राजनीति:- जी हाँ दोस्तों आज में
के सामने एक नया टोपिक लेकर हाज़िर हुआ हूँ। वो टोपिक है "राजनीति" जी आज पुरे विश्व 🌏में आज राज चल रहा है वो राज किसका है वो राज है नीतियों अथार्त सिद्धांतों का है।ये बात में कर रहा हूँ लोकतांत्रिक सरकार की जिसमें राजनीतिक पार्टियां निश्चित समय अवधि के बाद चुनाव लड़ते हैं और उस देश का विकास करने के लिए संविधान की क़सम लेकर वो सत्ता धारी कुर्सी पर बैठते हैं और देश का शासन चलाते हैं।
अब मैं बात करना चाहता हूँ हमारे देश भारत की जो राजनीति में क्या स्थिति है? ये जानना बहुत ज़रूरी है। हमें इस बात की खुशी है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है यहाँ पर हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं अन्य सभी धर्मों के लोग👫👬👭 मिल कर साथ रहते हैं और विकास एवं संविधान के अनुसार सभी को बराबरी का हिस्सा मिलता है। जनसंख्या की
दृष्टि से विश्व🌏 में दूसरे स्थान पर है। भारत की जनसंख्या लगभग 125करोड़ है। तो सीधी सी बात है कि राजनीतिक दल भी अधिक है, 7-8 राष्ट्रीय दल है और कुछ स्थानीय दल भी है जिनकी तादाद बहुत ज्यादा है। भारतीय🇮🇳 चुनाव पांच साल में होते हैं। भारत के पांच साल का समय चुनाव में गुज़र जाता है MLA, MP, राज्य सभा, राष्ट्रीपति, ओर सथानीय सरकारैं सरपंच
और प्रधान के ये सारे चुनाव पांच साल में ही होते हैं एक साथ नहीं बल्कि प्रत्येक संस्थान के चुनाव एक साल या दो साल के मध्य होते हैं। जो विकास की दृष्टि से बहुत हानिकारक है।
इससे भारत की आर्थिक स्थिति खराब और समय का भी दुरूपयोग होता है।
मेरा सुझाव है कि भारत सरकार को चुनाव पूरे भारत के एक साथ करवाना चाहिए जिससे यह स्थिति देश के लिए ठीक रहेगी।
आज भारत के अन्दर राजनीति किस तरह हो रही है इस के बारे में, में आप को बताने जा रहा 🚶👭रहा हूँ। भारत में हर पांच साल बाद चुनाव होते हैं और निर्वाचन विभाग चुनाव करवाता है,। सभी दल अपना -अपना प्रचार प्रसार करते हैं और विकास की बड़ी बड़ी बातें करते हैं। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हो जाते हैं और जो प्रतिनिधि जीत 🏆 जाता है वो पांच साल में जितना पैसा कमाना होता है उतना वो में से कमा लेते हैं उनको कोई रोकने वाला नहीं है। यह बात सत्य है। लेकिन पांच साल के अन्दर कोई प्रतिनिधि अपने खास आदमी का विकास करवाता है बाकी की तरफ कोई मुतवज्जो नहीं है। चाहे कोई भी दल हो या कोई भी व्यक्ति क्यों नहीं, सभी अपनी अपनी पूर्ति करने में लगे रहते हैं।
जैसे ही पांच साल पुरे होते हैं वापस चुनाव का दौर आ जाता है और नैता लोग बडी बडी बातें करते हैं और विकास के मूद्दा भुनाते है और जनता को पैसे देकर लालच देकर वोट☑ लेकर जीत 🏆 जाते हैं और पांच साल फिर मजे करते हैं।
इस दलों में या पार्टियों में कयी प्रकार के लोग रहते हैं हर एक व्यक्ति अपने आप में अलग होता है कोई व्यक्ति अपनी जनता को चाहने वाला होता है कोई व्यक्ति जनता के प्रति निष्क्रिय होता है यकीनन जो नेता लोग निष्क्रिय होते हैं उन्हें जनता सबक सिखा देती है अगर जनता ही मूर्ख या भोली भाली है तो उस क्षेत्र का नेता भी मोज करता है। राजनीतिक के मामले में राजस्थान की जनता बहुत चालाक हैं इस बात का उदाहरण है कि हर पांच साल बाद सरकार बदलती रहती एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा। बाकी राज्यों में ऐसा उदाहरण आप को शायद ही मिलेगा।
