Population is Controlle जनसंख्या नियंत्रण

जी हाँ आज बात जनसंख्या नियंत्रण को लेकर की जाए, क्योंकि जब हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर लाल किले की प्राचीर से कर ही लिया है तो हमें भी  उस विषय पर जरुर चर्चा करनी चाहिए। कि जनसंख्या क्यों बढ रही है?  इस के क्या मायने हैं?  देश के लिए कितना संकट है?  इन परिस्थितियों के बारे में हमें ग़ौर करना भी चाहिए। 

ज़ाहिर सी बात है कि जनसंख्या अगर बढ रही है तो हमारे पास जो उपलब्ध संसाधन है, वो भी कम हो जाएंगे, और जो हमारा खज़ाना है वो भी धीरे धीरे घटता चला जाएगा, खजाने का मतलब ये है कि भुमि के अन्दर से प्राप्त होने वाली वस्तुएँ तेजी से घटती जा रही है, क्योंकि जनसंख्या तेजी से बढ रही है, उन संसाधनों की समाज के प्रत्येक सदस्य को प्राप्त नहीं हो रही है, तो इसका मतलब ये बात उचित है कि जनसंख्या नियंत्रण होना चाहिए, वैसे भी जनसंख्या नियंत्रण हो रहा है और लोग खुद जागरूक हो रहे हैं ,। लोग खुद देश और समाज की परिस्थितियों को देख कर ही जनसंख्या नियंत्रण को अपने वश में कर रहे हैं। 2014 से पहले की सरकारों ने देश के अन्दर समाज को जागरूक किया और सार्वजनिक स्थानो पर स्लोगन ( नारे)  जो समाज को जागृत करे ऐसे नारे लिखवाए और प्रचार प्रसार भी किया गया। तो यकीनन समाज के अन्दर काफी हद तक जागरुकता आई है इस में कोई शक की बात नहीं है , जहाँ पर ज्यादा शिक्षित लोग है, वहाँ पर जनसंख्या को लेकर सोच समझ कर कदम उठाया गया है। हाँ ये भी बात सही है कि जहाँ पर या जिस समाज में शिक्षा की कमी हो वहाँ पर हालात काफी नाजुक है। 
भारत विश्व🌏 में जनसंख्या के हिसाब से दूसरे नंबर पर है, पहला नबंर चाईना का है  । तो चाईना में जनसंख्या नियंत्रण पर सख्त कानून लागू भी और वहाँ की आबादी भी काफी भारत से कयी गुना शिक्षित और जागरूक है, तो उनहोंने इस कदम को उचित ठहराया है। जब भारत की बात करें तो, भारत काफी शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है और लोगों के अन्दर कुछ हद तक जागरूकता की  कमी भी है। अगर सरकार जनसंख्या नियंत्रण पर संसद में कानून लाती है और अगर कानून पास भी हो जाता है और हो भी जाएगा, कोई शक की बात नहीं है। मगर लोग कितने उस कानून के मुताबिक चलने की हिमायत करेंगे, ये बात कानून के बाद की है। 

आंकड़े ये बता रहे हैं कि 2030 तक भारत की जनसंख्या चाईना को भी पार कर देगी। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर पर इस बात का जिक्र किया कि हमारे देश की जनसंख्या लगातार तेजी से बढ रही है, इस बात की हमें सख्त चिंता है, एक तबका जो जागरूक है वो जनसंख्या को नियंत्रण में लेकर चल रहा है और दूसरा तबका जो अनपढ़ और गरीब तबका है जो जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। उनका इशारा किसी विशेष समाज को लेकर था, अच्छी बात ये है कि उन्होंने उस समाज का नाम नहीं लिया। जब देश के अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर लाल किले की प्राचीर से सम्बोधन दिया था कि जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और इस के जिम्मेदार मुस्लिम समाज है। 2021 तक भारत की जनसंख्या 132 करोड़ हो जाएगी। 
अच्छी बात तो ये है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जरूर बात कही है मगर  आज सबसे ज्यादा यूवा आबादी वाला देश भारत  है, उन यूवाओ के लिए रोजगार को लेकर कोई बात नहीं की, ये भी अच्छी बात है शायद। 
भारत में महीलाएं जो बच्चों को जन्म देती है उनका हम कुछ जिक्र करते हैं धर्म के अनुसार, बाद में कुछ राज्यों की स्थिति के बारे में जिक्र करेंगे। 
1955 से लेकर यानि 2005 तक का जिक्र 

हिन्दू धर्म में प्रति महिला बच्चे को जन्म देती है उस का रेस्कयू 
2.59  जो कि अब 1.3 पर आ  गया है। 
मुस्लिम मे 3.40 था जो कि अब 2.62 पर आ गया है। 
ईसाई धर्म में 2.4 था
क्रिश्चियन में 1.95 था 
बुध्दिष्ट में 2.25 था। 

अब राज्यों की स्थिति 
बिहार राज्य में प्रति महिला 2.5 यानि ढाई बच्चे पैदा करती है  
गुजरात में 1.9  बच्चे महिला पैदा करती है। मध्यप्रदेश में 2.0 है। 
जम्मू कश्मीर में जो मुस्लिम बहुल आबादी वाला राज्य है वहाँ पर 1.5  है जो कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। 


