बाहर बारिश☔ हो रही थी, अन्दर क्लास चल रही थी, तभी एक अध्यापक ने कहा कि आज आप प्रत्येक छात्र को में 100 - 100 रुपये💵 दूं तो आप लोग क्या खरीदोगे तो किसी छात्र ने कहा कि मैं तो ट्रोफी खरीदूंगा, तो किसी ने कहा में विडियो गेम खरीदूंगा, तब अध्यापक की नज़र एक ऐसे छात्र पर पड़ी जो अपने विचारों में डूबा हुआ था, तब अध्यापक ने कहा बेटा आप क्या खरीदोगे, बोलते क्यों नहीं हो, तो उसने कहा कि मैं मेरी माँ के लिए चश्मा खरीदूंगा। तो अध्यापक ने कहा बेटा चश्मा खरीदने के लिए तेरे पिताजी है चशमा तो तेरे पिताजी खरीद सकते हैं तू तेरे लिए क्या खरीदेगा, तो उस छात्र की बात सुन कर अध्यापक का गला भर आया , उसने कहा सर मेरे पिताजी इस दुनिया में अब नहीं रहे। मेरी माँ लोगों के कपड़े सील कर मुझे खिलाती पिलाती है और मेरी पढाई का खर्चा भी भरती है । में चाहता हूं कि मेरी माँ को चश्मा खरीद के दूं ता की वो अच्छे से देख सके और कपड़े सील कर मेरी पढाई का खर्चा चला सके, और में पढ कर बड़ा आदमी बन के मां की सेवा कर सकूँ, तब अध्यापक ने उसको अपनी जैब से 100 रुपये💵 ओर उधार दिए और कहा कि ये 100 रुपये मेरे वादे के और ये 100 रूपये उधार दे रहा हूँ, जब रोजगार लगे तब वापस लोटा देना। लेकिन 20 साल बाद बाहर बारिश हो रही थी, अन्दर क्लास चल रही थी, उस बाहर अचानक लाल 🔴 बत्ती वाली गाड़ी आ के रुकती है और पूरी स्कूल 🏫 में सन्नाटा छा गया। पूरा स्कूल स्टाफ चोकन्ना सा रह गया। तब एक कलेक्टर वृहद अध्यापक के पैरों को छूता है और अध्यापक उस कलेक्टर को बाहों में कश कर ऊपर उठा लेते हैं और कलेक्टर कहता है कि आप मेरे सर हाथ रखें में धन्य हो जाऊँ।
सीख :- दोस्तों जीवन में कभी मग़रूर मत करना, साधारण रहना,अपने को कभी कमज़ोर मत आंकना शहंशाह को कभी फकीर, और फकीर को कभी शहंशाह बनने में देर नही लगती।।
वक्त आदमी का कभी भी बदल सकता हे
जवाब देंहटाएंहमेशा दूसरो कि मदद करना चाहिए
सही बात है भाई साहब में भी हमेशा दूसरों की मदद करना चाहता हूं, और करता भी हूँ।
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