लेकिन आज कल जो चुनाव होते हैं वो विकास के नाम पर नहीं⛔ बल्कि जाती, धर्म, लालच, समाज, मन्दिर, मस्जिद के नाम पर चुनाव होते हैं विकास का नाम भी गायब हो जाने लगता है, अगर विकास का मुद्दा गायब हो गया तो समझो उस देश का कानून भी खतरे में हो सकता है, हाँ यह बात भी सत्य है। कोई भी पार्टी जैसा बोलती है वैसा ही जवाब सामने वाला देता है लेकिन जनता के लिए जो ज़रूरी मुद्दे हैं और मूल भूत आवश्यकताएँ हैं उसकी तरफ किसी का भी ध्यान⚠ नहीं है। फिर भी जनता एसे लोगों को चुन कर संसद में भेजती है और जो संसद में बोल ही नहीं पाते हैं। कोई 10 फीसदी जो प्रतिनिधि जनता के लिए क्षेत्र अच्छे कार्य करते हैं और जनता की समस्या संसद में उठाते हैं समस्या का समाधान निकलवाते है ं। अछा नेता वह होता है जो जनता की भलाई एवं कल्याण कारी काम करै और जनता को पूरा पूरा हिसाब देवे। जनता उनको अपना मसीहा मानती है। जनता के लिए विकास के कार्य करे वही सबसे अच्छा है।
आज हमारा देश खतरे में है उसका एक उदाहरण नहीं है बल्कि बहुत बहुत सारे उदाहरण है जनता के सामने, जनता भी समझ चुकी है कि अब उसे ही चुन कर संसद में भैजैंगे जो ईमानदार, एवं कर्तव्य निष्ट हो
-जगह जगह पर साम्प्रदायिक हिंसा।
-निर्वाचन विभाग पर पक्ष पात का आरोप।
-देश के मुख्य न्यायाधीश पर झूठे आरोप।
ये सब देश को खतरे में डालने वाले उदाहरण है।
धन्यवाद🙏💕 दौस्तो ं।
में आप का दोस्त लेखक, वक्ता, समाज सेवी, मुराद खान।
।। जय हिंद जय भारत। ।
अब मैं बात करना चाहता हूँ हमारे देश भारत की जो राजनीति में क्या स्थिति है? ये जानना बहुत ज़रूरी है। हमें इस बात की खुशी है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है यहाँ पर हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं अन्य सभी धर्मों के लोग👫👬👭 मिल कर साथ रहते हैं और विकास एवं संविधान के अनुसार सभी को बराबरी का हिस्सा मिलता है। जनसंख्या की
दृष्टि से विश्व🌏 में दूसरे स्थान पर है। भारत की जनसंख्या लगभग 125करोड़ है। तो सीधी सी बात है कि राजनीतिक दल भी अधिक है, 7-8 राष्ट्रीय दल है और कुछ स्थानीय दल भी है जिनकी तादाद बहुत ज्यादा है। भारतीय🇮🇳 चुनाव पांच साल में होते हैं। भारत के पांच साल का समय चुनाव में गुज़र जाता है MLA, MP, राज्य सभा, राष्ट्रीपति, ओर सथानीय सरकारैं सरपंच
और प्रधान के ये सारे चुनाव पांच साल में ही होते हैं एक साथ नहीं बल्कि प्रत्येक संस्थान के चुनाव एक साल या दो साल के मध्य होते हैं। जो विकास की दृष्टि से बहुत हानिकारक है।
इससे भारत की आर्थिक स्थिति खराब और समय का भी दुरूपयोग होता है।
मेरा सुझाव है कि भारत सरकार को चुनाव पूरे भारत के एक साथ करवाना चाहिए जिससे यह स्थिति देश के लिए ठीक रहेगी।