भारत में यूवाओ की आबादी बढ रही है और प्रधानमंत्री द्वारा बेरोजगारी को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया, भारत में अगर आत्महत्या या खुदकुशी होती है तो उस में दो वर्ग निकल कर सामने आते है वो है- बेरोजगार यूवा और किसान। दोस्तों जो में आप को आंकड़े बता रहा हूँ इससे आप जरूर विचलित होंगे - 
1.     2001 से 2017 तक यानि बीते 17 वर्षों में किसानों की तादाद 2,64,152  है जो इन किसानों ने खुदकुशी की है। 
अब दूसरी स्थिति जरा समझ लीजिये
2. जो कि छात्रों की है 1,17,874 ऐसे छात्र है जो कि परीक्षा में फैल हो जाते हैं, जिन्होंने अपने जीवन को त्याग दिया। 
3.तीसरी स्थिति का भी जिक्र कर लेते हैं 
जो बेरोजगार यूवक है 1,67,606 ऐसे विद्यार्थी है जिन्होंने बीते 17 सालों में खुदकुशी की है। 

हमारा ध्यान ⚠ उस दिशा में जाता ही नही है, बड़ी अजीब ओ ग़रीब स्थिति है, हम किसानों का जिक्र करके बच जाते हैं, मगर न किसानों की समस्या का समाधान होता है और न ही बेरोजगार यूवाओ और छात्रों की समस्या का हल भी नहीं होता है और न ही उन्हें रोजगार दिया जाता है।। 

बीते 17 साल की स्थिति हर दिन 42 किसान प्रतिदिन खुदकुशी करता है, मगर बीते चार साल में किसान प्रतिदिन 41 खुदकुशी करता है यानि एक कम हो गया। 

बीते 17 साल में 18.9 छात्र प्रतिदिन खुदकुशी कर लेते हैं मगर बीते चार साल प्रतिदिन 24छात्र खुदकुशी करते हैं। 

बेरोजगारों की तादाद बीते 17 सालों में हर दिन☀ 27 बेरोजगार खुदकुशी के शिकार हो जाते हैं। 
बीते चार साल में 29.6 छात्र हर दिन खुदकुशी कर लेते हैं। 

आत्महत्या, खुदकुशी, मोत, हत्या के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं और समाज के भीतर तनाव की स्थिति बनी हुई है। लेकिन सरकार का ध्यान इस तरफ जाता ही नहीं है, मगर सरकार का ध्यान उस तरफ बहुत है। अगर हमारी सरकार देश को  विकसित बनाने चाहत रखती है तो देश को शिक्षा के ऊपर रूपये खर्च करने पडेंगे, क्योंकि आज सरकारी स्कूल और निजी स्कूल की कार्यशैली में दिन रात का अंतर क्यों आ गया है। जरा सरकार को सोचना चाहिए और सरकारी स्कूलों पर अगर सरकार तवज्जो दे तो यकीनन देश की स्थिति में काफी बदलाव आएगा। 
आज अगर सरकारी कर्मचारी और राजनेताओं के बच्चे निजी और हाई क्लास के विध्यालय में दाखिला लेता है, मगर एक सरकारी स्कूल में गरीबों के बच्चे और मध्यम वर्ग के विद्यार्थी पढते है। तो भला आप बताओ भारत विकसित केसै होगा, आज भारत के अन्दर बहुत सारे सरकारी स्कूल है मगर उस विध्यालय की स्थिति बदल से बदतर है, उस स्थिति का जिम्मेदार कोन?  सरकार या हम। आखिर बड़ा सोचनीय विषय है। 
मुख्य बात ये है कि हमारे पास शिक्षा सिर्फ कागज़ और डिग्री तक ही सीमित है, उस के बाद रोजगार की कोई गारन्टी नहीं है, तब यूवा मजबूर होकर खुदकुशी कर लेता है। हम देशको डिजिटल इंडिया🇮🇳 बनाना चाहते हैं मगर ज्यादातर आबादी अनपढ़ है, बताओ वो आबादी डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कैसे करेंगे। हर देश के विकास का पैमाना शिक्षा और संसाधनों पर टिका होता है, भारत के अन्दर संसाधनों की कोई कमी नहीं है, मगर हमारे पास उचित शिक्षा🎒🏫📚🎓 नीति लागू नहीं है। पूरा देश का एक पाठ्यक्रम नहीं है।


आज का मेरा लेख जनसंख्या नियंत्रण को लेकर था, जो कि जनसंख्या नियंत्रण करना हर आदमी को जरूरी है, क्योंकि आप को पता है कि भारत के अन्दर जनसंख्या तीव्र गति से बढ रही है और संसाधनों की मांग भी बढती जा रही, हमें और आप को सोच समझ कर कदम उठाना चाहिए। अगर सरकार इस विषय पर कानून लाती है तो भी ठीक है, अगर नही भी लाती है तो भी ठीक, मगर भारतीयों को सोच समझ कर कदम उठाना चाहिए। 


दोस्तों👭👬👫 धन्यवाद🙏💕 शुक्रिया, आप लोग यकीनन मेरा लैख पढते है, तो आप लोग मुझे सुझाव भी देते रहे ं और आगे भी पोस्ट को लिंक के जरिये भी दूसरे भाईयों तक शैयर करें। 
एक बार फिर धन्यवाद🙏💕 पोस्ट पढने के लिए। 
में आप का दोस्त लेखक, ब्लोगर, और स्वतंत्र विचारक मुराद खान जयसिंधर।। 

    ज   य    हिं   द     जो   ये   भारत।। 
6378616491


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