'सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा
हम बुलबुले हैं इसकी गुलिस्ताँ हमारा'।।
फानूस बन कर जिसकी हिफाजत हवा करे
वो शमा क्या बुझे जिससे रोशन खुदा करे।
इल्म नूर है जहालत अंधेरा है
इल्म जिंदगी के लिए जि़न्दगी वतन के लिए
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी है हम वतन है हिन्दूस्तान हमारा।
खुद ही को कर इतना बुलंद कि हर तक़दीर से पहले खुदा खुद बंदे से पूछे कि बता तेरी रज़ा क्या है।।
निगाहों में मंजिल थी गिरे और गिर कर संभलते रहे, हवाओं ने बहुत कोशिश की
मगर चिराग आँधियों में भी जलते रहे।।
दिल में जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताकत ए परवाज़ मगर रखती है।।
अम्ल से ज़िन्दगी बनती है जन्नत भी और जहन्नुम भी
ये खाकी अपनी फितरत में न नूरी है न नारी है।।
सोदागिरी नहीं है ये इबादत खुदा की है
ए खबर ज़रा की तमन्ना भी छोड़ दे।।
मस्जिद तो बना दी शब्द भर में
ईमान की हरारत वालों ने
मन अपना पुराना पापी हैं बरसो में
नमाज़ी बन न सका।
हम बुलबुले हैं इसकी गुलिस्ताँ हमारा'।।
फानूस बन कर जिसकी हिफाजत हवा करे
वो शमा क्या बुझे जिससे रोशन खुदा करे।
इल्म नूर है जहालत अंधेरा है
इल्म जिंदगी के लिए जि़न्दगी वतन के लिए
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी है हम वतन है हिन्दूस्तान हमारा।
खुद ही को कर इतना बुलंद कि हर तक़दीर से पहले खुदा खुद बंदे से पूछे कि बता तेरी रज़ा क्या है।।
निगाहों में मंजिल थी गिरे और गिर कर संभलते रहे, हवाओं ने बहुत कोशिश की
मगर चिराग आँधियों में भी जलते रहे।।
दिल में जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताकत ए परवाज़ मगर रखती है।।
अम्ल से ज़िन्दगी बनती है जन्नत भी और जहन्नुम भी
ये खाकी अपनी फितरत में न नूरी है न नारी है।।
सोदागिरी नहीं है ये इबादत खुदा की है
ए खबर ज़रा की तमन्ना भी छोड़ दे।।
मस्जिद तो बना दी शब्द भर में
ईमान की हरारत वालों ने
मन अपना पुराना पापी हैं बरसो में
नमाज़ी बन न सका।
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