आज भारत के अन्दर राजनीति किस तरह हो रही है इस के बारे में, में आप को बताने जा रहा 🚶👭रहा हूँ। भारत में हर पांच साल बाद चुनाव होते हैं और निर्वाचन विभाग चुनाव करवाता है,। सभी दल अपना -अपना प्रचार प्रसार करते हैं और विकास की बड़ी बड़ी बातें करते हैं। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हो जाते हैं और जो प्रतिनिधि जीत 🏆 जाता है वो पांच साल में जितना पैसा कमाना होता है उतना वो में से कमा लेते हैं उनको कोई रोकने वाला नहीं है। यह बात सत्य है। लेकिन पांच साल के अन्दर कोई प्रतिनिधि अपने खास आदमी का विकास करवाता है बाकी की तरफ कोई मुतवज्जो नहीं है। चाहे कोई भी दल हो या कोई भी व्यक्ति क्यों नहीं, सभी अपनी अपनी पूर्ति करने में लगे रहते हैं।
जैसे ही पांच साल पुरे होते हैं वापस चुनाव का दौर आ जाता है और नैता लोग बडी बडी बातें करते हैं और विकास के मूद्दा भुनाते है और जनता को पैसे देकर लालच देकर वोट☑ लेकर जीत 🏆 जाते हैं और पांच साल फिर मजे करते हैं।
इस दलों में या पार्टियों में कयी प्रकार के लोग रहते हैं हर एक व्यक्ति अपने आप में अलग होता है कोई व्यक्ति अपनी जनता को चाहने वाला होता है कोई व्यक्ति जनता के प्रति निष्क्रिय होता है यकीनन जो नेता लोग निष्क्रिय होते हैं उन्हें जनता सबक सिखा देती है अगर जनता ही मूर्ख या भोली भाली है तो उस क्षेत्र का नेता भी मोज करता है। राजनीतिक के मामले में राजस्थान की जनता बहुत चालाक हैं इस बात का उदाहरण है कि हर पांच साल बाद सरकार बदलती रहती एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा। बाकी राज्यों में ऐसा उदाहरण आप को शायद ही मिलेगा।
लेकिन आज कल जो चुनाव होते हैं वो विकास के नाम पर नहीं⛔ बल्कि जाती, धर्म, लालच, समाज, मन्दिर, मस्जिद के नाम पर चुनाव होते हैं विकास का नाम भी गायब हो जाने लगता है, अगर विकास का मुद्दा गायब हो गया तो समझो उस देश का कानून भी खतरे में हो सकता है, हाँ यह बात भी सत्य है। कोई भी पार्टी जैसा बोलती है वैसा ही जवाब सामने वाला देता है लेकिन जनता के लिए जो ज़रूरी मुद्दे हैं और मूल भूत आवश्यकताएँ हैं उसकी तरफ किसी का भी ध्यान⚠ नहीं है। फिर भी जनता एसे लोगों को चुन कर संसद में भेजती है और जो संसद में बोल ही नहीं पाते हैं। कोई 10 फीसदी जो प्रतिनिधि जनता के लिए क्षेत्र अच्छे कार्य करते हैं और जनता की समस्या संसद में उठाते हैं समस्या का समाधान निकलवाते है ं। अछा नेता वह होता है जो जनता की भलाई एवं कल्याण कारी काम करै और जनता को पूरा पूरा हिसाब देवे। जनता उनको अपना मसीहा मानती है। जनता के लिए विकास के कार्य करे वही सबसे अच्छा है।
आज हमारा देश खतरे में है उसका एक उदाहरण नहीं है बल्कि बहुत बहुत सारे उदाहरण है जनता के सामने, जनता भी समझ चुकी है कि अब उसे ही चुन कर संसद में भैजैंगे जो ईमानदार, एवं कर्तव्य निष्ट हो
-जगह जगह पर साम्प्रदायिक हिंसा।
-निर्वाचन विभाग पर पक्ष पात का आरोप।
-देश के मुख्य न्यायाधीश पर झूठे आरोप।
ये सब देश को खतरे में डालने वाले उदाहरण है।
धन्यवाद🙏💕 दौस्तो ं।
में आप का दोस्त लेखक, वक्ता, समाज सेवी, मुराद खान।
।। जय हिंद जय भारत। ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें