मुसलमान कयादत से महरूम!!

                           मुसलमानों की कयादत !! 

 

जी हां दोस्तों जी हां दोस्तों है सलाम व आदाब ।आज बात मुसलमानो की हो रही है। हिंदुस्तान आजाद हुए को 75 साल हो गए चुके हैं, लेकिन हिंदुस्तान के अंदर मुसलमानों के राष्ट्रीय स्तर पर लीडरशिप या कयादत कभी उभर ही नहीं सकी । हिंदुस्तान के मुसलमानो ने कुछ हद तक मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को एक सियासी लीडर्स जरूर माना था , मगर बड़े तबके ने उसे शख्सियत की लीडर खारिज कर दिया था,जिसकी प्रमुख वजह है मुसलमान के अंदर फिरका परस्थिति ।आज भी मुसलमान फिरका वरियत में बंटे हुए हैं, जिसे उनका सियासी और मजहबी लीडर राष्ट्रीय स्तर पर अभी तक मुस्लिम अवाम को एक प्लेटफार्म पर नहीं ला सका। हालांकि कुछ हद तक जमीयत  उलमा और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसी संस्थाओं ने अहम भूमिका अदा की है। मुसलमानों के हर दुख और सुख में हमेशा खड़े रहे ,किसी भी तरह से मुस्लिम आवाम की बाढ़ जैसे हालात में ,या दंगे के वक्त ,और भी परिस्थति सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट का मामला हो ,जमीयत ने फिर्का परस्ती से ऊपर उठ कर काम किया है । कुछ हद तक वह संस्थाएं नाकाम साबित रही है । मगर हिन्दुस्तान की मुख्तलिफ रियासतों में देखा जाए  तो केरला रियासत के अंदर मुस्लिम लीग की  कयादत रही है ,हैदराबाद में ए आई एम आई एम पार्टी की कयादत  कर रही है । असम के अंदर मुखलिफिन माहौल के अंदर मौलाना बद्रुदीन अजमल साहब कयादत कर रहे हैं, लेकिन उसके अलावा और शुबो के अंदर बहुत ही गिने चुने मुस्लिम लीडर है जो मुसलमान की छोटे स्तर पर कयादत  कर रहे हैं । लेकिन यह सब एक नाकाम कोशिश से नजर आ रही हैं ।हालांकि इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर ए आई एम आई एम पार्टी जिसके मुखिया असदुद्दीन ओवैसी साहब अपने सूबे से बाहर निकाल कर हिंदुस्तान की मुख्तलिफ रियासतों में जाकर मुसलमान के हुकूक की बात कर रहे हैं,हालांकि वो भी काफी हद तक नाकाम साबित रहे है ,हालांकि ओवैसी साहब पक्के और सच्चे ईमानदार शख्सियत है , उसके बावजूद भी मुसलमान उसको अपना लीडर नहीं मान रहे हैं, जिस की वजह  मुसलमान काफी लंबे वक्त से दूसरी कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियों में उनकी जड़ें मजबूत टिकी हुई है इसलिए बड़े लीडर ओवैसी से हाथ नही मिलाते हैं।

इसलिए मुस्लमान लीडरों से बड़ी इल्तिजा है की वो सियासी और मजहबी लीडरशिप फिरका प्रस्ति से ऊपर उठ कर सारे मसलक के रहनुमा आवाम की रहनुमाई करते हुए सारे लीडर एक प्लेटफार्म पर जमा हो ,फिर आवाम उन सब को रहनुमाई को मंजूर करे ।


मुसलमानों की कयादत मजबूत नहीं होने की वजह से बहुत सारे मुस्लमान विकास, और इंसाफ से महरूम रह जाते हैं  मुसलमानो का सियासत में हिस्सा बिलकुल न के बराबर होना ,जिससे उनका बैकग्राउंड बिछड़ता चला जा रहा है। इससे हमारी कॉम में पसमंजर और ना इंसाफी का माहोल नजर आता है ।

हम आवाम को चाहिए की हमें अपने अंदर झांकना होगा और दुनिया के माहौल को देखना होगा कि हम मुस्लिम कहां पर खडे है और हमारा क्या हाल है ,और हमारी कॉम और समुदाय का क्या हाल है ,उनके साथ क्या हो हो रहा है ये सब आप लोग आज कल सोसल मीडिया पर देख और सुन रहे हो ,कोई मजलूम मुसलमानों की आवाज उठा रहा है? तो अलर्ट हो जाइए और अपनी कयादत को मजबूत कीजिए ,सियासत में हिस्सा लीजिए और वोट देने वाले नहीं बल्कि वोट लेने वाले बनिए।

हां जी और ये भी कहना चाहता हु ,अगर आप लोग मजहब से ऊपर उठ कर सियासी लीडर अपना नही कायम करेंगे तब तक आप की सुनने वाला कोई नहीं होगा ,जो भी आप के लिए मुल्क के अंदर आवाज उठा
 रहा है उसका साथ दीजिए ,और उसकी कयादत को स्वीकार कीजिए चाहे उसकी जाति या समुदाय कोई भी
 हो , फिरका prsti से ऊपर उठ कर काम कीजिए।अपना ही लीडर 
बिना निषपक्ष से आप की आवाज को सदन में या सोशल मीडिया में उठाता हैं जरूर उसकी बात का असर पड़ता 
है ।

                     धन्यवाद दोस्तों 
         आप का साथी, लेखक मुराद खान  
               जय हिन्द जय भारत 



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