उपहास और अपमान के बाद मिलती है सफलता🏆💪

हां जी यह सत्य है कि आज की दुनिया में हर आम आदमी सफल होना चाहता है। लेकिन उनकी  की सफलता का राज अलग - अलग है। हर व्यक्ति की कार्य क्षमता अलग- अलग है और यहाँ तक की उनकी रूचियाँ भी अलग- अलग है तो यकीनन उनकी सफलता भी अलग ही है।
कोई आदमी चाहता है कि मैं राजनेता बनूँ।
कोई आदमी चाहता है कि मैं बड़ा आधिकारी बनूँ।
कोई आदमी यह चाहता है कि मैं न्याय धीशं बनूँ।
कोई आदमी चाहता है कि मैं बड़ा अस्पताल खोलूं।
कोई आदमी चाहता है कि मैं एक निजी स्कूल खोलूं।
आज के समय में हर कोई आदमी यही चाहता है कि मैं कैसे भी करके सफल हो जाऊँ लेकिन कोई भी काम शुरू करने से पहले वह लोगों की सलाह लेता है, ऐसे लोगों की सलाह लेता है उन्हें इस प्रकार के कार्य के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है, लेकिन सलाह मांगने वाला उनके बहकावे में आ जाता है और वो अपना काम रोक देता है।
एक ऐसा आदमी या एसी संस्थान जो ऐक बड़ा बिजनेस या कोई ऐसी सेवा शुरू करना चाहते हैं और वो अपना काम कर भी रहे हैं और उसमें वैसे लोगों को जोड भी रहे हैं, लगातार नये नये प्लान बना रहे हैं और उस पर काम भी कर रहे हैं। वे अपने कार्य में अगर सलाह लेने की जरूरत भी पड़ जाऐ तो वे बडे अनूभव वाले के पास सलाह लेते हैं, और उनका काम भी सफल हो जाता है।
उनके सामने कुछ ऐसी चुनोतियां होती है, जिन्हें पार कर नै में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। और बहुत सारे लोगों कि समूह आप के काम का  पहले विरोध करेंगे, आप को यहाँ तक भटका भी देंगे, मगर जेसे ही आप सफल होंगे तो आप के काम का उपहास उडाएंगे, जब आप काम सड़क पर आ जाएगा तो वही लोग👫👬👭 जो पहले विरोध कर रहे थे और मजाक भी कर रहे थे, वही लोग👫👬👭 आप के साथ जुड कर कम करेंगे।
तो दोस्तों  कोई भी काम शुरू कर ने से पहले कभी लोगों की बात नहीं सुननी, जिसके पास उस काम का अनुभव ना हो। और लोगों के बारे में कभी नहीं ये सोचें कि आखिर ये लोग क्या कहेंगे, अगर लोगों की बात पर आ गए तो जरूर  रास्ता भटक जाओगे।
आप तो बस अपना कर्तव्य कर्म करते रहें।
      "मांजी तेरी कशती के तलब दार बहुत है, इस पार कुछ मगर उस पार बहुत है।। "
      "  जिस शहर में खोली है तूने शीशे की दुकान💈 उस शहर 🌇 में पत्थर के खरीदार बहुत है। "
           धन्यवाद🙏💕
       दोस्तों👭👬👫 में आप का दोस्त लेखक, अध्यापक,  और सामाजिक कार्यकर्ता
मुराद खान।
आप मेरे ब्लोग को जरूर पढ़ें और कमैंट भी करैं ताकि मैं व्ययाहारि ज्ञान आप के साथ साझा करता रहूँ।






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