हिंदुस्तानी मुसलमानो पर ज़ुल्म क्यों?

 हिंदुस्तानी मुसलमानो पर ज़ुल्म क्यों?

जी हां दोस्तों आज बात हिंदुस्तान के मुसलमानो की हो रही है। जी दोस्तों हिंदुस्तान को आजाद होने में आज लगभग 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उससे पहले हमारा मुल्क अंग्रेजों का गुलाम था,अंग्रेजों ने हमारे मुल्क पर ढाई सौ साल कब्जा किया था जिससे 1757 से लेकर 1947 तक हिंदुस्तानियों ने अंग्रेजों को शिकस्त दी।

हमारा मुल्क 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ और हिंदुस्तान 26 जनवरी 1950 को एक गणतंत्र राष्ट्र बना, जिसे हमारे बुजुर्गों ने एक ख्वाब बुना था, उस ख्वाब को पूरा किया। हिंदुस्तान दुनिया का एक ऐसा वाहिद मुल्क है जिसमें सभी मजहब और पंथ को मानने वाले इस मुल्क में रहते हैं,इसलिए भारत एक विविधता का देश है। जिसकी एक खासियत है अनेकता में एकता।

हमारे देश में हिंदू मुसलमान सिख इसाई जैन बौद्ध पारसी और अन्य सभी धर्म के लोग रहते हैं।सभी मजहब के लोग इतने वर्षों तक एक साथ रहते आए, एक दूसरे के दुख सुख में साथ रहे कभी कोई किसी को दिक्कत नहीं।  लेकिन कुछ वर्षों से हमारे मुल्क के अंदर एक ऐसा असामाजिक  तत्वों द्वारा माहौल बनाया गया की इस मुल्क के अंदर रहने वाले भाईचारे को हिंदू और मुसलमान के बीच जो प्रेम और मोहब्बत का रिश्ता है, उसे रिश्ते को कैसे तोड़ा जाए और तोड़ने का मकसद यह है की हमें तख्त ओ ताज हासिल करना। इस कोशिश  मैं तकरीबन कुछ हद तक असामाजिक तत्व कामयाब हुए हैं ।इस बात पर हमें बहुत बड़ा अफसोस है, कि हमारे देश को एक आग की भट्टी में धकेला जा रहा है। किसी न किसी एक धर्म को ,किसी एक इंसान को या की दलित जाति के इन्सान को या कभी हिंदू और मुसलमान को निशाना बनाया जा रहा है जिस देश की विविधता में एकता वाली मिसाल अब बिखरती नजर आ रही है।

हमारे मुल्क की सरकारें बड़े-बड़े दावे करती है कि हिंदुस्तान एक विश्व गुरु  बनने जा रहा है लेकिन दूसरी तरफ भारत के अंदर रहने वाले शहरी सुरक्षित नहीं है।जिन्होंने अपने मुल्क को आजाद करवाने  में बड़ी कुर्बानियां दी। उन्हीं के ऊपर अत्याचार किया जा रहा है, और उन को निशाना बनाया जा रहा है । यहां तक कि उनसे राष्ट्र का सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है इसके पीछे एक बहुत बड़ी ताकत है संगठन है जो देश को बर्बादी की ओर ले जा रहा है यह हमारे मुल्क के लिए तरक्की नहीं बल्कि एक विनाश का रास्ता है इससे भारत अखंड भारत या भारत गुरु नहीं बन पाएगा, बल्कि भारत के टुकड़े टुकड़े हो सकते हैं इसमें कोई शक नहीं अगर इस तरह की हरकतें होती रही तो।


 मुसलमानों पर जुल्म के प्रमुख कारण

1. मुत्ताहिद ना होना

हिंदुस्तान के मुसलमान आज भी फिरका वॉरीअरियत में बंटे हुए हैं। जिसे मुसलमान एक प्लेटफार्म पर नहीं आते हैं। किसी शहर में या किसी सूबे में किसी मुसलमान पर जुल्म होता है तो उसके खिलाफ कोई नही बोलता है ।जिससे  जालिमों के खिलाफ न तो और मुसलमान बोलते ही और न ही वहां की सरकार कुछ करती है ,सिर्फ और औपचारिकता पूरी करके कुछ दिनों बाद नाइंसाफी करने वाले को छोड़ देते है। उसे सरकार के खिलाफ या उन लोगों के खिलाफ या उनके रिश्तेदार आवाज उठाते हैं या उनका कोई मुसलमान सच्चा नेक वही आवाज उठाता है। लेकिन बाकी कोई उनका नुमाइंदा या प्रतिनिधि आवाज नहीं उठाता है चाहे वो मुसलमान हो या कोई गैर मुस्लिम हो ,कोई नहीं बोलते हैं ,क्योंकि उनकी सरकार को उनके प्रतिनिधियों को सब पता है कि मुसलमान आपस में एक एकजुट नहीं है इसलिए मुसलमानों के ऊपर जुल्म हो रहे हैं। 

2. मुसलमानों का सियासत में  हिस्सा न होना

हिंदुस्तान के अंदर आज तक मुसलमानो की कोई राष्ट्रीय स्तर की पार्टी या कोई दल है ही नहीं जो मुसलमानो के मसले मसाइल की आवाज उठा सके ।  क्यों की मुसलमानो ने अपनी जागीदा राष्ट्रीय लेवल पर कांग्रेस अपना अब कुछ मा और बाप मान लिया और इसी पर भरोसा करने लगे ,इस बूढ़े मां और बाप से परे जाकर कभी सोचा ही नहीं बस अंधों की तरह विश्वास कर लिया । बाकी राज्यों में बीजेपी के अलावा जो भी राजनीतिक दल है उनके ऊपर भरोसा करके बैठे है। यहां तक कि कभी भी मुस्लिम आवाम ने अपने हक और इंसाफ के लिए सरकार से मुतालबा नही किया इसलिए सरकार ने जो दिया वो लिया और जो नही दिया उससे वो महरूम रह गए बेचारे । जाहिर सी बात है की बच्चा रोता है तो मां दूध पिलाती है , वरना मां अपने काम में व्यस्त है ।मुसलमानों की  राजनीति हैसियत  में बहुत ही न के बराबर अनुपात है जिसे मुसलमान की आवाज एवं इवान ए असेंबली में नहीं सुनाई देती है सरकार को।

3. मुसलमान शिक्षा में पिछड़ा हुआ।

हिंदुस्तान में मुसलमान की आबादी 25 फ़ीसदी है लेकिन शिक्षा में अनुपात मात्र चार फीसदी है। जिसे मुसलमान का बड़ा तबका  शिक्षा में दुनिया की तालीम और दीनी तालीम में पिछड़ा हुआ है ।इससे उनके ऊपर हो रही जुल्म के खात्मे  को मिटाने के लिए उनके पास शिक्षा जैसा  बड़ा हथियार नहीं होने की वजह से जागरूकता नहीं है ,जिसे मुसलमान अक्सर जुल्म का शिकार हो रहा  हैं, इसलिए हमें चाहिए की अपने बच्चों को और बच्चियों को दीनी और दुनियावी तालीम से जोड़ें।

4. मुसलमान आर्थिक स्थिति में पिछड़ा हुआ।

हिंदुस्तान के मुसलमान आर्थिक दृष्टि से बहुत पिछड़े हुए हैं । क्योंकि उनके पास व्यापार या पैसा इन्वेस्ट  करने की जानकारी नहीं होने की वजह से मुसलमानों की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर है ,जिससे भारत का अकसर मुसलमान तबका गरीब है ,गरीब इसलिए है क्योंकि उनके पास सही जगह पर सही वक्त पर पैसा खर्च करने का कोई प्लान ही नहीं है । मुसलमान अपना पैसा शादी ब्याह में या ओसर में या फालतू चीजें खरीदने में पैसा ज्यादा खर्च करते हैं। जहां पर पैसा खर्च करना चाहिए वहां पर पैसा खर्च नहीं करते हैं जिससे वह नुकसान उठाते हैं।

5. मुसलमान का ईमान मजबूत न होना।

हिंदुस्तान के मुसलमान की आबादी भारत में 20 से 25 फ़ीसदी है, लेकिन आबादी कितनी भी हो चाहे कम हो चाहे इससे ज्यादा हो यह कोई मायने नहीं रखता बल्कि मायने यह रखता है कि मुसलमान का ईमान कितना पक्का है। ईमान का मतलब यह है कि मुसलमान अपने अल्लाह और हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु  अलैहि वसल्लम की बातों को मानता हो , मोहम्मद के तरीके पर चलता हो अल्लाह के जो अहकाम है उनको पूरा करता हो  और जो तरीका है, मोहम्मद ए मुस्तफा है उस पर चलता हो ,यकीनन उस शख्स का ईमान पक्का है । ईमान पर चलना और ईमान पर अमल करना यही सबसे बड़ी मजबूत दलील है ।आज हिंदुस्तान में मुसलमान 25 फ़ीसदी में से सिर्फ दो फीस दी मुसलमान नमाज पढ़ते हैं। 5 फीसदी जुमा की नमाज पढ़ते हैं और 15 फ़ीसदी ईद की नमाज में पढ़ते हैं अक्सर हमारे गांव की मस्जिद या शहर की मस्जिद है पांच वक्त की नमाज में खाली पड़ी रहती है तो बताओ उसे बस्ती में मुसलमान का क्या हाल होगा क्या मुसलमान तरक्की करेगा या विनाश की ओर जाएगा मुसलमान को तरक्की करने में कोई अगर चीज रोक रही है तो वह नमाज  है । अगर मुसलमान दीन का पक्का रहकर ईमान पर चलता है और अपने सारे काम करता है यकीनन वो  मुसलमान तरक्की याफ्ता है।   उसकी इज्जत दुनिया में भी है और आखीरत  में भी है।

मुसलमानो का हमदर्द कोन?

