुताबिक होंगे , ऐसे बैठे बैठे काम नही होंगे ।
आज हमे जरूरत इस बात की है की हमे चाहिए की अल्लाह के हुकुम के मुताबिक अपनी जिदंगी
ईमान को तर ए ताजा करने वाला बयान माशा अल्लाह बहुत खुब
जवाब देंहटाएंShaandar brother keep it up
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