जी हां दोस्तों असली हमदर्द वही है जो किसी मजलूम का जुल्म के वक्त साथ दें उसको हिम्मत बंधाए या हौसला अफजाई करें । वह चाहे मुस्लिम हो चाहे गैर मुस्लिम हो चाहे कोई संस्था या पार्टी  हो चाहे वह मीडिया हो ,चाहे वह सरकार का नुमाइंदा हो, चाहे कोई और ऑफिसर हो अगर मजलूम के पक्ष में जालिम के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत जिस मजलूम का साथ दिया जाता है, वही लोग  मजलूम मुसलमानों के हमदर्द है । उस मुसलमान मजलूम का या तो उसका कोई रिश्तेदार या पड़ोसी या कोई उनका प्रतिनिधित्व राजनीतिक या कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी यहां तक वह कानूनी प्रक्रिया में गुजरता है, जो उसका लीगल तरीके से साथ देते हैं कानून के मुताबिक अपना फैसला करते हैं वही लोग असली हमदर्द है।

आज हिंदुस्तान में के हर सूबे में हर  जगह-जगह मुसलमानों को मौत का निशाना बनाया जा रहा है। मोबलीचिंग की जा रही है। मुसलमानों के ऊपर तरह-तरह के जुल्म ढाए जा रहे हैं, या कहीं ऐसी जगह पर हिंदू मुसलमानों के दंगे भड़काए जा रहे हैं, या किसी अकेले मुसलमान को देखकर  उससे मारा पीटा जा रहा है और उसके साथ गंदी हरकतें की जा रही है ,जिससे मुसलमान जुल्म का शिकार हो रहा हैं।

इस  दुख की घड़ी में मजलूम का साथ देना बहुत ही जरूरी है ,चाहे उसका कानूनी प्रक्रिया में साथ होने की बात हो , या हौसला अफजाई हो किसी भी तरह से मजलूम का साथ देना बहुत ही नेक काम है । उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना चाहिए ताकि हम लोग नेक दिल इंसान बन सके।अगर  सामने वाला जालिम के पक्ष में बोलता है तो वो भी  इंसान जालिम कहलाता है । हमें चाहिए मजलूम का साथ दें,वरना हमारी गिनती भी जालिमों में होगी और कल हम भी जुल्म का शिकार होंगे


हालांकि आज भी हमारे प्यारे मुल्क हिंदुस्तान में  काफी हद तक हिंदू मुसलमान में आपस में भाईचारा है। प्यार और मोहब्बत है, एक दूसरे के मामलात में दुख सुख में साथ रहते हैं उठते  बैठते हैं, खाते पीते हैं अच्छा व्यवहार कर




ते हैं और एक दूसरे के साथ व्यवसाय भी करते हैं लेकिन कुछ लोग हैं चंद मुट्ठी भर जो देश के माहौल को गंदा करते हैं । जिसे कुछ हद तक हिंदू मुसलमान के अंदाज नफरत पैदा हो रही है हमें इस बात से डरना नहीं चाहिए , हिम्मत और सब्र से काम लेना चाहिए अपने आप को जागरूक रखना चाहिए जिससे की हम मुकाबिल बन सके।

मुसलमानों के लिए नसीहत 

मुसलमान को चाहिए की हमें आज के युग में हर हाल में सक्रिय रहकर जिंदगी गुजारनी चाहिए। हमें इस जमाने में सबसे पहले अपने ईमान को मजबूत करना होगा ईमान का मतलब यह है, ईमान का मतलब यह है की हमें एक अल्लाह की इबादत और हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की इताअत करनी होगी । अल्लाह के जो हुक्म है उनको मानना होगा उन पर  अमल करना  होगा, और मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरीके को अपनाना होगा। जिससे हमारा ईमान मजबूत हो , हमें हमें हमारे अपने पड़ोसी रिश्तेदार और अन्य भाइयों के साथ अच्छा मामलात रखना होगा, लेनदेन का व्यवहार सही होना चाहिए, ताकि हुकुकुल्लाह और हुकुकुल इबाद पर सच्चा और ईमानदार रहना होगा।अपनी औलाद को दीनी  तालीम और दुनियावी तालीम से जोड़ना होगा और हमें अपने व्यवसाय या व्यापार बड़ी तवज्जो के साथ मेहनत करनी होगी और हमें सोशल मीडिया पर जागरूक रहना होगा, सोशल मीडिया पर नजर रखनी होगी। आज के हालात को और आज के माहौल को देखना होगा परखना होगा। जिससे हम लोग मजलूम होने से बच सकें।


 लेखक -   मुराद खान जयसिंधर 








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